NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
ख़ास रपट : कृषि संकट, अनुपयोगी गाय और बदहाल किसान
पशुपालन विभाग के दूध उत्पादन के नवीनतम आंकड़ो के मुताबिक देशी गायों का कुल दूध उत्पादन में मात्र 21 प्रतिशत हिस्सा है। इसीलिये किसान आर्थिक फायदा देखते हुए देशी नस्ल की गायों की अपेक्षा विदेशी नस्ल की गायों और भैंस पालने की तरफ बढ़ रहे हैं।  
पीयूष शर्मा
10 Dec 2019
cow

देश के लगभग सभी हिस्सों में छुट्टा पशु विशेषकर छुट्टा गाय एक गंभीर समस्या बन गये हैं। इन छुट्टा गायों को इनके मालिकों ने अनुपयोगी हो जाने के कारण खुला छोड़ दिया है, क्योंकि उनके भरण-पोषण में बहुत पैसा खर्च होता है और अभी जब पूरे देश में कृषि संकट गहराया हुआ है ऐसे में किसान इन छुट्टा गायों के पालन का खर्चा वहन करने में सक्षम नहीं हैं।

लगभग हर गाँव और शहर में इन छुट्टा/आवारा गायों के झुण्ड के झुण्ड दिखाई पड़ते हैं जो खाने की तलाश में इधर-उधर भटकते रहते हैं और खेतों में फसल खाते हैं जिसके कारण किसानों की फसल बर्बाद होती है और उनका नुकसान होता है। खेतों में फसल के नुकसान से बचने के लिए किसान रात-रात भर पहरेदारी करते और देश की कई हिस्सों ऐसी भी खबरे आई हैं कि किसानों ने इन आवारा पशुओं को पकड़ कर सरकारी भवनों और विद्यालयों में बंद कर दिया है।

ग्रामीणों द्वारा स्कूल में बंद की की गईं छुट्टा गाय

पिछली पशुगणना के आंकड़े बताते हैं कि देशी नस्ल की गायों की संख्या में गिरावट आई है जिसका मुख्य कारण इनके द्वारा कम दूध उत्पादन है जबकि वहीं दूसरी और भैंस और विदशी/ क्रॉसब्रीड की संख्या में बढ़ोतरी हुई है क्योंकि इनका दूध उत्पादन देशी नस्ल से कहीं ज्यादा है। नवीनतम पशुगणना के अनुसार देशी गायें जो दुधारू हैं वह कुल दुधारू गायों एवं भैंस की संख्या का 40 प्रतिशत हैं पशुपालन विभाग के दूध उत्पादन के नवीनतम आंकड़ो के मुताबिक देशी गायों का कुल दूध उत्पादन में मात्र 21 प्रतिशत हिस्सा है। इसीलिये किसान आर्थिक फायदा देखते हुए देशी नस्ल की गायों की अपेक्षा विदेशी नस्ल की गायों और भैंस पालने की तरफ बढ़ रहे हैं।  

पिछले 25 वर्षों में देशी गोवंश की आबादी में 25% की गिरावट आई है, जबकि क्रॉसब्रीड गोवंश में तीन गुना से ज्यादा और भैंस में 30% से अधिक की वृद्धि हुई है।
Decline in Indigenous Cattle Population Hindi.jpg

स्रोत: पशुगणना, पशुपालन और डेयरी विभाग, भारत सरकार

हालाँकि सभी देशी गाय सभी दुधारू पशुओं की संख्या का लगभग 40% हैं, लेकिन उनके दूध का उत्पादन कुल दूध के उत्पादन का सिर्फ 21% है। आश्चर्य तो यह है कि बेहतर रिटर्न के लिए किसान विदेशी गाय और भैंस की तरफ़ रुख कर रहे हैं।
Milch animal Share in Population and in Milk Hindi.jpg

स्रोत: पशुगणना 2019 व बुनियादी पशुपालन और मत्स्य पालन सांख्यिकी

मोदी सरकार में गाय की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के प्रयासों और कथित गोरक्षकों की जानलेवा गतिविधयों ने मांस उत्पादन में भारी गिरावट ला दी है। इसका दूसरा पहलू यह भी है कि देश की कृषि अर्थव्यवस्था पर बड़ी संख्या में अनुपयोगी गायों का भार पड़ रहा हैं।
Meat Production Growth Rate in Hindi (1).jpg

स्रोत: पशुगणना 2019 व बुनियादी पशुपालन और मत्स्य पालन सांख्यिकी

CAGR: कंपाउंड ऐनुअल ग्रोथ रेट

गायों पर आने वाली लागत:

गायों का पालने में किसान को काफी खर्च करना पड़ता है, अगर गाय दुधारू है तो किसान के लिए उपयोगी है परन्तु जब गाय दूध देना बंद कर देती है तो किसान को इसके पालने से कोई आय नही होती है और उल्टा उसको पालने के लिए खर्च करना पड़ता है। उत्तर प्रदेश की कामधेनु योजना के अनुसार एक अनुपयोगी गाय को पालने में एक वर्ष में करीब 15,650 रूपये का खर्च आता है |

नवीनतम पशुगणना के अनुसार पुरे देश में 1.328 करोड़ छुट्टा व अनुपयोगी पशु है और इनके भरण-पोषण पर एक साल में 20,777 करोड़ रुपये खर्च की जरुरत है। अनुपयोगी गायों के भरण-पोषण का यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसान और आम जनता पर ही पड़ रहा है और समुचित नीतियों के आभाव में भविष्य में भी पड़ेगा।
चमड़ा व्यापार टेनरी बंद से खस्ताहाल

पूरी दुनिया में चमड़ा करोबार के लिए मशहूर देश के चमड़ा बाजार पर संकट मंडरा रहा है। नोटबंदी और मवेशियों को लेकर हुए बवाल आदि कारणों ने इस कारोबार को मुसीबत में खड़ा कर दिया है जिसके कारण लाखों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट छाया पड़ा है और निकट भविष्य में भी इसमें सुधर के कोई आसार नजर नहीं आते हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने अचानक टेनरियों को बंद करने का आदेश दे दिया, जिसके कारण इस व्यवसाय को हजारो करोड़ों का नुकसान हो रहा है और वहीं दूसरी और लाखों लोगों के रोजगार पर भी मुसीबत आ गई है, वो भी ऐसे समय जब देश में लाखों लोगों के सामने रोजगार का संकट है।

Tennary Mandi Hapur (1).jpg

चमडा मंडी, हापुड़

चमड़ा निर्यात परिषद (सेंटर रीजन) कानपुर के रीजनल चेयरमैन  जावेद इक़बाल बताते है कि कानपुर और उन्नाव में टेनरियों का प्रति वर्ष करीब 30,000 करोड़ रुपये का कारोबार हैं, जिसमे से करीब 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का घरेलू और 8,000 करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है। टेनरी को बंद किये जाने से इस क्षेत्र के चमडा व्यापर ठप हुआ जिसके चलते टर्नओवर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। टेनरियों के बंद होने से करीब 20,000 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का अनुमान है।

WhatsApp Image 2019-12-03 at 1.06.38 PM.jpeg

टेनरी, जाजमाऊ, कानपुर
WhatsApp Image 2019-12-03 at 1.05.53 PM.jpeg
जाजमाऊ, कानपुर की एक टेनरी में बंद पड़ी मशीन

agricultural crises
Agriculture workers
cows
farmers
farmers crises
animals safety
Cattle census
Indian government
Stray Cattle
stray cows
cow slaughter
cow slaughter ban
Cow Vigilante
cow lynching
Holy Cow
cow locked in school
Animal Husbandary
Livestock Census

Related Stories

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

हिसारः फसल के नुक़सान के मुआवज़े को लेकर किसानों का धरना

किसानों, स्थानीय लोगों ने डीएमके पर कावेरी डेल्टा में अवैध रेत खनन की अनदेखी करने का लगाया आरोप

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

WHO की कोविड-19 मृत्यु दर पर भारत की आपत्तियां, कितनी तार्किक हैं? 

ब्लैक राइस की खेती से तबाह चंदौली के किसानों के ज़ख़्म पर बार-बार क्यों नमक छिड़क रहे मोदी?

आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार

MSP पर लड़ने के सिवा किसानों के पास रास्ता ही क्या है?

बिहार: कोल्ड स्टोरेज के अभाव में कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर आलू किसान


बाकी खबरें

  •  Punjab security lapse
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाब में पीएम की "सुरक्षा चूक" पर पूरी पड़ताल!
    06 Jan 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे में आज अभिसार शर्मा चर्चा कर रहे प्रधानमंत्री के पंजाब दौरे की। साथ ही वे नज़र डाल रहे हैं कि किस तरह मीडिया द्वारा किसानों को टारगेट किया जा रहा है
  • fact check
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेक : संबित ने जर्जर स्कूलों को सपा सरकार का बताया, स्कूल योगी सरकार के निकले
    06 Jan 2022
    एक बार फिर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्विटर पर फ़ेक न्यूज़ के ज़रिये विपक्ष पर निशाना साधने की कोशिश की है।
  • jnu
    रवि कौशल
    जेएनयू हिंसा के दो साल : नाराज़ पीड़ितों को अब भी है न्याय का इंतज़ार 
    06 Jan 2022
    ऐसा लगता है कि दिल्ली पुलिस की जांच भटक चुकी है। अब तक दोषियों की पहचान तक नहीं की जा सकी है।
  • punjab security
    शंभूनाथ शुक्ल
    'सुरक्षा चूक' की आड़ में राजनीतिक स्टंट?
    06 Jan 2022
    प्रधानमंत्री को एयरपोर्ट में पंजाब के अधिकारियों को दिए बयान से बचना चाहिए था। और जो कुछ करना था, वह सीधे गृह मंत्रालय के आला अधिकारी करते तो भविष्य में ऐसी किसी भी चूक से प्रशासन सतर्क रहते। तथा…
  • election
    सौरभ शर्मा
    यूपी: युवाओं को रोजगार मुहैय्या कराने के राज्य सरकार के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते हैं!
    06 Jan 2022
    लगभग 43 उम्मीदवारो को उत्तर प्रदेश में पिछले साल विभिन्न चिकित्सा विभागों द्वारा विभिन्न कोरोना लहरों के दौरान में रोजगार पर रखा गया था। बाद में इन्हें काम से मुक्त कर दिया गया। उन्होंने इस कदम के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License