NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
42 फीसदी भारत सूखे की चपेट में, 6 फीसदी इलाके में हालात ख़तरनाक़
केंद्र सरकार द्वारा 2016 में जारी किया गया नवीनतम सूखा मैनुअल सूखा घोषित करने की प्रक्रिया को लंबा और कठिन बना देता है, विशेषज्ञों का कहना है कि आधिकारिक तौर पर बहुत देर से सूखा घोषित करने से बहुत बुरे प्रभाव निकलते हैं।
अजय कुमार
06 Jun 2019
महाराष्ट्र में सूखे का संकट
Image Courtesy : IndiaSpend

मार्च, 2019 की ड्राउट अर्ली वार्निंग सिस्टम से मिली जानकारी के तहत भारत का 42 फीसदी इलाका इस समय सूखे से जूझ रहा है। इसमें से तकरीबन 6 फीसदी इलाके की स्थिति बहुत अधिक खतरनाक हो चुकी है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार, गुजरात और उत्तर पूर्व के कुछ इलाके इस समय सूखे की चपेट में हैं। इन राज्यों में भारत की कुल आबादी की तकरीबन चालीस फीसदी आबादी रहती है। जबकि केंद्र सरकार ने अभी तक कहीं भी सूखे की घोषणा नहीं की है, वहीं पर आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, राजस्थान की सरकारों ने अपने यहां के कई जिलों में सूखे की घोषणा कर दी है। मानसून का महीना तो अब शुरू हो रहा है। जबकि सूखे की चपेट से यह सारे इलाके तकरीबन दस महीने से पीड़ित हैं। 
इस स्थिति के लिए बारिश की कम मात्रा पहला कारण है। इंडियन मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट के आंकड़ों के अनुसार नॉर्थ-ईस्ट मानसून, जिसे 'पोस्ट-मानसून वर्षा' (अक्टूबर-दिसंबर) के रूप में भी जाना जाता है, जो भारत को 10-20% वर्षा प्रदान करता है,  इसमें साल 2018 में 44.2% की कमी रही। साल 2015 से भारत लगातार सूखे से जूझ रहा है केवल साल 2017 अपवाद के तौर पर रहा। कम बारिश की वजह से जलाशयों के पानी का जलस्तर कम होता जा रहा है। देश के 91 प्रमुख जलाशयों में तकरीबन 32 फीसदी की कमी दर्ज की गयी है। दक्षिण भारत के 31 प्रमुख जलाशयों में इस कमी का स्तर तकरीबन 36 फीसदी तक पहुँच चुका है। इस तरह के लम्बे दौर तक मौजूद रहने वाले सूखे से कई तरह की परेशानियां उपजती हैं। जमीन के अंदर अधिक पानी निकालने की वजह से भूमिगत जलस्तर कम हो जाता है। गाँव के लोग पानी की समस्या से परेशान होकर शहरों की ओर पलायन करते हैं। गाँवों के गाँव खाली होते जाते हैं। राज्यों और जिलों के बीच पानी को लेकर झगड़ें बढ़ते हैं। खेती-किसानी पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।  
फिर भी, केंद्र सरकार द्वारा 2016 में जारी किया गया नवीनतम सूखा मैनुअल सूखा घोषित करने की प्रक्रिया को लंबा और कठिन बना देता है, विशेषज्ञों का कहना है कि आधिकारिक तौर पर बहुत देर से सूखा घोषित करने से बहुत बुरे प्रभाव निकलते हैं। इसका मतलब है कि राहत के उपाय जैसे कि पेयजल उपलब्धता, रियायती दर पर डीजल और सिंचाई के लिए बिजली, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत तयशुदा कामों के दिनों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं की जाती है। और ऐसे माहौल में अगर चुनाव आ गया तो स्थिति बहुत अधिक गंभीर हो जाती है। 
शोधकर्ताओं का मानना है कि जलवायु परिवर्तन की दशाओं की वजह से सूखे की बारम्बारता बढ़ती जा रही है। आज हमलोग बहुत अधिक गर्म हो रही दुनिया में रह रहे हैं। अगर यह ऐसे ही बढ़ता रहा तो सूखे से बहुत भयंकर परिणाम निकल सकते हैं। ग्लोबल वार्मिंग की  वजह से उन दशाओं में भी कमजोरी आ रही है, जिनसे मजबूत मानसून बनता था और अधिक बारिश होती थी। जलवायु की दशाओं में इतना अधिक परिवर्तन हो रहा है कि केरल में भयंकर बाढ़ आती है तो तमिलनाडु और ओडिशा में भयंकर चक्रवात। इंटर गवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज की रिपोर्ट के अनुसार साल 1800 यानी औद्योगिक क्रांति की शुरुआत से लेकर अब तक पृथ्वी के तापमान में एक फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। अगर इस तापमान में 1. 5 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी हुई तो दुनिया के कई जगहों पर बारिश भयंकर होगी और साथ में सूखा भी भयंकर पड़ेगा। जलवायु परिवर्तन की वजह से मानसून लाने वाली दशाओं में परिवर्तन हो रहा है। इससे भारत के कई इलाके में बारिश होने के पैटर्न बदल रहे रहे हैं। इससे हो सकता है कि सूखा और बाढ़ की संभावनाएं और अधिक बढ़ती जाए। शायद यही वजह है  कि भारत के उत्तर पश्चिम इलाके में कम बारिश हो रही है और लगातरा सूखा पड़ रहा है। 
इसका खामियाजा कृषि अर्थव्यस्था को भुगतना पड़ता है। भारत की 50% आबादी कृषि पर निर्भर है। कृषि लायक जमीन के 50 फीसदी से जमीन पर बारिश होती है। सूखे की वजह से इन जमीनों पर होने वाली खेती पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ने वाला है। इससे सबसे अधिक नुकसान उन मजदूरों को होगा जो दूसरे के खेतों में मजदूरी कर अपना गुजारा करते हैं। सामान्य स्थिति  में उन्हें साल के औसतन 150 -160 दिन काम मिल जाता है। लेकिन सूखे के हालत में काम मिलने वाले दिनों की संख्या और कम हो जाती है। कर्जा लिए हुए किसान की स्थिति बदतर हो जाती है।

पर्यावरणविद हिमांशु ठक्कर कहते हैं कि ऐसे हालत में सरकार के जल संसाधन से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट जैसे नदी जोड़ो परियोजना, हाइड्रो पावर, बड़े बाँध बनाने से ज्यादा मदद नहीं मिलती है। ऐसे हालात में माइक्रो इरिगेशन से जुडी परियोजनाएं है कारगर होती हैं। सूखे के ऐसे हालत से जूझने की पहली लड़ाई तो यह है कि सही समय पर स्वीकार कर लिया जाए किसी इलाके में सूखे की स्थिति है और उस तरह वहां पर काम किया जाए। पूरी तरह से यह लागू होने के बाद भी यह केवल तात्कालिक समाधान है। असली सामधान यह है कि जलवायु परिवर्तन से जूझने की हर लड़ाई कारगर तरह से लड़ी जाए और पूरी दुनिया को बाध्य किया जाए कि वह उस पर एकमत हो। साधारण शब्दों में यह कि भारत में बारिश उपयुक्त मानसूनी दशाओं से होती है। और इन दशाओं में परिवर्तन के लिए भारत जिम्मेदार नहीं है बल्कि पूरी दुनिया की ग्लोबल वार्मिंग इसे प्रभावित करती है। इसलिए सूखा चाहे महाराष्ट्र के लातूर में पड़े या मराठवाड़ा में लड़ाई केवल भारत में ही नहीं बल्कि अमेरिका से लेकर यूरोप तक में होनी चाहिए। और हमारी सरकारों को भी अपनी ज़िम्मेदारी पूरी ज़िम्मेदारी से निभानी चाहिए। 

इन्हें भी पढ़ें :-

महाराष्ट्र : बद से बदतर होते जा रहे हैं सूखे के हालात

महाराष्ट्र एक बार फिर भीषण सूखे की चपेट में

#महाराष्ट्र_सूखाः हज़ारों किसान ऋण माफ़ी योजना से मदद का कर रहे हैं इंतज़ार

#महाराष्ट्र_सूखा : किसान अपने मवेशियों को न बेच पा रहे हैं, न बचा पा रहे हैं!

#महाराष्ट्र_सूखाः सरकार की प्रमुख लघु सिंचाई योजना लोगों को सुविधा देने में विफल

 

drought
drought in India
Maharashtra drought
Andhra pradesh
Telangana
Rajesthan
Gujrat
karnataka
Odisha
farmer crises

Related Stories

मध्य प्रदेश के जनजातीय प्रवासी मज़दूरों के शोषण और यौन उत्पीड़न की कहानी

किसानों और सरकारी बैंकों की लूट के लिए नया सौदा तैयार

पुरी एयरपोर्ट : भूमि अधिकारों के लिए दलित एवं भूमिहीन समुदायों का संघर्ष जारी

तेलंगाना की पहली सुपर थर्मल पावर परियोजना को हरी झंडी देने में अहम मुद्दों की अनदेखी?

कर्नाटक: बीजेपी सरकार का फ़ैसला जिसके पास टीवी वो गरीब नहीं, लौटाएं बीपीएल कार्ड

देश की विवधता और एकता के साथ गणतंत्र दिवस परेड को तैयार किसान

तेलंगाना: केंद्र की मज़दूर और किसान विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ सीटू का जन जागरण अभियान!

कृषि कानूनों के खात्मे से जुड़ी लड़ाई में शामिल दक्षिण भारत के किसानों की राय

यह पूरी तरह से कमज़ोर तर्क है कि MSP की लीगल गारंटी से अंतरराष्ट्रीय व्यापार गड़बड़ा जाएगा!

आंध्र: अनंतपुर की इंडियन डिज़ाइन कंपनी के कपड़ा मज़दूर न्यूनतम मज़दूरी बढ़ाने के लिए कर रहे हैं विरोध प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • देवरिया की घटना महज़ पहनावे की कहानी नहीं, पितृसत्‍ता की सच्‍चाई है!
    सोनिया यादव
    देवरिया की घटना महज़ पहनावे की कहानी नहीं, पितृसत्‍ता की सच्‍चाई है!
    26 Jul 2021
    घर की लड़कियों और औरतों को नियंत्रण में रखना और उनके नियंत्रण से बाहर चले जाने पर उन्‍हें जान से मार डालना ऑनर किलिंग है, जो अक्सर घर की सो कॉल्ड 'इज्‍जत' बचाने के नाम पर किया जाता है, लेकिन हैरानी…
  • आर्थिक उदारीकरण के तीन दशक
    प्रभात पटनायक
    आर्थिक उदारीकरण के तीन दशक
    26 Jul 2021
    नव-उदारवाद मेहनतकश जनता को तब भी निचोड़ रहा था जब वह ऊंची वृद्घि दर हासिल करने में समर्थ था। संकट में फंसने के बाद से उसने निचोड़ने की इस प्रक्रिया को और तेज कर दिया है।
  • कई प्रणाली से किए गए अध्ययनों का निष्कर्ष :  कोविड-19 मौतों की गणना अधूरी; सरकार का इनकार 
    ऋचा चिंतन
    कई प्रणाली से किए गए अध्ययनों का निष्कर्ष :  कोविड-19 मौतों की गणना अधूरी; सरकार का इनकार 
    26 Jul 2021
    हालिया अनुमानों के मुताबिक, भारत में कोविड-19 की वजह से मरने वाले लोगों की तादाद 22 लाख से लेकर 49 लाख के बीच हो सकती है। इनके आधार पर वास्तविक मौतों की संख्या आधिकारिक स्तर पर दर्ज की गई और बताई जा…
  • कैसे ख़त्म हो दलितों पर अत्याचार का अंतहीन सिलसिला
    राज वाल्मीकि
    कैसे ख़त्म हो दलितों पर अत्याचार का अंतहीन सिलसिला
    26 Jul 2021
    दलितों पर अत्याचार और दलित महिलाओं से बलात्कार का अंतहीन सिलसिला चलता ही रहता है। कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के ही कानपुर के अकबरपुर में दलित युवक को सवर्ण समाज की लड़की से प्रेम करने की सज़ा उसे पेड़…
  • यूके ने अमेरिका के लिए रचा नया अफ़गान कथानक  
    एम. के. भद्रकुमार
    यूके ने अमेरिका के लिए रचा नया अफ़गान कथानक  
    26 Jul 2021
    अमेरिका, ब्रिटेन और पश्चिमी ताकतों को उम्मीद है कि वे तालिबान को अपने खुद के हितों को ध्यान में रखते हुए उनके खिलाफ जाने के बजाय उनके साथ काम करने का फायदा उठा सकने की स्थिति में हैं। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License