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भारत
राजनीति
आमागढ़ क़िला: आदिवासी मीणा समुदाय और हिंदूवादी संगठन आमने-सामने
आमागढ़ जिसे आंबागढ़ भी कहा जाता है का क़िला मीणा समुदाय की अस्मिता से जुड़ा है लेकिन आज इसके साथ भगवे झंडे का विवाद भी जुड़ गया है, जिसे लेकर एक दूसरे को चुनौती दी जा रही है। इससे सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का भी ख़तरा हो गया है।
अवधेश
30 Jul 2021
आमागढ़ क़िला: आदिवासी मीणा समुदाय और हिंदूवादी संगठन आमने-सामने
आमागढ़ (आंबागढ़) का क़िला। फोटो साभार : इंडियन एक्सप्रेस

राजस्थान की राजधानी में जहां एक तरफ राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं वहीं दूसरी तरफ जयपुर से 10 किलोमीटर दूर गलता तीर्थ के पास पहाड़ी पर स्थित आमागढ़ (जिसे आंबागढ़ भी कहा जाता है) किला इन दिनों विवादों के घेरे में है। किले को लेकर हुए विवाद में कथित रूप से हिंदूवादी संगठन और आदिवासी मीणा समुदाय आमने-सामने हैं।

कहां से हुई मामले की शुरूआत ?

मामले की शुरूआत 21 जुलाई को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद हुई जिसमें कथित रूप से आदिवासी मीणा समुदाय के लोग आमागढ़ किले के ऊपर लगभग 8 फुट लम्बे डंडे पर लगे एक भगवा झंडे को उतार रहे हैं।

जयपुर के गलता तीर्थ स्थित आमागढ़ की पहाड़ी पर सत्ताधारी कांग्रेस समर्थित विधायक की मौजूदगी में “श्रीराम “ लिखा पवित्र भगवा ध्वज पोल से उतार कर फाड़ दिया

कहाँ हो फ़र्ज़ी जनेऊधारी ? pic.twitter.com/y43zQVkECe

— Laxmikant bhardwaj (@lkantbhardwaj) July 22, 2021

वायरल वीडियो के मुताबिक राजस्थान आदिवासी मीणा सेवा संघ के प्रदेशाध्यक्ष और गंगापुर सिटी से कांग्रेस समर्थित निर्दलीय विधायक रामकेश मीणा लोगों की अगुवाई कर रहे हैं, झंडा उतारते समय फटने से मामले ने तूल पकड़ लिया और आरएसएस से जुड़े कई लोगों ने इसकी तीखी आलोचना की, हालांकि राजस्थान भाजपा से जुड़े मुख्यधारा के नामों ने अभी मामले से दूरी बना रखी है।

लेकिन राज्यसभा में भाजपा के सांसद किरोड़ीलाल मीणा ने राजस्थान सरकार को पत्र लिखते हुए इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा है, साथ ही किरोड़ीलाल ने विधायक रामकेश मीणा की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि मीणा समाज के लोग हमेशा से हिंदू थे और आगे भी हिंदू परंपराओं का निर्वहन करते रहेंगे।

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भाजपा सांसद किरोड़ीलाल मीणा का बयान

वहीं 21 जुलाई की घटना के बाद मीणा समुदाय और हिंदू संगठनों ने एक-दूसरे पर आईपीसी धारा 295 और आईटी अधिनियम की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करवाई है।

क्या कह रहा है मीणा समुदाय ?

मीणा समुदाय से जुड़े लोगों का आरोप है कि युवा शक्ति मंच नामक एक संगठन ने आमागढ़ किले पर एक पोल पर भगवा झंडा लगा दिया और मंदिर परिसर में रखी प्राचीन मूर्तियों की जगह नई प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं और वहां अंबिका भवानी माता मंदिर के होने का दावा किया जा रहा है।

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अम्बा माता, मीणा जाति की ईष्ट देवी।

वहीं इस मामले में जून में जयपुर के आदर्श नगर पुलिस थाने में एक एफआईआर भी दर्ज करवाई गई थी जिसमें पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुछ युवकों को हिरासत में लिया था।

समुदाय का आगे आरोप है कि बीते 16 जुलाई 2021 को कुछ लोगों से पता चला कि आमागढ़ किले पर कोई अन्य झंडा लगाया गया है। तमाम बातचीत के दौर के बाद मीणा समाज के लोग 21 जुलाई को वहां एकजुट हुए।

वहीं मीणा समुदाय का शुरूआत से यह दावा है कि आमागढ़ किला आदिवासी मीणा समुदाय के राजाओं का है और यहां नाढ़ला गोत्र के मीणाओं का पुराना आमागढ़किला और अंबा माता का प्राचीन मंदिर है।

इसके अलावा समुदाय पुरातत्व विभाग के उस सूचना पट्ट का भी हवाला दे रहा है जो किले के मुख्य द्वार पर लगा है जिसमें लिखा है “मीणों का यह दुर्ग उत्तर की ओर एक पहाड़ी पर स्थित है”।

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इस मामले पर भाजपा नेता लक्ष्मीकांत भारद्वाज कहते हैं कि हमारी आपत्ति या दावा मंदिर या किले को लेकर कभी नहीं थी, हमें भगवा झंडे के अपमान से ठेस पहुंची है जिसका हम विरोध कर रहे हैं।

आदिवासी बनाम हिंदू धर्म की पुरानी बहस

आमागढ़ मामले के साथ ही अब आदिवासी और हिंदू धर्म की पुरानी बहस में फिर से चिंगारी लग गई है। गौरतलब है कि इससे पहले आदिवासी मीणा समाज के लोग देशभर में आदिवासी कोड लागू करने और जनगणना फार्म में अलग से कॉलम रखने की मांग करते रहे हैं जिनका समय-समय पर कांग्रेस, बीजेपी और निर्दलीय विधायकों ने भी साथ दिया।

वहीं इस साल मार्च में राजस्थान विधानसभा में आदिवासी विधायक और राजस्थान युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्षगणेश घोघरा ने भी मांग करते हुए कहते हैं कि हमारा आदिवासी धर्म कोड अलग से बनाया जाए।

2011 की जनगणना के मुताबिक भारत में आदिवासियों की संख्या करीब 10 करोड़ से अधिक है, वहीं देश में आदिवासियों की 750 से भी अधिक जातियां रहती हैं।

अधिकतर राज्यों में आबादी के हिसाब से अलग धर्म कोड बनाने की मांग देशभर में समय-समय पर उठती रही है। मालूम हो कि कि पिछली जनगणना में इन्हें धर्म की जगह 'अन्य' श्रेणी में रखा गया था।

वहीं ब्रिटिश शासन काल में साल 1871 से लेकर आज़ादी के बाद 1951 तक आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड की व्यवस्था थी। आज़ादी के बाद आदिवासी समुदाय को शेड्यूल ट्राइब्स (एसटी) कहा गया।

वरिष्ठ पत्रकार अवधेश आकोदिया पूरे मामले पर अपनी राय रखते हुए कहते हैं कि इस पूरे प्रकरण में भगवा झंडे को हटाने और आदिवासी-हिंदू की बहस दोनों एक साथ चल रहे हैं जबकि यह दोनों मामले अलग हैं।

वह जोड़ते हैं कि आदिवासी समुदाय की हिंदू नियमों से अलग करने की मांग पुरानी है, लेकिन वर्तमान में आमागढ़ को समुदाय के लोगों ने अस्मिता तो उधर कुछ हिंदू संगठनों ने दबे मुंह भावनाओं से जोड़ा है।

आकोदिया कहते हैं कि इस मामले में भाजपा की चुप्पी बताती है कि वह इस मामले पर राजनीतिक लिहाज से मीणा समुदाय और सोशल मीडिया पर मुखर युवाओं की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती है। 

राजस्थान में चुनावी राजनीति के लिहाज से मीणा समुदाय का काफी दबदबा है जहां अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित 25 विधानसभा सीटों में कांग्रेस और भाजपा दोनों के मीणा विधायक हैं। वहीं 2011की जनगणना के मुताबिक राज्य में अनुसूचित जनजाति राज्य की जनसंख्या का 13.48 फीसदी है।

रावत सारस्वत का लिखा मीणा इतिहास

आंबागढ़, जिसे आमागढ़ भी कहा जाता है, को 18वीं शताब्दी में सवाई जय सिंह-2 ने बनवाया था। इस पर गवर्मेंट कॉलेज, बस्सी के प्रोफेसर डॉ. राम नारायण मीणा कहते हैं किले को देखते हुए हम कह सकते हैं कि उस समय के मीणा शासकों का अच्छा-खासा प्रभाव था, कच्छावा और मीणा शासकों के बीच हुए युद्ध से इस किले की एतिहासिक कड़ी जुड़ी है।

वह जोड़ते हैं कि इतिहासकार जादुनाथ सरकार की किताब ‘ए हिस्ट्री ऑफ जयपुर: 1503-1938के मुताबिक भी कच्छावा शासकों के जयपुर पर शासन करने से पहले इस क्षेत्र में मीणा राजाओं का निवास था।

आगे वह कहते हैं कि इस मामले में तूल देने जैसा कुछ नहीं है, वह इस घटनाक्रम को मीणा समुदाय के लोगों में बढ़ती हुई जागरूकता और चेतना के परिणाम के रूप में देखते हैं।

इधर जेएनयू दिल्ली में एसोसिएट प्रोफेसर गंगा सहाय मीणा कहते हैं सत्ता में जिस विचारधारा का प्रभुत्व होता है वह अपना वर्चस्व फैलाने के लिए ऐतिहासिक बिंदुओं पर ऐसी कोशिशें करती रहती है, वहीं सोशल मीडिया से मामले को धार्मिक और साम्प्रदायिक रंग दिया जाता है।

वहीं बस्सी के लेखक स्वर्गीय रावत सारस्वत द्वारा लिखे सन 1968 में सर्वप्रथम प्रकाशित ‘मीणा इतिहास’ में उल्लेखित है कि आमागढ़ का किला निश्चय ही मीणों का रहा है जो सैनिक दृष्टि से उपयोग के लिए बनाया गया मालूम होता है. किले के अंदर केवल एक जलाशय और दो-तीन पक्के मकान के अलावा सुरक्षात्मक परकोटे है। (पृष्ठ संख्या-139)

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सोशल मीडिया पर आदिवासी समाज के समर्थन में एकजुटता

आमागढ़ मसले पर शुरू से ही सोशल मीडिया पर मीणा समुदाय के लोग मुखर रहे हैं। इस कड़ी में आदिवासी नेता छोटूभाई वसावा, भीम आर्मी के संयोजक चंद्रशेख़र आज़ाद और कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरएसएस को आड़े हाथों लेते हुए ट्वीट किए हैं.

वहीं सुदर्शन चैनल के संपादक अशोक चव्हाणके के पूरे मामले पर 1 अगस्त को आमागढ़ क़िले में जाकर भगवा ध्वज फहराने का ऐलान करने के बाद अब मीणा समुदाय 1 अगस्त को आमागढ़ पहुंचने का आह्वान कर रहा है।

इसके साथ ही जयपुर पुलिस कमिश्नरेट की तरफ से सभी पक्षों से अपील की गई है कि वह 1 अगस्त को आमागढ़ क्षेत्र या आसपास इकट्‌ठा नहीं हों।

अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) राहुल प्रकाश ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति संस्था अथवा किसी पक्ष के द्वारा सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की जाती है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

(जयपुर स्थित लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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