NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
स्वास्थ्य
भारत
कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले और डॉक्टर-नर्सों का विरोध, क्या दिल्ली एम्स में सब ठीक है?
एक ओर देश के बड़े चिकित्सीय संस्थानों में शामिल दिल्ली एम्स में लगातार कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर प्रशासन की कथित ख़ामियों को उजागर करने वाले डॉ श्रीनिवास को रजिस्ट्रार द्वारा कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया है। इसके अलावा अस्पताल में कोविड-19 को लेकर बने हालात के चलते एम्स नर्सेस यूनियन भी अपनी मांगों को लेकर लगातार मुखर है।
सोनिया यादव
03 Jun 2020
Image Courtesy: social media
Image Courtesy: social media

“हेल्थ मिनिस्ट्री और ICMR ने N-95 को लेकर जो जानकारी दी है वो झूठ है। यहां भारत में बनने वाले N-95 मास्क के साथ गुणवत्ता और मानकीकरण को लेकर काफी ज़्यादा दिक्कतें हैं।”

ये ट्वीट अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सीनियर रेसिडेंट डॉक्टर राजकुमार श्रीनिवास का है। डॉ. श्रीनिवास ने अपने इस ट्वीट में आगे ये भी लिखा कि अगर आप जर्नलिस्ट हैं और इस बारे में जानकारी पाना चाहते हैं तो मुझे डायरेक्ट मैसेज करें या फिर इस ट्वीट को रिट्वीट करें। अब इस ट्वीट को लेकर एम्स प्रशासन की ओर से डॉक्टर श्रीनिवास को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

एम्स में बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों के बीच 25 मई को डॉक्टर राजकुमार श्रीनिवास ने अस्पताल में वायरस संक्रमण से बचाव के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को मिलने वाले N-95 मास्क की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए एक ट्वीट किया। इस  ट्वीट में उन्होंने ICMR और स्वास्थ्य मंत्रालय को टैग करते हुए लिखा कि N95 मास्क को लेकर सरकार झूठ बोल रही है।

aiims_0.jpeg

इस ट्वीट के बाद 1 जून को उन्हें एम्स रजिस्ट्रार द्वारा कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। इस नोटिस में लिखा है कि श्रीनिवास को 3 जून तक इसका जवाब देना होगा और अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

नोटिस के अनुसार “डॉक्टर राजकुमार ने ट्वीट कर कहा है कि हेल्थ मिनिस्ट्री और ICMR ने N-95 मास्क से जुड़े जो आंकड़े दिए हैं, वो झूठ हैं। इसी ट्वीट में उन्होंने अधिक जानकारी के लिए पत्रकारों को भी इनवाइट किया है। उन्होंने अपने दावे के सपोर्ट में कोई सबूत भी नहीं दिए। वो एम्स  के सीनियर रेसिडेंट और रेसिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के महासचिव हैं। इस पद पर होने के नाते उनके शब्द लोगों को और हेल्थ केयर वर्कर्स को काफी प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे वक्त में जहां देश इस महामारी से लड़ रहा है, इस तरह के बिना सबूत वाली बातें फ्रंटलाइन में कोरोना से लड़ रहे हेल्थ केयर स्टाफ की हिम्मत को कम कर सकती हैं। उनमें अपनी सुरक्षा को लेकर संदेह पैदा हो सकता है।”

2Capture_0.JPG

क्या कहना है प्रशासन का?

एम्स रजिस्ट्रार संजीव लालवानी ने मीडिया से कहा, “हमने इस मुद्दे पर उनसे जवाब मांगा है। यह उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं है, लेकिन हम यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उन्होंने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर जाने से पहले प्रशासन में किसी के साथ उठाया था। अगर कोई समस्या है तो हमारे पास एक प्रणाली है जो हमारे सभी प्रमुख स्वास्थ्यकर्मियों के लिए उपलब्ध है।”

RDA ने डॉक्टर श्रीनिवास को महासचिव पद से हटाया

डॉक्टर श्रीनिवास को इस ट्वीट के बाद दिल्ली एम्स के रेजिडेंट्स डॉक्टर एसोसिएशन यानी RDA के महासचिव पद से भी हटा दिया गया है। इसके साथ ही उन्हें एसोसिएशन से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

notice dr.jpeg

RDA ने 29 मई को नोटिस जारी कर डॉ. श्रीनिवास पर मीडिया में गलत बयानबाजी का आरोप लगाते हुए उनके कृत्यों की निंदा की है। एसोसिएशन का कहना है कि वो RDA की कार्यकारिणी को दरकिनार कर कई बार बयान जारी कर चुके हैं। इसलिए दो तिहाई एग्जीक्यूटिव्स की सहमति से अब उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जा रहा है।

मालूम हो कि डॉ श्रीनिवास ने हाल ही में एम्स RDA के उस लेटर को भी ट्वीट किया है जो एसोशिएसन की ओर से अप्रैल में पीएम मोदी को लिखा गया था। इस लेटर में एसोशिएसन ने हेल्थकेयर वर्कर, नर्स, डॉक्टरों द्वारा पीपीई, क्वारंटीन फैसिलिटी का मुद्दा उठाने पर प्रशासन की तरफ से आलोचना और सजा के बारे में सूचित किया था और उसे रद्द करने की अपील की थी।

1Capture_0.JPG

एम्स प्रशासन पर धमकी देने का आरोप

एम्स के दो स्वास्थ्यकर्मियों की कोविड-19 से मौत के बाद बीते 28 मई को श्रीनिवास ने एक बयान जारी कर एम्स प्रशासन पर आवाज उठाने वाले डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज कराने की धमकी देने का आरोप लगाया था।

उन्होंने सरकार और प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यह जारी रहा तो मरीजों का इलाज करने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों की कमी पड़ जाएगी।

एम्स नर्सों के संगठन का विरोध प्रदर्शन

डॉ. श्रीनिवास के अलावा एम्स नर्सेस यूनियन ने भी अस्पताल में कोविड-19 को लेकर बने हालात पर चिंता व्यक्त की है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार, 1 जून को नर्सेस यूनियन ने एम्स निदेशक के दफ्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इससे पहले यूनियन ने 29 मई को एम्स निदेशक को अपनी मांगों के संबंध में पत्र लिखा था और मांगें पूरी न होने पर 1 जून से विरोध की चेतावनी दी थी।

यूनियन का कहना है कि बार-बार अस्पताल में कोविड-19 की चुनौतीपूर्ण स्थिति संज्ञान में लाने के बावजूद प्रशासन उनकी मांगों पर निष्क्रिय बना हुआ है। उनकी प्रमुख मांगों में कोविड क्षेत्रों में पीपीई के साथ चार घंटे तक समान रूप से ड्यूटी, कोविड और नॉन-कोविड इलाकों में यूनिफॉर्म बदलना, स्वास्थ्यकर्मियों के लिए उचित प्रतिक्रिया प्रणाली की स्थापना, रात की शिफ्ट के दौरान आने-जाने के लिए वाहन की व्यवस्था आदि शामिल हैं।

एम्स नर्सेस यूनियन की महासचिव फमीर सीके ने कहा, “हमारे प्रशासन ने फैसला किया है कि नर्सों को पीपीई में 22 दिनों तक छह घंटे की ड्यूटी करनी होगी जिसमें सिर्फ आठ छुट्टियां होंगी। यह असंभव है, खासकर पीरियड वाली महिला सहयोगियों के लिए। हम संकट के इस समय में देश की सेवा करना चाहते हैं इसलिए केवल कार्यकारी समिति के सदस्य विरोध कर रहे हैं जिसमें लगभग 20 लोग शामिल हैं।”

कोविड-19 आईसीयू में लगातार शिफ्ट करने वाली नर्स श्री विजया ने कहा, ‘पीरियड के दौरान मेरी कुछ सहयोगी तो बेहोश हो चुकी हैं। हम ब्रेक भी नहीं ले पाते हैं। एक सामान्य दिन में हम हर चार घंटे में सैनिटरी पैड बदलते हैं जो कि अब संभव नहीं है। हम वयस्क डायपर पहनते हैं लेकिन वह बहुत ही असुविधाजनक होता है। थकान और कमजोरी तो होती ही है।’

गौरतलब है कि एम्स में कोरोना का कहर बढ़ता जा रहा है। काफी संख्या में संस्थान के स्वास्थ्य कर्मी और उनके परिवार के लोग कोरोना से पीडि़त हो रहे हैं। ख़बर लिखे जाने तक मिली जानकारी के मुताबिक एम्स से जुड़े कुल 479 संक्रमित केस मिले हैं जिनमें दो फैकल्टी, 17 रेजीडेंट, 38 नर्स, 74 सुरक्षा गार्ड, 74 हॉस्पिटल अटेंडेंट और 54 सफाई कर्मचारी शामिल हैं। 

इनके अलावा छह एमएलटी, एक आरटी, छह ओटी और एक एक्सरे तकनीशियन भी कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। 12 डीईओ और एक पीसीसी के अलावा 193 लोग एम्स कर्मचारियों के परिजन भी हैं जो कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं। 

बढ़ते संक्रमण पर प्रशासन का स्पष्टीकरण

एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि एम्स में जिन स्वास्थ्य कर्मचारियों के कोरोना संक्रमित होने की जानकारी मिली है, उसमें कुछ ही कर्मचारी हैं जो कोविड वार्ड में ड्यूटी दे रहे थे और वायरस की चपेट में आए हैं। जबकि बाकी सभी कर्मचारी बाहर से संक्रमित होकर अस्पताल आए हैं।

उन्होंने बताया कि यह कर्मचारी भी दिल्ली के कई इलाकों में रहते हैं। वायरस का आउटब्रेक होने से कर्मचारी भी उसकी चपेट में आ रहे हैं। साथ ही इनके परिजन भी कोरोना पॉजिटिव मिल रहे हैं।

एम्स के कर्मचारियों का क्या कहना है?

एम्स के एक रेजिडेंट डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “AIIMS प्रशासन घूमा-फिराकर बातें कर है। वो कह रहे हैं कि ज्यादातर संक्रमण बाहर से हो रहा है लेकिन सच्चाई ये है कि पीपीई किट, N-95 मास्क सिर्फ कोविड वार्ड वालों को दिए जा रहे हैं। बाकि सब भगवान भरोसे हैं। इसके अलावा क्वारंटीन प्रोटोकॉल, हॉस्टल, मेस, सैनिटेशन आदि के नियमों का ठीक से पालन नहीं हो रहा। ये सब हेल्थकेयर वर्कर के संक्रमित होने की बड़ी वजहें हो सकती हैं।”

एक अन्य स्वास्थ्यकर्मी हॉस्पिटल अटेंडेंट ने बताया कि 15 से 20 दिनों में एक मास्क मिलता है। एक ही मास्क को कई दिनों तक पहने रहना भी ख़तरे से भरा हुआ है। हाथों के ग्ल्वस के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ती है। इसके अलावा अस्पताल में सोशल डिस्टेंसिंग और कोरोना प्रोटोकॉल का भी पूरा पालन नहीं हो पाता। हॉस्पिटल और हॉस्टल में रहने वाले रेजिडेंट डॉक्टर्स पॉजिटिव पाए जा रहे हैं। ऐसे में बाक़ी स्वास्थ्यकर्मियों की हालत का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

novel coronavirus
aiims
health care facilities
N95 masks
Dr. Srinivas Rajkumar
AIIMS Nurse Union

Related Stories

कोरोना संकट: भोजन, नौकरी और सुरक्षा के लिए हुआ देशव्यापी विरोध

शाहीनबाग़ : ये तो होना ही था, लेकिन ये क्यों हुआ?

लखनऊ : अब घंटाघर और उजरियां में महिलाओं की जगह उनके दुपट्टे धरने पर

कोरोना के कारण ‘समाजवादी विचार यात्रा’ के पहले चरण का सेवा आश्रम में समापन

शाहीन बाग़ और जनता कर्फ़्यू : आज महिलाओं की जगह धरने पर हैं उनकी चप्पलें, ताकि सनद रहे...

‘जनता कर्फ़्यू’ के दौरान छज्जे से CAA, NPR, NRC का विरोध करेंगे अनेक लोग

दिल्ली: शाहीन बाग़, राहत शिविर और जनता कर्फ़्यू

लखनऊ घंटाघर : अब कोरोना के नाम पर धरना हटाने की कोशिश, महिलाओं पर लाठीचार्ज़

हरियाणा : कोरोनावायरस के कारण शिक्षकों ने अपना प्रदर्शन टाला 

केन्या के मेरु काउंटी में हेल्थकेयर श्रमिक 5 फरवरी के हड़ताल के लिए तैयार


बाकी खबरें

  • putin
    एपी
    रूस-यूक्रेन युद्ध; अहम घटनाक्रम: रूसी परमाणु बलों को ‘हाई अलर्ट’ पर रहने का आदेश 
    28 Feb 2022
    एक तरफ पुतिन ने रूसी परमाणु बलों को ‘हाई अलर्ट’ पर रहने का आदेश दिया है, तो वहीं यूक्रेन में युद्ध से अभी तक 352 लोगों की मौत हो चुकी है।
  • mayawati
    सुबोध वर्मा
    यूपी चुनाव: दलितों पर बढ़ते अत्याचार और आर्थिक संकट ने सामान्य दलित समीकरणों को फिर से बदल दिया है
    28 Feb 2022
    एसपी-आरएलडी-एसबीएसपी गठबंधन के प्रति बढ़ते दलितों के समर्थन के कारण भाजपा और बसपा दोनों के लिए समुदाय का समर्थन कम हो सकता है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 8,013 नए मामले, 119 मरीज़ों की मौत
    28 Feb 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 1 लाख 2 हज़ार 601 हो गयी है।
  • Itihas Ke Panne
    न्यूज़क्लिक टीम
    रॉयल इंडियन नेवल म्युटिनी: आज़ादी की आखिरी जंग
    28 Feb 2022
    19 फरवरी 1946 में हुई रॉयल इंडियन नेवल म्युटिनी को ज़्यादातर लोग भूल ही चुके हैं. 'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस अंग में इसी खास म्युटिनी को ले कर नीलांजन चर्चा करते हैं प्रमोद कपूर से.
  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    मणिपुर में भाजपा AFSPA हटाने से मुकरी, धनबल-प्रचार पर भरोसा
    27 Feb 2022
    मणिपुर की राजधानी इंफाल में ग्राउंड रिपोर्ट करने पहुंचीं वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह। ज़मीनी मुद्दों पर संघर्षशील एक्टीविस्ट और मतदाताओं से बात करके जाना चुनावी समर में परदे के पीछे चल रहे सियासी खेल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License