NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
संसद मार्ग पर मज़दूरों का खुला अधिवेशन, जनवरी में हड़ताल की घोषणा
30 सितंबर को दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा मोदी सरकार  के "विनाशकारी" आर्थिक नीतियों के खिलाफ  सामूहिक सम्मेलन बुलाया गया था। यूनियन नेताओ ने कहा बीजेपी  नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने भारतीय जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों और रोजगार पर हमला  किया है।
मुकुंद झा
30 Sep 2019
8 जनवरी को मजदूरों की आम हड़ताल की घोषणा

सरकार पर श्रम कानूनों को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए , सेंट्रल ट्रेड यूनियनों ने 30 सितबंर 2019 को श्रमिकों का राष्ट्रीय खुला अधिवेशन किया।  जिसमें  देश भर के  हजारों  श्रमिकों ने भाग लिया ।मोदी सरकार  के "विनाशकारी" आर्थिक नीतियों के खिलाफ  सामूहिक सम्मेलन बुलाया गया था। यूनियन नेताओं ने कहा बीजेपी  नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने भारतीय जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों और रोजगार पर हमला  किया है।

71335675_10211755376998352_673238146577596416_n.jpg

देश के विभिन्न क्षेत्रों में श्रमिकों के लगातार चल रहे संघर्ष को और तेज करने के लिए, अगले साल 8 जनवरी को देशव्यापी आम हड़ताल का संयुक्त आह्वान किया गया है।मोदी सरकार ने इस महीने की शुरुआत में अपने दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिन पूरे किए । यह शायद इतिहास में पहली सरकार होगी जिसके 100 दिनों बाद ही मज़दूर वर्ग सड़क पर उसके खिलाफ उतर रहे हैं। श्रमिक वर्ग का कहना है कि  नौकरी जा रही है  और  सार्वजनिक उपक्रमों का  निजीकरण किया जा रहा है।

Capture_18.PNG

52 वर्षीय प्रेम पाल और 45 वर्षीय  राम सिंह टैंक, दोनों सुबह ही इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए पहुंचे। दोनों हरियाणा के फरीदाबाद में सफाई कर्मचारी हैं । 2001 के बाद से अनुबंध के आधार पर काम कर रहे प्रेम पाल ने कहा, "हमारी मांग है कि हमारे जीवन को प्रभावित करने वाले बड़े पैमाने पर अनुबंध को समाप्त किया जाए।  प्रेम पाल अनुबंध के आधार पर 18 हज़ार रूपये महीना कमाते हैं, जबकि वही काम कर रहें राम सिंह जो एक स्थायी कर्मचारी हैं, वो 40 हज़ार रूपये कमाते  है।

राम-सिंह ने कहा "हम दोनों शहर को साफ रखने के लिए एक ही तरह के काम करते हैं और सरकार से हम समान रूप से भुगतान करने की मांग करते हैं" .  
इसी तरह बिहार से आए शंकर साहा जो सफाई कर्मचारी यूनियन के नेता हैं ,वो अपने साथ एक बैनर लेकर आये थे, जिसमें उन्होंने बिहार में सफाई कर्मचारियों की समस्याओं और उनकी मांगों को लिखा था।

bhiar.PNG

उन्होंने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि बिहार में सफाई कर्मचारियों की  हालत इतनी बुरी है कि न तो उन्हें हाथो में पहने के लिए दस्ताने दिया जाते न ही मुँह पर लगाने के लिए मास्क। वेतन के नाम पर कई जगह महिलाओं को 1500 रूपये दिए जाते हैं तो पुरुष को 3 हज़ार ,जो कि  न्यूनतम वेतन से बहुत कम है।
 

इसके अलावा, ऑल इंडिया डिफेंस फेडरेशन वर्कर्स (एआईडीईएफ) के बैनर तले ऑर्डनेंस फैक्ट्री वर्कर्स ने देश भर से कार्यकर्ताओं की बैठक में भाग लिया, मोदी सरकार से 41 आयुध कारखानों को कॉर्पोरेट करने का प्रस्ताव वापस लेने की मांग की ।

 इस सम्मेलन में असंगठित श्रमिकों  ने भी बढ़चढ़कर भाग लिया,  वो भी देश में चल रहे आर्थिक मंदी का खामियाजा भुगत रहे हैं।

Capture 1_0.PNG

सफल स्टोर एनसीआर में किराने का सामान का सबसे बड़ा खुदरा नेटवर्क है।  यहां काम करने वाले 45 वर्षीय रमेश भी ठेका प्रथा से पीड़ित हैं। उन्होंने भी  सम्मेलन में भाग लिया और अपने काम के लिए न्यूनतम मजदूरी की मांग की। इसके अलावा उन लोगो की कोई साप्ताहिक छुट्टी नहीं है, और प्रत्येक दिन की ड्यूटी 12-13 घंटे तक ली जाती है, फिर भी उन्हें 10 हज़ार मिलता है। बिल्कुल इस तरह की समस्या लिए पूर्वी दिल्ली से केंद्रीय भंडारण निगम के कर्मचारी भी इस सम्मलेन में शामिल हुए।
 
इस सम्मेलन में हरियाणा और  पंजाब के आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और  मनरेगा कार्यकर्ता भी उपस्थित थे, जो दोनों सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में विफलताओं  से नाराज़ थे ।आंगनवाड़ी कार्यकर्ता  की तो काफी लंबे समस्य से मांग है उन्हें कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। क्योंकि वो सरकारी नीतियों को धरातल पर ले जाती है ,लेकिन सरकार उन्हें कर्मचारी भी नहीं मानती है। उन्हें वेतन नहीं मिलता बल्कि उन्हें मानदेय दे दिया जाता है।

Capture 3_0.PNG

जब उनसे पूछा  कि वह हरियाणा में आगामी विधानसभा चुनावों में किसे वोट देंगी , तो उन्होंने जवाब दिया, "पहले हमें अपने बच्चों को खिलाने में सक्षम होना चाहिए, अभी तो यही हमारा  संघर्ष है  और इसीसे  हम  गुजर रहे हैं।"

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को छोड़कर, भारतीय मजदूर संघ (BMS) से संबद्ध, मज़दूरों के अधिवेशन में सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के नेता, भारतीय व्यापार संघ का केंद्र, अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के अखिल भारतीय केंद्रीय कर्मचारी संघ के नेता शामिल हुए थे। भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस, हिंद मजदूर सभा, अखिल भारतीय यूनाइटेड ट्रेड यूनियन केंद्र, ट्रेड यूनियन समन्वय केंद्र,  श्रम प्रगतिशील मोर्चा और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस सहित सभी केंद्रीय यूनियन  और फेडरेशन शामिल हुईं।

इसके अलावा बैंक, बीमा, रेलवे, बिजली, सड़क परिवहन सहित विभिन्न क्षेत्रों के स्वतंत्र श्रमिकों के यूनियन के नेताओं और कर्मचारियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

Capture 5.PNG
12-सूत्री मांग पत्र को मनवाने के लिए , केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 8 जनवरी  को  हड़ताल के साथ ही  अगले तीन महीनों के लिए  कार्यक्रम की भी घोषण की।

सभा को संबोधित करते हुए सीटू के महासचिव तपन सेन ने सेक्टर भर में काम करने वाले लोगों से हड़ताल की कार्रवाई का समर्थन करने का आह्वान करते हुए कहा कि, “यह राष्ट्र मज़दूर और श्रमिक  वर्ग का है और मजदूर मोदी सरकार को इसे बेचने नहीं देंगे। और उन्होंने लगातार सरकार द्वारा  श्रम  कानूनों को कमजोर करने पर कहा कि मज़दूर उसका प्रतिकार करेंगे। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी की   "....... तू कोशिश करके देख हम होने नहीं देंगे" ।

TU Strike Call Jan 8 Workers’ Strike
TU Convention
labour rights
Modi government
PSU Privatisation.
Factories Act
minimum wages

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

ट्रेड यूनियनों की 28-29 मार्च को देशव्यापी हड़ताल, पंजाब, यूपी, बिहार-झारखंड में प्रचार-प्रसार 

आंगनवाड़ी की महिलाएं बार-बार सड़कों पर उतरने को क्यों हैं मजबूर?

केंद्र सरकार को अपना वायदा याद दिलाने के लिए देशभर में सड़कों पर उतरे किसान

देश बड़े छात्र-युवा उभार और राष्ट्रीय आंदोलन की ओर बढ़ रहा है

रेलवे भर्ती मामला: बर्बर पुलिसया हमलों के ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलनकारी छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने कोचिंग संचालकों पर कसा शिकंजा

रेलवे भर्ती मामला: बिहार से लेकर यूपी तक छात्र युवाओं का गुस्सा फूटा, पुलिस ने दिखाई बर्बरता

किसानों को आंदोलन और राजनीति दोनों को साधना होगा


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    आंगनवाड़ी की महिलाएं बार-बार सड़कों पर उतरने को क्यों हैं मजबूर?
    23 Feb 2022
    प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का कहना है कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारों द्वारा घोषणाओं और आश्वासनों के बावजूद उन्हें अभी तक उनका सही बकाया नहीं मिला है। एक ओर दिल्ली सरकार ने उनका मानदेय घटा दिया है तो…
  • nawab malik
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हम लड़ेंगे और जीतेंगे, हम झुकेंगे नहीं: नवाब मलिक ने ईडी द्वारा गिरफ़्तारी पर कहा
    23 Feb 2022
    लगभग आठ घंटे की पूछताछ के बाद दक्षिण मुंबई स्थित ईडी कार्यालय से बाहर निकले मलिक ने मीडिया से कहा, '' हम लड़ेंगे और जीतेंगे। हम झुकेंगे नहीं।'' इसके बाद ईडी अधिकारी मलिक को एक वाहन में बैठाकर मेडिकल…
  • SKM
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बंगाल: बीरभूम के किसानों की ज़मीन हड़पने के ख़िलाफ़ साथ आया SKM, कहा- आजीविका छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए
    23 Feb 2022
    एसकेएम ने पश्चिम बंगाल से आ रही रिपोर्टों को गम्भीरता से नोट किया है कि बीरभूम जिले के देवचा-पंचमी-हरिनसिंह-दीवानगंज क्षेत्र के किसानों को राज्य सरकार द्वारा घोषित "मुआवजे पैकेज" को ही स्वीकार करने…
  • राजस्थान विधानसभा
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान में अगले साल सरकारी विभागों में एक लाख पदों पर भर्तियां और पुरानी पेंशन लागू करने की घोषणा
    23 Feb 2022
    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को वित्तवर्ष 2022-23 का बजट पेश करते हुए 1 जनवरी 2004 और उसके बाद नियुक्त हुए समस्त कर्मचारियों के लिए आगामी वर्ष से पूर्व पेंशन योजना लागू करने की घोषणा की है। इसी…
  • चित्र साभार: द ट्रिब्यून इंडिया
    भाषा
    रामदेव विरोधी लिंक हटाने के आदेश के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया की याचिका पर सुनवाई से न्यायाधीश ने खुद को अलग किया
    23 Feb 2022
    फेसबुक, ट्विटर और गूगल ने एकल न्यायाधीश वाली पीठ के 23 अक्टूबर 2019 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें और गूगल की अनुषंगी कंपनी यूट्यूब को रामदेव के खिलाफ मानहानिकारक आरोपों वाले वीडियो के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License