NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
शाहीन बाग़: ट्रैफ़िक की परेशानी बनाम ज़िंदगी की लड़ाई
शाहीन बाग़ के धरना आंदोलन की वजह से कालिंदी कुंज-शाहीन बाग़ रोड बंद है और लोगों को ट्रैफ़िक की दिक्कत हो रही है। लेकिन क्या ये दिक्कत इतनी बड़ी है कि इसके लिए इस धरने आंदोलन को हटा दिया जाए?
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
22 Jan 2020
shaheen bagh protest

सीएए-एनआरसी के ख़िलाफ़ शाहीन बाग़ के धरने आंदोलन को आज 39 दिन हो गए हैं। इस धरने की वजह से कालिंदी कुंज-शाहीन बाग़ रोड बंद है और नोएडा और फरीदाबाद से दिल्ली आने-जाने वाले लोगों को ट्रैफिक की दिक्कत हो रही है। लेकिन क्या ये दिक्कत इतनी बड़ी है कि इसके लिए इस धरने आंदोलन को हटा दिया जाए। या आंदोलनकारियों की चिंता और दिक्कत ज़्यादा बड़ी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस संबंध में 14 जनवरी को एक पीआईएल की सुनवाई करते हुए पुलिस को व्यापक जनहित का ध्यान रखने को कहा था लेकिन ये व्यापक जनहित है क्या? क्या ट्रैफिक की दिक्कत झेल रहे लोगों का हित या सीएए-एनआरसी से प्रभावित होने वाली एक बड़ी आबादी का हित!

इसे लेकर लोगों में बहस है। इस संदर्भ में न्यूज़क्लिक ने शाहीन बाग़ में ही रहने वाले वकील फ़िरोज़ इक़बाल ख़ान से 14 जनवरी को ही विस्तार से बात की थी। उन्होंने इस मुद्दे के व्यापक पक्ष को हमारे सामने रखा। उन्होंने क्या कहा, इससे पहले आपको बता दें कि 14 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट ने वाकई में कहा क्या था-

दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की पीठ ने वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी द्वारा दाखिल जनहित याचिका को सुनते हुए दिल्ली पुलिस से व्यापक जनहित और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मामले पर गौर करने को कहा था।

पूरी ख़बर यहां पढ़ें : शाहीन बाग़: व्यापक जनहित और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखकर फ़ैसला ले पुलिस

हाईकोर्ट के आदेश को समझाते हुए वकील फ़िरोज़ इक़बाल ख़ान ने कहा "हाईकोर्ट के मुताबिक पुलिस कार्रवाई करते समय निम्न बातों का ध्यान रखेगी-

1. कानून व्यस्था को ध्यान में रखा जाएगा। इसका अर्थ ये है कि कोई कठोर कार्रवाई न हो।

2. जनता की असुविधा या दिक्कतों का ध्यान रखा जाए।

इसे इस तरह देखा जाए कि कोर्ट ने ये नहीं माना कि रोड पर धरना अवैध है। अगर ऐसा होता तो कोर्ट की इतनी पावर है कि वो सीधा आदेश दे सकता था कि 24 घंटे के भीतर रोड खाली की जाए। इस तरह कोर्ट ने जनता के विरोध प्रदर्शन के अधिकार का भी ध्यान रखा, उसने अन्य लोगों को हो रही परेशानी का भी ध्यान रखा और ये भी कहा कि पुलिस कोई कठोर कार्रवाई न करे।

अब समझा जाए कि Public inconvenience यानी जनता की असुविधा और व्यापक जनहित है क्या?

आश्रम से रोज़ाना तीन लाख गाड़ियां निकलती हैं। अगर इस (शाहीन बाग़) इलाके से इसकी एक तिहाई गाड़ियां निकलती हैं तो ये होती हैं एक लाख। अगर इन्हें दो लाख भी मान लिया जाए और 125 करोड़ जनता से औसत निकाला जाए तो 0.5 प्रतिशत आबादी। तो इस तरह देखा जाए तो केवल 0.5 फीसद आबादी को परेशानी हो रही है, वो भी इस तरह की परेशानी है जो अस्थायी है, जो 2 घंटे जाम में फंसने से निकल जाती है।

अब सीएए-एनआरसी को लेकर परेशानी समझिए। देश में मुस्लिमों की 20 से 25 करोड़ की आबादी है यानी कुल आबादी में 17 से 20 प्रतिशत जनसंख्या है। मुस्लिमों की बात इसलिए क्योंकि इसका पहला निशाना हैं मुस्लिम। इसके बाद एससी भी आएंगे। एसटी भी आएंगे। ईसाई भी आएंगे और अन्य भी आएंगे। कोई नहीं बचेगा। अगर ये विचारधारा इसी हिसाब से चलती रही।

इस हिसाब से देखिए ख़तरा और दिक्कत कितनी बड़ी है। इसकी पीढ़ियों के लिए ख़तरा है। मेरे बच्चे डिटेंशन कैंप में मिलेंगे मुझे। और उनके बच्चे भी डिटेंशन कैंप में मिलेंगे। तो मेरी परेशानी स्थायी हो गई। मतलब 25 करोड़ आबादी की प्रॉब्लम परमानेंट है। पीढ़ी दर पीढ़ी चल रही है, जिनका कोई भविष्य नहीं है। तो आप बताइए 0.5 प्रतिशत लोगों की प्रॉब्लम जो दो घंटे में ख़त्म हो जाती है, वो बड़ी है या ये समस्या बड़ी है। और अगर हमसे इतनी समस्या है तो जो लोग भी इस धरने के ख़िलाफ़ हैं वो सरकार से क्यों नहीं गुहार लगा रहे कि ये लोग जो बैठे हैं, जिनकी पीढ़ियां दांव पर लगी हैं, इनकी सुनती क्यों नहीं हो।

अगर इतनी बड़ी समस्या है तो फिर सरकार ये गतिरोध ख़त्म करने के लिए क्यों नहीं आगे आती। सरकार की ये ज़िम्मेदारी है। क्योंकि ये समस्या, ये गतिरोध सरकार ने पैदा किया है। हमारे बच्चे भी पढ़ रहे हैं लेकिन हमें उन्हें स्कूल नहीं भेज रहे हैं अगर सेशन एक-दो महीने आगे-पीछे हो जाएगा तो दिक्कत हो गई। ट्रैफिक वाला दो घंटे जाम में फंस जाएगा तो दिक्कत हो जाएगी, यहां तो पीढ़ियां ख़त्म हो जाएंगी क्या वो दिक्कत नहीं है?”

Shaheen Bagh
Anti-CAA protest
Delhi HC
delhi police
Traffic Curbs
Kalindi Kunj

Related Stories

शाहीन बाग से खरगोन : मुस्लिम महिलाओं का शांतिपूर्ण संघर्ष !

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

मुस्लिम विरोधी हिंसा के ख़िलाफ़ अमन का संदेश देने के लिए एकजुट हुए दिल्ली के नागरिक

दिल्ली दंगों के दो साल: इंसाफ़ के लिए भटकते पीड़ित, तारीख़ पर मिलती तारीख़

दिल्ली: प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों पर पुलिस का बल प्रयोग, नाराज़ डॉक्टरों ने काम बंद का किया ऐलान

किसान आंदोलन@378 : कब, क्या और कैसे… पूरे 13 महीने का ब्योरा

दिल्ली: ऐक्टू ने किया निर्माण मज़दूरों के सवालों पर प्रदर्शन

सुप्रीम कोर्ट को दिखाने के लिए बैरिकेड हटा रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा

दिल्ली सरकार के विश्वविद्यालय के सफ़ाई कर्मचारियों ने कपड़े उतार कर मुख्यमंत्री आवास पर किया प्रदर्शन!

दिल्ली पुलिस की 2020 दंगों की जांच: बद से बदतर होती भ्रांतियां


बाकी खबरें

  • price hike
    न्यूज़क्लिक टीम
    महंगाई और पेट्रोल के दाम पर घिरी मोदी सरकार
    23 Mar 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस इंक में आज वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा चर्चा कर रहे हैं, देश में बढ़ती हुई रिकॉर्ड तोड़ महंगाई की। उसके साथ ही वे भाजपा सरकार से सवाल पूछ रहे हैं कि मोदी सरकार महंगाई…
  • petroleum
    न्यूज़क्लिक टीम
    सरकार चाहे तो पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस के दाम न बढ़े
    23 Mar 2022
    137 दिनों के बाद पेट्रोल-डीज़ल के दाम 80 पैसे प्रति लीटर बढ़ गए हैं। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में भी 50 रुपए का इज़ाफा हुआ है। यानी पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें बढ़ गयी हैं। लेकिन सरकार चाहें…
  • bhagat singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    भगत सिंह ने क्यों कहा— मैं नास्तिक हूं?
    23 Mar 2022
    आज जब एक बार फिर धर्म और ईश्वर के नाम पर सत्ता और शोषण की राजनीति बेहद तेज़ हो गई है। ऐसे में शहीदे-आज़म Bhagat Singh का यह लेख "मैं नास्तिक क्यों हूं" पढ़ना बेहद ज़रूरी हो गया है।
  • Jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन सत्याग्रह जारी, संकल्प दिवस में शामिल हुए राकेश टिकैत
    23 Mar 2022
    विगत तीन दशकों से सरकार द्वारा घोषित नेतरहाट फ़ील्ड फायरिंग रेंज परियोजना को रद्द करने की मांग को लेकर प्रत्येक वर्ष 22 एवं 23 मार्च को आयोजित होने वाले ‘विरोध एवं संकल्प दिवस’ कार्यक्रम में इस बार…
  • akhilesh yadav
    रवि शंकर दुबे
    सियासत: अखिलेश ने क्यों तय किया सांसद की जगह विधायक रहना!
    23 Mar 2022
    चुनाव नतीजों के बाद से ही चली आ रही नेता प्रतिपक्ष के नाम की कश्मकश लगभग खत्म हो चुकी है। अखिलेश यादव ने लोकसभा से इस्तीफा देकर भाजपा के सामने चुनौती पेश की है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License