NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आमागढ़ क़िला: आदिवासी मीणा समुदाय और हिंदूवादी संगठन आमने-सामने
आमागढ़ जिसे आंबागढ़ भी कहा जाता है का क़िला मीणा समुदाय की अस्मिता से जुड़ा है लेकिन आज इसके साथ भगवे झंडे का विवाद भी जुड़ गया है, जिसे लेकर एक दूसरे को चुनौती दी जा रही है। इससे सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का भी ख़तरा हो गया है।
अवधेश
30 Jul 2021
आमागढ़ क़िला: आदिवासी मीणा समुदाय और हिंदूवादी संगठन आमने-सामने
आमागढ़ (आंबागढ़) का क़िला। फोटो साभार : इंडियन एक्सप्रेस

राजस्थान की राजधानी में जहां एक तरफ राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं वहीं दूसरी तरफ जयपुर से 10 किलोमीटर दूर गलता तीर्थ के पास पहाड़ी पर स्थित आमागढ़ (जिसे आंबागढ़ भी कहा जाता है) किला इन दिनों विवादों के घेरे में है। किले को लेकर हुए विवाद में कथित रूप से हिंदूवादी संगठन और आदिवासी मीणा समुदाय आमने-सामने हैं।

कहां से हुई मामले की शुरूआत ?

मामले की शुरूआत 21 जुलाई को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद हुई जिसमें कथित रूप से आदिवासी मीणा समुदाय के लोग आमागढ़ किले के ऊपर लगभग 8 फुट लम्बे डंडे पर लगे एक भगवा झंडे को उतार रहे हैं।

जयपुर के गलता तीर्थ स्थित आमागढ़ की पहाड़ी पर सत्ताधारी कांग्रेस समर्थित विधायक की मौजूदगी में “श्रीराम “ लिखा पवित्र भगवा ध्वज पोल से उतार कर फाड़ दिया

कहाँ हो फ़र्ज़ी जनेऊधारी ? pic.twitter.com/y43zQVkECe

— Laxmikant bhardwaj (@lkantbhardwaj) July 22, 2021

वायरल वीडियो के मुताबिक राजस्थान आदिवासी मीणा सेवा संघ के प्रदेशाध्यक्ष और गंगापुर सिटी से कांग्रेस समर्थित निर्दलीय विधायक रामकेश मीणा लोगों की अगुवाई कर रहे हैं, झंडा उतारते समय फटने से मामले ने तूल पकड़ लिया और आरएसएस से जुड़े कई लोगों ने इसकी तीखी आलोचना की, हालांकि राजस्थान भाजपा से जुड़े मुख्यधारा के नामों ने अभी मामले से दूरी बना रखी है।

लेकिन राज्यसभा में भाजपा के सांसद किरोड़ीलाल मीणा ने राजस्थान सरकार को पत्र लिखते हुए इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा है, साथ ही किरोड़ीलाल ने विधायक रामकेश मीणा की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि मीणा समाज के लोग हमेशा से हिंदू थे और आगे भी हिंदू परंपराओं का निर्वहन करते रहेंगे।

image

भाजपा सांसद किरोड़ीलाल मीणा का बयान

वहीं 21 जुलाई की घटना के बाद मीणा समुदाय और हिंदू संगठनों ने एक-दूसरे पर आईपीसी धारा 295 और आईटी अधिनियम की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करवाई है।

क्या कह रहा है मीणा समुदाय ?

मीणा समुदाय से जुड़े लोगों का आरोप है कि युवा शक्ति मंच नामक एक संगठन ने आमागढ़ किले पर एक पोल पर भगवा झंडा लगा दिया और मंदिर परिसर में रखी प्राचीन मूर्तियों की जगह नई प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं और वहां अंबिका भवानी माता मंदिर के होने का दावा किया जा रहा है।

image

अम्बा माता, मीणा जाति की ईष्ट देवी।

वहीं इस मामले में जून में जयपुर के आदर्श नगर पुलिस थाने में एक एफआईआर भी दर्ज करवाई गई थी जिसमें पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुछ युवकों को हिरासत में लिया था।

समुदाय का आगे आरोप है कि बीते 16 जुलाई 2021 को कुछ लोगों से पता चला कि आमागढ़ किले पर कोई अन्य झंडा लगाया गया है। तमाम बातचीत के दौर के बाद मीणा समाज के लोग 21 जुलाई को वहां एकजुट हुए।

वहीं मीणा समुदाय का शुरूआत से यह दावा है कि आमागढ़ किला आदिवासी मीणा समुदाय के राजाओं का है और यहां नाढ़ला गोत्र के मीणाओं का पुराना आमागढ़किला और अंबा माता का प्राचीन मंदिर है।

इसके अलावा समुदाय पुरातत्व विभाग के उस सूचना पट्ट का भी हवाला दे रहा है जो किले के मुख्य द्वार पर लगा है जिसमें लिखा है “मीणों का यह दुर्ग उत्तर की ओर एक पहाड़ी पर स्थित है”।

image

इस मामले पर भाजपा नेता लक्ष्मीकांत भारद्वाज कहते हैं कि हमारी आपत्ति या दावा मंदिर या किले को लेकर कभी नहीं थी, हमें भगवा झंडे के अपमान से ठेस पहुंची है जिसका हम विरोध कर रहे हैं।

आदिवासी बनाम हिंदू धर्म की पुरानी बहस

आमागढ़ मामले के साथ ही अब आदिवासी और हिंदू धर्म की पुरानी बहस में फिर से चिंगारी लग गई है। गौरतलब है कि इससे पहले आदिवासी मीणा समाज के लोग देशभर में आदिवासी कोड लागू करने और जनगणना फार्म में अलग से कॉलम रखने की मांग करते रहे हैं जिनका समय-समय पर कांग्रेस, बीजेपी और निर्दलीय विधायकों ने भी साथ दिया।

वहीं इस साल मार्च में राजस्थान विधानसभा में आदिवासी विधायक और राजस्थान युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्षगणेश घोघरा ने भी मांग करते हुए कहते हैं कि हमारा आदिवासी धर्म कोड अलग से बनाया जाए।

2011 की जनगणना के मुताबिक भारत में आदिवासियों की संख्या करीब 10 करोड़ से अधिक है, वहीं देश में आदिवासियों की 750 से भी अधिक जातियां रहती हैं।

अधिकतर राज्यों में आबादी के हिसाब से अलग धर्म कोड बनाने की मांग देशभर में समय-समय पर उठती रही है। मालूम हो कि कि पिछली जनगणना में इन्हें धर्म की जगह 'अन्य' श्रेणी में रखा गया था।

वहीं ब्रिटिश शासन काल में साल 1871 से लेकर आज़ादी के बाद 1951 तक आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड की व्यवस्था थी। आज़ादी के बाद आदिवासी समुदाय को शेड्यूल ट्राइब्स (एसटी) कहा गया।

वरिष्ठ पत्रकार अवधेश आकोदिया पूरे मामले पर अपनी राय रखते हुए कहते हैं कि इस पूरे प्रकरण में भगवा झंडे को हटाने और आदिवासी-हिंदू की बहस दोनों एक साथ चल रहे हैं जबकि यह दोनों मामले अलग हैं।

वह जोड़ते हैं कि आदिवासी समुदाय की हिंदू नियमों से अलग करने की मांग पुरानी है, लेकिन वर्तमान में आमागढ़ को समुदाय के लोगों ने अस्मिता तो उधर कुछ हिंदू संगठनों ने दबे मुंह भावनाओं से जोड़ा है।

आकोदिया कहते हैं कि इस मामले में भाजपा की चुप्पी बताती है कि वह इस मामले पर राजनीतिक लिहाज से मीणा समुदाय और सोशल मीडिया पर मुखर युवाओं की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती है। 

राजस्थान में चुनावी राजनीति के लिहाज से मीणा समुदाय का काफी दबदबा है जहां अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित 25 विधानसभा सीटों में कांग्रेस और भाजपा दोनों के मीणा विधायक हैं। वहीं 2011की जनगणना के मुताबिक राज्य में अनुसूचित जनजाति राज्य की जनसंख्या का 13.48 फीसदी है।

रावत सारस्वत का लिखा मीणा इतिहास

आंबागढ़, जिसे आमागढ़ भी कहा जाता है, को 18वीं शताब्दी में सवाई जय सिंह-2 ने बनवाया था। इस पर गवर्मेंट कॉलेज, बस्सी के प्रोफेसर डॉ. राम नारायण मीणा कहते हैं किले को देखते हुए हम कह सकते हैं कि उस समय के मीणा शासकों का अच्छा-खासा प्रभाव था, कच्छावा और मीणा शासकों के बीच हुए युद्ध से इस किले की एतिहासिक कड़ी जुड़ी है।

वह जोड़ते हैं कि इतिहासकार जादुनाथ सरकार की किताब ‘ए हिस्ट्री ऑफ जयपुर: 1503-1938के मुताबिक भी कच्छावा शासकों के जयपुर पर शासन करने से पहले इस क्षेत्र में मीणा राजाओं का निवास था।

आगे वह कहते हैं कि इस मामले में तूल देने जैसा कुछ नहीं है, वह इस घटनाक्रम को मीणा समुदाय के लोगों में बढ़ती हुई जागरूकता और चेतना के परिणाम के रूप में देखते हैं।

इधर जेएनयू दिल्ली में एसोसिएट प्रोफेसर गंगा सहाय मीणा कहते हैं सत्ता में जिस विचारधारा का प्रभुत्व होता है वह अपना वर्चस्व फैलाने के लिए ऐतिहासिक बिंदुओं पर ऐसी कोशिशें करती रहती है, वहीं सोशल मीडिया से मामले को धार्मिक और साम्प्रदायिक रंग दिया जाता है।

वहीं बस्सी के लेखक स्वर्गीय रावत सारस्वत द्वारा लिखे सन 1968 में सर्वप्रथम प्रकाशित ‘मीणा इतिहास’ में उल्लेखित है कि आमागढ़ का किला निश्चय ही मीणों का रहा है जो सैनिक दृष्टि से उपयोग के लिए बनाया गया मालूम होता है. किले के अंदर केवल एक जलाशय और दो-तीन पक्के मकान के अलावा सुरक्षात्मक परकोटे है। (पृष्ठ संख्या-139)

image

सोशल मीडिया पर आदिवासी समाज के समर्थन में एकजुटता

आमागढ़ मसले पर शुरू से ही सोशल मीडिया पर मीणा समुदाय के लोग मुखर रहे हैं। इस कड़ी में आदिवासी नेता छोटूभाई वसावा, भीम आर्मी के संयोजक चंद्रशेख़र आज़ाद और कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरएसएस को आड़े हाथों लेते हुए ट्वीट किए हैं.

वहीं सुदर्शन चैनल के संपादक अशोक चव्हाणके के पूरे मामले पर 1 अगस्त को आमागढ़ क़िले में जाकर भगवा ध्वज फहराने का ऐलान करने के बाद अब मीणा समुदाय 1 अगस्त को आमागढ़ पहुंचने का आह्वान कर रहा है।

इसके साथ ही जयपुर पुलिस कमिश्नरेट की तरफ से सभी पक्षों से अपील की गई है कि वह 1 अगस्त को आमागढ़ क्षेत्र या आसपास इकट्‌ठा नहीं हों।

अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) राहुल प्रकाश ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति संस्था अथवा किसी पक्ष के द्वारा सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की जाती है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

(जयपुर स्थित लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Rajasthan
Amagarh fort
Tribal Meena Community
Tribal community
BJP
Meena community
hinduism

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • srilanka
    न्यूज़क्लिक टीम
    श्रीलंका: निर्णायक मोड़ पर पहुंचा बर्बादी और तानाशाही से निजात पाने का संघर्ष
    10 May 2022
    पड़ताल दुनिया भर की में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने श्रीलंका में तानाशाह राजपक्षे सरकार के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन पर बात की श्रीलंका के मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. शिवाप्रगासम और न्यूज़क्लिक के प्रधान…
  • सत्यम् तिवारी
    रुड़की : दंगा पीड़ित मुस्लिम परिवार ने घर के बाहर लिखा 'यह मकान बिकाऊ है', पुलिस-प्रशासन ने मिटाया
    10 May 2022
    गाँव के बाहरी हिस्से में रहने वाले इसी मुस्लिम परिवार के घर हनुमान जयंती पर भड़की हिंसा में आगज़नी हुई थी। परिवार का कहना है कि हिन्दू पक्ष के लोग घर से सामने से निकलते हुए 'जय श्री राम' के नारे लगाते…
  • असद रिज़वी
    लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हंगामा: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत चंदन का घेराव, धमकी
    10 May 2022
    एक निजी वेब पोर्टल पर काशी विश्वनाथ मंदिर को लेकर की गई एक टिप्पणी के विरोध में एबीवीपी ने मंगलवार को प्रोफ़ेसर रविकांत के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया। उन्हें विश्वविद्यालय परिसर में घेर लिया और…
  • अजय कुमार
    मज़बूत नेता के राज में डॉलर के मुक़ाबले रुपया अब तक के इतिहास में सबसे कमज़ोर
    10 May 2022
    साल 2013 में डॉलर के मुक़ाबले रूपये गिरकर 68 रूपये प्रति डॉलर हो गया था। भाजपा की तरफ से बयान आया कि डॉलर के मुक़ाबले रुपया तभी मज़बूत होगा जब देश में मज़बूत नेता आएगा।
  • अनीस ज़रगर
    श्रीनगर के बाहरी इलाक़ों में शराब की दुकान खुलने का व्यापक विरोध
    10 May 2022
    राजनीतिक पार्टियों ने इस क़दम को “पर्यटन की आड़ में" और "नुकसान पहुँचाने वाला" क़दम बताया है। इसे बंद करने की मांग की जा रही है क्योंकि दुकान ऐसे इलाक़े में जहाँ पर्यटन की कोई जगह नहीं है बल्कि एक स्कूल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License