NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अफ़ग़ानिस्तान : लगातार बढ़ रहे नागरिकों और फ़ौज पर हमले
देश में 19 साल से चल रही जंग में पिछले हफ़्ते को सबसे ख़ूनी बताया जा रहा है।
पीपल्स डिस्पैच
23 Jun 2020
अफ़ग़ानिस्तान

इस महीने के अंत में कतर में होने वाली अंतर-अफगान शांति वार्ता के बीच, अशरफ गनी की अगुवाई वाली अफगान सरकार ने नोट किया है कि पिछले हफ्ते देश में 19 साल के युद्ध में सबसे अधिक खून बहा था, जो 422 हमलों और 700 से अधिक हताहतों के विद्रोही तालिबान द्वारा हुआ था।

राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अनुसार, 32 प्रांतों में हमले किए गए जिनमें 291 सरकारी सैनिक मारे गए और 550 गंभीर रूप से घायल हुए।

राष्ट्रीय सेक्युरिटी काउंसिल के प्रवक्ता जाविद फ़ैसल ने Tolo न्यूज़ को बताया, "हिंसा को कम करने के लिए तालिबान की प्रतिबद्धता निरर्थक है, और उनकी कार्रवाई शांति पर उनकी बयानबाजी के साथ असंगत है।"

अफ़ग़ानी संसद के इंटरनल सिक्योरिटी कमीशन के हेड ख़ान आग़ा रेज़ाई ने कहा, "इस माहौल में असुरक्षा है, युद्ध है, राजमार्ग ढहने के कगार पर हैं, आतंक है, अपहरण है।"

राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद द्वारा किए गए दावों को खारिज करते हुए, विद्रोही तालिबान ने एक बयान में सुरक्षा तंत्र पर हमलों को तेज करने के इन आरोपों से इनकार किया है कि "ऐसी रिपोर्टें वार्ता प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकती हैं"।

देश भर में घातक हमलों की श्रृंखला के बीच, नवीनतम काबुल के देह सब्ज़ जिले में 22 जून की सुबह किया गया, जिसमें अटॉर्नी जनरल कार्यालय के पांच कर्मचारियों ने अपनी जान गंवा दी। हमले के समय ये सभी एक वाहन में यात्रा कर रहे थे।

UNAMA
Afghanistan
COVID-19
Coronavirus

Related Stories

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

महामारी के दौर में बंपर कमाई करती रहीं फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां

विश्व खाद्य संकट: कारण, इसके नतीजे और समाधान

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां

कोविड मौतों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर मोदी सरकार का रवैया चिंताजनक

महंगाई की मार मजदूरी कर पेट भरने वालों पर सबसे ज्यादा 

भोजन की भारी क़िल्लत का सामना कर रहे दो करोड़ अफ़ग़ानी : आईपीसी

जनवादी साहित्य-संस्कृति सम्मेलन: वंचित तबकों की मुक्ति के लिए एक सांस्कृतिक हस्तक्षेप

कोरोना अपडेट: देश में एक हफ्ते बाद कोरोना के तीन हज़ार से कम मामले दर्ज किए गए

दिल्लीः एलएचएमसी अस्पताल पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया का ‘कोविड योद्धाओं’ ने किया विरोध


बाकी खबरें

  • भाषा
    श्रीलंका में हिंसा में अब तक आठ लोगों की मौत, महिंदा राजपक्षे की गिरफ़्तारी की मांग तेज़
    10 May 2022
    विपक्ष ने महिंदा राजपक्षे पर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हमला करने के लिए सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को उकसाने का आरोप लगाया है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिवंगत फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी को दूसरी बार मिला ''द पुलित्ज़र प्राइज़''
    10 May 2022
    अपनी बेहतरीन फोटो पत्रकारिता के लिए पहचान रखने वाले दिवंगत पत्रकार दानिश सिद्दीकी और उनके सहयोगियों को ''द पुल्तिज़र प्राइज़'' से सम्मानित किया गया है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर खीरी हत्याकांड: आशीष मिश्रा के साथियों की ज़मानत ख़ारिज, मंत्री टेनी के आचरण पर कोर्ट की तीखी टिप्पणी
    10 May 2022
    केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के आचरण पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि वे इस घटना से पहले भड़काऊ भाषण न देते तो यह घटना नहीं होती और यह जघन्य हत्याकांड टल सकता था।
  • विजय विनीत
    पानी को तरसता बुंदेलखंडः कपसा गांव में प्यास की गवाही दे रहे ढाई हजार चेहरे, सूख रहे इकलौते कुएं से कैसे बुझेगी प्यास?
    10 May 2022
    ग्राउंड रिपोर्टः ''पानी की सही कीमत जानना हो तो हमीरपुर के कपसा गांव के लोगों से कोई भी मिल सकता है। हर सरकार ने यहां पानी की तरह पैसा बहाया, फिर भी लोगों की प्यास नहीं बुझ पाई।''
  • लाल बहादुर सिंह
    साझी विरासत-साझी लड़ाई: 1857 को आज सही सन्दर्भ में याद रखना बेहद ज़रूरी
    10 May 2022
    आज़ादी की यह पहली लड़ाई जिन मूल्यों और आदर्शों की बुनियाद पर लड़ी गयी थी, वे अभूतपूर्व संकट की मौजूदा घड़ी में हमारे लिए प्रकाश-स्तम्भ की तरह हैं। आज जो कारपोरेट-साम्प्रदायिक फासीवादी निज़ाम हमारे देश में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License