NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
फिलिस्तीन
शता ओदेह की गिरफ़्तारी फ़िलिस्तीनी नागरिक समाज पर इस्राइली हमले का प्रतीक बन गया है
हेल्थ वर्क कमिटीज़ की निदेशक शता ओदेह जुलाई 2021 से ही जेल में हैं और जेल में रहने के दौरान उन्हें कोविड-19 से भी गुज़रना पड़ा। उनका यह मामला इज़राइल के भेदभावपूर्ण नीतियों की आलोचना करने वाली सभी तरह की आवाज़ों को ख़त्म करने की इज़राइली कोशिशों का एक छोटा सा रूप है।
शिरीन ओदेह
09 Feb 2022
Shatha Odeh
डॉ शता ओदेह

मेरी मां और हेल्थ वर्क कमिटीज़ (HWC) की निदेशक शता ओदेह को गिरफ़्तारी 7 जुलाई, 2021 हुई थी, जिसे अब सात महीने हो गये हैं, लेकिन वह अब भी इज़राइली नज़रबंदी में हैं। उनकी क़ैद और उन पर चलाया जा रहा सैन्य मुकदमा सही मायने में फ़िलिस्तीन के लोगों के ख़िलाफ़ इज़राइली न्यायिक प्रणाली के भीतर मौजूद भेदभाव का एक और ऐसा निराशाजनक तमाशा है, जिसमें एक व्यापक बढ़ती कार्रवाई के हिस्से के रूप में शता जैसे प्रमुख नागरिक समाज के सक्रिय लोग शामिल हैं।

पिछले जनवरी में डेमन जेल में फ़िलिस्तीनी क़ैदियों के बीच कई क़ैदियों को कोविड-19 होने का पता चला था। शता उनमें से एक थीं। इन क़ैदियों को ख़राब हालात वाले एक ऐसे जेल में रख छोड़ा गया था,जहां अंधेरा और सीलन था। जैसा कि किसी क़ैदी ने कहा था कि इस जेल में सांस ले पाना भी मुश्किल था।

इज़राइल ने बक़ायदा इन फ़िलिस्तीनी क़ैदियों की सेहत की अनदेखी की है। इसका नतीजा यह होता रहा है कि कई बार तो उनकी मौत तक हो जाती है या फिर वे किसी पुरानी बीमारियों की ज़द में आ जाते हैं। मेरी मां जल्द ही 61 साल की होने वाली हैं, और पहले से ही कई पुरानी बीमारियों से पीड़ित रही हैं, उन्हें तक़रीबन 10 दिनों तक उस सेल में क़ैद रखा गया। हम इसलिए चिंतित हैं, क्योंकि वह अपनी उम्र और कई रोगों के चलते कोविड-19 के लिहाज़ से एक उच्च जोखिम वाले समूह में आती है। यह विडंबना ही है कि जिसने एक नर्स और बाद में एचडब्ल्यूसी के तत्कालीन निदेशक के रूप में अपना जीवन दूसरों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए समर्पित कर दिया हो, उन्हें ऐसी विकट परिस्थितियों में एक घातक वायरस से उबरना होगा।।

मेरी मां का मामला फ़िलिस्तीनी नागरिक समाज पर इज़राइल की ओर से बक़ायदा किये जाने वाले हमलों का एक छोटा सा रूप है, जिसका एक ही मक़सद है और वह यह कि इज़राइल के दशकों पुराने उत्पीड़न और यातना की आलोचना करने वाली हर आवाज़ को ख़त्म कर दिया जाये और इस लिहाज़ से किये जा रहे गंभीर उल्लंघनों और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अपराधों की जवाबदेही के तमाम रास्ते बंद कर दिये जायें। संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) सहित मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इज़राइल को सज़ा से मुक्ति के साथ आगे बढ़ने की इजाज़त दे रहे हैं।ऐसे में फ़िलिस्तीन की सिविल सोसाइटी, मानवाधिकार संगठन और इसके लिए लड़ने वाले लोग एक ऐसे अंधेरे युग की ओर बढ़ रहे हैं, जो उनके पूरे के पूरे वजूद और मानवाधिकार आंदोलन को ख़तरे के हवाले करता जा रहा है। फ़िलीस्तीनियों को ख़ुद को किसी भी तरह से संगठित किये जाने को लेकर धमकाया जाता है और इज़रायल अपने उस सिविल सोसाइटी पर भी हमले को तेज़ कर रहा है, जिसमें स्वास्थ्य सेवा जैसी बुनियादी सेवायें देने वाले सिविल सोसाइटी भी शामिल हैं।

शता के ख़िलाफ़ इज़राइल की ये कथित शिकायतें एचडब्ल्यूसी के निदेशक के तौर पर उनकी गतिविधियों को लेकर हैं, और फ़िलिस्तीनियों पर मुकदमा चलाने के लिए ख़ास तौर पर बनायी गयी एक इजरायली सैन्य अदालत से इस तरह के मामलों को "सुरक्षा" की एक कमज़ोर कड़ी के तौर पर जोड़ दिया गया है। जैसे ही इस सैन्य अदालत में फ़िलीस्तीनी क़ैदी ले जाये जाते हैं,, जिसमें शता (साथ ही फ़िलीस्तीनी बच्चे, सांसद और मानवाधिकार रक्षक) शामिल हैं, उनसे कठोर पूछताछ की जाती है और उन्हें उचित क़ानूनी प्रक्रिया से भी वंचित रखा जाता है। यह इज़रायल की रंगभेद व्यवस्था का एक और मज़ाहरा है।

शता जैसे मामलों को फ़ैसले तक पहुंचने में सालों लग सकते हैं। दरअस्ल यह इज़रायली अधिकारियों का डराने-धमकाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक हथियार है। आरोप की पुष्टि हुए बिना जेल में बंद कई फ़िलिस्तीनी दबाव में आकर किसी समझौते के तहत अपने ऊपर लगे आरोप को क़ुबूल कर लेते हैं । बाक़ी लोग तो हिरासत और पूछताछ की क्रूर, अमानवीय स्थितियों से महज़ बाहर निकलने के लिए इज़राइल के इन आरोपों को झूठे तौर पर स्वीकार कर लेते हैं। इज़राइल कभी-कभी दूसरे फिलिस्तीनियों पर झूठे आरोप लगाने के लिए इन झूठे बयानों का इस्तेमाल करता है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की हाल ही में जारी रिपोर्ट में इज़रायल की इस रंगभेद प्रणाली के इस्तेमाल से तक़रीबन 99.74% सज़ा दरों पर गंभीरता से ध्यान दिलाया गया है।इस रिपोर्ट से साफ़ तौर पर "इजरायल की वह आपराधिक न्याय प्रणाली सामने आती है,जो कि फ़िलिस्तीनियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार" को उजागर करती है।

इज़राइल ने अक्टूबर 2021 में छह प्रमुख फ़िलिस्तीनी सिविल सोसाइटी संगठनों पर "आतंकवादी संगठन" होने का ठप्पा लगा दिया था और वेस्ट बैंक में उनकी गतिविधियों को "ग़ैर-क़ानूनी" घोषित कर दिया था। इस कार्रवाई ने इज़राइल के दोहरे इरादों को उजागर कर दिया है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र ने इज़ाइल के इस रवैये पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी, बाद में इसे "फ़िलिस्तीनी मानवाधिकार आंदोलन पर इस सीधे-सीधे हमले" की निंदा करते हुए कहा था कि "इज़राइल की सरकार की ओर से इस तरह से आतंकवाद विरोधी उपायों के ग़लत इस्तेमाल से सभी की सुरक्षा कमज़ोर पड जाती है।

मेरी मां को मिली यह क़ैद इज़राइल के इसी व्यापक हमले का प्रतीक थी। यह उसी रणनीति का हिस्सा है। इज़राइल का आख़िरी लक्ष्य फ़िलिस्तीन के सिविल सोसाइटी को पूरी तरह ख़त्म करना है। इज़राइल इस मक़सद  को ख़ास तौर से फ़िलिस्तीनी संगठनों के उन वित्तीय संसाधनों को ख़त्म करके हासिल करने की उम्मीद करता है, जिनमें ज़्यादतर संगठन विदेशी फंडिंग पर निर्भर हैं। इज़राइल झूठे और भ्रामक दावों के आधार पर मानहानि के सैन्य कार्रवाई का इस्तेमाल करता है और बिना कारण के उन संगठनों के कर्मियों को क़ैद कर लेता है। फ़ंडिंग करने वाले अंतर्राष्ट्रीय संगठन संभावित जोखिमों से डरते हैं, और कुछ मामलों में तो स्वेच्छा से इस फ़ंडिंग को ख़त्म कर देते हैं।

शता की गिरफ़्तारी से एक महीने पहले कोविड-19 महामारी के बीच ही इज़रायली अधिकारियों ने मनमाने ढंग से एचडब्ल्यूसी के मुख्यालय को बंद करने का फ़ैसला किया था। यह देखते हुए कि एचडब्ल्यूसी अधिकृत फ़िलिस्तीनी क्षेत्र (OPT) में स्वास्थ्य सेवाओं के मुख्य प्रदाताओं में से एक है,एमनेस्टी इंटरनेशनल ने तब कहा था कि इस तरह के सख़्त क़दम से "फ़िलिस्तीनी स्वास्थ्य सेवा के लिए विनाशकारी नतीजे होंगे।"

शता की गिरफ़्तारी के बाद से ही स्थानीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी तत्काल रिहाई के लिए व्यापक मांगें उठती रही हैं। इन मानवाधिकार योद्धाओं की स्थिति पर अन्य संयुक्त राष्ट्र विशेष प्रक्रियाओं द्वारा समर्थित संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत, मैरी लॉलर ने शता और दो अन्य एचडब्ल्यूसी कर्मचारियों-जुआना रुइज़ सांचेज़ और तासीर अबू शरबक की रिहाई का आह्वान किया है। दुनिया भर की सिविल सोसाइटी ने उनकी रिहाई की मांग की है।

जहां शाता के मामले को लेकर अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है, वहीं कई अमेरिकी सांसदों ने सार्वजनिक रूप से छह फ़िलिस्तीनी संगठनों के सिलसिले में उठाये गये इज़राइल के हालिया क़दमों की निंदा की है।

मेरी मां 10 फ़रवरी को इज़राइल के ओफ़र शहर में चल रहे सैन्य न्यायाधिकरण में अपने 10वें सुनवाई सत्र में भाग लेंगी। इस सत्र के 15 मिनट तक चलने की संभावना है। इसका संचालन हिब्रू भाषा में किया जायेगा। इस सत्र की कार्रवाई का घटिया अनुवाद भी मुहैया नहीं कराया जायेगा। शता का यह मामला फ़िलिस्तीनी नागरिक समाज के ख़िलाफ़ इज़रायल के हमले और फ़िलिस्तीनी लोगों को दबाने,उन पर हावी होने और ख़त्म करने के उसके चल रहे इन प्रयासों का हिस्सा बना रहेगा।

इस बीच शता का परिवार और उनके चाहने वाले उनकी रिहाई का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।

# FreeShathaOdeh

शिरीन ओदेह शता की बेटी हैं और बतौर क़ानूनी शोधकर्ता काम कर रही हैं।

यह लेख पीपल्स डिस्पैच में प्रकाशित हुआ था। अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

https://peoplesdispatch.org/2022/02/07/7-months-after-her-arrest-shatha-odehs-case-is-emblematic-of-israeli-attack-on-palestinian-civil-society/

Israel
Palestine
Israel Occupied Palestine
Administrative detention in Israeli prisons

Related Stories

फ़िनलैंड-स्वीडन का नेटो भर्ती का सपना हुआ फेल, फ़िलिस्तीनी पत्रकार शीरीन की शहादत के मायने

न नकबा कभी ख़त्म हुआ, न फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध

अल-जज़ीरा की वरिष्ठ पत्रकार शिरीन अबु अकलेह की क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीन में इज़रायली सुरक्षाबलों ने हत्या की

अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ इज़राइल को किया तैनात

फ़िलिस्तीन पर इज़राइली हिंसा और यूक्रेन-रूस में ख़ूनी जंग कब तक

इज़रायली सुरक्षाबलों ने अल-अक़्सा परिसर में प्रार्थना कर रहे लोगों पर किया हमला, 150 से ज़्यादा घायल

लैंड डे पर फ़िलिस्तीनियों ने रिफ़्यूजियों के वापसी के अधिकार के संघर्ष को तेज़ किया

अमेरिका ने ईरान पर फिर लगाम लगाई

ईरान नाभिकीय सौदे में दोबारा प्राण फूंकना मुमकिन तो है पर यह आसान नहीं होगा

141 दिनों की भूख हड़ताल के बाद हिशाम अबू हव्वाश की रिहाई के लिए इज़रायली अधिकारी तैयार


बाकी खबरें

  • Low Budget Allocations Severely Unjust to Children
    भरत डोगरा
    कम बजट आवंटन बच्चों के साथ घोर अन्याय
    28 Jan 2022
    भारत युवाओं को उनके दाय से वंचित करने का जोखिम नहीं उठा सकता, खासकर जब कोरोना महामारी उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बनी हुई है। वित्तीय वर्ष 2022 के लिए प्रस्तावित बजट में…
  • Rajeev Nigam
    न्यूज़क्लिक टीम
    व्यंग्य हमेशा रहा है और रहेगा
    28 Jan 2022
    हास्य और व्यंग्य हमेशा से ज़रूरी रहा है। राजनीति के ऊपर व्यंग्य हमेशा कसा गया है। लेकिन आज के नेताओं में सहने की ताकत कम हो गयी है। राजीव निगम से इस खास मुलाकात में सुनिए इन्हीं सब मुद्दों पर बात ।
  • bjp
    भाषा
    भाजपा ने 2019-20 में 4,847 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति घोषित की : एडीआर
    28 Jan 2022
    द एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने 2019-20 में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों की संपत्ति और देनदारियों के अपने विश्लेषण के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें भाजपा की संपत्ति सबसे…
  • RRB-NTPC
    रवि शंकर दुबे
    जानें: RRB-NTPC के खिलाफ क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं छात्र? क्या है पूरा मामला?
    28 Jan 2022
    एक ओर पूरा देश गणतंत्र दिवस के पर्व में डूबा हुआ था, तो दूसरी ओर देश का भविष्य सड़कों पर पुलिस की लाठियां खा रहा था। आखिर क्यों छात्रों को सड़क पर उतरने के लिए होना पड़ा मजबूर, क्या है RRB-NTPC के…
  • RRB NTPC
    एम.ओबैद
    बिहार आरआरबी-एनटीपीसी छात्र आंदोलनः महागठबंधन माले नेता ने कहा- ये सरकार लोकतंत्र विरोधी है
    28 Jan 2022
    "सरकार चाहती ही है कि देश में रोजगार समाप्त हो। पीएम मोदी और उनके मंत्री और पूर्ववर्ती रेल मंत्री पहले कहते रहे हैं कि देश में निजीकरण ज़रुरी है और रोज़गार तो पकौड़ा तलना है। बीजेपी की पकौड़ा तलने की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License