NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिकी प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ वेनेज़ुएला को रूस का संरक्षण
यह कहना काफ़ी है कि अमेरिका के दबाव को झेलने और अपनी सामरिक स्वायत्तता को बनाए रखने की मादुरो सरकार की तात्कालिक शर्तों में प्रक्रिया को मज़बूत करते हुए क्रेमलिन लंबे समय का खेल खेल रहे हैं।
एम. के. भद्रकुमार
01 Apr 2020
USA

राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को बेदखल करने के लिए वाशिंगटन की परिवर्तन परियोजना के हिस्से के रूप में दो सप्ताह पहले अमेरिकी ट्रेजरी ने अपनी व्यापारिक शाखा को मंज़ूरी देने के बाद रूस की बड़ी तेल कंपनी रोसनेफ्ट ने अपनी सब्सिडियरी रोज़नेफ्ट ट्रेडिंग एसए को बेचने और वेनेज़ुएला में अपनी सभी संपत्तियां बेचने का फैसला किया जो विदेशी टिप्पणीकारों के लिए सही नहीं लग सकता है।

ऐसा लग सकता है कि प्रथम दृष्टया रूस मादुरो से दूर हो रहा है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की वेनेज़ुएला सरकार के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों के शस्त्रीकरण के हालिया फ़ैसले को स्वीकार कर रहा है।कम से कम बीबीसी रेडियो के सुबह के बुलेटिन ने ऐसा ही कुछ बताया है।

लेकिन कोई गहराई में जाएगा तो यह सामने आएगा, इसके विपरीत यह क्रेमलिन के अंतिम विजय की संतुष्टी है। रूस जो कुछ कर रहा है वह काफ़ी अजीब है, यूएस डिप्लोमैटिक टूलबॉक्स से उधार लेना- यह वैसा ही जो यूएस आतंकवाद पर अपने युद्ध में लगातार जो करता है,अर्थात, जब कभी कोई आतंकवादी समूह जिसे वाशिंगटन संरक्षण देता है तो वह युद्ध के मैदान में उजागर हो जाता है, यह तुरंत नया रूप ले लेता है और एक नए अवतार के रूप में प्रकट होता है, और जीवन आगे बढ़ता रहता है।

इसलिए, जो हो रहा है उसे इस तरह समझने की ज़रूरत है कि भविष्य में संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच बनाने के लिए काफी समझ बूझकर उठाए गए कदम के तहत रोसनेफ्ट जेनेवा स्थित व्यापारिक सहायक कंपनी रोसनेफ्ट ट्रेडिंग एसए से अपने व्यापारिक रिश्ते खत्म कर रही है।

यह रोसनेफ्ट के वैश्विक संचालन के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है - रोसनेफ्ट वैश्विक तेल उत्पादन का लगभग 6 प्रतिशत उत्पादन करता है - जो कि उत्पादन को अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते जोखिम में डाल सकता है।

रोसनेफ्ट तब से चालाकी से काम कर रहा है, हालांकि रोसनेफ्ट का बड़ा हिस्सा क्रेमलिन के पास है, यह लंदन में सूचीबद्ध है और अधिक परिमाण में न्यून संख्या में शेयरधारकों के रूप में बीपी तथा कतरी संप्रभु धन निधि को शामिल किया जाता है।

रोसनेफ्ट के प्रवक्ता के हवाले से लिखा गया है, “एक सार्वजनिक अंतरराष्ट्रीय कंपनी के रूप में, हमने अपने शेयरधारकों के हितों में उक्त परिस्थिति के संदर्भ में निर्णय लिया है जो निष्पक्षता से उत्पन्न हुई है। अब हमें अमेरिकी नियामकों द्वारा सार्वजनिक रूप से किए गए उनके वादों को पूरा करने के लिए उम्मीद करने का अधिकार है।" यूएस के बयान में अंतिम संदर्भ है कि अगर रोसनेफ्ट अपने वेनेजुएला के व्यापार धीरे धीरे कम करे तो उसके व्यापारिक संगठन के खिलाफ प्रतिबंध हटा दिए जाएंगे।

दिलचस्प बात यह है कि क्रेमलिन द्वारा पूरी तरह से स्वामित्व वाली एक अनाम कंपनी वेनेज़ुएला में रोसनेफ्ट की सहायक कंपनी और उसकी तेल सेवाओं और व्यापारिक परिचालन को खरीदेगी। रोसनेफ्ट (इगोर सेचिन के नेतृत्व में) और क्रेमलिन (व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में) के बीच का सौदा अब सीधे तौर पर वेनेज़ुएला में संसाधन को अधिग्रहित करते हुए नतीजे तक पहुंच जाएगा जहां तेल भंडार 80 मी टन से अधिक है और प्रतिदिन तेल उत्पादन पीडीवीएसए के साथ पांच संयुक्त उद्यमों के जरिये प्रतिदिन 66,500 बैरल प्रति टन होने की संभावना है। पीडीवीएसए वेनेज़ुएला की सरकारी तेल कंपनी है।

रोसनेफ्ट की सहायक कंपनी को क्रेमलिन से उक्त परिसंपत्तियों के बदले कंपनी का 9.6 प्रतिशत स्टॉक प्राप्त होगा। यदि ट्रम्प मादुरो को दंडित करना चाहते हैं तो उनके पास क्रेमलिन को मंज़ूरी देने का एकमात्र शेष विकल्प है।

मॉस्को ने पहले भी वेनेजुएला में ट्रम्प के प्रतिबंधों को मात देने के लिए इस नई तकनीक को अपनाया था जब वेनेजुएला ने रुस की सरकार को अपना शेयर हस्तानांतरित करते हुए और यूएस के प्रतिबंधों का सामना करते हुए रुस के संयुक्त उद्यम पार्टनर -वीटीबी और गाजप्रोमबैंक- के साथ एक संयुक्त-रूसी/वेनेज़ुएला के बैंक को रिब्रांड किया था।

स्पष्ट रूप से, रोसनेफ्ट और क्रेमलिन (इसे सेचिन और पुतिन के बीच - जो निश्चित रूप से रूसी राजनीति में हर तरह से लंबे समय तक सहयोगी रहे हैं) के बीच का सौदा एक अस्पष्ट संकेत देता है कि मॉस्को वेनेजुएला में जब तक सफल नहीं हो जाता तब तक जारी रखना चाहता है, यह मायने नहीं रखता कि यह कौन सा क़दम उठाता है।

पश्चिमी गोलार्ध में रूस की स्थिति को बढ़ाते हुए और अमेरिका की अपनी पृष्ठभूमि में उसके अधिपत्य की सीमा को उजागर करते हुए मादुरो सरकार के भविष्य के लिए भू-राजनीतिक निहितार्थ बेहद महत्वपूर्ण हैं। (क्या यह विपरीत दिशा में यूक्रेन नहीं है?) लैटिन अमेरिकी देशों (और चीन) पर भी कड़ी नजर रहेगी।

केजीएन के पूर्व अधिकारी सेचिन खुद क्रेमलिन के पदाधिकारियों में एक प्रमुख व्यक्ति रहे हैं जिन्होंने कराकस के साथ करीबी संबंधों को तैयार किया और स्थापना की। उन्होंने वेनेजुएला में ‘बोलिवेरियन रिवोल्यूशन’ के स्वयंभू नेता स्वर्गीय ह्यूगो शावेज के साथ असाधारण रूप से अपनी घनिष्ठ मित्रता को बढ़ाया था।

किसी भी तरीके से 2014 से 2018 के बीच रोसनेफ्ट ने अमेरिका की शत्रुतापूर्ण नीतियों के कारण आर्थिक कठिनाइयों से निपटने में वेनेजुएला की मदद करने के लिए शावेज को 6.5 बिलियन डॉलर का ऋण दिया था। वेनेजुएला ने तब से तेल देकर रूस के ऋण को वापस कर दिया है।

रोसनेफ्ट वेनेजुएला के आधे और दो-तिहाई हिस्से तेल के बीच का कारोबार कर रहा था और रोसनेफ्ट ट्रेडिंग एसए वेनेजुएला के गैसोलीन का एकमात्र आपूर्तिकर्ता था। अब यह व्यवसाय अनाम क्रेमलिन कंपनी द्वारा किया जाएगा। जाहिर है, यह एक रणनीतिक कदम है जो वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति बनाए रखने के लिए रूस के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।

विश्व तेल बाजार के लिए इसके निहितार्थ हैं क्योंकि वेनेजुएला के सुरक्षित तेल भंडार – वर्ष 2016 केअनुसार 300 बिलियन बैरल - दुनिया भर में सुरक्षित तेल भंडार के 18 प्रतिशत से अधिक है और यह इस देश को दुनिया में नंबर एक का दर्जा देता है।

ऐसे समय में जब ओपेक परिवर्तन कर रहा है और ओपेक प्लस को कोरोनोवायरस के कारण तेल की कीमतों में भारी गिरावट के कारण झेलना पड़ा है तो इस तरह विश्व तेल बाजार का भविष्य अत्यधिक अस्थिर और अनिश्चित हो गया है। यह पहले से ही अमेरिकी शेल उद्योग पर हानिकारक प्रभाव डाल रहा है जो तब तक जीवित नहीं रह सकता जब तक कि तेल 45-50 डॉलर प्रति बैरल नहीं बिकता। लेकिन आने वाले वर्षों में तेल की कीमतें बढ़नी तय हैं और लंबे समय तक विश्व तेल बाजार में वेनेजुएला का एक बड़ा ठिकाना बनना तय है।

यह कहने के लिए पर्याप्त है कि अमेरिका के दबाव को झेलने और अपनी सामरिक स्वायत्तता को बनाए रखने की मादुरो सरकार की तात्कालिक शर्तों में प्रक्रिया को मज़बूत करते हुए क्रेमलिन लंबे समय का खेल खेल रहे हैं।

अंग्रेजी में लिखे गए मूल आलेख को आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं

A Russian Firewall for Venezuela Against US Sanctions

USA
Russia
sanctions
US Sanction on Venezuela
Venezuelan Sanctions

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

डेनमार्क: प्रगतिशील ताकतों का आगामी यूरोपीय संघ के सैन्य गठबंधन से बाहर बने रहने पर जनमत संग्रह में ‘न’ के पक्ष में वोट का आह्वान

रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने के समझौते पर पहुंचा यूरोपीय संघ

यूक्रेन: यूरोप द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाना इसलिए आसान नहीं है! 

पश्चिम बैन हटाए तो रूस वैश्विक खाद्य संकट कम करने में मदद करेगा: पुतिन

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

अमेरिकी आधिपत्य का मुकाबला करने के लिए प्रगतिशील नज़रिया देता पीपल्स समिट फ़ॉर डेमोक्रेसी

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत


बाकी खबरें

  • ukraine russia
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूक्रेन पर रूसी हमला जारी, क्या निकलेगी शांति की राह, चिली-कोलंबिया ने ली लाल करवट
    15 Mar 2022
    'पड़ताल दुनिया भर की' में, वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने यूक्रेन पर रूसी हमले के 20वें दिन शांति के आसार को टटोला न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के साथ। इसके अलावा, चर्चा की दो लातिन…
  • citu
    न्यूज़क्लिक टीम
    स्कीम वर्कर्स संसद मार्च: लड़ाई मूलभूत अधिकारों के लिए है
    15 Mar 2022
    CITU के आह्वान पर आज सैकड़ों की संख्या में स्कीम वर्कर्स ने संसद मार्च किया और स्मृति ईरानी से मुलाकात की. आखिर क्या है उनकी मांग? क्यों आंदोलनरत हैं स्कीम वर्कर्स ? पेश है न्यूज़क्लिक की ग्राउंड…
  • yogi
    रवि शंकर दुबे
    चुनाव तो जीत गई, मगर क्या पिछले वादे निभाएगी भाजपा?
    15 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भले ही भाजपा ने जीत लिया हो लेकिन मुद्दे जस के तस खड़े हैं। ऐसे में भाजपा की नई सरकार के सामने लोकसभा 2024 के लिए तमाम चुनौतियां होने वाली हैं।
  • मुकुल सरल
    कश्मीर फाइल्स: आपके आंसू सेलेक्टिव हैं संघी महाराज, कभी बहते हैं, और अक्सर नहीं बहते
    15 Mar 2022
    क्या आप कश्मीर में पंडितों के नरसंहार के लिए, उनके पलायन के लिए मुसलमानों को ज़िम्मेदार नहीं मानते—पड़ोसी ने गोली की तरह सवाल दागा।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः खेग्रामस व मनरेगा मज़दूर सभा का मांगों को लेकर पटना में प्रदर्शन
    15 Mar 2022
    "बिहार में मनरेगा मजदूरी मार्केट दर से काफी कम है। मनरेगा में सौ दिनों के काम की बात है और सम्मानजनक पैसा भी नहीं मिलता है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License