NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अप्रैल के बाद से मनरेगा में दो करोड़ आवेदकों को नहीं मिला काम
लॉकडाउन में काम न होने के चलते योजना में काम करने के लिए इच्छुक लोगों की संख्या में इज़ाफ़ा हुआ है, लेकिन MGNREGA की चादर बढ़ती मांग के लिए छोटी पड़ रही है।
सुबोध वर्मा
19 Jun 2020
मनरेगा

एक अप्रैल को इस वित्तवर्ष की शुरुआत के बाद से अब तक ढाई महीने गुजर चुके हैं। इस दौरान महात्मा गांधी ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (MGNREGA) में करीब़ 7.3 करोड़ लोगों ने आवेदन किया है। इस योजना में 40,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त प्रावधान के बावजूद, योजना का लाभ लेने के लिए जो मांग उठ रही है, उसकी पूर्ति नहीं हो पा रही है। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल से अब तक करीब़ दो करोड़ लोगों को काम देने से इंकार कर दिया गया है। काम की मांग करने वालों के कुल आंकड़े का यह 28 फ़ीसदी हिस्सा है (नीचे चार्ट देखें)। 

Screen Shot 2020-06-19 at 3.03.42 PM.png

रोज अपडेट होने वाला यह आंकड़ा ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा इसी काम के लिए प्रबंधित वेबसाइट पर देखा जा सकता है।

हर साल मांग और दिए गए काम के बीच अंतर बरकरार रहता है। उदाहरण के लिए, पिछले साल 1.45 करोड़ लोगों को काम देने से इंकार कर दिया गया। लेकिन इस साल स्थितियां ज्यादा परेशान करने वाली हैं। अभी इस वित्तवर्ष के सिर्फ़ ढाई महीने निकले हैं, लेकिन काम न पा सकने वाले लोगों की संख्या पिछले वित्तवर्ष के कुल आंकड़े को पार कर चुकी है।

कुछ राज्यों में तो काम देने से इंकार करने में ख़ास सक्रियता दिखाई है। उत्तरप्रदेश में करीब़ 34 लाख लोगों को काम देने से इंकार कर दिया गया। ग्रामीण रोजगार गारंटी के तहत प्रदेश में आवेदन करने वाले लोगों की कुल संख्या का यह 36 फ़ीसदी हिस्सा था। वहीं राजस्थान में 33 लाख, पश्चिम बंगाल में 20 लाख, मध्यप्रदेश में 17 लाख, छत्तीसगढ़ में 14 लाख, बिहार में 14 लाख, तमिलनाडु में 12 लाख और ओडिशा में 11 लाख लोगों को काम नहीं मिल पाया। 
MGNREGA में बड़ी संख्या में लोगों को काम देने को लेकर कई राज्य सरकारें अपनी पीठ थपथपा रही हैं। लेकिन जिन लोगों को काम नहीं मिल पाया, उस आंकड़े से ही राज्यों द्वारा योजना को लागू करने के तरीके की असली तस्वीर सामने आती है।

24 मार्च से लागू देशव्यापी लॉकडाउन ने प्रभावी तरीके से भारतीय अर्थव्यवस्था के ज़्यादातर हिस्से को बंद कर दिया है। इससे 12 से 15 करोड़ लोगों की नौकरियां चली गई हैं। क्योंकि इनमें से ज़्यादातर लोग अनौपचारिक रोज़गार में लगे थे, जिन्हें कम भत्ते मिलते थे और उनके पास थोड़ी ही बचत है। इन लोगों को बहुत जल्दी भुखमरी का सामना करने पर मज़बूर होना पड़ा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (MGNREGS) के तहत काम बंद हो गया, लेकिन 20 अप्रैल तक सरकार को कोई सुध ही नहीं थी। लाखों लोग बेरोज़गार थे, ख़ासकर वे मज़दूर, जिन्हें सरकार ने अपने हाल पर छोड़ दिया था। यह लोग बड़े शहरों से दूर-दराज के अपने गांवों-कस्बों में पहुंचे थे, उन्होंने MGNREGS में काम लेने की कोशिश की। आख़िर उनके पास छोटी-मोटी आय का सिर्फ़ यही एक साधन बचा था। 
इस तरह काम की मांग करने वालों में सर्वकालिक मासिक उछाल आया, जिसके तहत तीन करोड़ चौबीस लाख परिवारों को इस साल मई में काम दिया गया। (नीचे चार्ट देखें)

Screen Shot 2020-06-19 at 3.03.59 PM.png

आमतौर पर काम के आवेदन गर्मियों के महीने में बढ़ते हैं, जब रबी की फ़सल की कटाई का मौसम ख़त्म होता है। जैसा आप ऊपर चार्ट में देख सकते हैं, 2019 में मानसून आने के पहले अप्रैल, मई और जून के महीने में काम पाने वाले परिवारों की संख्या बढ़ गई। क्योंकि इस दौरान खरीफ की फ़सल लगना शुरू होती है।

लेकिन इस साल लॉकडाउन के चलते चीजें बुरे तरीके से हिल गईं। पहली बार अप्रैल में काम पाने वाले परिवारों की संख्या पिछले महीने से कम हो गई। मार्च में काम पाने वालों के 1.59 करोड़ के आंकड़े से गिरकर यह संख्या 1.11 करोड़ हो गई। लेकिन जैसे ही मई में MGNREGS गतिविधियां शुरू हुईं, इस आंकड़े में बहुत तेज उछाल आया। 17 जून तक करीब़ 1.2 करोड़ परिवारों को काम दिया जा चुका था।

इन उछाल भरे आंकड़ों के बीच हमें उन लोगों की बड़ी संख्या दिखती है, जिन्हें काम नहीं दिया गया। इसकी वज़ह राज्यों सरकारों को पर्याप्त फंड न मिलना, उनके तंत्र का इतनी बड़ी संख्या में लोगों को संभाल पाने की अक्षमता या फिर लोगों को काम की जरूरत पर गंभीर ध्यान न देना है। 

लेकिन लाखों लोगों की एकमात्र आजीविका के साधन को नजरंदाज करना उनसे धोखेबाजी है। वह भी ऐसे वक़्त में जब नौकरियां पैदा किए जाने की दूसरी नीतियां बुरे तरीके से असफल हो रही हैं। जबकि इस कठिन दौर में मोदी सरकार से लोगों को सीधे नग़द की राहत मिल पा रही है, जिसकी नीतियों ने आंखों पर काली पट्टी बांध रखी है।

इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।
 

Over 2 Crore MGNREGA Job Seekers Turned Back Since April

MGNREGA
Rural Economy
unemployment
Migrant workers
COVID-19
Lockdown
BJP
Narendra modi

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

छत्तीसगढ़ : दो सूत्रीय मांगों को लेकर बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मियों ने इस्तीफ़ा दिया

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां


बाकी खबरें

  • bose
    प्रबीर पुरकायस्थ
    मोदी सरकार और नेताजी को होलोग्राम में बदलना
    28 Jan 2022
    बोस की सच्ची विरासत को उनकी होलोग्राफिक छवि के साथ खत्म कर देना : बिना किसी सार और तत्व के प्रकाश तथा परछाइयों का खेल। यह लगातार मोदी सरकार की वास्तविक विरासत बनती जा रही है!
  • Taliban
    एम. के. भद्रकुमार
    पश्चिम ने तालिबान का सहयोजन किया 
    28 Jan 2022
    अफगानिस्तान में हो रही घटनाओं पर प्रतिबिंबों की श्रंखला में इस बार के लेख में इंगित  किया गया है कि कैसे पश्चिमी राजनयिकों और तालिबान अधिकारियों के एक कोर ग्रुप के बीच ओस्लो में हुए तीन दिवसीय…
  • up elections
    महेश कुमार
    यूपी चुनाव: पश्चिमी यूपी के लोग क्यों भाजपा को हराना चाहते हैं?
    28 Jan 2022
    पश्चिमी उत्तर प्रदेश राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है और किसान आंदोलन का गढ़ है। चर्चा से तो लगता है कि लोग बदलाव चाहते हैं।
  • fact check
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेकः योगी का दावा ग़लत, नहीं हुई किसानों की आय दोगुनी
    28 Jan 2022
    सदन में कृषि मंत्री का लिखित जवाब और नेशनल सैंपल सर्वे दोनों ही बताते हैं कि यूपी के किसानों की आय में 2015-16 की अपेक्षा मात्र 3 रुपये मासिक की वृद्धि हुई है।
  • covid
    डॉ. ए.के. अरुण
    बजट 2022-23: कैसा होना चाहिए महामारी के दौर में स्वास्थ्य बजट
    28 Jan 2022
    कुछ अपवादों को छोड़ दें तो 85 फ़ीसद अस्पताल और उपचार केन्द्र धन के अभाव में महज़ ढाँचे के रूप में खड़े हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License