NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
200 से ज़्यादा लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 370 हटाने के ख़िलाफ़ जारी किया बयान
कश्मीर में 370 हटाए जाने और राज्य को दो हिस्सों में बांटे जाने के विरोध में 200 से ज़्यादा सामाजिक कार्यकर्ताओं, लेखकों, कवियों ने एक बयान जारी किया है और कहा है कि "ये जम्हूरियत का मज़ाक़ है!"
इंडियन कल्चरल फ़ोरम
16 Aug 2019
jammu and kashmir
image courtesy: Indian Cultural Forum

कश्मीर में अनुच्छेद 370 के हटाए जाने और राज्य को दो हिस्सों में बांटे जाने के विरोध में 200 से ज़्यादा सामाजिक कार्यकर्ताओं, लेखकों, कवियों ने एक बयान जारी किया है और कहा है कि "ये जम्हूरियत का मज़ाक़ है!" इस बयान में सभी ने और नागरिकों से अपील की है कि वो आयें और कश्मीर की अवाम के साथ एकजुट हो कर खड़े हों।

"जम्हूरियत का मज़ाक़"

इंडियन राइटर्स फ़ोरम का बयान

अगस्त 16 2019

जम्मू कश्मीर को मिले ख़ास दर्जे को हटा कर और उसे दो केंद्र-शासित प्रदेशों में बाँट कर, केंद्र सरकार ने लोकतंत्र का मज़ाक़ बना दिया है। उसने उन औपचारिक वादों को तोड़ दिया है जो भारत द्वारा 1947 में राज्य के पदारोहण के दौरान किये गए थे।

संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने और राज्य को दो हिस्सों में बाँट देने के इस क़दम को गुप्त रूप से, एकतरफ़ा रूप से और बलप्रयोग के साथ अंजाम दिया गया है। धार्मिक, सांस्कृतिक, संजातीय और वैचारिक वर्गों के लोगों से इस बारे में कोई चर्चा नहीं की गई। 5 अगस्त 2019 की शाम से राज्य में सुरक्षा और सूचना पर जो अभूतपूर्व स्तर का शिकंजा कसा गया है, उससे ये बात ज़ाहिर हो गई है कि सरकार असहमति और लोकतांत्रिक मतभेद से किस क़दर घबराई हुई है।

हम, भारत के नागरिक जो लेखक, कलाकार, मीडिया के सदस्य और सांस्कृतिक कार्यकर्त्ता हैं, जम्मू कश्मीर में सरकार द्वारा उठाए गए इस ग़ैर-लोकतांत्रिक और असंवैधानिक क़दम की निंदा करते हैं। हम अपनी बुनियादी संवैधानिक संघीयता का हनन करते हुए राज्य और जनता को बांटने के सरकार के इस फ़ैसले की निंदा करते हैं। हम सदियों से प्रताड़ना झेल रहे राज्य के लोगों पर लगाई गई इस घेराबंदी की निंदा करते हैं।

हम मांग करते हैं कि जम्मू-कश्मीर से घेराबंदी हटाई जाए। और सभी बुनियादी आज़ादी - अभिव्यक्ति की आज़ादी, संचार और मीडिया की आज़ादी को तुरंत वापस किया जाये। हम 370 और जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस करने की मांग करते हैं। हम कश्मीरी अवाम के साथ अपनी एकजुटता ज़ाहिर करते हुए अपने साथी नागरिकों से मांग करते हैं कि वो आगे आएं और जम्मू-कश्मीर के स्वराज्य और आज़ादी पर हो रहे इन सत्तावादी हमलों का विरोध करें।

मूल बयान और हस्ताक्षर कर्ताओं के नाम पढ़ने के लिए क्लिक करें : https://indianculturalforum.in/2019/08/16/over-200-writers-and-cultural-activists-respond-to-the-kashmir-situation-this-is-a-mockery-of-democracy/

Jammu and Kashmir
Article 370
Article 35A
social workers
indian writers
Religious discrimination
Religious fundamentalism

Related Stories

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

कश्मीरी पंडितों के लिए पीएम जॉब पैकेज में कोई सुरक्षित आवास, पदोन्नति नहीं 

यासीन मलिक को उम्रक़ैद : कश्मीरियों का अलगाव और बढ़ेगा

आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को उम्रक़ैद

क्यों अराजकता की ओर बढ़ता नज़र आ रहा है कश्मीर?

कैसे जम्मू-कश्मीर का परिसीमन जम्मू क्षेत्र के लिए फ़ायदे का सौदा है


बाकी खबरें

  • Banaras
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव : बनारस में कौन हैं मोदी को चुनौती देने वाले महंत?
    28 Feb 2022
    बनारस के संकटमोचन मंदिर के महंत पंडित विश्वम्भर नाथ मिश्र बीएचयू IIT के सीनियर प्रोफेसर और गंगा निर्मलीकरण के सबसे पुराने योद्धा हैं। प्रो. मिश्र उस मंदिर के महंत हैं जिसकी स्थापना खुद तुलसीदास ने…
  • Abhisar sharma
    न्यूज़क्लिक टीम
    दबंग राजा भैया के खिलाफ FIR ! सपा कार्यकर्ताओं के तेवर सख्त !
    28 Feb 2022
    न्यूज़चक्र के आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार Abhisar Sharma Ukraine में फसे '15,000 भारतीय मेडिकल छात्रों को वापस लाने की सियासत में जुटे प्रधानमंत्री' के विषय पर चर्चा कर रहे है। उसके साथ ही वह…
  • रवि शंकर दुबे
    यूपी वोटिंग पैटर्न: ग्रामीण इलाकों में ज़्यादा और शहरों में कम वोटिंग के क्या हैं मायने?
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में अब तक के वोटिंग प्रतिशत ने राजनीतिक विश्लेषकों को उलझा कर रख दिया है, शहरों में कम तो ग्रामीण इलाकों में अधिक वोटिंग ने पेच फंसा दिया है, जबकि पिछले दो चुनावों का वोटिंग ट्रेंड एक…
  • banaras
    सतीश भारतीय
    यूपी चुनाव: कैसा है बनारस का माहौल?
    28 Feb 2022
    बनारस का रुझान कमल खिलाने की तरफ है या साइकिल की रफ्तार तेज करने की तरफ?
  • एस एन साहू 
    उत्तरप्रदेश में चुनाव पूरब की ओर बढ़ने के साथ भाजपा की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं 
    28 Feb 2022
    क्या भाजपा को देर से इस बात का अहसास हो रहा है कि उसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहीं अधिक पिछड़े वर्ग के समर्थन की जरूरत है, जिन्होंने अपनी जातिगत पहचान का दांव खेला था?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License