NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
2 साल बाद भी नजीब का कोई नामो निशान नहीं
पिछले हफ्ते ही सीबीआई ने इस मामले में क्लोज़र रिपोर्ट भी फ़ाइल कर दी है। दूसरी ओर नजीब की माँ शुरू से ही यह आरोप लगा रही हैं कि इस मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के उन छात्रों को बचाने के प्रयास किया जा रहा है जिन्होंने नजीब को पीटा था। 
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
15 Oct 2018
najeeb ahmed

जेएनयू छात्र नजीब अहमद को गायब हुए पूरे दो साल हो गए हैं लेकिन अब तक उसका कोई सुराख़ नहीं मिला है। इसके विरोध में आज विभिन्न राजनीतिक पार्टियों से जुड़े नेता, जेएनयू के छात्र, रोहित वेमुला की माँ राधिका वेमुला और बाकि सामाजिक कार्यकर्ता संसद मार्ग तक एक मार्च निकाला। पिछले हफ्ते ही सीबीआई ने इस मामले में क्लोज़र रिपोर्ट भी फ़ाइल कर दी है। उनका कहना है कि मामले में कोई सुराख़ नहीं मिला है। दूसरी ओर नजीब की माँ शुरू से ही यह आरोप लगा रही हैं कि इस मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के उन छात्रों को बचाने के प्रयास किया जा रहा है जिन्होंने नजीब को पीटा था। 

15 सितम्बर 2016 को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में एम.एससी. का छात्र नजीब अहमद  रहस्यमय परिस्थितियों में माहि मांडवी हॉस्टल से गायब हो गया। बताया गया कि पिछली रात उन पर एबीवीपी के 9 छात्रों ने हमला किया था। दिल्ली पुलिस ने इसके बाद अपहरण का केस दर्ज़ किया। घटना के एक महीने बाद दिल्ली पुलिस ने नजीब की जानकारी देने वाले के लिये पहले 50,000 रुपये का इनाम देने की बात कही और बाद में रकम को 5,00,000 रुपये कर दिया गया। 

नवंबर 2016 में नजीब की माँ फातिमा अहमद ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। उनका आरोप था कि दिल्ली पुलिस एबीवीपी के 9 आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उन पर इन सभी आरोपियों का नाम न बोलने का दबाव डाला। साथ ही आरोपियों से ठीक से पूछताछ नहीं की जा रही। इसके बाद जेएनयू के छात्रों ने ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन भी किया। मई 2017 में कोर्ट ने यह मामला सीबीआई को सौंप दिया। अक्टूबर में कोर्ट ने सीबीआई को लताड़ते हुए कहा कि वह नजीब को ढूंढने के मामले में गंभीर नहीं है। 2017 के दिसंबर को फातिमा अहमद ने  फिर से आरोप लगाया कि सीबीआई चश्मदीदों को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है।

इस मामले में पुलिस का कहना है कि उन्होंने जेएनयू परिसर, दिल्ली के कई इलाकों और उत्तर प्रदेश की कई जगहों पर नजीब की तलाश की। बीच में कुछ मीडिया चैनलों ने एक खबर चलानी शुरू की कि नजीब इस्लामिक स्टेट में शामिल हो गया है और भारत छोड़ कर जा चुका है। कमाल की बात यह है कि बीजेपी के बड़े नेता राम माधव और बीजेपी के कई लोगों ने ट्विटर पर इस खबर को खूब फैलाया। लेकिन बाद में पता चला कि यह खबर झूठ है और इस बात की पुष्टि खुद जांचकर्ताओं ने दी। 

इस बीच जेएनयू  छात्र और नजीब की माँ फातिमा और उनका पूरा परिवार केस की निष्पक्ष जांच के लिए विरोध प्रदर्शन करते रहे। कई बार उन्हें पुलिस दमन का शिकार भी होना पड़ा। उनकी रोती  हुई माँ की तस्वीरों ने आम जन  के दिलों को कचोटकर रख दिया है। वो आज भी अपने बेटे के वापस आने की उम्मीद कर रही हैं। 

मई 2018 में सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने एबीवीपी के 9 आरोपियों के मोबाइलों की जांच की है और उनमें कुछ नहीं पाया गया है। इन्हें चंडीगढ़ की एक लैबोरेटरी में जाँचा गया था। लेकिन 9 में से 6 फोनों की जाँच हुई तीन की नहीं क्योंकि 3 फोनों में लॉक लगा हुआ था, जिसे खोला नहीं जा सका! 4 सितम्बर 2018 को सीबीआई ने कोर्ट को कहा कि नजीब के मामले में कोई सबूत न मिलने की वजह से वह इसमें क्लोज़र रिपोर्ट फाइल करना चाहते हैं (यानी मामले को बंद करना चाहते हैं)I 8 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने इसकी इजाज़त दे दी है। 

 नजीब का परिवार इस वक्त सकते में है। उनकी माँ की स्थिति एक अंतहीन पीड़ा की कहानी बयान करती है। लेकिन परिवार ने हार नहीं मानी है और कहा है कि वह अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाज़े खटखटाएंगे। 

Najeeb ahmed
fatima ahmed
Najeeb mother
CBI
delhi police
BJP
ABVP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

कार्टून क्लिक: उनकी ‘शाखा’, उनके ‘पौधे’

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • राजा मुज़फ़्फ़र भट
    जम्मू-कश्मीर में उपभोक्ता क़ानून सिर्फ़ काग़ज़ों में है 
    28 Mar 2022
    सैंकड़ों उपभोक्ताओं की शिकायतों का अभी तक कोई हल नहीं हुआ है। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से एक भी नया मामला दर्ज नहीं किया गया है। क़ानूनों को बड़ी तेज़ी से निरस्त और लागू किया जा रहा है, लेकिन…
  • सोनिया यादव
    'राइटिंग विद फायर’ को नहीं मिला ऑस्कर, लेकिन 'खबर लहरिया' ने दिल ज़रूर जीत लिया
    28 Mar 2022
    खबर लहरिया देश का अकेला ऐसा न्यूज़ नेटवर्क है जिसे सिर्फ़ महिलाएं चलाती हैं। यह महिलाएं दलित, मुस्लिम, आदिवासी और पिछड़ी माने जाने वाली जातियों से हैं, जिन्होंने पिछले 20 साल में सुदूर ग्रामीण इलाकों…
  • एम.ओबैद
    बिहार में आम हड़ताल का दिखा असर, किसान-मज़दूर-कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता
    28 Mar 2022
    देश भर में जारी ट्रेड यूनियनों की दो दिवसीय आम हड़ताल का व्यापक असर बिहार में भी देखने को मिला है। इस हड़ताल का सभी वर्गों ने समर्थन किया और इसमें शामिल हुए।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    संसद अपडेट: लोकसभा में मतविभाजन के जरिये ‘दंड प्रक्रिया (पहचान) विधेयक’ पेश, राज्यसभा में उठा महंगाई का मुद्दा
    28 Mar 2022
    लोकसभा में सोमवार को ‘दंड प्रक्रिया (पहचान) विधेयक, 2022’ और संविधान (अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां) आदेश (दूसरा संशोधन) विधेयक पेश किया गया।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    ऑस्कर 2022: स्मिथ और जेसिका सर्वश्रेष्ठ अभिनेता व अभिनेत्री, ‘ड्राइव माय कार’ सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फिल्म
    28 Mar 2022
    सर्वश्रेष्ठ एनिमेटेड फीचर के लिए ‘एनकैंटो’ ने ऑस्कर जीता जबकि भारतीय वृत्तचित्र ‘राइटिंग विद फायर’ को ऑस्कर में सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र की श्रेणी में ‘समर ऑफ सोल’ ने मात दे दी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License