NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
48,000 झुग्गियों के अधिकारों के लिए 48 घंटे की ‘चेतावनी भूख हड़ताल’ जारी
भाकपा माले दिल्ली के राज्य सचिव रवि राय के साथ झुग्गी के 5 लोग शकुंतला देवी, सीता देवी, रामेश्वरी देवी, रिंकू और सीता ने कल यानी सोमवार शाम से चेतावनी भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
15 Sep 2020
48,000 झुग्गियों के अधिकारों के लिए 48 घंटे की ‘चेतावनी भूख हड़ताल’ जारी

दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के झुग्गी तोड़ने के फ़ैसले और दिल्ली व केंद्र सरकार के रवैये से नाराज़ दिल्ली के झुग्गी निवासी आंदोलन की राह पर हैं। हालांकि केंद्र ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में यह आश्वासन दिया कि चार हफ्तों में कोई बेदख़ली नहीं होगी, लेकिन झुग्गी वाले इसे सिर्फ़ एक धोखा ही मान रहे हैं। ये सभी लोग रेल पटरियों के पास बसी झुग्गियों में रहते हैं और वजीरपुर समेत आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करते हैं। भाकपा माले ने इनके समर्थन में 14 सितंबर को शाम 5 बजे से 48 घंटे की चेतावनी भूख हड़ताल शुरू की है। माले दिल्ली के राज्य सचिव रवि राय के साथ झुग्गी के 5 लोग शकुंतला देवी, सीता देवी, रामेश्वरी देवी, रिंकू और सीता भी इस चेतावनी भूख हड़ताल में शामिल हैं। यह हड़ताल बुधवार शाम 5 बजे तक चलेगी।

IMG-20200915-WA0001 (1).jpg

भूख हड़ताल क्यों, क्या है पूरा मामला?

ये भूख हड़ताल राष्ट्रीय राजधानी में रेलवे पटरियों के किनारे झुग्गियों के तोड़े जाने के फैसले के विरोध में की जा रही है। भूख हड़ताल पर बैठे लोगो ने कहा कि 31 अगस्त को पारित अपने एक गरीब विरोधी आदेश में सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली में रेलवे पटरियों के साथ लगी हुई झुग्गी बस्तियों को हटाने का आदेश दिया था और साथ ही यह भी निर्देश दिया था कि कोई अन्य अदालत इस आदेश को रोक नहीं सकती है।

रेल मंत्रालय द्वार कोर्ट में एक रिपोर्ट दायर की गई जिसमें दिल्ली में रेलवे ट्रैक के आस पास साफ सफाई की कमी का आरोप लगाया गया, जिसके बाद कोर्ट ने  झुग्गी हटाने का आदेश दिया। लेकिन सरकार के इस दावे को गलत और कोर्ट के इस निर्णय को अमानवीय बताते हुए झग्गी वालों का कहना है कि इससे ज्यादा शर्मनाक बात नहीं हो सकती है कि एक चुनी हुई सरकार गरीबों को प्रदूषण के लिए दोषी ठहरा रही है। पहले तालाबंदी और महामारी ने दिल्ली के गरीबों और श्रमिकों की आजीविका को नष्ट कर दिया है। पूरे देश में झुग्गीवासियों और प्रवासी श्रमिकों की दुर्दशा देखी और इस स्थिति में झुग्गियों को तोड़ने  का आदेश सरासर अमानवीय है।

आपको बता दे झुग्गी तोड़ने के आदेश के बाद से रेलवे, आस पास के अलग-अलग झुग्गी बस्तियों में बेदखली के नोटिस लगा रहा है।

notice 1.jpg

इस नोटिस के बाद से विरोध के स्वर भी तेज़ी से अलग-अलग बस्तियों से उठ रहे है, विरोध की ये चिंगारी वज़ीरपुर से मानसरोवर, कीर्ति नगर, केशवपुरम नरेला तक अलग-अलग झुग्गियों में फैल गई है। झुग्गीवासी कह रहे हैं कि वे उन्हें अपनी झुग्गियों से निकालने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

बेदखली आदेश के खिलाफ झुग्गी वासियों के विरोध के कारण, केंद्र सरकार ने अदालत में एक शपथ पत्र में कहा है कि अगले चार हफ्तों में कोई बेदख़ली नहीं होगी।

माले का मानना है कि झुग्गी तोड़ने पर चार सप्ताह की मोहलत केवल तात्कालिक राहत है। भूख हड़ताल ने विध्वंस आदेश को पूरी तरह से रद्द करने की मांग शुरू कर दी है।

notice 2_1.jpg

भूख हड़ताल शुरू करते हुए रवि राय ने कहा, "झुग्गीवासियों को उनके वर्तमान निवास स्थान के पास आवास का अधिकार है। सरकार का 4 सप्ताह तक कोई विध्वंस न होने का तथाकथित आश्वासन सिर्फ आंखों में धूल झोंकने वाला है। हम झुग्गी तोड़ने के आदेश के पूर्ण निरस्तीकरण की मांग करते हैं। ज़मीन के मालिकान हक के साथ झुग्गी के निवासी का पुनर्वास किया जाए।"

पिछले 28 वर्षों से वजीरपुर स्लम में रहने वाली और भूख हड़ताल करने वाली शकुंतला देवी ने कहा, "हम लंबे समय से यहां रह रहे हैं। हम शहर में काम करते हैं। सरकार को हमें बताना चाहिए कि अगर हमारा घर तोड़ देंगे तो हम कहां रहेंगे। "

पिछले 22 वर्षों से झुग्गी में रह रहीं एक और भूख हड़ताल में शामिल महिला सीता देवी ने कहा, "हमें सरकार द्वारा अब तक पक्का घर नहीं दिया गया है और अब वे हमारी झुग्गी को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। अब हमें वो अगले चार  सप्ताह में हमें घर देंगे, जो उन्होंने पिछले 22 वर्षों में नहीं दिए हैं? ”

माले का कहना है कि कई कानूनी विद्वानों और वकीलों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस आदेश ने सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली उच्च न्यायालय के पिछले कई फैसलों को शर्मनाक तरीक़े से नजरअंदाज कर दिया है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राइट टू शेल्टर यानी आवास का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और दिल्ली में किसी भी झुग्गी को पर्याप्त और उचित पुनर्वास के बग़ैर तोड़ा नहीं जा सकता। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के ख़िलाफ़ भी है क्योंकि यह आदेश पुनः अपील करने का मौका भी नहीं देता है और अदालत ने झुग्गी वासियों के पक्ष को नहीं सुना है।

रवि राय ने कहा कि "सुप्रीम कोर्ट का आदेश बेहद अमानवीय है, उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के रूप  की विशेष परिस्थितियाँ आज हमारे सामने हैं यह आदेश उन परिस्थितियों को भी नज़रअंदाज़ करता है, इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया गया है कि झुग्गी-झोपड़ी निवासी इन हालातों का सामना कैसे करेंगे। रेल मंत्रालय ने पुनर्वास की योजना के बिना दिल्ली में कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ शुरू कर दी है जो पूरी तरह से अमानवीय है। मोदी सरकार जानबूझकर कानूनों की धज्जियाँ  उड़ा रही है और खुद को गरीब विरोधी साबित कर रही है। दिल्ली सरकार ने बिना किसी ठोस आश्वासन के ख़ुद को केवल बयान देने तक ही सीमित रखा है। यह एक ऐसी स्थिति की ओर ले जा रहा है, जहाँ  गरीबों को ख़ुद उनके ही भरोसे छोड़ दिया गया है। हम 48 घंटों के लिए चेतावनी भूख हड़ताल कर रहे हैं और अगर सरकार ने जवाब नहीं दिया तो हम इससे भी बड़े आंदोलन की ओर बढ़ेंगे"

भूख हड़ताल बैठे लोगों की माँगें :

  • मोदी और केजरीवाल सरकार को झुग्गी बस्तियों के लोगों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे!
  • कोरी बयानबाज़ी नहीं बल्कि एक कानूनी आदेश जारी करना होगा और झुग्गी वासियों से किये गए वादों को पूरा करना होगा।
  • जबरन विस्थापन नहीं चलेगा, सभी झुग्गी वासियों के लिए वर्तमान निवास के 5 किलोमीटर के भीतर पुनर्वास की गारंटी की जाए।
48000 slum Demolition
slums
Supreme Court
hunger strike
CPIML
Railway ministry
Arvind Kejriwal
AAP
Narendra modi
BJP
Northern Railway

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट


बाकी खबरें

  • Savarkar and gandhi
    राम पुनियानी
    क्या गांधी ने सावरकर से दया याचिका दायर करने को कहा था?
    18 Oct 2021
    विशिष्ट हिंदू राष्ट्र की धारणा को विकसित करने वाले सावरकर ने अंडमान से अंग्रेज़ों को दया याचिकायें लिखी थीं और ऐसा करने के लिए उन्हें किसी और ने नहीं कहा था बल्कि यह उनके ख़ुद का निजी फ़ैसला था।
  • gandhi ji and sawarkar
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    गांधी बनाम सावरकरः हिंद स्वराज बनाम हिंदुत्व
    18 Oct 2021
    असली सवाल महात्मा गांधी बनाम सावरकर का नहीं है। असली सवाल उन दो दृष्टियों का है जो एक दूसरे से भिन्न हैं और जिनकी नैतिकता में जमीन आसमान का अंतर है। यह अंतर्विरोध रहेगा और ‘अमृत महोत्सव’ में इस पर…
  • kisan andolan
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मंत्री अजय मिश्रा की बर्ख़ास्तगी की मांग को लेकर किसानों का ‘रेल रोको’ आंदोलन
    18 Oct 2021
    एसकेएम के मुताबिक आज का रेल रोको आंदोलन कुल 6 घंटे का रहेगा। इस दौरान पूरे देश में रेल सेवाएं सुबह 10 से शाम 4 बजे तक बाधित की जाएंगी। रेल संपत्ति को बिना क्षति पहुंचाए, रेल रोको शांतिपूर्ण रहेगा।…
  • Coal
    प्रबीर पुरकायस्थ
    बिजली की मौजूदा तंगी सरकारी नियोजन में आपराधिक उपेक्षा का नतीजा है
    18 Oct 2021
    जहां तक बिजलीघरों में पर्याप्त कोयला न रहने के वर्तमान संकट का सवाल है, यह नियोजन के अभाव और सरकार की घोर अक्षमता के योग का नतीजा है। 
  • Putin
    जेम्स डब्ल्यू कार्डेन
    रूस किस तरह का ख़तरा है?
    18 Oct 2021
    रूसी खतरे के अलावा किसी भी विषय पर द्विदलीय सहमति इतनी अचल नहीं है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License