NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
2अप्रैल के भारत बंद के बाद विभिन्न राज्यों में दलितों पर फर्जी मुकदमे और दमन
"ये पूरी कार्यवाही सुनियोजित ढंग से की जा रहा है जिससे दलितों में एक आतंक का माहौल बनाया जा सके I "
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
09 Apr 2018
भारत बंद

2 अप्रैल को दलित संगठनों द्वारा SC/ST Act के कमज़ोर किये जाने के खिलाफ किये गए भारत बंद के बाद लगातार दलितों पर दमन किये जाने की रिपोर्टें आ रही हैं I दलित नेताओं का कहना है कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई इलाकों में दलितों पर फ़र्ज़ी मुकदमें दायर किये जा रहे हैं और कुछ निर्दोष दलितों को गिरफ्तार करके पीटा जा रहा है I

सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के कई नेताओं ने भी इस बात को उठाया है I इसमें सबसे मुख्य हैं बीजेपी के सांसद उदित राज जिन्होंने ट्वीटर पर इस बात को रक्खा I उदित राज ने कहा कि रिपोर्टें आ रही है कि 2 अप्रैल को जिन दलितों ने भारत बंद में शिरकत की थी उन्हें यातनाएं दी जा रही हैं और इसे रोका जाना चाहिए I उन्होंने आगे कहा कि बाड़मेर, जयपुर, ग्वालियर , मेरठ, बुलंदशहर, करौली और दूसरी जगह के लोगों को पुलिस द्वारा पीटा जा रहा है और उनपर फ़र्ज़ी मुकदमें थोपे जा रहे हैं I

उदित राज के आलावा बीजेपी के और भी नेताओं ने ये इसी तरह के आरोप लगाये हैं I गौरतलब है कि जिन जगहों में प्रताड़ना की बात की जा रही है वह तीनों राज्य (राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश) बीजेपी द्वारा शासित राज्य हैं I

इसी सिलसिले में राजस्थान के दलित नेता यूनियन मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, राजस्थान विधान सभा स्पीकर कैलाश मेघवाल और अन्य नेताओं से मिले और उन्हें ज्ञापन सौंपे I राजस्थान के दलित नेताओं का कहना है कि पुलिस ने उन लोगों के खिलाफ अब तक कोई कार्यवाही नहीं की है जिन्होंने 2 अप्रैल को हिंसा और आगज़नी की पर दूसरी तरफ वह निर्दोष दलितों को लगातार परेशान कर रही है I

दलित कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि बाड़मेर में 3 दलित युवकों को पुलिस ने इतना पीटा है कि उन्हें फ्रैक्चर हो गए हैं और इस घटना को दबाने के लिए पुलिस इन युवकों से किसी को मिलने नहीं दे रही I फिलहाल ये युवक बाड़मेर के किसी अस्पताल में भर्ती हैं I

बता दें कि 2 अप्रैल को देश भर में दलित संगठनों द्वारा भारत बंद का आह्वान किया गया था I ये बंद 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट द्वारा SC/ST एक्ट में बदलाव करने के निर्णय के खिलाफ था I दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में SC/ST एक्ट की तीन मुख्य बिन्दुओं को बदलने का आदेश दिया था I सुप्रीम कोर्ट ने कहा SC/ST एक्ट के अंतर्गत मामलों में अग्रिम ज़मानत के प्रावधान होना चाहिए, किसी भी सरकारी कर्मचारी को इस एक्ट के अंतर्गत गिरफ्तार करने से लिए पहले उच्च अधिकारियों से अनुमति ज़रूरी होगी और पहले पुलिस अधिकारी ये तय कर लें कि अपराध हुआ है या नहीं उसके बाद ही FIR की जाए I

दलित नेताओं का कहना है कि इससे ये कानून बहुत ही लचर और कमज़ोर हो जायेगा I इस कानून की ज़रुरत को समझने के लिए दलितों के खिलाफ बढ़ती जातिगत हिंसा  के  NCRB  (National crime record beureau)  डेटा की ओर नज़र डालने की ज़रुरत है I 3 अप्रैल में लोक सभा में एक प्रश्न का जवाब देते हुए यूनियन मिनिस्टर हंसराज गंगाराम ने कहा कि NCRB के ही डेटा के अनुसार 2016 में   SC/ST समुदाय के खिलाफ 47,000 मामले दर्ज़ हुए थे और 40,774 मामलों में SC/ST एक्ट लगाया गया था I उन्हीं के मुताबिक इन मामलों में सज़ा की दर सिर्फ 25.8% है I

राजस्थान में 2 अप्रैल के भारत बंद के बाद दलितों पर हो रहे दमन पर बोलते हुए दलित सामाजिक कार्यकर्त्ता भंवर मेघवंशी ने कहा “पूरे राजस्थान में 250 मुकदमें दर्ज़ किये गए हैं और पुलिस के ही आंकड़ों के हिसाब से करीब 1500 हज़ार लोग गिरफ्तार किये गए हैं I इनमें से ज़्यादातर लोग छात्र हैं, सरकारी कर्मचारी हैं और अम्बेडकरवादी विचार धारा से जुड़े लोग हैं जिनपर फ़र्ज़ी मकद्दमें दर्ज़ किये जा रहे हैं और कस्टडी में पीटा जा रहा है I ये पूरी कार्यवाही सुनियोजित ढंग से की जा रहा है जिससे दलितों में एक आतंक का माहौल बनाया जा सके I दूसरी तरफ 2 अप्रैल को जालौर, नीमकाथाना, हिंडोन और बाकि जगहों पर जातिगत सेनाओं जैसे करणी सेना और बजरंग दल ने शांतिपूर्वक बंद कर रहे दलितों पर हमले किये और उनके छात्रावासों और वाहनों में आग लगायी गयी I इन लोगों पर कोई कार्यवाही अब तक नहीं हुई है I पूरे राजस्थान में दलितों के 322 वाहन जलाये गए , कुछ जगहों पर अम्बेडकर की मूर्ति तोड़ी ,एक दलित शख्स की मौत हुई है और घायल होने वाले भी ज्यादतर दलित ही थे I सवाल ये है कि अगर दलितों ने हिंसा की तो क्या वह अपने ही लोगों पर हमला कर रहे थे ? क्या अपनी ही सम्पत्ति को नुक्सान कर रहे थे ?”

उदित राज और बाकी बीजेपी के नेताओं द्वारा दलितों के इस दमन पर बोलने पर भंवर का कहना है कि ये अपने समुदाय और पार्टी में खुदकी साख बचाने के लिए किया जा रहा है, क्योंकि दलित समाज में सरकार के प्रति गुस्सा बढ़ रहा है I

भारत बंद
दलित उत्पीड़न
दलितों पर केस
उदित राज
Dalit atrocities
Rajasthan
Madhya Pradesh
fake cases
torture

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

परिक्रमा वासियों की नज़र से नर्मदा

कड़ी मेहनत से तेंदूपत्ता तोड़ने के बावजूद नहीं मिलता वाजिब दाम!  

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

15 राज्यों की 57 सीटों पर राज्यसभा चुनाव; कैसे चुने जाते हैं सांसद, यहां समझिए...

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

मनासा में "जागे हिन्दू" ने एक जैन हमेशा के लिए सुलाया

‘’तेरा नाम मोहम्मद है’’?... फिर पीट-पीटकर मार डाला!

‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार

लखनऊ: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत के साथ आए कई छात्र संगठन, विवि गेट पर प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • Ahmed Hasan passes away
    भाषा
    उप्र विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन का निधन; योगी, अखिलेश ने दुख जताया
    19 Feb 2022
    वह पूर्व पुलिस अधिकारी थे। बाद में समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव उन्हें राजनीति में ले आये थे। हसन सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। वर्तमान में वह विधान परिषद सदस्य और नेता…
  • Ravish Tiwari passes away
    भाषा
    वरिष्ठ पत्रकार रवीश तिवारी का निधन, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया शोक
    19 Feb 2022
    इंडियन एक्सप्रेस के राष्ट्रीय ब्यूरो के प्रमुख रवीश तिवारी कैंसर से पीड़ित थे और पिछले करीब दो वर्षों से इस बीमारी से जूझ रहे थे।
  • police
    नाइश हसन
    योगी की पुलिस कैसे कर रही चुनाव में ग़रीबों से वसूली: एक पड़ताल
    19 Feb 2022
    सवाल यह है कि क्या मात्र विज्ञापन या भाषण स्थितियों की असलियत बयान कर सकते हैं? हमने हालिया पुलिसिया दमन की पड़ताल करनी चाही, तो ‘अमृतकाल’ में ग़रीब बस्तियों का हाल कुछ और ही दिखा।
  • Protest in Myanmar
    लव पुरी
    कैसे सैन्य शासन के विरोध ने म्यांमार को 2021 के तख़्तापलट के बाद से बदल दिया है
    19 Feb 2022
    म्यांमार में सैन्य शासन नया नहीं है, लेकिन कुछ टिप्पणीकार बाइनरी लेंस से परे म्यांमार की स्थिति को समझने का प्रयास करते हैं।
  • AFGHAN
    क्रिस्टीन लेहनेन
    तालिबान के आने के बाद अफ़ग़ान सिनेमा का भविष्य क्या है?
    19 Feb 2022
    तीन पुरस्कार विजेता महिला निर्देशकों ने अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उद्योग से अफ़ग़ान सिनेमा को बचाने की अपील की है। आज के दौर में इन महिला फिल्मकारों का समर्थन पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।  
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License