NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
रूसः 78% से अधिक मतदाताओं ने संविधान में संशोधन का समर्थन किया
ये संशोधन मार्च 2024 में राष्ट्रपति पुतिन को इस पद के लिए फिर से चुनाव लड़ने की अनुमति देगा।
पीपल्स डिस्पैच
02 Jul 2020
रूस

रूसी केंद्रीय चुनाव आयोग (सीईसी) द्वारा आज यानी 2 जुलाई को घोषित परिणामों के अनुसार 1993 के रूसी संविधान में संशोधनों को लेकर सप्ताह भर के जनमत संग्रह में 99% से अधिक मतों की गिनती के बाद लगभग 78% मतदाताओं ने इस संशोधन का समर्थन किया और केवल 21% मतदाताओं ने इसके ख़िलाफ़ मतदान किया है।

कई अन्य चीजों के अलावा ये संशोधन होने वाले अगले चुनावों में राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन को इस पद के लिए फिर से चुनाव लड़ने की अनुमति देगा जो मार्च 2024 में होने वाले हैं।

इस जनमत संग्रह पर मतदान 25 जून से शुरू हुआ और 1 जुलाई तक जारी रहा। मतदान केंद्रों पर भीड़भाड़ से बचने के लिए मतदान की अवधि को एक दिन से बढ़ाकर एक सप्ताह तक कर दिया गया ताकि COVID-19 के प्रसार को रोका जा सके। COVID-19 के 6,50,000 से अधिक मामलों और 9500 से अधिक मौतों के साथ दुनिया के तीसरे सबसे अधिक प्रभावित इस देश में सामाजिक दूरी को बनाए रखने के लिए मतदाताओं को विशेष रूप से संगठित मतदान क्षेत्रों में अपने मोबाइल फोन के माध्यम से या ऑनलाइन के माध्यम से मतदान करने की अनुमति दी गई थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार फाइनल वोटर टर्नआउट 65% था।

रूसी समाचार एजेंसी टीएएसएस के अनुसार ये संशोधन मार्च में रूसी पार्लियामेंट द्वारा पारित किया गया और अधिकांश स्टेट पार्लियामेंट बाद में प्रभाव में आ जाएंगे क्योंकि यह लोक सम्मत समर्थन की न्यूनतम (50%) सीमा को पूरा करता है।

राष्ट्रपति पद के सीमित कार्यकाल में संशोधन के अलावा अन्य प्रमुख संशोधनों में स्टेट ड्यूमा को प्रधानमंत्री और कैबिनेट नियुक्त करने का अधिकार देना, रूसी संविधान को मज़बूत करना जिसका क़ानून अंतरराष्ट्रीय क़ानून पर तरजीह देंगे और संवैधानिक और सर्वोच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को हटाने में हस्तक्षेप करने के लिए फेडरेशन काउंसिल (संसद के ऊपरी सदन) को सशक्त बनाना शामिल है। इस बिल में स्टेट काउंसिल की स्थिति और भूमिका को समेकित करने, संवैधानिक न्यायालय को अधिक अधिकार देने और न्यूनतम वेतन और पेंशनरों के सूचीकरण के प्रावधान का भी प्रस्ताव है।

इन संशोधनों की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ रशियन फेडरेशन और अन्य वाम दलों ने अपनी मनमानी और सरकार द्वारा आम सहमति बनाने के प्रयासों में कमी के आधार पर आलोचना की है।

Russia
Russians support constitutional amendments
Russia News
International news
Moscow

Related Stories

डेनमार्क: प्रगतिशील ताकतों का आगामी यूरोपीय संघ के सैन्य गठबंधन से बाहर बने रहने पर जनमत संग्रह में ‘न’ के पक्ष में वोट का आह्वान

रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने के समझौते पर पहुंचा यूरोपीय संघ

यूक्रेन: यूरोप द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाना इसलिए आसान नहीं है! 

पश्चिम बैन हटाए तो रूस वैश्विक खाद्य संकट कम करने में मदद करेगा: पुतिन

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

दुनिया भर की: कोलंबिया में पहली बार वामपंथी राष्ट्रपति बनने की संभावना

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

खाड़ी में पुरानी रणनीतियों की ओर लौट रहा बाइडन प्रशासन


बाकी खबरें

  • Cartoon Click: Ah Democracy!, Wow Democracy!
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: आह लोकतंत्र!, वाह लोकतंत्र!
    27 Oct 2021
    हमारे गृह मंत्री से अच्छा लोकतंत्र का पाठ कौन पढ़ा सकता है। नहीं...नहीं...ये कोई व्यंग्य नहीं है, यक़ीन न हो तो लोकतंत्र को लेकर दिल्ली में आयोजित तीन दिन के राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री…
  • pegasus bench
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    पेगासस जासूसी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए बनाई विशेषज्ञ समिति
    27 Oct 2021
    पीठ ने कहा कि याचिकाओं में निजता के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के उल्लंघन जैसे आरोप लगाए गए हैं, जिनकी जांच करने की ज़रूरत है।
  • tripura
    सत्यम श्रीवास्तव
    बांग्लादेश सीख रहा है, हिंदुस्तान सीखे हुए को भूल रहा है
    27 Oct 2021
    बांग्लादेश ने अपने से कहीं पुराने और कहीं बड़े हिंदुस्तान को न केवल आर्थिक प्रगति और उससे जुड़े गरीबी, पोषण और शिक्षा के मामले में पछाड़ दिया है, बल्कि एक बेहतर भविष्य रचने की दिशा में भी हिंदुस्तान को…
  • DISCOMS
    बिजली संशोधन कानून 2021: बिजली को तारों से अलग करने की कसरत!
    27 Oct 2021
    दुर्भाग्य से, बिजली के मामले में बाजार की विफलता के सबूत अपने सामने होने के बावजूद, वर्तमान सरकार ऐसी नीतियों को ही आगे बढ़ाने में लगी हुई है, जो इस क्षेत्र को और भी ख़तरे में डालने जा रही हैं।
  • law
    दित्सा भट्टाचार्य
    जजों की भारी कमी के बीच भारतीय अदालतों में 4.5 करोड़ मामले लंबित, कैदियों से खचाखच भरी जेलें
    27 Oct 2021
    उच्च न्यायालयों में 2019-2020 के बीच लंबित मामलों में 20 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि इसी अवधि में, अधीनस्थ न्यायालयों में ​13 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।​
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License