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भारत
राजनीति
9 भारतीय अमीरों की संपत्ति 50 फीसद गरीबों की संपत्ति के बराबर
ऑक्सफैम की रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि शीर्ष 1 प्रतिशत भारतीय अमीरों की संपत्ति में 39 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
दित्सा भट्टाचार्य
22 Jan 2019
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy: Business Today

ऑक्सफैम की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि साल 2018 में भारतीय अरबपतियों की संपत्ति में हर दिन 22 बिलियन (2200 करोड़) रुपये का इज़ाफा हुआ है। इसमें यह भी सामने आया है कि देश के शीर्ष 1 प्रतिशत धनी व्यक्तियों की संपत्ति में 39 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। वहीं आबादी के निचले आधे हिस्से पर मौजूद लोगों की संपत्ति में मामूली वृद्धि हुई है।

ये रिपोर्ट विभिन्न श्रोतों द्वारा इकट्ठा किए गए आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है। इन श्रोतों में यूनेस्को इंस्टीट्यूट फॉर स्टेटिस्टिक्स, क्रेडिट सुइस, अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष, फोर्ब्स और खुद ऑक्सफैम शामिल है जिसने 21 जनवरी को स्विट्जरलैंड के दावोस में लॉन्च किया। दावोस में पूरे विश्व से राजनीतिक और व्यापारिक प्रतिनिधि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के लिए जुट रहे हैं।

ऑक्सफैम इंटरनेशनल के कार्यकारी निदेशक विनी बयानीमा ने लॉन्च के दौरान कहा "आपके बैंक खाते के आकार को यह तय नहीं करना चाहिए कि आपके बच्चे स्कूल में कितने साल बिताते हैं या आप कितने साल ज़िंदा रहते हैं। हालांकि दुनिया भर के कई देशों में यह वास्तविकता है। जबकि कॉर्पोरेशन और सबसे धनी लोग कम टैक्स का भुगतान करते हैं और लाखों लड़कियों को एक बेहतर शिक्षा से वंचित किया जाता है और महिलाएं प्रसव के दौरान इलाज की कमी के कारण मर रही हैं।"

'पब्लिक गुड ऑर प्राइवेट वेल्थ?’ शीर्षक वाले इस रिपोर्ट में लिखा है “हमें सार्वभौमिक स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सार्वजनिक सेवाओं को मुहैया कराने के लिए अपनी अर्थव्यवस्थाओं को बदलने की आवश्यकता है। इसे संभव बनाने के लिए सबसे अमीर लोगों और कॉर्पोरेशनों को कर का उचित हिस्सा देना चाहिए। यह अमीर और ग़रीब तथा महिलाओं और पुरुषों के बीच की खाई को कम करेगा।"

अमीर और अमीर हो गए तथा ग़रीब और ग़रीब हो गए

इस रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि दुनिया को हिला देने वाले और मुसीबतों का सामना करने वाले वित्तीय संकट के 10 वर्षों के बाद अरबपतियों की संख्या में नाटकीय ढ़ंग से वृद्धि हुई है। यह संख्या वर्ष 2008 में 1,125 से बढ़कर वर्ष 2018 में 2,208 हो गई है। ऑक्सफैम के अनुसार दुनिया के अरबपतियों की संपत्ति वर्ष 2018 में 900 बिलियन डॉलर बढ़ गई है।

ठीक इसी समय 3.8 अरब लोगों में शामिल आधे सबसे ग़रीब लोगों की संपत्ति में 11 प्रतिशत की गिरावट आई। इसमें यह भी कहा गया कि वर्ष 2017 और 2018 के बीच हर दो दिनों में एक नया अरबपति पैदा हुआ जबकि ग़रीब लोग और ग़रीब होते रहे। पिछले एक साल में धन और भी अधिक केंद्रित हो गया। वर्ष 2017 में 43 सबसे अमीर लोगों के पास दुनिया की सबसे ग़रीब आधी आबादी के जितना ही धन था। वर्ष 2018 में यह संख्या घटकर 26 हो गई।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेज़न के संस्थापक जेफ बेजोस वर्ष 2018 की फोर्ब्स सूची में 112 बिलियन डॉलर के साथ दुनिया के सबसे अमीर आदमी हैं। उनकी कुल संपत्ति का सिर्फ एक प्रतिशत 105 मिलियन लोगों वाले देश इथियोपिया के लगभग पूरे स्वास्थ्य बजट के बराबर है।

भारत का स्थान

भारत में स्वास्थ्य सेवा के बारे में बात करें तो इस रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधा केवल उन लोगों के लिए उपलब्ध है जिनके पास इसके लिए ख़र्च करने के लिए पैसा है। भले ही भारत मेडिकल टूरिज़्म के मामले में अग्रणी है फिर भी स्वास्थ्य सेवा पर सरकारी खर्च का स्तर दुनिया में सबसे कम है।

सबसे ग़रीब भारतीय राज्यों में शिशु मृत्यु दर उप-सहारा अफ्रीका की तुलना में काफी अधिक है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2015-2016 के अनुसार उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मृत्यु दर 1,000 जीवित बच्चों के जन्म में क्रमशः 64 और 54 मौत थी जबकि उप-सहारा अफ्रीका में मृत्यु दर 52 है।

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि भारत में जाति व्यवस्था रोज़मर्रा की जिंदगी को लगातार किस तरह प्रभावित कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार एक निम्न जाति की महिला की जीवन प्रत्याशा उच्च जाति की महिला की तुलना में लगभग 15 वर्ष कम है।

इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि जातिगत व्यवस्था द्वारा घातक प्रथाओं को प्रचारित किया जाता है जैसे कि उच्च जाति से संबंध रखने वाले लोग उन बर्तनों या थालियों का इस्तेमाल नहीं करते जो निम्न जाति से संबंध रखने वाले लोग करते हैं। हालांकि इसमें कहा गया है कि इस बात के सबूत हैं कि सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना ने इस प्रथा को ख़त्म में योगदान दिया है क्योंकि यहां बच्चे एक साथ खाना खाते हुए पाए जाते हैं।

हाल के वर्षों में विश्व बैंक जैसे दानदाताओं ने सरकारी प्रावधान के विकल्प के रूप में निम्न लागत वाली निजी स्कूली शिक्षा का समर्थन किया है। हालांकि ग़रीबी अभी भी निजी शिक्षा से ग़रीब बच्चों के दूर रहने में एक स्पष्ट कारक है। उत्तर प्रदेश पर आधारित एक अध्ययन के अनुसार यह पाया गया कि कम-लागत वाले निजी स्कूल सबसे ग़रीब 40 प्रतिशत परिवारों के लिए पहुंच से बाहर हैं और निम्न जातियों या धार्मिक अल्पसंख्यकों की लड़कियों और बच्चों के इनमें शामिल होने की संभावना कम है।

ऑक्सफैम ने यह भी कहा कि 13.6 करोड़ भारतीय जो देश के 10 प्रतिशत सबसे ग़रीब हैं वर्ष 2004 से क़र्ज़ में डूबे हुए है। यह पाया गया कि “भारत की शीर्ष 10 प्रतिशत आबादी के पास कुल राष्ट्रीय संपत्ति का 77.4 प्रतिशत है। इसके विपरीत शीर्ष 1 प्रतिशत की बात करें तो उनके पास राष्ट्रीय संपत्ति का 51.53 प्रतिशत है। नीचे से 60 प्रतिशत जिसकी आबादी सबसे अधिक है उनके पास राष्ट्रीय संपत्ति का केवल 4.8 प्रतिशत ही है। शीर्ष 9 अरबपतियों की संपत्ति आबादी के निचले 50 प्रतिशत लोगों की संपत्ति के बराबर है।”

अमीरों से अधिक कर लेने की ज़रूरत

इस रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि सबसे अमीर जो तेजी से बढ़ती किस्मत का फायदा उठाना जारी रखते हैं वे दशकों से कर के कुछ न्यूनतम स्तरों का भी फायदा उठा रहे हैं क्योंकि वे कॉर्पोरेशन के मालिक हैं। ऑक्सफैम के अनुसार, "संपत्ति विशेष रूप से कर रहित है। कर राजस्व के प्रत्येक डॉलर में केवल 4 सेंट संपत्ति पर करों से आता है।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमीर देशों में 1970 में आयकर की औसत शीर्ष दर 62 प्रतिशत से गिरकर 2013 में 37 प्रतिशत हो गई। विकासशील देशों में व्यक्तिगत आयकर की औसत शीर्ष दर 28 प्रतिशत है। ब्राज़ील और यूके जैसे कुछ देशों में आबादी का सबसे ग़रीब 10 प्रतिशत अब सबसे धनी दस प्रतिशत की तुलना में कर के रूप में अपनी आमदनी का सबसे ज़्यादा भाग अदा कर रहे हैं।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को असमानता से लड़ने में मदद करने के लिए बहुत धनी लोगों से अधिक धन जुटाने के अपने प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इसमें कहा गया है कि सबसे अमीर को उनकी संपत्ति पर सिर्फ 0.5% अतिरिक्त कर का भुगतान करने से उन सभी 262 मिलियन बच्चों को शिक्षित करने में मदद मिल सकती है जो स्कूल से दूर हैं और साथ ही स्वास्थ्य सेवा बेहतर हो सकेगा जो 3.3 मिलियन लोगों की ज़िंदगी को बचाएंगे। सबसे धनी लोग टैक्स अधिकारियों से 7.6 ट्रिलियन डॉलर की चौंकाने वाली राशि छिपा रहे हैं। बड़े कॉरपोरेट्स भी बड़ी मात्रा में धन विदेशों में छिपाते हैं। कुल मिलाकर यह विकासशील देशों को एक वर्ष में 170 बिलियन डॉलर से वंचित रखता है।

एक बेहतर दुनिया के लिए

इस रिपोर्ट ने दुनिया भर की सरकारों को कई सुझाव दिए हैं जिसमें निजी वस्तु की तुलना में सरकारी वस्तु चयन करने का आग्रह किया गया है। इसमें कहा गया है ''आज असमानता और ग़रीबी का स्तर एक विकल्प है। हम उन लोगों को प्रतिफल देना जारी रख सकते हैं जो पहले से ही अमीर हैं या हम असमानता से लड़ने और गरीबी खत्म करने का विकल्प चुन सकते हैं।”

ऑक्सफैम द्वारा की गई सिफारिशें निम्नलिखित हैं:

1. विश्वव्यापी नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और अन्य सार्वजनिक सेवाएं देना जो महिलाओं और लड़कियों के लिए भी काम करती हैं। सरकारी सेवाओं के निजीकरण का समर्थन करना बंद करना। सभी को पेंशन, बच्चों के लिए लाभ और अन्य सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना। महिलाओं और लड़कियों के लिए भी यह सुनिश्चित करने के लिए सभी सेवाओं को तैयार करना।

2. अपने परिवार और घरों की देखभाल के लिए हर दिन खर्च किए गए लाखों अवैतनिक घंटों को कम करके महिलाओं के समय का इस्तेमाल करना। जो लोग इस आवश्यक कार्य को करते हैं वे बजट निर्णयों में कहते हैं और महिलाओं के समय को इस्तेमाल करने को सरकारी व्यय का एक प्रमुख उद्देश्य बताते हैं। पानी, बिजली और चाइल्डकेयर सहित सरकारी सेवाओं में निवेश करना जो इस अवैतनिक कार्य को करने के लिए आवश्यक समय को कम करे। सभी सरकारी सेवाओं को इस तरह से तैयार करना जो उन लोगों के लिए काम करे जिनके पास थोड़ा समय है।

3. अमीर व्यक्तियों और कॉर्पोरेशनों के अल्प-कराधान को समाप्त करना। संपत्ति और पूंजी के उचित स्तरों पर कर लगाना। कॉर्पोरेट्स और सबसे धनी लोगों द्वारा कर से बचाव और चोरी को ख़त्म करना। समान स्थान वाले विकासशील देशों के साथ मूल रूप से कर प्रणाली को निष्पक्ष बनाने को लेकर नया स्वरूप देने के लिए वैश्विक नियमों और संस्थानों के एक नए ढांचे पर सहमत होना।

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