NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
प्रशासक प्रफुल्ल के पटेल ने कभी भी द्वीप की संस्कृति को समझने की कोशिश नहीं की: लक्षद्वीप सांसद
सांसद फैज़ल ने कहा, “अगर केंद्र प्रफुल्ल पटेल का समर्थन करता है, तो हमारे लिए अगला विकल्प हस्तक्षेप के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना है। हम केंद्र को हमारी आवाज सुनाने और अपनी जायज मांगों पर विचार के लिए राजनीतिक रूप से इसका विरोध करना जारी रखेंगे।”
भाषा
31 May 2021
mp faizal
लक्षद्वीप सांसद मोहम्मद फैज़ल। फोटो साभार: outlookindia

नयी दिल्ली:  लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैज़ल ने आरोप लगाया कि प्रशासक प्रफुल्ल के पटेल पिछले पांच महीनों में सिर्फ 15-20 दिन लक्षद्वीप में रहे होंगे और उन्होंने द्वीपवासियों की संस्कृति और पारिस्थितिकी को समझने की कोशिश नहीं की।

फैज़ल ने जोर दिया कि अगर केंद्र द्वीपसमूह से जुड़े विवादास्पद कानूनों को आगे बढ़ाता है तो कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया जाएगा।

प्रशासक के तौर पर पटेल को वापस बुलाने की मांग कर रहे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता ने कहा कि मसौदा कानूनों का लक्षद्वीप समाज का हर तबका विरोध कर रहा है, यहां तक कि स्थानीय भाजपा नेता भी इसके खिलाफ हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि मसौदा कानून पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील द्वीपों पर विकास कार्य करने के लिए उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देशों का खुला उल्लंघन है।

पिछले साल दिसंबर में दिनेश्वर शर्मा के निधन के बाद पटेल को लक्षद्वीप के प्रशासक का प्रभार दिया गया था।

फैज़ल ने कहा कि पटेल स्थानीय लोगों या यहां तक कि उनके प्रतिनिधियों से सलाह-मशविरा किए बिना "वन-मैन शो" करने की कोशिश कर रहे हैं।

फैज़ल ने फोन पर पीटीआई-भाषा को दिए साक्षात्कार में कहा, “वह (पटेल) पदभार संभालने के पांच महीने पूरे कर रहे हैं। इन पांच महीनों में द्वीपों पर उनकी मौजूदगी 15-20 दिन रही होगी। वह कभी भी द्वीप पर लोगों की चिंता, उनकी विरासत और संस्कृति को समझने के लिए नहीं गए।”

लोकसभा सांसद ने कहा कि पटेल ऐसे कानूनों पर जोर दे रहे हैं, जिससे द्वीपवासियों में रोष है, जिनमें से अधिकांश मुस्लिम हैं।

इन कानूनों में गोहत्या पर प्रतिबंध, पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों के लिए दो-बच्चे का मानदंड और रिसॉर्ट में शराब परोसने की अनुमति शामिल है।

‘पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ ने कहा कि दो-बच्चों का प्रस्तावित मानदंड "आत्मघाती" है और सभी तर्कों के विपरीत है। एनजीओ ने रेखांकित किया कि 2019-2020 के राष्ट्रीय स्वास्थ्य और परिवार सर्वेक्षण के अनुसार, लक्षद्वीप की कुल प्रजनन दर 1.4 है, जो राष्ट्रीय औसत 2.2 से बहुत कम है और चिंता का विषय है।

फैज़ल ने कहा कि लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण नियमन (एलडीएआर) के मसौदे और लक्षद्वीप समाज विरोधी गतिविधियां निवारण नियमन (एलपीएएसएआर) को लेकर भी लोगों में आशंका है।

एलडीएआर का उद्देश्य द्वीपों पर शहरों के विकास की निगरानी करना है और इसके तहत भूमि को अधिग्रहण करने और इस्तेमाल करने के तरीकों में जबर्दस्त बदलाव किए जा सकते हैं।

एलपीएएसएआर लोक व्यवस्था से संबंधित किसी भी तरीके का नुकसानदेह कार्य करने से रोकने के लिए किसी व्यक्ति को एक वर्ष तक हिरासत में रखने की शक्ति प्रदान करता है। स्थानीय लोगों के एक समूह ने अदालत में पहले ही मसौदा कानूनों को चुनौती दे दी है।

फैज़ल ने कहा, “अगर केंद्र प्रफुल्ल पटेल का समर्थन करता है, तो हमारे लिए अगला विकल्प हस्तक्षेप के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना है। हम केंद्र को हमारी आवाज सुनाने और अपनी जायज मांगों पर विचार के लिए राजनीतिक रूप से इसका विरोध करना जारी रखेंगे।”

फैज़ल के मुताबिक, लक्षद्वीप जैसी जगह में प्रशासक अहम भूमिका निभाते हैं। अगर कोई अधिकारी गलती करता है, तो लोग अंतिम उपाय के तौर पर प्रशासक के पास ही जाते हैं।

उन्होंने कहा, “"लेकिन ये सारे ‘अत्याचार’ उस कुर्सी से हो रहे हैं और इससे लोगों को तकलीफ हो रही है।”

फैज़ल ने कहा, “उनके जीवन में ऐसा प्रशासक कभी नहीं आया। और केंद्र को दोषी ठहराया जा रहा है। केंद्र को इस पर तत्काल फैसला लेना चाहिए।”

प्रशासक के इस कदम की कई विपक्षी दलों ने आलोचना की है। लक्षद्वीप के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए, केरल विधानसभा ने सोमवार को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया और पटेल को वापस बुलाने की मांग की है।

फैजल ने कहा कि राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने भी इस मुद्दे पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात का समय मांगा है।

उन्होंने रेखांकित किया कि पटेल का नाम दादरा और नगर हवेली के सांसद मोहन डेलकर की खुदकुशी मामले में सामने आया था। पटेल उस केंद्रशासित प्रदेश के भी प्रशासक हैं।

मुंबई पुलिस ने डेलकर की आत्महत्या के बाद पटेल समेत आठ लोगों के खिलाफ खुदकुशी के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था।

फैज़ल ने कहा, “मुझे नहीं पता कि केंद्र ऐसे व्यक्ति का समर्थन क्यों कर रहा है जो उसकी छवि खराब कर रहा है। वे क्यों बदनाम हो रहे हैं।”

Mohammed Faizal P. P
Lakshadweep
Praful Khoda Patel

Related Stories

भारत में सबसे कम जेल में रहने की दर होने के बावजूद लक्षद्वीप को पांचवीं जेल की आवश्यकता क्यों है?

लक्षद्वीप में विरोध प्रदर्शन हुआ तेज़, द्वीपसमूह में पहली बार लगा देशद्रोह का आरोप

किसानों के आंदोलन की ताकत,लक्षद्वीप और अन्य

लक्षद्वीप ने अपनी आवाज़ अमित शाह को सुनाई, न माने तो जारी रहेगी लड़ाई

लक्षद्वीप के प्रशासक को वापस बुलाए जाने की मांग करने वाला प्रस्ताव केरल विधानसभा में पारित

लक्षद्वीप के ‘आघात उपचार’ के पीछे केंद्र की भूमि हथियाने वाली नीति है  

लक्षद्वीप : एक समय की बात है...


बाकी खबरें

  • एम. के. भद्रकुमार
    भारत को अब क्वाड छोड़ देना चाहिए! 
    15 Mar 2022
    राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जेक सुलिवन के बयान में अमेरिका के बढ़ते खतरे का भारत की रक्षा क्षमताओं और उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा पर महत्त्वपूर्ण असर पड़ेगा। 
  • Kashmir press club
    राज कुमार
    जम्मू-कश्मीर में मीडिया का गला घोंट रही सरकार : प्रेस काउंसिल
    15 Mar 2022
    ग़ौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने सितंबर 2021 में प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया को एक पत्र लिखा था और मांग की थी कि काउंसिल एक फ़ैक्ट फ़ाइंडिंग टीम भेजकर जम्मू-कश्मीर में…
  • Jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: हेमंत सरकार ने आदिवासी समूहों की मानी मांग, केंद्र के ‘ड्रोन सर्वे’ कार्यक्रम पर लगाईं रोक
    15 Mar 2022
    ‘ड्रोन सर्वे’ और ‘ज़मीन की डिजिटल मैपिंग’ कार्यक्रम के खिलाफ आवाज़ उठा रहे सभी आदिवासी संगठनों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।
  • अजय कुमार
    रूस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध का भारत के आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
    15 Mar 2022
    आर्थिक जानकारों का कहना है कि सरकार चाहे तो कच्चे तेल की वजह से बढ़े हुए ख़र्च का भार ख़ुद सहन कर सकती है।
  • रौनक छाबड़ा
    ईपीएफओ ब्याज दर 4-दशक के सबसे निचले स्तर पर, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने आम हड़ताल से पहले खोला मोर्चा 
    15 Mar 2022
    ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड ने शनिवार को वित्त वर्ष 2021-22 के लिए अपनी मौजूदा ब्याज दर को 8.5% से घटाकर 8.1% करने की सिफारिश की है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License