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संसद मार्ग पर मज़दूरों का खुला अधिवेशन, जनवरी में हड़ताल की घोषणा
30 सितंबर को दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा मोदी सरकार  के "विनाशकारी" आर्थिक नीतियों के खिलाफ  सामूहिक सम्मेलन बुलाया गया था। यूनियन नेताओ ने कहा बीजेपी  नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने भारतीय जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों और रोजगार पर हमला  किया है।
मुकुंद झा
30 Sep 2019
8 जनवरी को मजदूरों की आम हड़ताल की घोषणा

सरकार पर श्रम कानूनों को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए , सेंट्रल ट्रेड यूनियनों ने 30 सितबंर 2019 को श्रमिकों का राष्ट्रीय खुला अधिवेशन किया।  जिसमें  देश भर के  हजारों  श्रमिकों ने भाग लिया ।मोदी सरकार  के "विनाशकारी" आर्थिक नीतियों के खिलाफ  सामूहिक सम्मेलन बुलाया गया था। यूनियन नेताओं ने कहा बीजेपी  नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने भारतीय जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों और रोजगार पर हमला  किया है।

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देश के विभिन्न क्षेत्रों में श्रमिकों के लगातार चल रहे संघर्ष को और तेज करने के लिए, अगले साल 8 जनवरी को देशव्यापी आम हड़ताल का संयुक्त आह्वान किया गया है।मोदी सरकार ने इस महीने की शुरुआत में अपने दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिन पूरे किए । यह शायद इतिहास में पहली सरकार होगी जिसके 100 दिनों बाद ही मज़दूर वर्ग सड़क पर उसके खिलाफ उतर रहे हैं। श्रमिक वर्ग का कहना है कि  नौकरी जा रही है  और  सार्वजनिक उपक्रमों का  निजीकरण किया जा रहा है।

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52 वर्षीय प्रेम पाल और 45 वर्षीय  राम सिंह टैंक, दोनों सुबह ही इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए पहुंचे। दोनों हरियाणा के फरीदाबाद में सफाई कर्मचारी हैं । 2001 के बाद से अनुबंध के आधार पर काम कर रहे प्रेम पाल ने कहा, "हमारी मांग है कि हमारे जीवन को प्रभावित करने वाले बड़े पैमाने पर अनुबंध को समाप्त किया जाए।  प्रेम पाल अनुबंध के आधार पर 18 हज़ार रूपये महीना कमाते हैं, जबकि वही काम कर रहें राम सिंह जो एक स्थायी कर्मचारी हैं, वो 40 हज़ार रूपये कमाते  है।

राम-सिंह ने कहा "हम दोनों शहर को साफ रखने के लिए एक ही तरह के काम करते हैं और सरकार से हम समान रूप से भुगतान करने की मांग करते हैं" .  
इसी तरह बिहार से आए शंकर साहा जो सफाई कर्मचारी यूनियन के नेता हैं ,वो अपने साथ एक बैनर लेकर आये थे, जिसमें उन्होंने बिहार में सफाई कर्मचारियों की समस्याओं और उनकी मांगों को लिखा था।

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उन्होंने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि बिहार में सफाई कर्मचारियों की  हालत इतनी बुरी है कि न तो उन्हें हाथो में पहने के लिए दस्ताने दिया जाते न ही मुँह पर लगाने के लिए मास्क। वेतन के नाम पर कई जगह महिलाओं को 1500 रूपये दिए जाते हैं तो पुरुष को 3 हज़ार ,जो कि  न्यूनतम वेतन से बहुत कम है।
 

इसके अलावा, ऑल इंडिया डिफेंस फेडरेशन वर्कर्स (एआईडीईएफ) के बैनर तले ऑर्डनेंस फैक्ट्री वर्कर्स ने देश भर से कार्यकर्ताओं की बैठक में भाग लिया, मोदी सरकार से 41 आयुध कारखानों को कॉर्पोरेट करने का प्रस्ताव वापस लेने की मांग की ।

 इस सम्मेलन में असंगठित श्रमिकों  ने भी बढ़चढ़कर भाग लिया,  वो भी देश में चल रहे आर्थिक मंदी का खामियाजा भुगत रहे हैं।

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सफल स्टोर एनसीआर में किराने का सामान का सबसे बड़ा खुदरा नेटवर्क है।  यहां काम करने वाले 45 वर्षीय रमेश भी ठेका प्रथा से पीड़ित हैं। उन्होंने भी  सम्मेलन में भाग लिया और अपने काम के लिए न्यूनतम मजदूरी की मांग की। इसके अलावा उन लोगो की कोई साप्ताहिक छुट्टी नहीं है, और प्रत्येक दिन की ड्यूटी 12-13 घंटे तक ली जाती है, फिर भी उन्हें 10 हज़ार मिलता है। बिल्कुल इस तरह की समस्या लिए पूर्वी दिल्ली से केंद्रीय भंडारण निगम के कर्मचारी भी इस सम्मलेन में शामिल हुए।
 
इस सम्मेलन में हरियाणा और  पंजाब के आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और  मनरेगा कार्यकर्ता भी उपस्थित थे, जो दोनों सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में विफलताओं  से नाराज़ थे ।आंगनवाड़ी कार्यकर्ता  की तो काफी लंबे समस्य से मांग है उन्हें कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। क्योंकि वो सरकारी नीतियों को धरातल पर ले जाती है ,लेकिन सरकार उन्हें कर्मचारी भी नहीं मानती है। उन्हें वेतन नहीं मिलता बल्कि उन्हें मानदेय दे दिया जाता है।

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जब उनसे पूछा  कि वह हरियाणा में आगामी विधानसभा चुनावों में किसे वोट देंगी , तो उन्होंने जवाब दिया, "पहले हमें अपने बच्चों को खिलाने में सक्षम होना चाहिए, अभी तो यही हमारा  संघर्ष है  और इसीसे  हम  गुजर रहे हैं।"

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को छोड़कर, भारतीय मजदूर संघ (BMS) से संबद्ध, मज़दूरों के अधिवेशन में सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के नेता, भारतीय व्यापार संघ का केंद्र, अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के अखिल भारतीय केंद्रीय कर्मचारी संघ के नेता शामिल हुए थे। भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस, हिंद मजदूर सभा, अखिल भारतीय यूनाइटेड ट्रेड यूनियन केंद्र, ट्रेड यूनियन समन्वय केंद्र,  श्रम प्रगतिशील मोर्चा और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस सहित सभी केंद्रीय यूनियन  और फेडरेशन शामिल हुईं।

इसके अलावा बैंक, बीमा, रेलवे, बिजली, सड़क परिवहन सहित विभिन्न क्षेत्रों के स्वतंत्र श्रमिकों के यूनियन के नेताओं और कर्मचारियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

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12-सूत्री मांग पत्र को मनवाने के लिए , केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 8 जनवरी  को  हड़ताल के साथ ही  अगले तीन महीनों के लिए  कार्यक्रम की भी घोषण की।

सभा को संबोधित करते हुए सीटू के महासचिव तपन सेन ने सेक्टर भर में काम करने वाले लोगों से हड़ताल की कार्रवाई का समर्थन करने का आह्वान करते हुए कहा कि, “यह राष्ट्र मज़दूर और श्रमिक  वर्ग का है और मजदूर मोदी सरकार को इसे बेचने नहीं देंगे। और उन्होंने लगातार सरकार द्वारा  श्रम  कानूनों को कमजोर करने पर कहा कि मज़दूर उसका प्रतिकार करेंगे। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी की   "....... तू कोशिश करके देख हम होने नहीं देंगे" ।

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