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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे पर लगी रोक की मियाद बढ़ाई
ज्ञानवापी वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत होने मात्र से उस पर गैर मुस्लिमों का अधिकार खत्म नहीं हो जाता। साल 1960 के वक्फ एक्ट में 1984 में संशोधन किया गया, लेकिन वह लागू नहीं हो सका। संशोधन में वक्फ बोर्ड और गैर मुस्लिम के बीच संपत्ति विवाद की दशा में नोटिस विश्वनाथ मंदिर को जारी करना जरूरी है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
29 Apr 2022
gyanvapi

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का पुरातात्विक सर्वे कराने के मामले में अधीनस्थ अदालत के आदेश पर लगी रोक 31 मई तक बढ़ा दी है। इस मामले में दाखिल याचिका पर मंदिर के अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी की बहस पूरी नहीं हो सकी। अगली सुनवाई अब 10 मई को होगी।

अंजुमन इंतजामिया मस्जिद वाराणसी और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की तरफ से वाराणसी की अधीनस्थ कोर्ट के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

वाराणसी की अदालत में अपील की गई थी कि संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर और कथित विवादित स्थल के संबंध में भौतिक व पुरातात्विक दृष्टि से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा रडार तकनीक से सर्वेक्षण और परिसर की खोदाई कराकर रिपोर्ट मंगाई जाए।

इसे भी पढ़ें: EXCLUSIVE: उलझती जा रही विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद की गुत्थी, अब पांच और नए मुकदमे!

इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस संबंध में दायर याचिकाओं की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया कर रहे हैं। वादमित्र अधिवक्ता रस्तोगी का कहना है कि ज्ञानवापी वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत होने मात्र से उस पर गैर मुस्लिमों का अधिकार खत्म नहीं हो जाता। साल 1960 के वक्फ एक्ट में 1984 में संशोधन किया गया, लेकिन वह लागू नहीं हो सका। संशोधन में वक्फ बोर्ड और गैर मुस्लिम के बीच संपत्ति विवाद की दशा में नोटिस विश्वनाथ मंदिर को जारी करना जरूरी है। मगर, वादी विपक्षी को कोई नोटिस नहीं दी गई। इस कारण भी वक्फ एक्ट इस मामले में लागू नहीं होगा।

रस्तोगी ने कहा कि साल1995 का वक्फ एक्ट लागू किया गया, तो सभी वक्फ संपत्तियों का दोबारा पंजीकरण करना अनिवार्य किया गया है। मगर, प्रश्नगत विवादित संपत्ति कभी भी दोबारा पंजीकृत नहीं कराई गई है। इसलिए विवादित संपत्ति को वक्फ संपत्ति नहीं माना जा सकता। रस्तोगी ने कहा कि पंजाब वक्फ बोर्ड बनाम शैम सिंह केस में कहा गया है कि विवादित जमीन वक्फ संपत्ति नहीं हो सकती।

रस्तोगी ने कहा कि 1936 में दीन मोहम्मद, मोहम्मद हुसैन और मोहम्मद जकारिया ने बनारस अधीनस्थ अदालत में घोषणात्मक वाद दायर किया था। जिसमें मौजा शहर खास, परगना देहात अमानत, बनारस गाटा 9,130 रकबा एक बीघा नौ बिस्वा 6 धुर, चबूतरा, पेड़, पक्का कुआं आदि को वक्फ संपत्ति घोषित करने और अलविदा नमाज पढ़ने की प्रार्थना की गई थी। कोर्ट ने दावा साबित न कर पाने के कारण खारिज कर दिया। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में प्रथम अपील 1937 में दाखिल की गई। जो 1942 में निर्णीत हुई। जिसमें केवल वादी को ही नमाज पढ़ने की राहत मिली थी, जिसका फायदा दूसरा कोई नहीं उठा सकता। इसलिए याचिका खारिज की जाए। केंद्र सरकार और राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि जो भी कोर्ट आदेश करेगी, वह पालन करेंगे।

श्रृंगार गौरी मंदिर मामले में छह मई को होगी वीडियोग्राफी

काशी विश्वनाथ धाम-ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी मंदिर के नियमित दर्शन को लेकर दाखिल याचिका के मामले में सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत द्वारा नियुक्त वकील कमिश्नर अजय कुमार छह मई को ज्ञानवापी और विश्वनाथ मंदिर का जायजा लेंगे। कमीशन अपनी कार्रवाई अपराह्न तीन बजे शुरू करेगा। इस दौरान मस्जिद परिसर में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी होगी। वकील कमिश्नर दो-तीन दिनों तक वहां जा सकता है। कमीशन की रिपोर्ट पर 10 मई को सुनवाई होगी। इस बीच अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने कहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद की वीडियोग्राफी कराने पर माहौल बिगड़ सकता है।

काशी विश्वनाथ धाम ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी सहित अन्य विग्रहों की पूजा-अर्चना को लेकर 18 अगस्त 2021 को वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में याचिका दायर की गई थी। राखी सिंह, लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा ने कोर्ट में दायर वाद में कहा है कि श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन की छूट मिलनी चाहिए। साथ ही विश्वनाथ मंदिर परिसर में अवस्थित आदि विशेश्वर परिवार के सभी विग्रहों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ न की जाए। साथ ही वाद के जरिए ज्ञानवापी परिसर का निरीक्षण-परीक्षण और सर्वेक्षण कराने के लिए कमीशन भेजा जाए।

अदालत में गोंडा निवासी राखी सिंह व अन्य की तरफ से वाद दाखिल कर श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन के साथ 1993 के पूर्व की स्थिति बहाल करने की मांग की गई है। याचिका में अनुरोध किया गया है कि ज्ञानवापी स्थित श्रृंगार गौरी और आदि विश्वेश्वर परिवार के विग्रहों की यथास्थिति रखी जाए और वकील कमिश्नर से वर्तमान स्थिति के बाबत रिपोर्ट मंगा ली जाए। इस मामले विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट, डीएम, पुलिस आयुक्त, अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी और सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया है। अदालत ने श्रृंगार गौरी मंदिर की मौजूदा स्थिति को जांचने के लिए कमीशन गठित करते हुए अधिवक्ता कमिश्नर नियुक्त करने और तीन दिन के अंदर पैरवी का आदेश भी दिया था। कतिपय कारणों से दो मर्तबा अदालत कमिश्नर पीछे हट गए। अदालत कमिश्नर के रूप में अजय कुमार मिश्रा को वीडियोग्राफी करने का आदेश किया गया है।

सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने 19 अप्रैल को विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी का दौरा करने के लिए वकील कमिश्नर को आदेश जारी किया था, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रशासन ने कोर्ट से वकील कमिश्नर न भेजने की अपील कर दी। जिला प्रशासन का कहना था कि ज्ञानवापी मस्जिद की वीडियोग्राफी कराने पर माहौल बिगड़ सकता है। सर्वे से ज्ञानवापी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था भंग हो सकती है। सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने प्रशासन अनुरोध पर इस मामले की सुनवाई के लिए 26 अप्रैल 2022 की तिथि मुकर्रर की थी। साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का 19 अप्रैल को वकील कमिश्नर की अगुवाई में होने वाला सर्वे स्थगित कर दिया था।

Gyanvapi mosque
Kashi Vishwanath Temple
Allahabad High Court
Kashi Vishwanath Temple-Gyanvapi Mosque Complex

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