NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
8 जनवरी हड़ताल : दिल्ली एनसीआर में व्यापक असर
आज की इस हड़ताल में सरकार से श्रमिक विरोधी, जनविरोधी, राष्ट्र विरोधी नीतियों को वापस लेने की मांग की गई। मज़दूरों ने नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध में भी अपना समर्थन दिया।
मुकुंद झा
08 Jan 2020
delhi strike

आज 8 जनवरी को अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनों, स्वंतत्र फ़ेडरेशनों एवं कर्मचारी संगठनों के केंद्रीय आह्वान पर दिल्ली-एनसीआर में बैंकों की विभिन्न शाखाओं, नगर निगम और साथ ही औद्योगिक मज़दूर, घरेलू कामगार महिलाएँ और विश्विद्यालय के छात्र और शिक्षक सभी कर्मचारी अपनी मांगों के साथ हड़ताल पर रहे। 

सुबह से ही मज़दूर नेताओं और यूनियनों ने औद्योगिक क्षेत्र में जाकर मज़दूरों से काम का बहिष्कार करने की अपील की और उसके बाद मज़दूरों ने एकत्रित होकर औद्योगिक क्षेत्रों में रैली भी की। इस सब में सबसे बड़ी बात यह थी कि सुबह मौसम के ख़राब होने के बाद भी मज़दूरों और अन्य आंदोलनकारियों के उत्साह में कोई कमी नहीं थी। भारी बरसात में भी पटपड़गंज और झिलमिल, ओखला साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र में देशव्यापी हड़ताल को लेकर जुलूस निकालते हुए श्रमिकों को 21 हज़ार रुपये न्यूनतम वेतन, ठेका प्रथा बंद करने समेत 16 सूत्रीय मांगों को लेकर मज़दूरों ने हड़ताल की।

यह हड़ताल केंद्र सरकार की मज़दूर विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ की गई, जिसमें नौकरियों की सुरक्षा, रोज़गार सृजन और श्रम क़ानूनों में संशोधन बंद करने से संबंधित मांगें रखी गई थीं।

मज़दूर नेताओं ने आज की ये हड़ताल सरकार द्वारा बैंक, रेलवे, बीमा, संचार, बिजली पेट्रोलियम सहित सभी सार्वजनिक उपक्रमों को निजी हाथों में बेचने के खिलाफ़ बताया। मज़दूर संगठन के नेताओं ने कहा, "आज पूरे देश के पैमाने पर 20 करोड़ से ऊपर कर्मचारी हड़ताल पर हैं। आज देश का मज़दूर ये हड़ताल करने को मजबूर हुआ है क्योंकि लगातार कई चक्र की वार्ताओं के बाद भी इस सरकार ने अपना अड़ियल रुख नहीं बदला है। सरकार लगातार मज़दूर विरोधी क़दम उठा रही है। मज़दूरों की 21000 रुपये की न्यूनतम वेतन की मांग पूरी नहीं हुई है। श्रम क़ानूनों का लगातार उल्लंघन किया जा रहा है।"

इस हड़ताल में शामिल बैंक के कर्मचारियों ने कहा कि वर्किंग कंडीशन काफ़ी जटिल बना दी गयी है। बैंकों का मर्जर करके कर्मचारियों को कम किया जा रहा है।

साहिबाबाद के औद्योगिक क्षेत्र में हमने कई कंपनियों के मज़दूरों से बात की सभी ने एक बात कही कि मज़दूरों का न्यूनतम वेतन बहुत कम है। कुछ ही दूर दिल्ली में जहाँ मज़दूरों को 14 हज़ार न्यूनतम वेतन मिलता है वहीं साहिबाबाद में मज़दूर 7 हज़ार में काम करने को मजबूर हैं।

साहिबाबाद में स्थित सेंट्रल इलक्ट्रोनिक जो एक पब्लिक अंडर टेकिंग कंपनी है। जो देश के लिए रक्षा उत्पाद बनाती है। सीईएल मज़दूरों ने आज 100% हड़ताल का दावा किया। सेंट्रल इलक्ट्रोनिक की मज़दूर यूनियन ने कहा, "सरकार इस सरकारी कंपनी को कौड़ियों के दाम पर बेचना चाहती है जबकि पिछले कई सालों से यह कंपनी मुनाफ़े में है। सरकार पता नहीं क्यों 350 करोड़ की संपत्ति वाले उद्योग को मात्र 50 करोड़ में बेचने को तैयार हैं। क्यों? इसका जवाब उनके पास नहीं है।"

साहिबाबाद के एक अन्य उद्योग अनुपम प्रोडक्ट्स के कर्मचारी भारी बारिश में भी कंपनी गेट के बाहर एक प्लास्टिक के नीचे खड़े रहे। इस फ़ैक्टरी ने कुछ दिनों पहले ही मज़दूर यूनियन को टारगेट करते हुए कई मज़दूर नेताओं को बर्ख़ास्त कर दिया था। ये मज़दूर उनकी बहाली के लिए भी संघर्ष कर रहे थे।

IMG-20200108-WA0030.jpg

इसके आलावा दिल्ली एनसीआर के तमाम औद्योगिक क्षेत्र चाहे वो ओखला हो या फिर वज़ीरपुर, या फिर पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र सभी में हड़ताल का असर देखने को मिला।

IMG-20200108-WA0029.jpg

इसके साथ ही गुरुग्राम मानेसर बावल इंडस्ट्रियल बेल्ट में देशव्यपी हड़ताल के समर्थन में सैंकड़ो कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। इससे कई ऑटोमोबाइल कारखानों में उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अधिकतर प्रमुख कारख़ाने पूर्ण रूप से बंद रहे।

IMG-20200108-WA0028_1.jpg

इसके अलावा दिल्ली में छात्रों ने भी अपने अपने कैंपसों में प्रदर्शन किया है। जामिया तो पिछले कई दिनों से सड़कों पर है लेकिन उसने आज अपने मंच से मज़दूरों की हड़ताल का समर्थन किया। इसके साथ ही डीयू में भी बड़ी संख्या में छात्र निकले और ख़ुद को मज़दूरों के आंदोलन के साथ जोड़ा।

IMG-20200108-WA0027.jpg

दिल्ली में आईटीओ के शहीदी पार्क में मज़दूरों ने एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन किया। इसमें सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के शीर्ष नेता मौजूद थे।

आज की इस हड़ताल में सरकार से श्रमिक विरोधी, जनविरोधी, राष्ट्र विरोधी नीतियों को वापस लेने की मांग की गई। मज़दूर-कर्मचारियों के अधिकार सुनिश्चित करने और उनके मांगें पूरी करने के अलावा आज की हड़ताल में मज़दूरों ने सीएए के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध में भी अपना समर्थन दिया। और हाल ही में जेएनयू में हुई हिंसा पर भी सरकार से गंभीर सवाल किए।

All India General Strike
Delhi-NCR
All India Trade Unions
CITU
workers protest
DU Students Protest
BJP
Narendra modi

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    त्रिपुरा: बिप्लब देब के इस्तीफे से बीजेपी को फ़ायदा या नुक़सान?
    16 May 2022
    बिप्लब देब के प्रदर्शन से केंद्रीय नेतृत्व नाख़ुश था लेकिन नए सीएम के तौर पर डॉ. माणिक साहा के नाम के ऐलान से बीजेपी के पुराने नेता नाराज़ बताए जाते हैं।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ज्ञानवापी अपडेटः मस्जिद परिसर में शिवलिंग मिलने का दावा, मुस्लिम पक्ष ने कहा- फव्वारे का पत्थर
    16 May 2022
    सर्वे टीम में शामिल हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन की ओर से दाखिल प्रार्थना-पत्र पर सीनियर सिविल जज ने वजुखाने की जगह को तत्काल सील करने का आदेश दिया है।
  • जेरेमी कोर्बिन
    केवल विरोध करना ही काफ़ी नहीं, हमें निर्माण भी करना होगा: कोर्बिन
    16 May 2022
    वैश्विक व्यवस्था संकट में नहीं है, जिसका कि कोई हल निकाला जा सकता है। दरअसल,यह सिस्टम ही संकट है और इसको दूर करना, उसको बदलना और उसे परिवर्तित करना होगा।
  • सोनाली कोल्हटकर
    जलवायु परिवर्तन : हम मुनाफ़े के लिए ज़िंदगी कुर्बान कर रहे हैं
    16 May 2022
    मौसम परिवर्तन एक जानलेवा ग़लत गणना का परिणाम है: वैश्विक कॉरपोरेट कंपनियों के मुनाफ़े के लिए ज़िन्दगियों को जोख़िम में डाला जा सकता है, यहां तक कि उन्हें गंवाया भी जा सकता है।
  • अजय सिंह
    मंगलेश को याद करते हुए
    16 May 2022
    मैं उसे किस रूप में याद करूं? ...मैं उसके उन इंसानी/वैचारिक पहलुओं के बारे में बात करना चाहूंगा, जो मुझे आज भी आकर्षित करते हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License