NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
8 जनवरी आम हड़ताल : मज़दूर, किसान और छात्रों का अपनी मांगों के साथ संविधान बचाने के लिए संघर्ष
ये हड़ताल पब्लिक सेक्टर की कंपनियों को प्राइवेट हाथों में बेचने, एफडीआई, श्रमिक विरोधी कोड की शुरूआत और बढ़ी बेरोज़गारी के विरोध और मज़दूरी में बढ़ोतरी की मांग के साथ साथ सीएए-एनपीआर-एनआरसी के ख़िलाफ़ किया जा रहा है।
मुकुंद झा
29 Dec 2019
protest
फाइल फोटो

एक तरफ जहां देश भर में मोदी सरकार द्वारा विवादित नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू करने और प्रस्तावित एनपीआर-एनआरसी को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है वहीं दूसरी तरफ किसानों और कृषि श्रमिकों के साथ लाखों औद्योगिक कर्मचारी और अन्य कर्मचारियों की नए साल में आम हड़ताल की योजना है। ये हड़ताल 8 जनवरी 2020 को की जाएगी।

मज़़दूर, किसानों के साथ ही छात्रों ने भी इस दिन भारत बंद का ऐलान किया है। पहले मज़दूरों ने सरकार द्वारा लागू की जा रही मज़़दूर-विरोधी आर्थिक नीतियों के विरोध में हड़ताल का आवाह्न किया था लेकिन अब इसमें संविधान पर हमले और नागरिकता संबंधी क़ानूनों के माध्यम से विभाजनकारी, सांप्रदायिक एजेंडे को आगे बढ़ाने पर रोक को भी शामिल कर लिया गया है।

ये हड़ताल सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के निजीकरण, विदेशी पूंजी के आमंत्रण, श्रमिक विरोधी कोड की शुरूआत, मज़दूरी में वृद्धि और बढ़ी बेरोज़गारी को लेकर किया जा रहा है। सरकार की ये नीति अर्थव्यवस्था और भविष्य को नष्ट कर रही है। इसके साथ ही यह किसानों के बढ़ते क़र्ज़ और सरकार द्वारा उनकी उपज के उचित क़ीमत सुनिश्चित करने और किसानों के निरंतर आंदोलन को एकत्रित करने को लेकर किया जा रहा है। हाल के दिनों किसानों के बीच बड़े पैमाने पर आर्थिक संकट का समाना करना पड़ा है।

मज़़दूर संगठन सीटू सहित तमाम संगठनों ने देशभर में जारी सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया है। सीटू ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सीएए और 8 जनवरी को होने वाली आम हड़ताल को एक साथ लड़ने की अपील की हैं। सीटू की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है की मज़़दूर और आम जनता की एकजूता से 8 जनवरी 2020 को सरकार के नापाक खेल को समाप्त करने के लिए हमे तैयार रहने की ज़रुरत है। यह संघर्ष श्रमिकों और लोगों के अधिकारों और आजीविका बचाने; देश का संविधान; अर्थव्यवस्था और देश की आत्मा को बचाने का संघर्ष हैं।

इसके अलावा वाम दलों ने भी सीएए के ख़िलाफ़ अपने संघर्ष को और तेज़़ करने का फैसला किया हैं। इसके लिए 1 जनवरी से लगातार 7 जनवरी तक पूरे देश में अंदोलन करने का फैसला किया है। इसके साथ ही इन्होंने 8 जनवरी को मज़दूरों, किसानों और छात्रों के देशव्यापी आम हड़ताल को समर्थन दिया हैं।

इस हड़ताल का आह्वान सितंबर 2019 में लगभग सभी स्वतंत्र राष्ट्रीय यूनियनों के साथ-साथ 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा आयोजित नेशनल मास कन्वेंशन ऑफ वर्कर्स में किया गया था। नवंबर 2019 में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के राष्ट्रीय सम्मेलन द्वारा इस आह्वान को समर्थन दिया गया। ज्ञात हो कि एआईकेएससीसी 100 से अधिक किसान संगठनों का एक मंच है। इसके बाद 70 से अधिक छात्र संगठन भी एक साथ आए और इस हड़ताल का समर्थन किया।

मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के पहले कार्यकाल में तीन बड़ी अखिल भारतीय हड़ताल हुई जो 2 सितंबर 2015, 2 सितम्बर 2016 और 8-9 जनवरी 2019 का दो दिवसीय हड़ताल था।

इस साल मई में मोदी सरकार फिर से सत्ता में आई। इस सरकार ने दो मोर्चे पर बड़ी तेज़ी से हमले किये। एक तो नवउदारवादी सुधार जिसमें मज़दूरों के हित बनें श्रम क़ानूनों को ख़त्म करना और दूसरा हिंदुत्व-उन्मुख परिवर्तन जिसमें में देश को संप्रदायिक आधार पर विभाजन शामिल है। इसका ताज़़ा उदहारण सीएए और एनआरसी हैं। आर्थिक मोर्चे पर इसने सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को बेचने की योजना के साथ भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) जैसे लाभ कमाने वाले उद्यमों को भी बेचने की योजना बना रही है। इसने रक्षा उत्पादन क्षेत्र, रेलवे, बैंकों आदि के विनिवेश की भी शुरुआत की है।

इस बीच, इसने मौजूदा श्रम कानूनों में कई बदलावों की प्रक्रिया शुरु कर दी है जो श्रमिकों के शोषण को बढ़ाएगा, उनकी मज़दूरी को कम करेगा और ट्रेड यूनियनों के गठन के उनके अधिकारों का हनन करेगा। यह बड़े औद्योगिक घरानों और विदेशी कंपनियों को देश में सस्ते और उचित श्रम का आश्वासन देकर उन्हें खुश करने के लिए किया जा रहा है।

परिणामस्वरूप, देश भर के अलग अलग क्षेत्र के मज़़दूर सड़को पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे है। रेलवे कर्मी, आयुध कारखानों, कोयला क्षेत्र, बैंक कर्मचारी, बीपीसीएल और एचपीसीएल इनके अलावा कई अन्य स्थानीय, क्षेत्रीय या उद्योग-स्तरीय संघर्ष हुए हैं जिनमें हज़ारों श्रमिक शामिल हुए हैं। हाल ही में निर्माण श्रमिकों ने श्रम कानूनों में बदलाव के ख़िलाफ़ संसद में एक अभूतपूर्व मार्च किया जो उन्हें प्रदान किए गए संरक्षण को समाप्त करता है। पत्रकारों ने भी उन क़ानूनों में इस तरह के बदलाव का विरोध किया जो उन्हें नियंत्रित करते थे। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और अन्य योजना कार्यकर्ताओं ने कई राज्यों में बड़े विरोध प्रदर्शन किए हैं।

गौरतलब है कि ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मंच उन मुद्दों पर भी एक अग्रणी और प्रभावशाली आवाज़ बन गया है जो देश के लोगों को प्रभावित करते हैं जो न केवल श्रमिकों और कर्मचारियों से संबंधित है। उदाहरण के लिए मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई सीएए-एनपीआर-एनआरसी की साजिश के ख़िलाफ़ संयुक्त मंच सक्रिय रूप से विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहा है। इसके आह्वान पर देश भर में प्रदर्शन किए गए हैं।

इस बीच, दूसरी बड़ी ताकत किसान जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में किसानों की लगातार बदतर होती हालत, किसानों की जमीनों को हड़पने की निति, एमएनसी को देश में कृषि-उपज को डंप करने की अनुमति, इसके अलावा बीमा कंपनियों की लूट और अन्य ऐसे शोषणकारी निर्णयों के ख़िलाफ़ संघर्ष किया है। उन्होंने भी मज़दूरों के साथ अपने संघर्षों को बढ़ाया है।

एआईकेएससीसी ने देश के लगभग सभी ज़़िलों में सड़क ब्लॉक करने, विरोध प्रदर्शन करने और कामबंदी के साथ ग्रामीण बंद के तौर पर 8 जनवरी को बंद करने का फैसला किया है। उनकी प्रमुख मांगों में न्यूनतम समर्थन मूल्य शामिल हैं जो उत्पादन की कुल लागत की तुलना में 50% अधिक है। सभी किसान ऋणों की पुरी तरह छूट, फसल क्षति से प्रभावी संरक्षण, आपदा मुआवजा, वन अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन और अन्य मांग शामिल हैं।

इसके अलावा छात्रों ने भी लगातार शिक्षा और शिक्षण संस्थानों पर हो रहे हमले चाहे वो फीस वृद्धि का मामला हो या फंड की कटौती और सीट की कमी से जुड़ा हो इन सभी को लेकर उन्होंने भी 8 जनवरी को देशभर में हड़ताल का आवाह्न किया है।

मज़दूर संगठनों ने साफ तौर पर कहा है कि मोदी सरकार की डूबती अर्थव्यवस्था से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिशें और नागरिकता सत्यापन करने के लिए सांप्रदायिक आधार रखा है जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय के ख़िलाफ़ भेदभाव करना हैं। इस तरह की नीतियां केवल मज़़दूरों के संघर्षो को दबाने के लिए है।

save constitution
Save Democracy
workers protest
peasant protest
Student Protests
All India General Strike
privatization
CAA
NRC
unemployment
Narendra modi
modi sarkar
BJP
CITU

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश


बाकी खबरें

  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ख़बर भी-नज़र भी: …लीजिए छापेमारी के साथ यूपी चुनाव बाक़ायदा शुरू!
    18 Dec 2021
    आयकर विभाग की टीम ने आज सपा नेताओं के घर और कैंप कार्यालयों पर छापेमारी की है। इसपर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि “भाजपा का हार का डर जितना बढ़ता जायेगा, विपक्षियों पर छापों का दौर भी उतना…
  • sudan
    पवन कुलकर्णी
    सूडान के दारफुर क्षेत्र में हिंसा के चलते 83,000 से अधिक विस्थापित: ओसीएचए 
    18 Dec 2021
    सूडान की राजधानी खार्तूम, खार्तूम नार्थ, ओम्डुरमैन सहित देशभर के कई राज्यों के कई अन्य शहरों में गुरूवार 16 दिसंबर को विरोध प्रदर्शनों के दौरान “दारफुर का खून बहाना बंद करो” और “सभी शहर दारफुर हैं”…
  • air india
    भाषा
    पायलटों की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय खारिज किये जाने के खिलाफ एअर इंडिया की अर्जी अदालत ने ठुकराई
    18 Dec 2021
    अदालत ने कहा, ‘‘सरकार और उसकी इकाई एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कार्य करने के लिए बाध्य हैं और इसलिए, उसे पायलटों को ऐसे समय संगठन (एअर इंडिया) की सेवा करने के अधिकार से वंचित करते नहीं देखा जा सकता…
  • Goa Legislative Assembly
    राज कुमार
    गोवा चुनाव 2022: राजनीतिक हलचल पर एक नज़र
    18 Dec 2021
    स्मरण रहे कि भाजपा ने जिन दो पार्टियों के बल पर सरकार बनाई थी वो दोनों ही पार्टियां भाजपा का साथ छोड़ चुकी है। गोवा फॉरवर्ड पार्टी कांग्रेस का समर्थन कर रही है तो महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी तृणमूल…
  • Nuh
    सबरंग इंडिया
    नूंह के रोहिंग्या कैंप में लगी भीषण आग का क्या कारण है?
    18 Dec 2021
    हरियाणा के नूंह में लगी आग में रोहिंग्याओं की 32 झुग्गियां जलकर खाक हो गईं। उत्तर भारत के रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में इस साल इस तरह की यह तीसरी आग है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License