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राजनीति
हरियाणा चुनाव: नया मोटर व्हीकल एक्ट राज्य में चुनावी मुद्दा बन गया है!
ग्राउंड रिपोर्ट: 'मैंने लोकसभा चुनाव में बीजेपी को वोट दिया था लेकिन बीजेपी ने हमारे पेट पर लात मार दी है। हमारी कमाई पहले से ही बहुत कम थी। अब पेट भरना मुश्किल है। इस कानून की आड़ में पुलिस का जुल्म बढ़ गया है। इस बार बीजेपी को वोट देना संभव नहीं है।'
अमित सिंह
12 Oct 2019
haryana elections and motor act
Image courtesy: News State

हिसार: हरियाणा में विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। फतेहाबाद सीट से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार डूडाराम बिश्नोई ने दावा किया है कि अगर इस चुनाव में वो जीतते हैं तो न सिर्फ नशे और शिक्षा से संबंधित समस्याओं का निदान करेंगे, बल्कि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत आए दिन चालान कटने जैसी समस्यााएं तो अपने आप ही खत्म हो जाएंगी।

बिश्नोई ने कहा, 'नशा बिकना, बाइक का चालान कटना और ऐसी ही कई और समस्याएं छोटी-मोटी समस्याएं हैं। एक बार आपका बेटा एमएलए बन गया तो फिर सब खत्म हो जाएंगी। मेरे विधायक बनने के बाद कोई बाइक का चालान नहीं कटेगा।'

हालांकि विश्नोई के बयान को लेकर आलोचना शुरू हो गई लेकिन वास्तविकता में नया मोटर व्हीकल एक्ट हरियाणा में चुनावी मुद्दा बन गया है। ज्यादातर लोग चालान को लेकर परेशान और बीजेपी सरकार से नाराज नजर आए।

गौरतलब है कि मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2019 में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के मकसद से काफी कठोर प्रावधान रखे गए हैं। किशोर नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना, बिना लाइसेंस, खतरनाक ढंग से वाहन चलाना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, निर्धारित सीमा से तेज गाड़ी चलाना और निर्धारित मानकों से अधिक लोगों को बैठाकर अथवा अधिक माल लादकर गाड़ी चलाने जैसे नियमों के उल्लंघन पर कड़े जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसमें एंबुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों को रास्ता नहीं देने पर भी जुर्माने का प्रस्ताव किया गया है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव के बाद हरियाणा में काटे जा रहे भारी-भरकम चालान पर सॉफ्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मोटर व्हीकल एक्ट को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है और फिर से सरकार बनने पर इस एक्ट में संशोधन किया जाएगा।

लेकिन खट्टर की इस बात से जनता की नाराजगी कम नही हो रही है। हिसार के भाईचारा टैक्सी यूनियन के प्रधान 45 वर्षीय राजकुमार जांगू कहते हैं, 'नए मोटर व्हीकल एक्ट के आने के बाद टैक्सी चालकों का जीवन तबाह हो गया है। हमारी पूरी बचत एक बार चालान कटने में ही खत्म हो जाती है। यह कानून इतना कठोर है कि कई दूसरे राज्य सरकारों ने इसमें ढील दी या बदलाव किया लेकिन चुनाव होने के बावजूद खट्टर सरकार ने कोई राहत नहीं दी है। सिर्फ 45 दिन जागरूकता अभियान चलाने की बात कही है, लेकिन चालान अब भी कट रहे हैं। चुनाव खत्म होते ही यह अवधि भी खत्म हो जाएगी तब क्या होगा?'
IMG-20191012-WA0009.jpgभाई चारा टैक्सी यूनियन हिसार के सदस्य

वो आगे कहते हैं,'मैंने लोकसभा चुनाव में बीजेपी को वोट दिया था लेकिन बीजेपी ने हमारे पेट पर लात मार दी है। यहां ज्यादातर टैक्सी चालकों को अपने परिवार का पेट पालना पड़ता है। हमारी कमाई पहले से ही बहुत कम थी। अब पेट भरना मुश्किल है। इस कानून की आड़ में पुलिस का जुल्म बढ़ गया है। इस बार बीजेपी को वोट देना संभव नहीं है।'

कुछ ऐसा ही कहना 35 वर्षीय टैक्सी चालक बिजेंदर कुमार का है। वो कहते हैं, 'ये कानून सिर्फ गरीब लोगों को परेशान करने के लिए बनाया गया है। इसकी आड़ में पुलिस की घूसखोरी बढ़ गई है। हरियाणा के टैक्सी ड्राइवरों की कमाई पर पहले से ही टोल टैक्स की मार पड़ी हुई थी। इस कानून के लागू होने के बाद हम ड्राइवरों का खर्च नहीं निकल पा रहा है। सड़क पर सब नियम से चले हम इसकी वकालत करते हैं लेकिन इसके लिए जुर्माने की राशि इतनी ज्यादा बढ़ा देना कहीं से भी जायज नहीं है। सरकार जुर्माने की राशि दोगुनी या तीन गुनी कर देती तब भी समझ में आता लेकिन इतना ज्यादा इजाफा ज्यादती है।'

हिसार के ही रहने वाले और ट्रैक्टर चालक 50 वर्षीय संपत लाल कहते हैं,'नए कानून के तहत पुलिस किसानी में काम आने वाले ट्रैक्टर पर भी जुर्माना लगा रही है। इसके चलते खेती और माल ढुलाई का काम प्रभावित हो रहा है। हरियाणा में चौधरी देवी लाल की सरकार ने ट्रैक्टर को टैक्स मुक्त किया था लेकिन खट्टर सरकार चालान करा रही है। किसान इसका जवाब अपने मतदान के जरिए देंगे।'

तो वहीं 45 वर्षीय प्रभू दयाल कहते हैं, 'इस चुनाव में वोट करते समय हम टैक्सी चालक इस कानून का भी ध्यान रखेंगे। इससे सब परेशान है। बाइक वाले से लेकर ट्रक चलाने वालों को इस कानून का खामियाजा उठाना पड़ा है। अभी चुनाव का टाइम है तो प्रशासन ने थोड़ी ढील दे रखी है लेकिन अगर ये फिर से जीतकर आ गए तो हम लोगों को धंधा बदल लेना पड़ेगा नहीं तो भूखे मरने की नौबत आ जाएगी।'

गौरतलब है कि नए मोटर व्हीकल एक्ट के लागू होने के बाद गुरुग्राम में एक स्कूटी चालक का 23 हजार रुपये का चालान काटने की खबर मीडिया में सुर्खियां बनी थी। इसी तरह हरियाणा के ही झज्झर में बाइक पर भी 22 हज़ार का चालान काटा गया था।

इसके अलावा हरियाणा के रेवाड़ी में एक ट्रक का 1.16 लाख रुपये का चालान किया गया था। गुरुग्राम में एक ट्रैक्टर चालक का 59 हजार रुपये का चालान कटा था। फरीदाबाद में एक बुलेट चालक का 41000 रुपये का चालान हुआ। फरीदाबाद में ही एक बुलेट चालक का 35 हजार रुपये का चालान हो चुका है।

हालांकि हरियाणा के विपक्षी दल इसे चुनाव में मुद्दा बना रहे हैं। जननायक जनता पार्टी के नेता दिग्विजय सिंह चौटाला अपनी चुनावी रैलियों में नए मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव की बात कर रहे हैं। वो इसी बहाने भाजपा की मनोहर लाल खट्टर सरकार को लोगों पर अत्याचार करने वाला बता रहे हैं। तो वहीं, कांग्रेस नेता और दो बार मुख्यमंत्री रह चुके भूपिंदर सिंह हुड्डा भी अपनी रैलियों में भाजपा सरकार को आड़े हाथों ले रहे हैं। उनका कहना है कि नया मोटर व्हीकल एक्ट जनता विरोधी है और अगर कांग्रेस की सरकार सत्ता में आती है तो वह जुर्माने में कटौती करेंगे।

आपको बता दें कि हरियाणा परिवहन विभाग के मुताबिक 2010 में प्रदेश में कुल रजिस्टर्ड वाहनों की संख्या 47,91,825 है। जानकारों का कहना है कि इसके बाद के 9 सालों में इसमें करीब डेढ़ गुना इजाफा हो गया होगा। गौरतलब है कि हरियाणा में विधानसभा चुनाव के लिए 21 अक्टूबर को मतदान होगा और 24 अक्टूबर को नतीजे आएंगे।

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