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अमेठी: सिस्टम से परेशान मां-बेटी ने की आत्मदाह की कोशिश! चार पुलिसकर्मी सस्पेंड
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भले ही बेहतर कानून व्यवस्था का दम भर रही हो लेकिन अमेठी की मां-बेटी के लखनऊ लोकभवन के सामने आत्मदाह की कोशिश ने एक बार फिर सरकार को विपक्ष के निशाने पर ला दिया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Jul 2020
UP Police
प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तर प्रदेश का अमेठी एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह सांसद स्मृति ईरानी या राहुल गांधी नहीं बल्कि दो मां-बेटी हैं। दोनों ने शुक्रवार, 17 जुलाई की शाम लखनऊ के लोकभवन के सामने आत्मदाह करने की कोशिश की। इनका आरोप है कि गांव के कुछ दबंगों के खिलाफ जब उन्होंने पुलिस में शिकायत की तो पुलिस ने उलटे उनके खिलाफ ही क्रॉस एफआईआर लिख दी।

इस घटना के बाद विपक्ष ने कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर योगी सरकार पर हमला बोला है तो वहीं मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासन भी हरकत में आया है। अमेठी के डीएम ने थाने में मां-बेटी की सुनवाई न करने वाले चार पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक अमेठी के जामो थानाक्षेत्र की रहने वाली करीब 55-56 वर्षीय महिला सोफिया और उनकी 28 वर्षीय बेटी गुड़िया का 9 मई को अपने पड़ोसी अर्जुन साहू से नाली को लेकर एक विवाद हो गया था। जिसकी शिकायत बेटी ने पुलिस थाने में दर्ज करवाई।

नवभारत टाइम्स ने पीड़ित महिला के हवाले से लिखा है कि अर्जुन साहू की पुलिस के साथ अच्छी साठगांठ थी, जिसके चलते थाने में उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। ख़बर के मुताबिक गुड़िया की शिकायत के बाद अर्जुन साहू और उसके साथियों के ख़िलाफ़ रिपोर्ट तो लिखी गई लेकिन अर्जुन साहू की तहरीर पर गुड़िया पर भी पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया।

इसके बाद दोनों मां-बेटी आला अधिकरियों तक अपनी बात पहुंचाने लखनऊ आईं और विधानसभा गेट नंबर 3 के सामने दोनों ने खुद पर मिट्टी का तेल उड़ेलकर आग के हवाले कर दिया। जिसके बाद आग की लपटों में घिरी महिला वहीं गिर गई। जबकि उनकी बेटी आग की लपटों में घिरकर सड़क पर दौड़ने लगी। 

अमर उजाला की ख़बर के अनुसार आत्मदाह की कोशिश करने वाली महिला की बेटी के मुताबिक जामो कस्बा में उनकी पुश्तैनी जमीन है। जिस पर कब्जा और पानी निकासी को लेकर कुछ लोग विवाद कर रहे हैं। इन लोगों ने घर पर हमला भी किया था। इस दौरान उसके साथ बदसुलूकी भी की गई।

जामो पुलिस ने सुनील, राजकरन, राममिलन, के खिलाफ मारपीट व छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज कर लिया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं एसडीएम ने भी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर की गई शिकायत पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। जिसके कारण दबंग लगातार प्रताड़ित करते आ रहे हैं। दबंगों के कारण वह अपने परिवार के साथ घर छोड़ने को मजबूर हैं। इस मामले में दरोगा ब्रह्मानंद यादव ने उसके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया था।

मुकदमा दर्ज करने के बाद दरोगा आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाए समझौता करने का दबाव बना रहे हैं। पीड़िताओं के मुताबिक जब अमेठी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की तो उच्चाधिकारियों से भी संपर्क किया। पीड़िता ने बताया कि वह आईजी रेंज के कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगा चुकी हैं। लेकिन वहां न्याय नहीं मिला। पुलिस व प्रशासन सीधे दबंगों की मदद कर रहा है।

बता दें कि मामले के संज्ञान में आने के बाद अमेठी के डीएम अरुण कुमार और एसपी ख्याति गर्ग शुक्रवार को ही पीड़ित परिवार के गांव पहुंचे। जहां उन्होंने निरीक्षण कर मामले की जानकारी हासिल की।

इस संबंध में डीएम अरुण कुमार ने बताया कि लापरवाही बरतने वाले जामो के एसएचओ रतन सिंह, हल्का के दरोगा ब्रह्मानंद तिवारी और दो सिपाहियों समेत चार को सस्पेंड कर दिया है।

क्या कहना है पुलिस प्रशासन का?

संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था नवीन अरोरा ने मीडिया को बताया कि मां-बेटी अमेठी के जामो की रहने वाली हैं। दोनों ने वहां की पुलिस व प्रशासन पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार शाम को लोकभवन के सामने आत्मदाह का प्रयास किया।

नवीन अरोरा के अनुसार पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों की जान बचाई और सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। अमेठी के पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया जा रहा है। उनसे जानकारी मांगी गई है।

विपक्ष क्या कह रहा है?

बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने इस मामले पर ट्वीट करते हुए योगी सरकार से लापरवाह अफसरों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। 

जमीन विवाद प्रकरण में अमेठी जिला प्रशासन से न्याय न मिलने पर माँ-बेटी को लखनऊ में सीएम कार्यालय के सामने आत्मदाह करने को मजबूर होना पड़ा। यूपी सरकार इस घटना को गम्भीरता से ले तथा पीड़ित को न्याय दे व लापरवाह अफसरों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई करे ताकि ऐसी घटना पुनः न हों।

— Mayawati (@Mayawati) July 18, 2020

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “जमीन विवाद प्रकरण में अमेठी जिला प्रशासन से न्याय न मिलने पर माँ-बेटी को लखनऊ में सीएम कार्यालय के सामने आत्मदाह करने को मजबूर होना पड़ा। यूपी सरकार इस घटना को गम्भीरता से ले और पीड़ित को न्याय दे।”

इससे पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी सरकार में गरीबों की कोई सुनवाई नहीं है। सपा कार्यकाल में बनवाए गए लोकभवन को लेकर उन्होंने कहा कि सपा ने लोकभवन इसलिए बनवाया था कि जहां बिना भेदभाव आम जनता अपनी शिकायतों के निवारण के लिए जा सके।

लखनऊ में लोकभवन के सामने दो महिलाओं द्वारा दबंगों के खिलाफ़ कोई कार्रवाई न होने से हताश होकर आत्मदाह करने की दुःखद ख़बर आयी है।

सपा ने लोकभवन इसलिए बनवाया था कि वहाँ बिना भेदभाव आम जनता अपनी शिकायतों के निवारण के लिए जा सके, लेकिन इस भाजपा सरकार में गरीबों की कोई सुनवाई नहीं।

— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) July 17, 2020

इस मामले पर आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने भी यूपी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा,"..अपराधियों के हाथों मरो या सरकार से तंग आकर मरो,हर हाल में मरना ही है।”

योगी सरकार की क्रूरता देखिये अमेठी की दो बहने सरकार से दुखी होकर मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने आत्मदाह करने को मजबूर हो जाती हैं क्या आपको लगता है यू पी में सरकार नाम की कोई चिड़िया है? “या अपराधियों के हाथों मरो या सरकार से तंग आकर मरो हर हाल में मरना ही है” pic.twitter.com/bEyRXTiYvL

— Sanjay Singh AAP (@SanjayAzadSln) July 17, 2020

गौरतलब है कि हाल ही में विकास दुबे कांड के उजागर होने के बाद पुलिस और दबंगों की मिलीभगत के मामले ने तूल पकड़ा था। जिसकी अभी भी जांच जारी है। ऐसे में इस मामले ने एक बार फिर पुलिस प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैँ।

स्थानीय पत्रकार शिवम यादव ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में बताया कि डॉक्टरों के मुताबिक महिला 80 प्रतिशत तक जल गई है। जबकि उनकी बेटी 40 प्रतिशत जली है। दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है।

शिवम ने आगे बताया कि दोनों मां-बेटी जब आग की लपटों में घिरी चीख रही थीं जब वहां मौजूद लोकभवन के सुरक्षाकर्मी या किसी कर्मचारी ने दोनों को बचाने की कोई कोशिश नहीं की, कई लोगों ने वीडियो बनाना ज्यादा जरूरी समझा। जब पुलिस पर मौके पर पहुंची तो आग बुझाने के बाद दोनों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। 

UttarPradesh
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