NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
समाज
भारत
राजनीति
‘सुशासन राज’ में प्रशासन लाचार है, महिलाओं के खिलाफ नहीं रुक रही हिंसा!
मुज़फ़्फ़रपुर जिले के एक गांव में पंचायत ने डायन होने के नाम पर तीन औरतों को क्रूर सजा सुनाई गई। जिसके चलते औरतों के सिर मुंडवा कर, उनहें  मल-मूत्र पिलाया गया। अर्धनग्न हालात में पूरे गांव में उनसे चक्कर लगवाए गए।
सोनिया यादव
07 May 2020
 महिलाओं के खिलाफ नहीं रुक रही हिंसा
'प्रतीकात्मक तस्वीर' फोटो साभार: हिंदुस्तान टाइम्स

“क्या करते अगर चुपचाप देखते नहीं तो, हमें भी तो अपनी जान प्यारी है। ऐसे मामलों के बीच में अगर कोई कुछ बोलता है, तो उसे भी गांव में मार दिया जाता है।”

ये डरे हुए शब्द बिहार के हथौड़ी इलाके के एक गांव में रहने वाले शख्स हरिया (बदला हुआ नाम) के हैं। हाल ही में हरिया के गांव में भीड़ के सामने ही कुछ लोगों ने तीन बूढ़ी औरतों के साथ अमानवीय व्यवहार किया। औरतों को बुरी तरह मारा-पीटा, उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए। इसके बाद भी अत्याचार यहीं नहीं रुका उन तीनों औरतों के सिर मुंडवा कर, उनहें  मल-मूत्र पिलाया गया। अर्धनग्न हालात में पूरे गांव में उनसे चक्कर लगवाए गए। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पुछताछ जारी है।

क्या है पूरा मामला?

बिहार की राजधानी पटना से महज 75 किलोमीटर दूर जिला मुज़फ़्फ़रपुर के एक गांव दकरामा में सोमवार, 4 मई को पंचायत ने गांववालों के अंधविश्वास के आधार पर एक क्रूर फैसला सुनाया। दरअसल गांव वालों को शक था कि ये तीनों औरतें डायन हैं और जादू-टोना करती हैं। पंचायत सभा में औरतों को ऐसी सजा दी गई कि मानवता शर्मसार हो जाए। इस घटना के बाद पुलिस तब जागी जब सोशल मीडिया पर वारदात का वीडियो वायरल हो गया।

इस वीडियो में तीन महिलाओं के कपड़े फंटे हुए, उनके बालों को काटते हुए, उनके साथ मार पीट और उन्हें जबरन मैला पिलाते कुछ लोग नज़र आ रहे हैं। वीडियो में दिख रहा है कि तीनों औरतें लाचार-सी बैठी हैं। आस-पास खड़ी भीड़ शोर कर रही है, उनकी हंसी उड़ा रही है। औरतें खुद को निर्दोष बताने की भी कोशिश कर रही हैं, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। भीड़ से एक आदमी उनकी मदद करने के लिए सामने आया, तो उसे भी वही सज़ा सुना दी गई, जो इन औरतों को सुनाई गई थी। बाकि जमा हुए लोग तमाशबीन बनकर औरतों पर जुल्म होते देखते रहे।

इस पूरी घटना को आंखों से देखने वाले हरिया बताते हैं, “इन तीन औरतों में से केवल एक ही हमारे गांव की है, बाकि शायद उसकी बहन हैं जो एक-दो दिन पहले ही गांव में आईं थी। इसी दौरान गांव में अचानक एक-दो बच्चों की मौत हो गई थी। क्योंकि ये औरतें ओझा जी के परिवार से हैं तो हमें ऐसा सुनने में आया कि शायद इन महिलाओं ने बच्चों की झाड़-फूंक की थी और इसलिए इन पर बच्चों की मौत का आरोप लगाकर गांव में पंचायत बुलाई गई।”

अब तक क्या कार्रवाई हुई है?

इस घटना के बारे में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) अमितेश कुमार ने बताया कि घटना के दकरामा गांव की है और पुलिस इस पर कार्रवाई कर रही है। अभी तक कुल 10 लोगों को प्राथमिकी दर्ज की गई जिसमें से नौ लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

अमितेश कुमार के अनुसार, “फरार आरोपी को हम पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस मामले में किसी गांववाले की तरफ से पुलिस को कोई जानकारी नहीं दी गई। किसी ने कोई शिकायत ही नहीं की, न तो पीड़िता ने और न ही ग्रामीणों ने। मीडिया की तरफ से ही पुलिस को खबर मिली है, उसी आधार पर छानबीन की जा रही है।

इस मामले पर एडीजी पटना जितेंद्र कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "मुज़फ़्फ़रपुर में महिलाओं के साथ हुए अमानवीय व्यवहार के मामले को पुलिस ने तुरंत संज्ञान में लिया है। 15 से अधिक व्यक्तियों के खिलाफ नामज़द रिपोर्ट दर्ज़ करके, 9 व्यक्तियों की अभी तक गिरफ्तारी किया जा चुका है। ये 9 वे लोग थे जो इस कांड को करने में सक्रिय रूप से शामिल थे।"

बता दें कि बिहार में ऐसे मामलों की बढ़ोत्तरी पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने चिंता व्यक्त की है। आयोग के अनुसार राज्य में डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम, 1999 लागू होने के बावजूद डायन प्रथा के नाम पर हिंसा नहीं रुक रही।

आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए बिहार के पुलिस महानिदेशक गुप्तेशवर पांडे और पुलिस आयुक्त मुज़फ़्फ़रपुर को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई और डीटेल एक्शन रिपोर्ट की मांग की है।

महिला विरोधी होने के साथ-साथ मानवाधिकारों का हनन

महिला अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद करने वाली एक स्थानीय गैर सरकारी संगठन से जुड़ी राखी विश्वास बताती हैं, “महिलाओं के साथ ऐसा अत्याचार महिला विरोधी होने के साथ-साथ मानवाधिकारों का भी सीधा-सीधा हनन है। नीतीश सरकार गर्व से कहती है कि ये सुशासन राज है तो क्या सुशासन में प्रशासन इस तरह होती है कि लॉकडाउन के बीच जब जगह-जगह पुलिस तैनात है तब बिहार के एक प्रसिद्ध जिले में इतनी बड़ी घटना को इतनी आसानी से अंजाम दे दिया जाता है।”

पेशे से वकील और सामाजिक कार्यकर्ता महेश मित्रा कहते हैं, “इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए साल 1999 में बिहार में  प्रिवेंशन ऑफ विचक्राफ्ट प्रैक्टिस ऐक्ट बना था, जिसके तहत यह प्रावधान किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को डायन के रूप पहचानकर उसे शारीरिक या मानसिक यातना देता है उसे कम से कम छह महीने की सजा हो सकती है। लेकिन हैरानी है कि कानून के बावजूद ऐसी घटनाएं बदस्तूर जारी हैं।"

इसे भी पढ़ें : ‘ये कैसा सुशासन है जहां महिलाएं अस्पताल में भी सुरक्षित नहीं हैं!’

डायन प्रथा से हुई मौतें

गौरतलब है कि देश में डायन बताकर महिलाओं पर अत्याचार की खबरें आए दिन सुर्खियों में रहती हैं। बिहार, झारखंड, राजस्थान, ओडिशा समेत देश के कई राज्यों में अभी भी इस प्रथा का जोर-शोर से प्रचलन जारी है। इस प्रथा का शिकार ज्यादातर ग़रीब, कमज़ोर एवं विधवा/एकल महिलाएं ही होती हैं। इसी साल जनवरी (2020) में आई राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो की रिपोर्ट (NCRB) के अनुसार वर्ष 2018 में डायन बताकर कुल 63 महिलाओं की हत्याएं हुई थीं। वहीं संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 1987 से लेकर 2003 तक कुल 2,556 महिलाओं की हत्या डायन के शक पर की जा चुकी है। इसमें यह भी बताया गया है कि साल में कम से कम 100 से लेकर 240 महिलाएं डायन बताकर मार दी जाती हैं।

जानी-मानी लेखिका ममता महरोत्रा अपनी किताब महिला अधिकार और मानव अधिकार में लिखती हैं कि इस समाज में डायन प्रथा के नाम पर हिंसा के साथ-साथ उस महिला को बराबरी के अधिकार, भेदभाव से बचाव, जीवन जीने के अधिकार, क्रूरता और अमानवीय व्यवहार, सुरक्षा के अधिकार, अच्छे घर में रहने के अधिकार से भी वंचित कर दिया जाता है जिसे डायन मान लिया जाता है। इस प्रथा में संपत्ति हड़पने, स्त्री पर यौन अधिकार या किसी अन्य इरादे से औरतों के साथ पुरूषों का समूह पाश्विक बर्ताव करता है। कभी उन पर किसी मृत बच्चे को ज़िंदा करने का दबाव बनाकर उनके साथ अमानवीय बर्ताव किया जाता है।

इसे भी पढ़ें : लॉकडाउन के बीच भी नहीं थम रही यौन हिंसा, ललितपुर में नाबालिग़ से दुष्कर्म की कोशिश

Bihar
Good Governance
crimes against women
gender discrimination
patriarchal society
black magic
violence against women

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

पिता के यौन शोषण का शिकार हुई बिटिया, शुरुआत में पुलिस ने नहीं की कोई मदद, ख़ुद बनाना पड़ा वीडियो

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

बिहार: 8 साल की मासूम के साथ बलात्कार और हत्या, फिर उठे ‘सुशासन’ पर सवाल

मध्य प्रदेश : मर्दों के झुंड ने खुलेआम आदिवासी लड़कियों के साथ की बदतमीज़ी, क़ानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

चारा घोटाला: सीबीआई अदालत ने डोरंडा कोषागार मामले में लालू प्रसाद को दोषी ठहराया

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'

यूपी: बुलंदशहर मामले में फिर पुलिस पर उठे सवाल, मामला दबाने का लगा आरोप!


बाकी खबरें

  • Uttarakhand
    न्यूज़क्लिक टीम
    "रोज़गार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के अभाव में पहाड़ से पलायन जारी"
    13 Feb 2022
    उत्तराखंड राज्य बने अब 22 साल हो गए हैं, जब यह राज्य बना था तब लोगों ने उम्मीद की थी कि इससे पहाड़ आबाद होंगे। परन्तु आज पहाड़ आबाद नहीं वीरान हो रहे हैं। उत्तराखंड सरकार ने खुद अपनी कई रिपोर्ट्स में…
  • itihas ke panne
    न्यूज़क्लिक टीम
    आखिर क्यों है भाजपा के संकल्प पत्र में 'लव जिहाद' पर इतना जोर ?
    13 Feb 2022
    हाल ही में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड चुनावों के लिए भाजपा ने संकल्प पत्र जारी किया जिसमे लव जिहाद पर ज़्यादा जोर दिया गया है। आखिर क्यों है भाजपा के संकल्प पत्र में 'लव जिहाद' पर इतना जोर ? जानने की…
  • ch
    मुकुंद झा, अविनाश सौरव
    उत्तराखंड चुनाव : डबल इंजन सरकार में भी ऐसा गांव जो दवा-पानी और आटे तक के लिए नेपाल पर निर्भर
    13 Feb 2022
    एक गांव है थपलियालखेड़ा जो चम्पावत ज़िले के नेपाल-भारत सीमा पर स्थित है। ये गांव तीन तरफ से नेपाल सीमा से घिरा हुआ है और एक तरफ भारत का टनकपुर डैम है। इस गांव के लोग ज़रूरी सुविधाओं के लिए पूरी तरह से…
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    फ़ैज़: हम ने इस इश्क़ में क्या खोया है क्या सीखा है... आजिज़ी सीखी ग़रीबों की हिमायत सीखी
    13 Feb 2022
    ‘इतवार की कविता’ में आज फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की 111वीं सालगिरह और प्यार के दिन वैलेंटाइन्स डे की पूर्व बेला पर पढ़ते हैं फ़ैज़ की यह नज़्म जिसमें वह बात कर रहे हैं अपने रक़ीब से...
  • voting
    रवि शंकर दुबे
    यूपी का रण, दूसरा चरण: मुस्लिम बाहुल्य इस क्षेत्र में किसका जनाधार?
    13 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में दूसरे चरण में 9 ज़िलों की 55 सीटों पर सोमवार, 14 फरवरी को वोट डाले जाएंगे। इन सभी सीटों पर मुस्लिम वोटरों की आबादी अच्छी-ख़ासी है, ऐसे में देखना होगा कि भारतीय जनता पार्टी कैसा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License