NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
1984 सिख विरोधी दंगे : सिर्फ़ नाम ही सज्जन है...
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा "1947 में विभाजन के दौरान नरसंहार हुआ था। 37 साल के बाद दिल्ली ऐसी ही एक घटना की गवाह बनी। अभियुक्तों ने राजनीतिक संरक्षण का फ़ायदा लिया और मुकदमों से भागते रहे।"
ऋतांश आज़ाद
17 Dec 2018
sajjan kumar

कांग्रेस नेता सज्जन कुमार सिर्फ़ नाम के ही सज्जन साबित हुए। दिल्ली हाईकोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में सज्जन कुमार को दोषी ठहराते हुए उन्हें उम्र कैद की सज़ा सुनाई है। साथ ही 5 लाख का जुर्माना भी किया है। सज्जन कुमार को पाँच सिखों की हत्या के मामले में दोषी पाया गया है। हाईकोर्ट ने इससे पहले निचली अदालत में दिये गए फैसले को रद्द कर दिया जिसमें सज्जन कुमार को बरी कर दिया गया था। कोर्ट ने यह फैसला सुनाते हुए कहा है कि इस मामले में “दोषियों को राजनीतिक संरक्षण हासिल था।’’ कोर्ट ने सज्जन कुमार को 31 दिसम्बर तक गिरफ्तारी देने को कहा है।

इससे पहले 2013 में निचली अदालत ने मामले में पूर्व पार्षद बलवान खोकार, पूर्व विधायक महेंद्र यादव, किशन खोकार, गिरधारी लाल और कैप्टन भागमल को सज़ा सुनाई थी। जबकि सज्जन कुमार को बरी कर दिया गया था।

यह मामला 31 अक्टूबर 1984 का है जब दिल्ली में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्या के बाद राजधानी में सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे। दिल्ली कैंट इलाके के राज नगर में एक भीड़ द्वारा एक सिख परिवार के पाँच लोगों को निर्ममता से मार दिया गया। यह लोग थे केहर सिंह, गुरप्रीत सिंह, रघुविंदर सिंह, नरेंद्र पाल सिंह और कुलदीप सिंह। कोर्ट में यह साबित हुआ है कि सज्जन कुमार उस भीड़ का नेतृत्व करने और भीड़ को भड़काने में शामिल थे। एक गवाह के मुताबिक सज्जन सिंह ने इस दौरान कहा “सिख साला एक भी नहीं बचना चाहिए, जो हिन्दू भाई उनको शरण देता है, उसका भी घर जला दो और उनको भी मारो।’’कोर्ट ने सज्जन कुमार को आपराधिक षडयन्त्र रचने,शत्रुता को बढ़ावा देने और सांप्रदायिक सौहार्द्र के खिलाफ कार्य करने का दोषी पाया है। 

यह मामला सालों से चल रहा है लेकिन सज्जन कुमार का नाम नानावती कमीशन कि रिपोर्ट के बाद ही सामने आया। कोर्ट का कहना है कि इसकी वजह सज्जन कुमार की सत्ता के गलियारों से करीबी थी।

2000 में आई नानावती कमीशन कि रिपोर्ट के बाद ही 2005 में सज्जन कुमार के खिलाफ मामला दर्ज़ हुआ। 2013 में जब निचली अदालत ने सज्जन कुमार को बरी किया तो इस मामले में जांच कर रही सीबीआई ने हाईकोर्ट में अपील की।

सज्जन कुमार 1977 में कांग्रेस से नगर निगम का चुनाव लड़े और पार्षद बने। 1980 में वह कांग्रेस से पहली बार सांसद बने। दंगों के बाद उनका टिकट काट दिया गया, लेकिन वह फिर से 1991 और 2004 में कांग्रेस के सांसद बने।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा  "1947 में विभाजन के दौरान नरसंहार हुआ था। 37 साल के बाद दिल्ली ऐसी ही एक घटना की गवाह बनी। अभियुक्तों ने राजनीतिक संरक्षण का फ़ायदा लिया और मुकदमों से भागते रहे।"

कोर्ट ने पाया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कि हत्या के बाद हुए सिख विरोधी दंगों में पुलिस जांच बेहद खराब रही। इस मामले में बहुत समय तक बयान नहीं लिए गए और न ही रिपोर्ट दर्ज़ की गयी। कोर्ट ने कहा कि इन दंगों में जहां दिल्ली में ही 2700 से ज़्यादा लोगों को कत्ल किया गया, कानूनी व्यवस्था बिल्कुल खत्म हो गयी थी, वहाँ खुलेआम कुछ भी करने की आज़ादी थी। कोर्ट ने कहा कि सज्जन कुमार के खिलाफ पहले तो केस दर्ज़ ही नहीं हो रहा था, जब हुआ भी तो भी उसमें ढंग से जांच नहीं हुई और उसे दबाया गया। कोर्ट ने इस मामले में गवाहों, जिनमें मरने वालों के परिवार वाले भी शामिल हैं, की बहादुरी की तारीफ की। साथ ही कोर्ट ने कहा कि उन्हें यह भरोसा दिलाते रहना चाहिए कि चुनौतियों के बावजूद अंत में सच की जीत होगी।

1984 में भड़के सिख विरोधी दंगे देश के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है। इन दंगों में दिल्ली में करीब 2800 लोगों का नरसंहार किया गया। दंगों के दौरान कई रेप हुए और कई जगह सिखों को गाड़ियों से निकालकर मारा गया। आरोप है कि पुलिस दंगों के दौरान सिर्फ मूकदर्शक बनी रही बल्कि कई बार पुलिस ने दंगाईयों के सहायता भी की। दंगों में कांग्रेस के कई छोटे बड़े नेताओं के शामिल होने का आरोप है। इसमें मुख्य हैं सज्जन कुमार, जगदीश टाईटलर और कमलनाथ। सज्जन कुमार कांग्रेस के पहले बड़े नेता हैं जो इस मामले में दोषी साबित हो गए हैं। गौरतलब है कि आज एक तरफ जहां सज्जन कुमार को सज़ा सुनाई गयी वहीं दूसरी कमलनाथ ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। कमलनाथ पर आरोप है कि रकाबगंज गुरुद्वारा के पास मौजूद थे जहां भीड़ ने दंगा किया।

sajjan kumar
Anti Sikh riots 1984
Congress
Sikh massacre
jagdish tytler

Related Stories

हार्दिक पटेल भाजपा में शामिल, कहा प्रधानमंत्री का छोटा सिपाही बनकर काम करूंगा

राज्यसभा सांसद बनने के लिए मीडिया टाइकून बन रहे हैं मोहरा!

ED के निशाने पर सोनिया-राहुल, राज्यसभा चुनावों से ऐन पहले क्यों!

ईडी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी को धन शोधन के मामले में तलब किया

राज्यसभा चुनाव: टिकट बंटवारे में दिग्गजों की ‘तपस्या’ ज़ाया, क़रीबियों पर विश्वास

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

केरल उप-चुनाव: एलडीएफ़ की नज़र 100वीं सीट पर, यूडीएफ़ के लिए चुनौती 

कांग्रेस के चिंतन शिविर का क्या असर रहा? 3 मुख्य नेताओं ने छोड़ा पार्टी का साथ

‘आप’ के मंत्री को बर्ख़ास्त करने से पंजाब में मचा हड़कंप

15 राज्यों की 57 सीटों पर राज्यसभा चुनाव; कैसे चुने जाते हैं सांसद, यहां समझिए...


बाकी खबरें

  • rbi
    भाषा
    चालू वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति 5.3 प्रतिशत रहने का अनुमान: आरबीआई
    08 Dec 2021
    आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की जानकारी देते हुए कहा कि मुद्रास्फीति के अगले वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में नरम पड़कर पांच प्रतिशत पर आने का अनुमान है।
  •  नगालैंड में मातम छाया, लोगों ने मारे गए आम नागरिकों की याद में शोक जताया
    भाषा
    नगालैंड में मातम छाया, लोगों ने मारे गए आम नागरिकों की याद में शोक जताया
    08 Dec 2021
    विभिन्न नगा संस्थाओं ने मृतकों के लिए पांच दिनों के शोक का आह्वान किया है, जो शुक्रवार को समाप्त होगा। नगा छात्र संघ ने मृतकों के लिए न्याय की अपनी मांगों को लेकर राज्यपाल आवास के समक्ष धरना देने की…
  • राज्यसभा में उठी अफ़्सपा वापस लिए जाने की मांग
    भाषा
    राज्यसभा में उठी अफ़्सपा वापस लिए जाने की मांग
    08 Dec 2021
    एनपीएफ का कहना है कि सशस्त्र बलों को विशेष अधिकार देश के और किसी भी हिस्से में नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि लागू किए जाने के दौरान भी इस कानून का व्यापक विरोध किया गया था।
  • रवींद्रनाथ टैगोर साहित्य पुरस्कार 2021-22
    भाषा
    रवींद्रनाथ टैगोर साहित्य पुरस्कार 2021, 2022 के लिए एक साथ दिया जाएगा : आयोजक
    08 Dec 2021
    रवींद्रनाथ टैगोर साहित्य पुरस्कार वर्ष 2021 और 2022 के लिए एक साथ दिया जाएगा। आयोजक और प्रकाशक पीटर बुंडालो ने यह जानकारी दी।
  • Ethiopia
    पवन कुलकर्णी
    टीपीएलएफ़ के पिछले महीने की बढ़त को रोकते हुए उत्तरी इथियोपिया का गृह युद्ध संघीय सरकार के पक्ष में बदला
    08 Dec 2021
    पश्चिमी और पूर्वी मोर्चे पर अपनी जीत के बाद संघीय सरकार और अम्हारन मिलिशिया के संयुक्त बलों ने डेसी और कोम्बोल्चा जैसे रणनीतिक तौर पर अहम शहरों पर फिर से कब्ज़ा कर लिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License