NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कृषि
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार
किसान नेता महेश दत्त पाराशर कहते हैं कि 50 वर्षों के लम्बे अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि यह शक्कर कारखाना सौ फ़ीसदी सफलतापूर्वक चलेगा। किसान इसे जीत की पहली कड़ी मान रहे हैं।
रूबी सरकार
19 Apr 2022
kisan

जनवरी महीने से लगातार कैलारस-मुरैना जिले के किसान यहां के एक मात्र शक्कर कारखाने को बेचने से रोकने और इसे सुचारू रूप से चलाने को को लेकर आंदोलनरत थे। यह कारखाना राजमार्ग 552 पर स्थित है और इसका परिसर 300 बीघे में फैला है। मध्यप्रदेश सरकार इसे बेचने के क्रम में पहले पहले 8 फरवरी, 22 को कारखाने की मशीन की नीलामी की। राज्य सरकार ने 2 करोड़, 78 लाख मूल्य तय किया था, जबकि मुंबई की एक बड़ी कंपनी ने इन्हीं मशीनों की 13 करोड़ रुपए की बोली लगाकर इसे अंतिम रूप दिया था। लेकिन किसानों के आंदोलन के चलते सरकार को इसे रोकना पड़ा। प्रदेश सरकार ने एक आदेश जारी कर इस पर अंतिम निर्णय लेने पर रोक लगा दी है। किसान नेता महेश दत्त पाराशर कहते हैं कि 50 वर्षों के लम्बे अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि यह शक्कर कारखाना सौ फीसदी सफलतापूर्वक चलेगा। किसान इसे जीत की पहली कड़ी मान रहे हैं।

कभी डाकू ग्रस्त क्षेत्र चंबल घाटी सन्नाटा पसरा था। यहां से गुजरने से भी लोग डरते थे। 60 के दशक में भूदान आंदोलन के जनक बिनोवा भावे, जयप्रकाश नारायण और सुब्बाराव ने यहां डाकुओं के हृदय परिवर्तन करने का काम शुरू किया था। उन्हें सफलता मिली। बहुत सारे बागियों ने आत्मसमर्पण किया, जिसकी 50वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। डाकुओं के आत्मसमर्पण की यह घटना  वर्ष 1971-72 की है। इसके बाद इस क्षेत्र में विकास और आजीविका के प्रयास शुरू हुए। इसी कड़ी में मुरैना जिले के जौरा तहसील से 20 किलोमीटर दूर दी मुरैना सहकारी शक्कर कारखाना लिमिटेड का  पंजीयन वर्ष 1966 में हुआ और कारखाना 1971 में  बनकर तैयार हुआ में। उस समय कारखाने के लिए भिंड, मुरैना और शिवपुर के 23 हजार किसानों के 240 सोसाइटी ने करीब 5 करोड़ रुपए दिए। इसके बाद 5 करोड़ ऋण और 5 करोड़ राज्य सरकार के सहयोग के रूप में दिए। कुल 15 करोड़ रुपए लागत से यह कारखाना शुरु हुआ। इसके बनने से इस क्षेत्र में खुशहाली आई, क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिला। अधिकतर किसान गन्ना बोने लगे। साल भर में यह शक्कर कारखाना 4 करोड़ रुपए के मुनाफे में आ गया। बावजूद इसके भाजपा सरकार वर्ष 2011 में इसे बंद करने पर आमादा हो गई। 

यहां की जमीन व मशीन बेचकर पैसे कमाने की जुगत में लग गई। कारखाने को बचाने के लिए किसान.मजदूर , राजनीतिक दलों के नेता व जनता पिछले चार महीनों से  आंदोलनरत हैं।  आंदोलन को गति पकड़ते देख मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए। बेचने के क्रम में पहले 8 फरवरी,22 को कारखाने की मशीनों की नीलामी शुरू हुई। राज्य सरकार ने इन मशीनों का मूल्य 2 करोड़, 78 लाख तय किया था, जबकि मुंबई की एक बड़ी कंपनी ने इन्हीं मशीनों पर 13 करोड़ रुपए की बोली लगा दी।  लेकिन किसानों के आंदोलन के चलते प्रदेश सरकार को इसे रोकना पड़ा। किसानों की एकजुटता को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सहकारी शक्कर कारखाने को बेचने का आदेश पर अंतिम निर्णय लेने पर रोक लगा दी है। 

किसान नेता महेश दत्त पाराशर कहते हैं कि 50 वर्षों के लम्बे अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि यह शक्कर कारखाना  सौ फीसदी सफलतापूर्वक चलेगा। किसान इसे जीत की पहली कड़ी मान रहे हैं। पराशर का कहना है कि  15 करोड़ रुपए की लागत से बने इस कारखाने में भिंड, मुरैना और शिवपुर के 23 हजार किसानों ने जमीन, गहने बेचकर 5 करोड़ रुपए इकट्ठे किए थे। सभी इस कारखाने में  शेयर होल्डर हैं। गन्ना इकट्ठा करने के लिए कई जिलों में 65 कलेक्शन सेंटर बनाए गए थे। सबलगढ़, विजयपुर जौरा और कैलारस, ग्वालियर में बड़ी संख्या में किसान इस कारखाने के लिए गन्ना बोने लगे थे। 1500 से अधिक लोगों सीधे कारखाने में रोजगार से जुड़े थे। इसके अलावा गन्ना कलेक्शन सेंटरों और ढुलाई, तुलाई आदि में काफी मजदूरों की आजीविका चल रही थी  करीब 50 हजार किसान परिवार सीधे इससे जुड़े हैं।

कारखाना लगने से उत्साहित किसान गन्ना बोने लगे

पूर्व विधायक महेश दत्त मिश्र बताते हैं कि हमें वह दिन भी यादव है, जब  आस.पास के क्षेत्र में गन्ना न मिलने के कारण चुकंदर से 8 किलो गुड़ निकाला गया था, तब किसानों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस कामयाबी से उत्साहित किसानों ने अपने खेतों में गन्ना बोने लगे थे। इसी गन्ने को कारखाने में सप्लाई करने लगे। इसके बाद सालभर में यह  कारखाना आठ करोड़ कमा कर देने लगा। इससे क्षेत्र का विकास हो रहा था और किसानों की माली हालत सुधर रही थी। अचानक 2008 में भाजपा सरकार को क्या सूझी कि उसने इस कारखाने को घाटे का सौदा बताकर बंद करने का निर्णय ले लिया। शेयर होल्डर किसानों ने इसका विरोध किया, तो साधारण सभा की बैठक बुला ली गई और प्रोसेसिंग में किसानों की बात न रखते हुए अपने मन का निर्णय ले लिया। इसके बाद  किसानों ने सभी राजनीतिक दलों और संगठनों के साथ बैठक कर इसे बंद करने का विरोध शुरू कर दिया, वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार ने वर्ष 2011 में हठधर्मिता से इसे बंद करने पर मोहर लगा दी। जबकि 2018 के विधानसभा चुनाव व 2019 के लोकसभा चुनाव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शक्कर कारखाने को चलाने का किसानों और जनता से चुनावी वादा किया। भाजपा शासन के केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी जौरा की आम सभा में कारखाने को चलाने का चुनावी वादा किया था। चुनाव जीतने के बाद सिंधिया को यहां पब्लिक मीटिंग में आना था, लेकिन किसान आंदोलन को देखते हुए उन्होंने अपना कार्यक्रम निरस्त कर दिया।  

सिर्फ मशीनों की लगी 13 करोड़ रुपए की बोली

दरअसल इस कारखाने का परिसर 300 बीघा में फैला है। 200 बीघे में कारखाना और 100 बीघा कृषि भूमि। मध्यप्रदेश किसान सभा के उपाध्यक्ष अशोक तिवारी ने बताया कि  कारखाना राष्ट्रीय राजमार्ग 552 पर स्थित है। यहां की जमीन का मूल्य किसी बड़े शहरों के मुकाबले कम नहीं है। राज्य सरकार 300 बीघा जमीन प्लाटिंग कर किसी बिल्डर को बेचना चाहती है। भाजपा को माफियाओं की चिंता है, जनता की नहीं। कारखाना बंद होने का खामियाजा यहां के किसान भुगत रहे हैं। उनके पैसे चले गए, उन्हें  गन्ने का बकाया नहीं मिला। आर्थिक नुकसान के चलते किसानों ने गन्ना बोना बंद कर दिया। मजदूरों की तनख्वाह नहीं मिली। राज्य सरकार ने एक पैसा नहीं दिया। पीएफ जमा न होने से कामगारों को पेंशन नहीं मिला। आजीविका व चिकित्सा के अभाव 60 से अधिक लोग दम तोड़ चुके हैं। किसान नेता गयाराम सिंह धाकड़ ने बताया कि कारखाने को बचाने के लिए किसान.मजदूर व जनता का आंदोलन चलता रहेगा।

50 हजार के करीब किसानों की आर्थिक स्थिति में हुआ था सुधार

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी जौरा के अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह सिकरवार बताते हैं कि हमारा आंदोलन सहकारी स्तर पर किसानों को शेयर होल्डर बनाकर निर्वतमान कांग्रेस सरकार ने ग्वालियर चंबल अंचल की समृद्धि के लिए शक्कर कारखाने को स्थापित किया था, इसे बचाने के लिए है और यह तब तक चलेगा, जब तक सरकार अपने निर्णय को वापस नहीं लेती तथा इसे पुनः शुरू नहीं करवाती।  शक्कर कारखाना स्थापित होने के बाद ग्वालियर चंबल अंचल के 50 हजार के करीब परिवार गन्ने की खेती करने लगे थे, इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ था। मुरैना ग्वालियर का बाजार गुलजार रहता था। कैलारस शक्कर कारखाने की शक्कर की मिठास की गूंज पूरे देश में थी।

बहरहाल कैलारस शक्कर कारखाना बचाओ आंदोलन आज भी जारी है। इस आंदोलन में अब कई सामाजिक संगठन, राजनीतिक दल, बुद्धिजीवी, जनता सब जुड़ चुके हैं। सभी इसे दोबारा शुरू कराने और किसानों व कर्मचारियों का बकाया भुगतान तथा अंश धारकों का नामांतरण करने जैसे कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

(रूबी सरकार स्वतंत्र पत्रकार हैं।

Madhya Pradesh
Shivraj Singh Chauhan
BJP
farmers
MP Farmers

Related Stories

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़

MSP पर लड़ने के सिवा किसानों के पास रास्ता ही क्या है?

यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित

यूपी चुनाव : किसानों ने कहा- आय दोगुनी क्या होती, लागत तक नहीं निकल पा रही

उप्र चुनाव: उर्वरकों की कमी, एमएसपी पर 'खोखला' वादा घटा सकता है भाजपा का जनाधार

केंद्र सरकार को अपना वायदा याद दिलाने के लिए देशभर में सड़कों पर उतरे किसान

यूपी चुनाव: आलू की कीमतों में भारी गिरावट ने उत्तर प्रदेश के किसानों की बढ़ाईं मुश्किलें

ग्राउंड  रिपोर्टः रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के गृह क्षेत्र के किसान यूरिया के लिए आधी रात से ही लगा रहे लाइन, योगी सरकार की इमेज तार-तार

ख़बर भी-नज़र भी: किसानों ने कहा- गो बैक मोदी!


बाकी खबरें

  • अफ़्रीकाः कोविड-19 मामलों के 7.1 मिलियन पार करने के बावजूद 2% से भी कम टीकाकरण
    पीपल्स डिस्पैच
    अफ़्रीकाः कोविड-19 मामलों के 7.1 मिलियन पार करने के बावजूद 2% से भी कम टीकाकरण
    13 Aug 2021
    धनी देशों द्वारा स्टॉक करने और पर्याप्त वैक्सीन उत्पादन की कमी के कारण इस महाद्वीप को टीकों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है जबकि हाल ही में इसकी आपूर्ति बढ़ी है।
  • मिथिला के छात्रों की मुहिम: ‘घर-घर से ईंट लाएंगे, दरभंगा एम्स बनाएंगे’
    राहुल कुमार गौरव
    मिथिला के छात्रों की मुहिम: ‘घर-घर से ईंट लाएंगे, दरभंगा एम्स बनाएंगे’
    13 Aug 2021
    अभी तक आपने ईंट वसूलने का किस्सा मंदिर और मस्जिद के लिए सुना होगा लेकिन बिहार के दरभंगा जिला में ईंट एक अस्पताल के लिए जमा की जा रही हैं।
  • ऑस्ट्रेलिया की चीनी मिल को उत्तर प्रदेश का बताकर चुनावी लहर बना रही भाजपा
    राज कुमार
    ऑस्ट्रेलिया की चीनी मिल को उत्तर प्रदेश का बताकर चुनावी लहर बना रही भाजपा
    13 Aug 2021
    भाजपा उत्तर प्रदेश ने 12 अगस्त को एक ट्वीट किया। भाजपा इस एक ट्वीट से दो निशाने साधने की सोच रही थी। भाजपा सोच रही थी कि विपक्ष की छवि भी खराब हो जाएगी और गन्ना किसानों का समर्थन भी हासिल कर लेगी।…
  • राजनीति का अपराधीकरण
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    राजनीति का अपराधीकरणः सियासी दलों को अदालत सुधारेगी या जनता
    13 Aug 2021
    राजनीति का अपराधीकरण रोकने के लिए देश की सर्वोच्च अदालत से होने वाली इस पहल के कई पहलू हैं और उन पर इस कदम की सफलता और असफलता निर्भर करती है।
  • विश्व आदिवासी दिवस पर उठी मांग, ‘पेसा कानून’ की नियमावली जल्द बनाये झारखंड सरकार
    अनिल अंशुमन
    विश्व आदिवासी दिवस पर उठी मांग, ‘पेसा कानून’ की नियमावली जल्द बनाये झारखंड सरकार
    13 Aug 2021
    आदिवासी समुदायों ने आदिवासियों के जबरदस्त समर्थन से झारखंड की सत्ता में काबिज़ हुई हेमंत सोरेन सरकार द्वारा आदिवासी मुद्दों को लगातार नज़रंदाज़ करने की तीखी निंदा की है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License