NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
इराक में ईरान समर्थक काफिले पर अमेरिका ने फिर किया हवाई हमला
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत मजीद तख्त रवांची ने ‘सीएनएन’ से कहा कि ये हमले ‘‘अमेरिका की ओर से युद्ध की कार्रवाई’’ है। 
एएफपी
04 Jan 2020
USS Stike

बगदाद: अमेरिका और ईरान के बीच छद्म युद्ध शुरू होने की बढ़ती आशंकाओं के बीच अमेरिकी ड्रोन हमले में एक शीर्ष ईरानी जनरल की मौत के एक दिन बाद अमेरिका ने इराक में ईरान समर्थक लड़ाकों पर शनिवार तड़के फिर हवाई हमला किया।

बगदाद में अमेरिका के ड्रोन हमले में शुक्रवार को ईरानी कुद्स बल के कमांडर कासिम सुलेमानी और इराकी अर्द्धसैन्य बल के उप प्रमुख अबु महदी अल मुहंदिस की मौत हो गई थी। अमेरिका ने इराक में और बल भेजने का संकल्प लिया है और दूसरी ओर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वह युद्ध नहीं चाहते हैं।

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत मजीद तख्त रवांची ने ‘सीएनएन’ से कहा कि ये हमले ‘‘अमेरिका की ओर से युद्ध की कार्रवाई’’ है। 

ईरान और अमेरिका के बीच बेहद तनावपूर्ण स्थिति के बीच ये हमले सबसे नाटकीय घटनाक्रम हैं। 

ड्रोन हमले के करीब 24 घंटे बाद एक और हमले में अमेरिका ने इराकी अर्द्धसैन्य नेटवर्क हशद अल शाबी के काफिले को निशाना बनाया। इस नेटवर्क के शिया बहुल धड़ों के ईरान से निकट संबंध हैं।

हशद ने यह नहीं बताया कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है। इराकी सरकारी टीवी चैनल ने बताया कि यह हमला अमेरिका ने किया था।

एक पुलिस सूत्र ने बताया कि बमबारी में हशद के काफिले को निशाना बनाया गया और जिसमें कई लोग ‘‘हताहत’’ हुए। उन्होंने मरने वालों की सटीक संख्या नहीं बताई।

इस संबंध में अमेरिका ने कोई तत्काल टिप्पणी नहीं की है।

सुलेमानी और मुहंदिस के लिए शोक मार्च निकाला जाना था जिसके कुछ ही घंटों पहले अमेरिका ने एक और हमला कर दिया।

जनरल सुलेमानी (62) को आयतुल्ला खामेनी के बाद ईरान में सबसे ताकतवर माना जाता था। उनका कुद्स फोर्स ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड्स की एक इकाई था जो सीधे-सीधे आयतुल्ला को रिपोर्ट करता है।

इस हमले में रेवोल्यूशनरी गार्ड्स और हशद के पांच-पांच सदस्य मारे गए थे।

उधर 'भाषा' के मुताबिक वाशिंगटन में अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ’ ब्रायन ने कहा है कि ईरान के शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी को मारने का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का निर्णय रक्षात्मक था और इसे भविष्य में रक्तपात रोकने के लिए लिया गया था। 

ट्रम्प ने बयान दिया था कि यह कार्रवाई युद्ध शुरू करने के लिए नहीं, बल्कि युद्ध रोकने के लिए की गई थी। 

ओ’ब्रायन ने ट्रम्प के इसी बयान का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘इस हमले का लक्ष्य उन हमलों को रोकना था जिनका षड्यंत्र सुलेमानी रच रहा था। इसका लक्ष्य भविष्य में अमेरिकियों के खिलाफ ईरान के परोक्ष या आईआरजीसी कुद्स बल के जरिए किए जाने वाले प्रत्यक्ष हमले को रोकना था।’’

America
IRAN
Iraq
UNO
US-Iran Relations
US-Iran Tension
Donald Trump

Related Stories

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

ईरानी नागरिक एक बार फिर सड़कों पर, आम ज़रूरत की वस्तुओं के दामों में अचानक 300% की वृद्धि

असद ने फिर सीरिया के ईरान से रिश्तों की नई शुरुआत की

क्या दुनिया डॉलर की ग़ुलाम है?

सऊदी अरब के साथ अमेरिका की ज़ोर-ज़बरदस्ती की कूटनीति

यूक्रेन में छिड़े युद्ध और रूस पर लगे प्रतिबंध का मूल्यांकन

पड़ताल दुनिया भर कीः पाक में सत्ता पलट, श्रीलंका में भीषण संकट, अमेरिका और IMF का खेल?

अमेरिका ने ईरान पर फिर लगाम लगाई

ईरान पर विएना वार्ता गंभीर मोड़ पर 

लखनऊ में नागरिक प्रदर्शन: रूस युद्ध रोके और नेटो-अमेरिका अपनी दख़लअंदाज़ी बंद करें


बाकी खबरें

  • एम.ओबैद
    एमपी : ओबीसी चयनित शिक्षक कोटे के आधार पर नियुक्ति पत्र की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे
    26 Apr 2022
    चयनित शिक्षक पिछले एक महीने से नियुक्ति पत्र को लेकर प्रदेश भर में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन मांग पूरी न होने पर अंत में आमरण अनशन का रास्ता चयन किया।
  • अखिलेश अखिल
    यह लोकतांत्रिक संस्थाओं के पतन का अमृतकाल है
    26 Apr 2022
    इस पर आप इतराइये या फिर रुदाली कीजिए लेकिन सच यही है कि आज जब देश आज़ादी का अमृतकाल मना रहा है तो लोकतंत्र के चार प्रमुख स्तम्भों समेत तमाम तरह की संविधानिक और सरकारी संस्थाओं के लचर होने की गाथा भी…
  • विजय विनीत
    बलिया पेपर लीक मामला: ज़मानत पर रिहा पत्रकारों का जगह-जगह स्वागत, लेकिन लड़ाई अभी बाक़ी है
    26 Apr 2022
    "डबल इंजन की सरकार पत्रकारों को लाठी के जोर पर हांकने की हर कोशिश में जुटी हुई है। ताजा घटनाक्रम पर गौर किया जाए तो कानपुर में पुलिस द्वारा पत्रकारों को नंगाकर उनका वीडियो जारी करना यह बताता है कि…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जन आंदोलनों के आयोजन पर प्रतिबंध अलोकतांत्रिक, आदेश वापस लें सरकार : माकपा
    26 Apr 2022
    माकपा ने सवाल किया है कि अब जन आंदोलन क्या सरकार और प्रशासन की कृपा से चलेंगे?
  • ज़ाहिद खान
    आग़ा हश्र काश्मीरी: गंगा-ज़मुनी संस्कृति पर ऐतिहासिक नाटक लिखने वाला ‘हिंदोस्तानी शेक्सपियर’
    26 Apr 2022
    नाट्य लेखन पर शेक्सपियर के प्रभाव, भारतीय रंगमंच में महत्वपूर्ण योगदान और अवाम में उनकी मक़बूलियत ने आग़ा हश्र काश्मीरी को हिंदोस्तानी शेक्सपियर बना दिया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License