NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
इलाहाबाद हाईकोर्ट सख़्त, योगी सरकार को हटाने ही होंगे सीएए हिंसा आरोपियों के होर्डिंग्स
कोर्ट ने कहा कि इस तरह से सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर लगाने बिल्कुल अनुचित है और यह संबंधित लोगों की व्यक्तिगत आज़ादी पर पूरी तरह से दख़लअंदाज़ी है। ये नागरिक के साथ-साथ राज्य का भी अपमान है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
09 Mar 2020
UP Hoarding

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार, 9 मार्च को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से हिंसा में शामिल आरोपियों के लखनऊ में पोस्टर लगाने को लेकर उत्तर प्रदेश प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए लखनऊ के डीएम और पुलिस कमिश्नर को सभी होर्डिंग्स को हटाने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने 16 मार्च से पहले महानिबंधक के समक्ष पोस्टर हटाए जाने संबंधित रिपोर्ट दायर करने की बात भी कही है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और जस्टिस रमेश सिन्हा की पीठ ने कहा कि इस तरह से सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर लगाने बिल्कुल अनुचित है और यह संबंधित लोगों की व्यक्तिगत आज़ादी पर पूरी तरह से दख़लअंदाज़ी है। ये नागरिक के साथ-साथ राज्य का भी अपमान है।

अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी ने पीटीआई-भाषा को बताया, “अदालत ने कहा है कि सरकार की यह कार्रवाई (पोस्टर लगाने की) अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है इसलिए पीठ ने लखनऊ के जिलाधिकारी और मंडलायुक्त को होर्डिंग हटाने का निर्देश दिया है।

त्रिपाठी ने आगे बताया कि पीठ ने 16 मार्च को या इससे पहले इस संबंध में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट सौंपे जाने पर यह मामला निस्तारित हुआ मान लिया जाएगा।

बता दें कि लखनऊ प्रशासन ने शहर के प्रमुख और भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर विवादित नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले करीब 60 लोगों के नाम और पते के साथ होर्डिंग्स लगा रखा है। इन पर आरोप लगाया गया है कि पिछले साल 19 दिसंबर को हुए प्रदर्शन के दौरान इन्होंने हिंसा की और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है।

होर्डिंग्स में कहा गया है कि अगर आरोपी मुआवजा भरने में नाकाम रहते हैं तो उनकी संपत्तियां जब्त कर ली जाएंगी। सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में होर्डिंग्स लगाने को न्यायोचित ठहराने वाला दो पेज का बिना हस्ताक्षर वाला एक नोट भेजा गया था। ये होर्डिंग जनहित को ध्यान में रखकर सभी नियमों का पालन करते हुए लगाए गए हैं। इसमें जानी-मानी कार्यकर्ता और नेता सदफ जाफर, मानवाधिकार वकील मोहम्मद शोएब, पूर्व आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी जैसे लोगों का भी नाम शामिल हैं।

गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने 7 मार्च को इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया था, जिसके बाद रविवार, 8 मार्च को मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान हाई कोर्ट ने लखनऊ के जिलाधिकारी और मंडल आयुक्त से पूछा था कि किस कानून के तहत ये होर्डिंग लगाए गए। मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और रमेश सिन्हा की पीठ ने इसे बेहद अन्यायपूर्ण और लोगों की निजता का हनन बताया। जिसके बाद सोमवार, 9 मार्च के लिए फैसले को सुरक्षित रख लिया गया था।

रविवार को कोर्ट में क्या-क्या हुआ?

रविवार को जब अदालत ने सुबह 10 बजे इस मामले में सुनवाई शुरू की, तो अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी ने अदालत को सूचित किया कि इस मामले में महाधिवक्ता राज्य सरकार का पक्ष रखेंगे। इसके बाद अदालत ने तीन बजे इस मामले की सुनवाई का निर्णय किया।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर ने उम्मीद जताई कि इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने सवाल किया कि क्या राज्य सरकार ने नागरिकों की निजता और स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं किया है। हालांकि राज्य सरकार ने इस कदम को प्रतिरोधक बताते हुए कहा कि अदालत को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए।

जब अदालत में दोबारा यह मामला आया, तो महाधिवक्ता ने अदालत को राज्य सरकार के रुख से अवगत कराया। उनकी दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

राज्य सरकार की दलील

राज्य सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता राघवेंद्र प्रताप सिंह ने दलील दी कि कोर्ट को इस तरह के मामले में जनहित याचिका की तरह दखल नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत को ऐसे कृत्य का स्वतः संज्ञान नहीं लेना चाहिए जो ऐसे लोगों द्वारा किए गए हैं जिन्होंने सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है। महाधिवक्ता ने कथित सीएए प्रदर्शनकारियों के पोस्टर लगाने की राज्य सरकार की कार्रवाई को ‘डराकर रोकने वाला कदम’ बताया ताकि इस तरह के कृत्य भविष्य में दोहराए न जाएं।

'होर्डिंग्स से लिंचिंग का खतरा'

मीडिया से बातचीत में पूर्व आईपीएस एसआर दारापुरी ने प्रशासन की कार्रवाई को 'असंवैधानिक' करार दिया और कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। एक्टिविस्ट दीपक कबीर ने कहा है कि सरकार द्वारा सीएए-विरोधी प्रदर्शनकारियों के नाम वाले होर्डिंग्स से डर का माहौल पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि पोस्टर में जिन लोगों के नाम का उल्लेख किया गया है, उन्हें कहीं भी लिंच किया जा सकता है। दिल्ली हिंसा के बाद माहौल सुरक्षित नहीं है। सरकार सभी को खतरे में डाल रही है।

UttarPradesh
Lucknow
Lucknow Hoardings
UP Erects Hoarding
Anti CAA
Anti-NRC protest
yogi sarkar
Yogi Adityanath
Sadaf Jafar
Allahabad High Court

Related Stories

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

अनुदेशकों के साथ दोहरा व्यवहार क्यों? 17 हज़ार तनख़्वाह, मिलते हैं सिर्फ़ 7000...

लखनऊ: देशभर में मुस्लिमों पर बढ़ती हिंसा के ख़िलाफ़ नागरिक समाज का प्रदर्शन

महानगरों में बढ़ती ईंधन की क़ीमतों के ख़िलाफ़ ऑटो और कैब चालक दूसरे दिन भी हड़ताल पर

बलिया: पत्रकारों की रिहाई के लिए आंदोलन तेज़, कलेक्ट्रेट घेरने आज़मगढ़-बनारस तक से पहुंचे पत्रकार व समाजसेवी

पत्रकारों के समर्थन में बलिया में ऐतिहासिक बंद, पूरे ज़िले में जुलूस-प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • Haldwani medical college students
    सत्यम कुमार
    मेडिकल छात्रों की फीस को लेकर उत्तराखंड सरकार की अनदेखी
    24 Sep 2021
    इससे पहले नॉनबॉन्ड वाले छात्रों को सालाना 4 लाख रुपए फीस देनी होती थी। बॉन्ड के तहत प्रवेश लेने वाले छात्रों, जिन्हें पांच साल के लिए दुर्गम इलाकों में अपनी सेवाएं देनी होती थी, की यही फीस मात्र 50,…
  • Pishach Mochan
    विजय विनीत
    अंधविश्वास: बनारस के पिशाचमोचन में सजी भूतों की मंडी, परेशान लोगों को लूटने-खसोटने में जुटे दलाल और ठग
    24 Sep 2021
    वाराणसी स्थित पिशाचमोचन मोहल्ले में हर साल पितृ पक्ष में बकायदा भूतों की मंडी लगती है। यह अनोखी मंडी इन दिनों सज गई है। भूतों को बैठाने के नाम पर मोल-भाव शुरू हो गया है। भूतों से मुक्ति दिलाने के नाम…
  • Rajasthan
    रोसम्मा थॉमस
    राजस्थानः चरवाहे बोले ‘अनचाहे’ ऊंटों के लिए ऊंटशाला एक बुरा विचार  
    24 Sep 2021
    राज्य की नीतियां प्रायः ऊंट के चरवाहों से बिना उनकी राय लिए ही बना ली जाती हैं और ये ऐसे समय में नफा से ज्यादा नुकसान कर रही हैं, जब राज्य में ऊंटों की तादाद घट रही है। 
  • Bharat Bandh
    रवि कौशल
    भारत बंद: ‘उड़ीसा में न्यूनतम समर्थन मूल्य ही अब अधिकतम मूल्य है, जो हमें मंज़ूर नहीं’
    24 Sep 2021
    किसानों के आन्दोलन से उत्साहित उड़ीसा के किसान भी अब राज्य के ‘सबसे बड़े’ बंद की तैयारियों में जुटे हुए हैं। पश्चिम उड़ीसा कृषक समन्वय समिति के नेता लिंगाराज प्रधान कहते हैं, यहाँ के किसान भी अब एक…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 31,382 नए मामले, 318 मरीज़ों की मौत
    24 Sep 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.89 फ़ीसदी यानी 3 लाख 162 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License