NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
भूख, नफ़रत और हिंसा के विरुद्ध रोटी, न्याय और सामाजिक साझेदारी के लिए ऐपवा का अनशन
"आवागमन पर प्रतिबंध है आवाज़ पर नहीं " ऐपवा के इसी आहवान पर 23 अप्रैल  को देशभर में हजारों महिलाओं ने एक दिन अनशन किया।
सरोजिनी बिष्ट
24 Apr 2020
aipwa

कोरोना (कोविड-19) के बहाने बढ़ते सामाजिक भेदभाव, हिंसा, छुआछूत, इस्लाफोबिया के ख़िलाफ़ और भूख से लड़ रही गरीब जनता तक सुचारू रूप से अनाज  उपलब्ध कराने की मांग के साथ 23 अप्रैल को देशभर में एक अनोखा आंदोलन देखने को मिला जब अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसियशन (Aipwa) की हजारों महिलाओं ने अपने परिवार के साथ मिलकर घर से ही अपने आंदोलन को गति दी। हाथों में प्लेकार्ड और पोस्टर लेकर घर में ही अपने एक दिवसीय अनशन और धरने को मजबूती प्रदान करते हुए इन आंदोलनकारी महिलाओं ने इसे ऑनलाइन आंदोलन में भी तब्दील करते हुए जब अपनी तस्वीरों को साझा किया तो मानो एक दिन के लिए सोशल मीडिया आंदोलन मीडिया बन गया।  "आवागमन पर प्रतिबंध है आवाज़ पर नहीं " ऐपवा के इसी आहवान पर 23 अप्रैल  को देशभर में हजारों महिलाओं ने भूख, नफरत और हिंसा के खिलाफ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए एक दिवसीय उपवास और धरने में शामिल हो अपनी मजबूत भागीदारी निभाई।

इस एक दिवसीय धरने और उपवास का हिस्सा न केवल ऐपवा की हजारों महिला कार्यकर्ता थीं बल्कि वे महिलाएं भी शामिल थीं जो एपवा की सदस्य नहीं भी हैं लेकिन इन वाजिब मुद्दों के साथ अपनी सहमति जताते हुए इस आंदोलन का हिस्सा बनीं। ऐसी महिलाओं में पत्रकार, वकील, प्रोफेसर, कलाकार शामिल थीं। इन मुद्दों और सवालों के साथ अपनी एकनिष्ठता जताते हुए। अंबेडकरकारी कार्यकर्ता और रोहित वेमुला की मां राधिका वेमुला और जेएनयू के छात्र नजीब अहमद की मां फातिमा नफीसा भी शामिल हुईं। एपवा की राष्ट्रीय की राष्ट्रीय अध्यक्ष रति राव, महासचिव मीना तिवारी, सचिव कविता कृष्णन और सभी राज्यों की ऐपवा अध्यक्षों और सचिवों ने अपने अपने घरों में उपवास किया।

IMG-20200424-WA0036.jpg

बिहार ऐपवा नेता और  राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी ने हमें बातचीत में बताया कि जब हमने लोगों से और खासकर महिलाओं से सोशल मीडिया के जरिए भूख , अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत और महिला हिंसा के विरुद्ध  रोटी , न्याय , और सामाजिक साझेदारी के लिए एकदिवसीय अनशन/धरना में शामिल होने की अपील की तो तब हमको भी अंदाजा नहीं था कि हमें इतनी बड़ी संख्या में जनसमर्थन प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि हमारे इस मुहिम का हिस्सा शाहीन बाग़ की  महिलाएं भी थीं तो विभिन्न अन्य प्रगतिशील संगठनों की महिलाएं भी।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से करोना के बहाने एक धर्म विशेष के लोगों को टारगेट किया जा रहा है, सांप्रदायिक टकराव को बढ़ावा दिया जा रहा है उसका  न केवल हम पुरजोर तरीके से विरोध करते हैं, बल्कि इस देश की सरकार से अपील भी करते हैं कि वह विभाजनकारी तत्वों, जिसमें कुछ मीडिया संस्थान भी शामिल हैं, के ख़िलाफ़ कठोर कदम उठाए। उन्होंने लॉक डाउन के समय भी हो रही बलात्कार की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कितनी शर्म और भयावह बात है कि पिछले दिनों Quarantine मैं भी बलात्कार की घटनाएं सामने आईं  ।

दिल्ली ऐपवा नेता और राष्ट्रीय सचिव कविता कृष्णन ने   कहा कि ये ऐसा वक्त है हम सब के लिए जब हमें करोना के वायरस से भी लड़ना होगा और नफ़रत के वायरस से भी।  उन्होंने कहा कि एक तरफ नफ़रत है, झूठ है, हिंसा है तो दूसरी तरफ प्रेम है, भाईचारा है। उन्होंने  कहा कि इसमें दो राय नहीं कि नफ़रत और भेदभाव बढ़ाने वाले कारक चाहे जितने मजबूत हो जाएं लेकिन प्रेम और भाईचारे के मिसाल के आगे बौने हैं। उन्होंने इंदौर, जयपुर और बुलन्दशहर के उन खबरों का जिक्र किया जहां इस कठिन दौर में हिन्दू की मौत पर मुस्लिम भाइयों ने उनकी अरथी को कंधा दिया। 

IMG-20200424-WA0037.jpg

उत्तर प्रदेश राज्य अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी ने इस सफल आंदोलन के लिए उन तमाम महिलाओं को धन्यवाद दिया जो इस आंदोलन का हिस्सा बनी। उन्होंने कहा कि एक तरफ कोरोना से लड़ाई है और एक तरफ़ भूख से। आज भी एक बड़ी गरीब आबादी है जिसे आवश्यक आहार नहीं मिल पा रहा है जिसके चलते दूध पिलाने वाली माताओं के स्तन पर दूध नहीं उतर पा रहा और न ही उनके बच्चो तक दूध की आपूर्ति सरकार की ओर से हो पा रही है। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर मुद्दा है जिसे सरकार को संज्ञान में लेना होगा ।

राजस्थान ऐपवा राज्य सचिव सुधा चौधरी  ने हमसे बातचीत में कहा कि इस दौर में घरेलू महिला हिंसा का ग्राफ बढ़ना भी सचमुच व्यापक चिंता का विषय है, जैसा कि पिछले दिनों राष्ट्रीय महिला आयोग के आंकड़ों से भी पता चला। उन्होंने कहा कि अब जबकि यह तथ्य सामने आ रहे हैं कि इस समय घरेलू हिंसा की घटनाएं भी बढ़ रही हैं तो हम सरकार से यह मांग करते हैं कि घरों में बंद हिंसाग्रस्त महिलाओं की सुरक्षा की ओर भी ध्यान दिया जाए। हिंसा की शिकार महिलाओं की मदद के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर कारगर योजनाएं चलाई जाएं।

झारखंड ऐपवा राज्य सचिव गीता मण्डल ने कहा कि इस समय हमें सामाजिक दूरी नहीं बल्कि सामाजिक साझेदारी की ओर बढ़ना होगा। उन्होंने कहा हमारा यह अनशन और एक दिवसीय धरना भूख के विरुद्ध भोजन, नफ़रत और हिंसा के विरुद्ध प्रेम और सांप्रदायिक एकता कायम की राह पर था जिसमें लोग जुड़ते गए और हमारा दस्ता व्यापक होता गया । उन्होंने कहा कि जब हमारे इस आंदोलन ने सोशल मीडिया पर भी दस्तक तो तमाम वे लोग भी एक दिवसीय अनशन और धरने का हिस्सा बने जिन्हें हम जानते तक नहीं थे।

करोना गाईडलाइन का पालन करते हुए घर पर ही रहकर एपवा का यह एक दिवसीय देशव्यापी अनशन और धरने का कार्यक्रम बिहार, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, पांडिचेरी, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, असम, उड़ीसा ,कार्वी, राजस्थान, पंजाब आदि राज्यों में किया गया। इस पूरे आंदोलन की प्रमुख मांगे कुछ इस प्रकार हैं

1 . बिना भेदभाव के सबके लिए राशन का प्रबंध करो!

2 . कोरोना मरीजों, स्वास्थ्य कर्मियों के साथ छुआछूत बंद करो!

3 . मोदी जी घड़ियाली आंसू बहाना बंद करो! साम्प्रदायिक जहर फैलाने वालों को सजा का प्रबंध करो!

4 . सरकारी राशन दुकानों से बच्चों के लिए दूध मुफ्त वितरित करो!

5 . महिलाओं के लिए सैनेटरी पैड मुफ्त वितरित करो!

6 . कोरोना के बहाने मुसलमानों के बारे में झूठी खबरें और नफरत भड़काने वाले मीडिया समूहों को प्रतिबंधित करो!

7. मुस्लिमों के सामाजिक - आर्थिक बहिष्कार का विरोध करो!

8. महिलाओं को हिंसा से बचाने के लिए 24×7 हॉटलाइन सेवा शुरू करो!

9. स्वास्थ्य और सफाई कर्मियों की सुरक्षा और उचित मेहनताने का प्रबंध करो!

10. ट्रांसजेंडर के साथ भेदभाव बन्द करो! उनकी सुरक्षा और राशन की व्यवस्था करो।

AIPWA
Coronavirus
COVID-19
Lockdown
CPI
CPIM
Quarantine
Bihar
Hunger Crisis
poverty

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • local body poll
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    आगामी जीटीए चुनावों पर टिकी है दार्जिलिंग हिल्स की राजनीति
    23 Nov 2021
    भाजपा और उसके सहयोगी जीएनएलएफ के विरोध के साथ यहाँ पर चुनाव एक संवेदनशील मुद्दा बन सकता है, जो इसके ‘स्थायी राजनीतिक समाधान’ के पक्ष में हैं।
  • attack on journalist
    एम.ओबैद
    बिहारः एक महीने के भीतर एक और पत्रकार पर जानलेवा हमला, स्थिति नाज़ुक 
    23 Nov 2021
    बिहार में एक सप्ताह पहले ही मधुबनी ज़िले के बेनीपट्टी इलाक़े में एक न्यूज़ पोर्टल से जुड़े पत्रकार बुद्धिनाथ झा की बदमाशों ने हत्या कर, उनके शव को जला दिया था। वे बेनीपट्टी में फ़र्ज़ी नर्सिंग होम का…
  • Death of 3 dalit girls
    विजय विनीत
    पड़ताल: जौनपुर में 3 दलित लड़कियों की मौत बनी मिस्ट्री, पुलिस, प्रशासन और सरकार सभी कठघरे में
    23 Nov 2021
    परिजन इसे हत्या का मामला बता रहे हैं और पुलिस आत्महत्या का। अगर यह हत्या है तब भी कई सवाल हैं जिनका जवाब पुलिस को ढूंढना होगा और अगर यह वाकई ग़रीबी की वजह से की गईं आत्महत्याएं हैं तब तो यह ज़िला…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक : किसान एकता का असर
    23 Nov 2021
    किसान आंदोलन की वजह से तीनों विवादित कृषि कानून वापस हो गए हैं और अब किसान एकता और मजबूत होती जा रही है। यही वजह है कि किसानों के अल्टीमेटम के बाद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय टेनी ने लखीमपुर में…
  • Tripura
    संदीप चक्रवर्ती
    त्रिपुरा; यदि मतदान निष्पक्ष रहा तो बीजेपी हारेगी : जितेंद्र चौधरी 
    23 Nov 2021
    नगरपालिका चुनावों से पहले और इस पूर्वोत्तर राज्य में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के बाद, माकपा और आदिवासी नेता तथा पूर्व लोकसभा सांसद का कहना है कि त्रिपुरा के लोग भाजपा से नाराज़ हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License