NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
2014 में मोदी का चुनाव अभियान गढ़ने वाले राजेश जैन आज विरोधी क्यों हो गए हैं?
भाजपा आईटी प्रकोष्ठ शुरू करने वाले प्रद्युत बोरा इस प्रकोष्ठ की तुलना आतंकी गतिविधियों की वजह से प्रतिबंधित संगठन सिमी से क्यों करते हैं?
सिरिल सैम, परंजॉय गुहा ठाकुरता
29 Mar 2019
प्रोजेक्ट 275 फॉर 2014 चलाने वाले राजेश जैन

हमें हर स्रोत से यही जानकारी मिली की राजेश जैन मुंबई के लोअर परेल के अपने कार्यालय से स्वतंत्र तौर पर काम कर रहे थे और उन्होंने नरेंद्र मोदी के अभियानों में अपने पैसे लगाए थे। जून, 2011 में उन्होंने एक लेख लिखकर बताया था कि वे भाजपा के लिए ‘प्रोजेक्ट 275 फॉर 2014’ चला रहे हैं। भाजपा को 2014 के लोकसभा चुनावों में 282 सीटें मिलीं। 

यही राजेश जैन नरेंद्र मोदी सरकार के कामकाज को लेकर अब उतने उत्साहित नहीं दिखते हैं। आजकल वे ‘धन वापसी’ के नाम से एक अभियान चला रहे हैं। इसके तहत सरकारी एजेंसियों, रक्षा प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक उद्यमों के पास पड़ी अतिरिक्त जमीन का इस्तेमाल गरीबों के कल्याण के लिए करने की योजना है। जैन के शब्दों में यह अभियान हर भारतीय को अमीर और आज़ाद बनाने के लिए है।

हाल के एक वीडियो में राजेश जैन यह कहते हुए दिखे, ‘2014 चुनावों के लिए मैंने तीन साल और अपने पैसे खर्च करके 100 लोगों की टीम बनाई। मुझे लगता था कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार कांग्रेस के समृद्धि विरोधी कार्यक्रमों का अंत करके भारत को एक नई दिशा देगी। लेकिन चार सालों में नीतियों में कोई बदलाव नहीं हुआ। भारत को गरीबी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से हमेशा के लिए मुक्ति पा लेनी चाहिए। मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने भी वही पुरानी नाकाम नीतियों का पालन करके कर और खर्च बढ़ाया। सत्ताधारी बदला लेकिन परिणाम नहीं।’

जब हमने 51 साल के जैन से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने बातचीत से इनकार कर दिया। अक्टूबर 2017 तक वे भारत सरकार की दो सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों एनटीपीसी और यूआईडीएआई के निदेशक मंडल में थे। 

भाजपा में 2007 में आईटी प्रकोष्ठ शुरू करने वाले 44 साल के प्रोद्युत बोरा का भी भाजपा से मोहभंग हो गया है। फरवरी, 2015 में उन्होंने मोदी और अमित शाह की व्यक्ति केंद्रीत निर्णय लेने की प्रक्रिया की आलोचना करते हुए पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि इससे सरकार और पार्टी की लोकतांत्रिक परंपराएं कमजोर होती हैं।

बोरा कहते हैं कि उस वक्त के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से प्रभावित होकर भाजपा में शामिल होने वाले भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद के कुछ शुरुआती लोगों में वे थे। 2007 में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह की सहमति से बोरा ने भाजपा में आईटी प्रकोष्ठ शुरू किया ताकि पार्टी के नेता आपस में और अपने समर्थकों के साथ प्रभावी ढंग से संवाद रख सकें। वे कहते हैं कि इस प्रकोष्ठ का गठन व्हाट्सएप और सोशल मीडिया जैसे माध्यमों का दुरुपयोग करके लोगों को गाली देने के लिए नहीं किया गया था। वे कहते हैं कि भाजपा का पागलपन इतना बढ़ गया है कि पार्टी किसी भी कीमत पर चुनाव जीतना चाहती है और इससे भाजपा के बुनियादी मूल्य छिन्न-भिन्न हो गए हैं। बोरा अभी एयर प्यूरिफायर बनाने वाली एक कंपनी चलाते हैं और अपने गृह राज्य की एक स्वतंत्र राजनीतिक दल के साथ जुड़े हुए हैं।

वे कहते हैं, ‘भाजपा में सच को तोड़ने-मरोड़ने का काम 2014 में शुरू हुआ। गलत सूचनाएं और फर्जी खबरें भेजी जाने लगीं। भाजपा नेताओं ने यह काम आउटसोर्स कर दिया ताकि कहीं से डिजिटल जगत में उनकी भूमिका नहीं सुनिश्चित की जा सके। 2009 में फेसबुक और व्हाट्सएप भारत के सिर्फ 20 प्रमुख शहरों में थे। 2014 में इसने पारंपरिक मीडिया को पीछे छोड़ दिया। 2019 में देश में यह सबसे अधिक दखलंदाजी वाली मीडिया साबित होगी।’

बोरा भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ की तुलना स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया यानी सिमी से करते हैं। इसकी आंतकी गतिविधियां की वजह से सरकार ने इसे प्रतिबंधित कर रखा है। बोरा कहते हैं, ‘20 बड़े शहरों के लोगों में सोशल मीडिया की सामग्री को लेकर संदेह पैदा हो रहा है। वे व्हाट्सएप की चीजों पर अब आंखें मूंदकर भरोसा नहीं कर रहे हैं।’ राजनाथ सिंह की जगह जब नितिन गडकरी अध्यक्ष बने तो बोरा ने आईटी प्रकोष्ठ छोड़ दिया और असम में भाजपा के लिए काम करने लगे।

हमारे सोशल मीडिया सीरीज़ के अन्य आलेख पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें :-

चार टीमों ने मिलकर गढ़ी नरेंद्र मोदी की बड़ी छवि!

सोशल मीडिया पर मोदी के पक्ष में माहौल बनाने वाले अहम किरदार कौन-कौन हैं?

#सोशल_मीडिया : लोकसभा चुनावों पर फेसबुक का असर?

किसने गढ़ी मोदी की छवि?

क्यों फेसबुक कंपनी को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की मांग उठ रही है?

मुफ्त इंटरनेट के जरिये कब्ज़ा जमाने की फेसबुक की नाकाम कोशिश?

#सोशल_मीडिया : लोकसभा चुनावों पर फेसबुक का असर?

क्या सोशल मीडिया पर सबसे अधिक झूठ भारत से फैलाया जा रहा है?

#सोशल_मीडिया : सत्ताधारियों से पूरी दुनिया में है फेसबुक की नजदीकी

जब मोदी का समर्थन करने वाले सुषमा स्वराज को देने लगे गालियां!

फेसबुक पर फर्जी खबरें देने वालों को फॉलो करते हैं प्रधानमंत्री मोदी!

फर्जी सूचनाओं को रोकने के लिए फेसबुक कुछ नहीं करना चाहता!

#सोशल_मीडिया : क्या सुरक्षा उपायों को लेकर व्हाट्सऐप ने अपना पल्ला झाड़ लिया है?

#सोशल_मीडिया : क्या व्हाट्सऐप राजनीतिक लाभ के लिए अफवाह फैलाने का माध्यम बन रहा है?

#सोशल_मीडिया : क्या फेसबुक सत्ताधारियों के साथ है?

#सोशल_मीडिया : क्या नरेंद्र मोदी की आलोचना से फेसबुक को डर लगता है?

#सोशल_मीडिया : कई देशों की सरकारें फेसबुक से क्यों खफा हैं?

सोशल मीडिया की अफवाह से बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा

Social Media
#socialmedia
#Facebook
Facebook India
Real Face of Facebook in India
rajesh jain
propaganda
election propaganda
BJP
Narendra modi
General elections2019
2019 Lok Sabha elections
2019 आम चुनाव

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • विकास भदौरिया
    एक्सप्लेनर: क्या है संविधान का अनुच्छेद 142, उसके दायरे और सीमाएं, जिसके तहत पेरारिवलन रिहा हुआ
    20 May 2022
    “प्राकृतिक न्याय सभी कानून से ऊपर है, और सर्वोच्च न्यायालय भी कानून से ऊपर रहना चाहिये ताकि उसे कोई भी आदेश पारित करने का पूरा अधिकार हो जिसे वह न्यायसंगत मानता है।”
  • रवि शंकर दुबे
    27 महीने बाद जेल से बाहर आए आज़म खान अब किसके साथ?
    20 May 2022
    सपा के वरिष्ठ नेता आज़म खान अंतरिम ज़मानत मिलने पर जेल से रिहा हो गए हैं। अब देखना होगा कि उनकी राजनीतिक पारी किस ओर बढ़ती है।
  • डी डब्ल्यू स्टाफ़
    क्या श्रीलंका जैसे आर्थिक संकट की तरफ़ बढ़ रहा है बांग्लादेश?
    20 May 2022
    श्रीलंका की तरह बांग्लादेश ने भी बेहद ख़र्चीली योजनाओं को पूरा करने के लिए बड़े स्तर पर विदेशी क़र्ज़ लिए हैं, जिनसे मुनाफ़ा ना के बराबर है। विशेषज्ञों का कहना है कि श्रीलंका में जारी आर्थिक उथल-पुथल…
  • आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: पर उपदेस कुसल बहुतेरे...
    20 May 2022
    आज देश के सामने सबसे बड़ी समस्याएं महंगाई और बेरोज़गारी है। और सत्तारूढ़ दल भाजपा और उसके पितृ संगठन आरएसएस पर सबसे ज़्यादा गैर ज़रूरी और सांप्रदायिक मुद्दों को हवा देने का आरोप है, लेकिन…
  • राज वाल्मीकि
    मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?
    20 May 2022
    अभी 11 से 17 मई 2022 तक का सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का “हमें मारना बंद करो” #StopKillingUs का दिल्ली कैंपेन संपन्न हुआ। अब ये कैंपेन 18 मई से उत्तराखंड में शुरू हो गया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License