NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
दिल्ली: ऐक्टू ने किया निर्माण मज़दूरों के सवालों पर प्रदर्शन
कार्यक्रम की शुरुआत सुश्रुत ट्रामा सेंटर से मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की ओर जुलूस निकालकर हुई। दिल्ली पुलिस द्वारा मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय तक का रास्ता बंद किये जाने के चलते सड़क पर ही सभा की गई।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
30 Nov 2021
AICCTU

नई दिल्ली: ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) से सम्बद्ध बिल्डिंग वर्कर्स यूनियन ने निर्माण मजदूरों की विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल के नाम ज्ञापन देते हुए प्रदर्शन किया।

ज्ञात हो कि प्रदूषण रोकने के नाम पर हर साल होने वाली ‘कामबन्दी’ से लाखों की संख्या में निर्माण मजदूर प्रभावित होते हैं। आर्थिक-सामजिक सुरक्षा के नाम पर इन मजदूरों के पास कुछ भी नहीं होता– ऐसे में दिल्ली सरकार द्वारा इस सम्बन्ध में कोई भी नीति नहीं बनाने के चलते मजदूरों की हालत दिनों-दिन और खराब हो रही है।

ट्रॉमा सेंटर से मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की ओर निकाला मार्च 
 
दिल्ली के नरेला, जहांगीरपुरी, संत नगर– बुराड़ी, वजीराबाद, वजीरपुर, तिमारपुर, मुस्तफाबाद, करावल नगर, गाँधी नगर, झिलमिल, संगम विहार, ओखला, भाठी माइंस, नजफगढ़ समेत कई इलाकों से निर्माण मजदूरों ने आज के कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत सुश्रुत ट्रामा सेंटर से मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की ओर जुलूस निकालकर हुई। दिल्ली पुलिस द्वारा मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय तक का रास्ता बंद किये जाने के चलते सड़क पर ही सभा की गई। सभा की शुरुआत भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के राज्य सचिव रवि राय ने अपनी बात रखते हुए की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री उन राज्यों में जहां चुनाव होने वाले हैं, तमाम झूठे-सच्चे वादे कर रहे हैं, पर दिल्ली के मजदूरों के विषय में सोचने का समय उनके पास नहीं है। दिल्ली सरकार केंद्र द्वारा लाए जा रहे मजदूर विरोधी श्रम कोड के सवाल पर भी चुप है। यह बहुत निंदनीय है।

ऐक्टू ने कहा जब प्रदूषण के ज़िम्मेदार गरीब नहीं तो भुगतान केवल गरीब-मेहनतकश को ही क्यों करना पड़ रहा है? न्यूनतम मजदूरी के बराबर आर्थिक सहायता प्रदान करे सरकार।

बिल्डिंग वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष राजीव जो पेशे से राज मिस्त्री हैं ने अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रदूषण की समस्या कोई नई समस्या नहीं है, हर साल प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर निर्माण कार्य रोका जा रहा है। इस कारण जहां एक तरफ पैसे वाले लोगों को विशेष अंतर नहीं पड़ रहा वहीं दूसरी तरफ दिहाड़ी मजदूर भूख-बेरोज़गारी से परेशान हो रहे हैं। मजदूर प्रदूषण के दुष्प्रभावों को भलीभांति समझते हैं. दिल्ली के मजदूर ही दिल्ली के सबसे प्रदूषित इलाकों में रहने के लिए मजबूर हैं, पर खाली पेट दिन काटना उनके लिए संभव नहीं है। दिहाड़ी पर काम करने वाले मजदूर हर रोज़ काम करने के पश्चात ही अपना पेट भर पाते हैं। दिल्ली सरकार को चाहिए की सभी पंजीकृत और गैर-पंजीकृत निर्माण मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी के बराबर आर्थिक सहायता/ बेरोज़गारी भत्ता प्रदान करे। दिल्ली के मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में घोषित 5000 हज़ार रूपए की आर्थिक सहायता काफी कम है और सभी मजदूरों तक नहीं पहुँच पा रही है।

"सरकार अपनी जेब से न तो पैसे खर्च कर रही है न ही कोई नीति बना रही है"

ऐक्टू के दिल्ली राज्य अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह गौतम ने सभा को संबोधित करते हुए बताया कि दिल्ली सरकार अपनी जेब से एक भी पैसा मजदूरों को नहीं दे रही। पांच हज़ार रूपए की आर्थिक सहायता जो कि दिल्ली में घोषित न्यूनतम वेतन से कई गुना कम है। निर्माण मजदूरों के कल्याण बोर्ड के पास उपलब्ध फंड से दी जा रही है। देश की राजधानी दिल्ली में समय-समय पर होने वाली ‘कामबन्दी’ को देखते हुए सरकार के पास मजदूरों की आजीविका के लिए कोई नीति होनी चाहिए थी, परन्तु ऐसा नहीं है। ये बेहद दुःख की बात है। दिल्ली सरकार को अपने बजट का कुछ हिस्सा ऐसी परिस्थितियों में मजदूर-कल्याण हेतु अलग करना चाहिए। आज जब पेट्रोल से लेकर घरेलु गैस तक के दाम आसमान छू रहे हैं, टमाटर जैसी सब्जियां आम जनता की पहुँच से बाहर हो गई हैं। तब दिल्ली और केंद्र की सरकारें केवल विज्ञापन देने में व्यस्त हैं।

प्रदर्शन के पश्चात दिल्ली के विभिन्न लेबर चौकों से लगभग 5000 निर्माण श्रमिकों के हस्ताक्षर के साथ एक ज्ञापन दिल्ली के मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल के नाम सौंपा गया। ज्ञापन में निम्नलिखित मांगों को उठाया गया– 

1. कामबंदी के दौरान दिल्ली सरकार ने अपने द्वारा ही तय किये गए न्यूनतम वेतन से कई गुना कम ‘वित्तीय सहायता राशि’ की घोषणा की है। सरकार इस बात से अच्छी तरह से अवगत है कि न्यूनतम मजदूरी से कम में गुज़ारा करना किसी भी मजदूर के लिए असंभव है। अतः हम मांग करते हैं कि सभी पंजीकृत एवं गैर पंजीकृत निर्माण मजदूरों को कम से कम दिल्ली में लागू न्यूनतम मजदूरी के बराबर वित्तीय सहायता राशि/ बेरोज़गारी भत्ता दिया जाए। जिन निर्माण मजदूरों का पंजीकरण निर्माण मजदूरों के लिए बने वेलफेयर बोर्ड में नहीं हुआ है, उन्हें भी सहायता प्रदान की जाए और उनके पंजीकरण की प्रक्रिया को तेज़ किया जाए।

2. चूंकि प्रदूषण की समस्या के निदान हेतु हर साल निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाना पड़ रहा है, अतः इस कामबन्दी से मजदूरों को होनेवाले नुकसान के विषय में दिल्ली सरकार, ट्रेड यूनियनों से वार्ता कर नीति बनाए।

3. निर्माण मजदूरों की आजीविका की गारंटी के लिए दिल्ली सरकार अपने बजट का कम-से-कम 5 फीसदी हिस्सा निर्माण मजदूरों के कल्याण के लिए अलग से आवंटित करे। अगर ज़रूरी हो तो दिल्ली सरकार अपने प्रचार-होर्डिंग में खर्च हो रहे पैसे निर्माण मजदूरों के कल्याण में लगाए।

4. निर्माण मजदूरों के कल्याण के लिए बने बोर्ड को सशक्त करने हेतु सभी सरकारी-गैर सरकारी संस्थानों/ व्यक्तियों/ कंपनियों से बकाये ‘सेस’ की तत्काल वसूली की जाए।

5. जिस प्रकार से किसानों की मांगों और ऐतिहासिक आन्दोलन के दबाव में दिल्ली के मुख्यमंत्री ने केंद्र द्वारा लाए गए ‘कृषि कानूनों’ के प्रति अपना विरोध प्रकट किया उसी प्रकार वो मजदूर-विरोधी ‘लेबर कोड’ के खिलाफ भी अपना विरोध व्यक्त करें। कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा करते हुए ऐक्टू के राज्य अध्यक्ष ने कहा कि हमारी यूनियन ने इस तरह बिना किसी प्लानिंग के किये जा रहे ‘कामबन्दी’ के विरुद्ध पहले भी प्रदर्शन किया है। हम अपने मांगो की लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे।

AICCTU
workers protest
delhi police
Arvind Kejriwal
AICWF

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

दिल्ली : नौकरी से निकाले गए कोरोना योद्धाओं ने किया प्रदर्शन, सरकार से कहा अपने बरसाये फूल वापस ले और उनकी नौकरी वापस दे

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?

मुस्लिम विरोधी हिंसा के ख़िलाफ़ अमन का संदेश देने के लिए एकजुट हुए दिल्ली के नागरिक


बाकी खबरें

  • aicctu
    मधुलिका
    इंडियन टेलिफ़ोन इंडस्ट्री : सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के ख़राब नियोक्ताओं की चिर-परिचित कहानी
    22 Feb 2022
    महामारी ने इन कर्मचारियों की दिक़्क़तों को कई गुना तक बढ़ा दिया है।
  • hum bharat ke log
    डॉ. लेनिन रघुवंशी
    एक व्यापक बहुपक्षी और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता
    22 Feb 2022
    सभी 'टूटे हुए लोगों' और प्रगतिशील लोगों, की एकता दण्डहीनता की संस्कृति व वंचितिकरण के ख़िलाफ़ लड़ने का सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि यह परिवर्तन उन लोगों से ही नहीं आएगा, जो इस प्रणाली से लाभ उठाते…
  • MGNREGA
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    ग्रामीण संकट को देखते हुए भारतीय कॉरपोरेट का मनरेगा में भारी धन आवंटन का आह्वान 
    22 Feb 2022
    ऐसा करते हुए कॉरपोरेट क्षेत्र ने सरकार को औद्योगिक गतिविधियों के तेजी से पटरी पर आने की उसकी उम्मीद के खिलाफ आगाह किया है क्योंकि खपत की मांग में कमी से उद्योग की क्षमता निष्क्रिय पड़ी हुई है। 
  • Ethiopia
    मारिया गर्थ
    इथियोपिया 30 साल में सबसे ख़राब सूखे से जूझ रहा है
    22 Feb 2022
    इथियोपिया के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 70 लाख लोगों को तत्काल मदद की ज़रूरत है क्योंकि लगातार तीसरी बार बरसात न होने की वजह से देहाती समुदाय तबाही झेल रहे हैं।
  • Pinarayi Vijayan
    भाषा
    किसी मुख्यमंत्री के लिए दो राज्यों की तुलना करना उचित नहीं है : विजयन
    22 Feb 2022
    विजयन ने राज्य विधानसभा में कहा, ‘‘केरल विभिन्न क्षेत्रों में कहीं आगे है और राज्य ने जो वृद्धि हासिल की है वह अद्वितीय है। उनकी टिप्पणियों को राजनीतिक हितों के साथ की गयी अनुचित टिप्पणियों के तौर पर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License