NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
राजनीति
अंबेडकर विश्वविद्यालय: फ़ीस माफ़ी खत्म करने की योजना के ख़िलाफ़ छात्रों का प्रदर्शन
दिल्ली स्थित अंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और विकलांग श्रेणियों के 100 प्रतिशत शुल्क माफ़ी की अपनी मौजूदा नीति में बदलाव पर विचार कर रहा है तो छात्र संगठन इसका विरोध कर रहे हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
08 Sep 2020
अंबेडकर विश्वविद्यालय

दिल्ली: दिल्ली के अंबेडकर विश्वविद्यालय (एयूडी) के छात्रों ने एससी/ एसटी/ पीडब्ल्यूडी छात्रों के लिए लागू किए गए फ़ीस माफ़ी के प्रावधानों को खत्म करने के ख़िलाफ़ सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का आह्वान छात्रसंघ ने किया था, इसका समर्थन एसएफआई और क्रांतिकारी युवा संगठन के साथ अन्य प्रगतिशील संगठनों ने भी किया।

आपको बता दे एयूडी में दाखिला लेने वाले एससी/ एसटी/ पीडब्ल्यूडी छात्रों के लिए 100% फ़ीस माफ़ी का प्रावधान है। परन्तु प्रस्तावित किया गया है कि नीतिगत बदलावों के तहत इस प्रावधान को खत्म कर दिया जाएगा, जिसके पश्चात यूनिवर्सिटी में फ़ीस माफ़ी केवल आर्थिक आधार पर दिए जाने का नियम लागू होगा। छात्र इसको लेकर ही गुस्से में हैं। इस निर्णय को समाज के वंचित तबके के छात्रों को शिक्षा से बाहर करने की साज़िश मान रहे हैं।

आपको बता दें कि अंबेडकर विश्वविद्यालय में प्रवेश पाने के इच्छुक सैकड़ों छात्र उन मीडिया रिपोर्टों के बाद चिंतित हैं जो बताते हैं कि विश्वविद्यालय अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के छात्रों को दी जाने वाली पूरी फ़ीस माफ़ी से दूर हो सकता है। अब उन छात्रों को शुल्क माफ़ी दी जाएगी, जिनकी पारिवारिक आय 3 लाख रुपये प्रति वर्ष से कम है।

IMG-20200908-WA0017.jpg

इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय ने यह भी प्रस्तावित किया है कि उम्मीदवारों को दिल्ली सरकार द्वारा जारी प्रमाण पत्र देना होगा, भले ही उनके पास उनके मूल राज्य से जारी प्रमाण पत्र हो।

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए प्रदर्शनकारी छात्र विजय ने कहा, “जब मैं एमए के लिए आवेदन कर रहा था, तब मेरे पास केवल दो विश्वविद्यालय थे; जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और अंबेडकर विश्वविद्यालय। दोनों विश्वविद्यालय अनुदानित दरों पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हैं। अब, मेरे जैसे किसी भी छात्र को आवेदन करने के लिए सपने देखने की हिम्मत नहीं होगी क्योंकि उनके पास शुल्क जमा करने की क्षमता नहीं होगी।”

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के एक्टिविस्ट आदित्य सिंह, जिन्होंने अभी-अभी इतिहास में परास्नातक पास किया, ने न्यूज़क्लिक को बताया, “इससे पहले, हम माता-पिता को बता सकते थे कि हमारी पढ़ाई उन्हें ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ेगा। उदाहरण के लिए, मेरे पिता बीएसईएस के लिए काम करते हैं और इस धारणा के तहत हैं कि कोई भी स्नातक पूरा करने के बाद आसानी से नौकरी पा सकता है। लेकिन मैं आगे पढ़ाई करना चाहता हूं। मैं उन्हें समझा सकता था कि मैं पढ़ाई के लिए उनसे ज्यादा पैसे नहीं लूंगा क्योंकि हमारी फ़ीस पूरी तरह माफ कर दी गई थी। लेकिन यह अब आसान नहीं होगा। हाशिए के तबके से आने वाली छात्राओं के लिए स्थिति और खराब होगी क्योंकि 12 वीं कक्षा के बाद स्नातक करना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण काम है। यह एक निर्णय उनके सभी सपनों को खत्म कर सकता है।”

IMG-20200908-WA0014.jpg

छात्र संगठन केवाईएस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि दिल्ली सरकार द्वारा संचालित अम्बेडकर विश्वविद्यालय में पहले से ही दिल्ली सरकार द्वारा पूर्ण वित्त-पोषित कॉलेज से बहुत ज्यादा फ़ीस वसूली जा रही है। इतनी अधिक फ़ीस के कारण कमजोर और पिछड़े समुदायों से आने वाले छात्रों का एक बड़ा हिस्सा दाखिला प्रक्रिया पास करने के बावजूद भी प्रवेश नहीं ले पाता है। बताना चाहेंगे कि एयूडी में विभिन्न स्नातक व स्नातकोत्तर विषयों में ली जाने वाली फ़ीस दिल्ली सरकार द्वारा पूर्ण वित्त-पोषित कॉलजों की फ़ीस से 5-6 गुना अधिक है।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने साफ तौर पर कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन बहुसंख्यक पिछड़े और कमजोर वर्ग के छात्रों की समस्याओं और जरूरतों को नजर अंदाज कर रहा है। छात्रों ने साफ किया कि वो विश्वविद्यालय में फ़ीस माफ़ी के प्रावधानों में बदलाव का पुरजोर विरोध करते हैं और आगे भी करते रहेंगे , जब तक इस फैसले की पूर्ण वापसी नहीं हो जाती है।

ambedkar university
Student Protests
JNU
Students Federation of India
delhi government

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

JNU में खाने की नहीं सांस्कृतिक विविधता बचाने और जीने की आज़ादी की लड़ाई

नौजवान आत्मघात नहीं, रोज़गार और लोकतंत्र के लिए संयुक्त संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ें

रेलवे भर्ती मामला: बर्बर पुलिसया हमलों के ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलनकारी छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने कोचिंग संचालकों पर कसा शिकंजा

रेलवे भर्ती मामला: बिहार से लेकर यूपी तक छात्र युवाओं का गुस्सा फूटा, पुलिस ने दिखाई बर्बरता

अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोध छात्र, अचानक सिलेबस बदले जाने से नाराज़


बाकी खबरें

  • Kusmunda coal mine
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    भू-विस्थापितों के आंदोलन से कुसमुंडा खदान बंद : लिखित आश्वासन, पर आंदोलन जारी
    01 Nov 2021
    कुसमुंडा में कोयला खनन के लिए 1978 से 2004 तक कई गांवों के हजारों किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया गया था। लेकिन अधिग्रहण के 40 वर्ष बाद भी भू-विस्थापित रोजगार के लिए भटक रहे हैं और एसईसीएल दफ्तरों…
  • Puducherry
    हर्षवर्धन
    विशेष : पांडिचेरी के आज़ादी आंदोलन में कम्युनिस्ट पार्टी की भूमिका
    01 Nov 2021
    आज एक नवंबर के दिन ही 1954 में पांडिचेरी फ्रांस से आज़ाद हुआ था। पांडिचेरी फ्रांस की गुलामी से आज़ाद कैसे हुआ और उसका भारत में विलय कैसे हुआ यह कहानी आम भारतीय जनमानस से कोसो-कोस दूर है। आइए जानते…
  • education
    प्रभात पटनायक
    विचार: एक समरूप शिक्षा प्रणाली हिंदुत्व के साथ अच्छी तरह मेल खाती है
    01 Nov 2021
    वैश्वीकृत पूंजी के लिए, अपने कर्मचारी भर्ती करने के लिए, ऐसे शिक्षित मध्यवर्ग की उपस्थिति आदर्श होगी, जो हर जगह जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके, एक जैसा हो। शिक्षा का ऐसा एकरूपीकरण हिंदुत्व के जोर से…
  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    यमन में एक बच्चा होना बुरे सपने जैसा है
    01 Nov 2021
    3 करोड़ की आबादी वाले यमन ने इस युद्ध में 2,50,000 से अधिक लोगों को खो दिया है, इनमें से आधे लोग युद्ध की हिंसा में मारे गए और बाक़ी आधे लोग भुखमरी और हैज़ा जैसी बीमारियों की वजह से।
  • Amit Shah
    सुबोध वर्मा
    लखनऊ में अमित शाह:  फिर किया पुराने जुमलों का रुख
    01 Nov 2021
    एक अहम स्वीकारोक्ति में शाह ने 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की संभावनाओं को 2024 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के साथ जोड़ दिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License