NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
समाज
भारत
राजनीति
49 हस्तियों ने "जय श्री राम" के दुरुपयोग पर मोदी को लिखा ख़त 
49 लोगों की इस लिस्ट में श्याम बेनेगल, अनुराधा कपूर, कोंकणा सेन शर्मा, अनुराग कश्यप जैसी हस्तियों का नाम है, जिन्होंने पीएम मोदी को ख़त लिखा है कि देश में "जय श्री राम" के नारे का दुरुपयोग करते हुए सांप्रदायिकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। 
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
24 Jul 2019
 "जय श्री राम" के दुरुपयोग पर मोदी को लिखा ख़त 

देश भर में लगातार हो रही मॉब लिंचिंग की घटनाओं और जय श्रीराम नारे के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए अलग-अलग क्षेत्रों की 49 हस्तियों ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में अपर्णा सेन, कोंकणा सेन शर्मा, रामचंद्र गुहा, अनुराग कश्यप, शुभा मुद्गल जैसे अलग-अलग क्षेत्र के दिग्गजों के हस्ताक्षर हैं। पीएम को संबोधित करते हुए चिट्ठी में लिखा गया है कि देश भर में लोगों को जय श्रीराम नारे के आधार पर उकसाने का काम किया जा रहा है। साथ ही दलित, मुस्लिम और दूसरे कमजोर तबकों की मॉब लिंचिंग को रोकने के लिए तत्काल क़दम उठाने की मांग की गई है।
ख़त में लिखा गया है: 'आदरणीय प्रधानमंत्री... मुस्लिम, दलित और दूसरे अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की लिंचिंग तत्काल प्रभाव से बंद होनी चाहिए। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े देख हम हैरान हैं। एनसीआरबी के डेटा के अनुसार, दलितों के साथ 2016 में 840 हिंसक घटनाएं हुईं। इन अपराध में शामिल लोगों को दोषी क़रार देने के आंकड़े में भी कमी आई है।'
ख़त में एक जगह ये भी लिखा है कि ऐसी घटनाओं पर प्रधानमंत्री की निंदा ही काफ़ी नहीं है। 

इसके अलावा ख़त में राष्ट्र और राज के सवाल पर बात करते हुए कहा गया है कि 'देश की सत्ताधारी पार्टी की आलोचना करना देश की आलोचना करने जैसा नहीं है। किसी भी देश की सत्ताधारी पार्टी उस राष्ट्र के समानांतर नहीं हो सकती। सत्ताधारी पार्टी देश की बहुत सी पार्टियों में से ही एक पार्टी भर होती है। सरकार के खिलाफ लिए जानेवाले कदम को राष्ट्र के खिलाफ उठाया कदम नहीं करार दिया जा सकता।'

ख़त में एक जगह ये भी लिखा है कि ऐसी घटनाओं पर प्रधानमंत्री की निंदा ही काफ़ी नहीं है। 

ख़त में एक जगह लिखा है कि "बहुत अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि इन दिनों जय श्रीराम का नारा युद्ध उन्माद जैसा बनता जा रहा है। कानून और व्यवस्था तोड़ने के लिए और बहुत बार लिंचिंग के वक्त भी इसी नारे का प्रयोग किया जा रहा है। यह देखना हैरान करने वाला है कि धर्म के नाम पर ऐसा किया जा रहा है। राम के नाम पर ऐसे अपराध को अंजाम देने की घटनाओं पर लगाम लगाना जरूरी है।'
 

एक और बात जो ग़ौरतलब है वो ये, कि आज ही राज्य सभा में केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने कहा है कि सांप्रदायिकता के मामलों में गिरावट आई है। 
इसके अलावा किशन रेड्डी ने ये भी कहा कि भीड़ के द्वारा की जा रही हिंसा का संबंध किसी दल विशेष से नहीं है। 

Letter by eminent personali... by NDTV on Scribd

एक तरफ़ जहाँ देश के विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियाँ सांप्रदायिक हिंसा के ख़िलाफ़ प्रधानमंत्री से किसी ठोस क़दम की अपील कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ़ किशन रेड्डी का ये कहना कि भीड़ द्वारा हिंसा का संबंध किसी दल विशेष से नहीं है, ये बात हास्यास्पद लगती है और सरकार के लापरवाह रवैये को भी दर्शाती है। 

 

 

mob lynching
Hindutva
Narendra modi
shyam benegal
Anuradha kapoor
Anurag kashyap
Sectarianism

Related Stories

मनोज मुंतशिर ने फिर उगला मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़हर, ट्विटर पर पोस्ट किया 'भाषण'

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

जनतंत्र पर हिन्दुत्व का बुल्डोजर और अंबेडकर की भविष्यवाणी

मुस्लिम जेनोसाइड का ख़तरा और रामनवमी

सद्भाव बनाम ध्रुवीकरण : नेहरू और मोदी के चुनाव अभियान का फ़र्क़

एक व्यापक बहुपक्षी और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता

हम भारत के लोगों की असली चुनौती आज़ादी के आंदोलन के सपने को बचाने की है

हम भारत के लोग : इंडिया@75 और देश का बदलता माहौल


बाकी खबरें

  • रवि कौशल
    आदिवासियों के विकास के लिए अलग धर्म संहिता की ज़रूरत- जनगणना के पहले जनजातीय नेता
    28 Apr 2022
    जनजातीय समूह मानते रहे हैं कि वे हिंदू धर्म से अलग रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन करते हैं, इसलिए उन्हें अलग धर्म संहिता दी जाना चाहिए, ताकि आने वाली जनगणना में उन्हें अलग समहू के तौर पर पहचाना जा…
  • संदीप चक्रवर्ती
    कोलकाता : वामपंथी दलों ने जहांगीरपुरी में बुलडोज़र चलने और बढ़ती सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ निकाला मार्च
    28 Apr 2022
    नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर बीजेपी-आरएसएस की ताक़त बढ़ी तो वह देश को हिन्दू राष्ट्र बना देंगे जहां अल्पसंख्यकों के साथ दोयम दर्जे के नागरिक जैसा बर्ताव किया जाएगा।
  • राज वाल्मीकि
    ब्राह्मणवादी व्यवस्था ने दलितों को ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण स्त्री समुदाय को मानवाधिकारों से वंचित रखा: चौथीराम यादव
    28 Apr 2022
    पंडिता रमाबाई के परिनिर्वाण दिवस के 100 साल पूरे होने पर सफाई कर्मचारी आंदोलन ने “पंडिता रमाबाई : जीवन और संघर्ष” विषय पर कार्यक्रम किया।
  • hisab kitab
    न्यूज़क्लिक टीम
    5 साल में रोज़गार दर 46 फ़ीसदी से घटकर हुई 40 फ़ीसदी
    28 Apr 2022
    CMIE के आंकड़ों के मुताबिक भारत की काम करने लायक़ 90 करोड़ आबादी में नौकरी और नौकरी की तलाश में केवल 36 करोड़ लोग हैं। तकरीबन 54 करोड़ आबादी रोज़गार की दुनिया से बाहर है। बेरोज़गरी के यह आंकड़ें क्या कहते…
  • राजु कुमार
    बिना अनुमति जुलूस और भड़काऊ नारों से भड़का दंगा
    28 Apr 2022
    मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी सहित आठ राजनीतिक दलों की ओर से एक प्रतिनिधि मंडल ने खरगोन के दंगा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License