NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे पर लगी रोक की मियाद बढ़ाई
ज्ञानवापी वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत होने मात्र से उस पर गैर मुस्लिमों का अधिकार खत्म नहीं हो जाता। साल 1960 के वक्फ एक्ट में 1984 में संशोधन किया गया, लेकिन वह लागू नहीं हो सका। संशोधन में वक्फ बोर्ड और गैर मुस्लिम के बीच संपत्ति विवाद की दशा में नोटिस विश्वनाथ मंदिर को जारी करना जरूरी है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
29 Apr 2022
gyanvapi

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का पुरातात्विक सर्वे कराने के मामले में अधीनस्थ अदालत के आदेश पर लगी रोक 31 मई तक बढ़ा दी है। इस मामले में दाखिल याचिका पर मंदिर के अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी की बहस पूरी नहीं हो सकी। अगली सुनवाई अब 10 मई को होगी।

अंजुमन इंतजामिया मस्जिद वाराणसी और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की तरफ से वाराणसी की अधीनस्थ कोर्ट के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

वाराणसी की अदालत में अपील की गई थी कि संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर और कथित विवादित स्थल के संबंध में भौतिक व पुरातात्विक दृष्टि से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा रडार तकनीक से सर्वेक्षण और परिसर की खोदाई कराकर रिपोर्ट मंगाई जाए।

इसे भी पढ़ें: EXCLUSIVE: उलझती जा रही विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद की गुत्थी, अब पांच और नए मुकदमे!

इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस संबंध में दायर याचिकाओं की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया कर रहे हैं। वादमित्र अधिवक्ता रस्तोगी का कहना है कि ज्ञानवापी वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत होने मात्र से उस पर गैर मुस्लिमों का अधिकार खत्म नहीं हो जाता। साल 1960 के वक्फ एक्ट में 1984 में संशोधन किया गया, लेकिन वह लागू नहीं हो सका। संशोधन में वक्फ बोर्ड और गैर मुस्लिम के बीच संपत्ति विवाद की दशा में नोटिस विश्वनाथ मंदिर को जारी करना जरूरी है। मगर, वादी विपक्षी को कोई नोटिस नहीं दी गई। इस कारण भी वक्फ एक्ट इस मामले में लागू नहीं होगा।

रस्तोगी ने कहा कि साल1995 का वक्फ एक्ट लागू किया गया, तो सभी वक्फ संपत्तियों का दोबारा पंजीकरण करना अनिवार्य किया गया है। मगर, प्रश्नगत विवादित संपत्ति कभी भी दोबारा पंजीकृत नहीं कराई गई है। इसलिए विवादित संपत्ति को वक्फ संपत्ति नहीं माना जा सकता। रस्तोगी ने कहा कि पंजाब वक्फ बोर्ड बनाम शैम सिंह केस में कहा गया है कि विवादित जमीन वक्फ संपत्ति नहीं हो सकती।

रस्तोगी ने कहा कि 1936 में दीन मोहम्मद, मोहम्मद हुसैन और मोहम्मद जकारिया ने बनारस अधीनस्थ अदालत में घोषणात्मक वाद दायर किया था। जिसमें मौजा शहर खास, परगना देहात अमानत, बनारस गाटा 9,130 रकबा एक बीघा नौ बिस्वा 6 धुर, चबूतरा, पेड़, पक्का कुआं आदि को वक्फ संपत्ति घोषित करने और अलविदा नमाज पढ़ने की प्रार्थना की गई थी। कोर्ट ने दावा साबित न कर पाने के कारण खारिज कर दिया। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में प्रथम अपील 1937 में दाखिल की गई। जो 1942 में निर्णीत हुई। जिसमें केवल वादी को ही नमाज पढ़ने की राहत मिली थी, जिसका फायदा दूसरा कोई नहीं उठा सकता। इसलिए याचिका खारिज की जाए। केंद्र सरकार और राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि जो भी कोर्ट आदेश करेगी, वह पालन करेंगे।

श्रृंगार गौरी मंदिर मामले में छह मई को होगी वीडियोग्राफी

काशी विश्वनाथ धाम-ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी मंदिर के नियमित दर्शन को लेकर दाखिल याचिका के मामले में सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत द्वारा नियुक्त वकील कमिश्नर अजय कुमार छह मई को ज्ञानवापी और विश्वनाथ मंदिर का जायजा लेंगे। कमीशन अपनी कार्रवाई अपराह्न तीन बजे शुरू करेगा। इस दौरान मस्जिद परिसर में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी होगी। वकील कमिश्नर दो-तीन दिनों तक वहां जा सकता है। कमीशन की रिपोर्ट पर 10 मई को सुनवाई होगी। इस बीच अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने कहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद की वीडियोग्राफी कराने पर माहौल बिगड़ सकता है।

काशी विश्वनाथ धाम ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी सहित अन्य विग्रहों की पूजा-अर्चना को लेकर 18 अगस्त 2021 को वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में याचिका दायर की गई थी। राखी सिंह, लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा ने कोर्ट में दायर वाद में कहा है कि श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन की छूट मिलनी चाहिए। साथ ही विश्वनाथ मंदिर परिसर में अवस्थित आदि विशेश्वर परिवार के सभी विग्रहों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ न की जाए। साथ ही वाद के जरिए ज्ञानवापी परिसर का निरीक्षण-परीक्षण और सर्वेक्षण कराने के लिए कमीशन भेजा जाए।

अदालत में गोंडा निवासी राखी सिंह व अन्य की तरफ से वाद दाखिल कर श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन के साथ 1993 के पूर्व की स्थिति बहाल करने की मांग की गई है। याचिका में अनुरोध किया गया है कि ज्ञानवापी स्थित श्रृंगार गौरी और आदि विश्वेश्वर परिवार के विग्रहों की यथास्थिति रखी जाए और वकील कमिश्नर से वर्तमान स्थिति के बाबत रिपोर्ट मंगा ली जाए। इस मामले विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट, डीएम, पुलिस आयुक्त, अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी और सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया है। अदालत ने श्रृंगार गौरी मंदिर की मौजूदा स्थिति को जांचने के लिए कमीशन गठित करते हुए अधिवक्ता कमिश्नर नियुक्त करने और तीन दिन के अंदर पैरवी का आदेश भी दिया था। कतिपय कारणों से दो मर्तबा अदालत कमिश्नर पीछे हट गए। अदालत कमिश्नर के रूप में अजय कुमार मिश्रा को वीडियोग्राफी करने का आदेश किया गया है।

सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने 19 अप्रैल को विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी का दौरा करने के लिए वकील कमिश्नर को आदेश जारी किया था, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रशासन ने कोर्ट से वकील कमिश्नर न भेजने की अपील कर दी। जिला प्रशासन का कहना था कि ज्ञानवापी मस्जिद की वीडियोग्राफी कराने पर माहौल बिगड़ सकता है। सर्वे से ज्ञानवापी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था भंग हो सकती है। सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने प्रशासन अनुरोध पर इस मामले की सुनवाई के लिए 26 अप्रैल 2022 की तिथि मुकर्रर की थी। साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का 19 अप्रैल को वकील कमिश्नर की अगुवाई में होने वाला सर्वे स्थगित कर दिया था।

Gyanvapi mosque
Kashi Vishwanath Temple
Allahabad High Court
Kashi Vishwanath Temple-Gyanvapi Mosque Complex

Related Stories

ज्ञानवापी मामले में अधिवक्ताओं हरिशंकर जैन एवं विष्णु जैन को पैरवी करने से हटाया गया

ज्ञानवापी सर्वे का वीडियो लीक होने से पेचीदा हुआ मामला, अदालत ने हिन्दू पक्ष को सौंपी गई सीडी वापस लेने से किया इनकार

ज्ञानवापी मामला : अधूरी रही मुस्लिम पक्ष की जिरह, अगली सुनवाई 4 जुलाई को

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

वर्ष 1991 फ़र्ज़ी मुठभेड़ : उच्च न्यायालय का पीएसी के 34 पूर्व सिपाहियों को ज़मानत देने से इंकार

ज्ञानवापी कांड एडीएम जबलपुर की याद क्यों दिलाता है

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्यों अराजकता की ओर बढ़ता नज़र आ रहा है कश्मीर?

‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार

मुद्दा: ज्ञानवापी मस्जिद का शिवलिंग असली है तो विश्वनाथ मंदिर में 250 सालों से जिसकी पूजा हो रही वह क्या है?


बाकी खबरें

  • up elections
    असद रिज़वी
    लखनऊ में रोज़गार, महंगाई, सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन रहे मतदाताओं के लिए बड़े मुद्दे
    24 Feb 2022
    लखनऊ में मतदाओं ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर वोट डाले। सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन की बहाली बड़ा मुद्दा था। वहीं कोविड-19 प्रबंधन, कोविड-19 मुफ्त टीका,  मुफ्त अनाज वितरण पर लोगों की अलग-अलग…
  • M.G. Devasahayam
    सतीश भारतीय
    लोकतांत्रिक व्यवस्था में व्याप्त खामियों को उजाकर करती एम.जी देवसहायम की किताब ‘‘चुनावी लोकतंत्र‘‘
    24 Feb 2022
    ‘‘चुनावी लोकतंत्र?‘‘ किताब बताती है कि कैसे चुनावी प्रक्रियाओं की सत्यता को नष्ट करने के व्यवस्थित प्रयासों में तेजी आयी है और कैसे इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
  • Salempur
    विजय विनीत
    यूपी इलेक्शनः सलेमपुर में इस बार नहीं है मोदी लहर, मुकाबला मंडल-कमंडल के बीच होगा 
    24 Feb 2022
    देवरिया जिले की सलेमपुर सीट पर शहर और गावों के वोटर बंटे हुए नजर आ रहे हैं। कोविड के दौर में योगी सरकार के दावे अपनी जगह है, लेकिन लोगों को याद है कि ऑक्सीजन की कमी और इलाज के अभाव में न जाने कितनों…
  • Inequality
    प्रभात पटनायक
    आर्थिक असमानता: पूंजीवाद बनाम समाजवाद
    24 Feb 2022
    पूंजीवादी उत्पादन पद्धति के चलते पैदा हुई असमानता मानव इतिहास में अब तक पैदा हुई किसी भी असमानता के मुकाबले सबसे अधिक गहरी असमानता है।
  • putin
    अब्दुल रहमान
    मिन्स्क समझौते और रूस-यूक्रेन संकट में उनकी भूमिका 
    24 Feb 2022
    अति-राष्ट्रवादियों और रूसोफोब्स के दबाव में, यूक्रेन में एक के बाद एक आने वाली सरकारें डोनबास क्षेत्र में रूसी बोलने वाली बड़ी आबादी की शिकायतों को दूर करने में विफल रही हैं। इसके साथ ही, वह इस…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License