NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अमृत काल: बेरोज़गारी और कम भत्ते से परेशान जनता
सीएमआईए के मुताबिक़, श्रम भागीदारी में तेज़ गिरावट आई है, बेरोज़गारी दर भी 7 फ़ीसदी या इससे ज़्यादा ही बनी हुई है। साथ ही 2020-21 में औसत वार्षिक आय भी एक लाख सत्तर हजार रुपये के बेहद निचले स्तर पर रही।
सुबोध वर्मा
11 Apr 2022
unemployment

पिछले पांच सालों में आर्थिक मंदी, महामारी और इस पर खस्ताहाल प्रतिक्रिया के चलते लगातार आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। ऊपर से इस दौरान नरेंद्र मोदी सरकार को भी लोगों की स्थिति से कोई फर्क नहीं पड़ा, इससे भी हालात खराब होते गए। शायद लगातार चुनावी सफलता से मदमस्त सरकार लोगों की रहने की स्थितियों में सुधार को भुला चुकी है।

आज के सरकारी विमर्श में नौकरियों की तो चर्चा तक नहीं होती, जबकि बेरोजगारी दर 7 फीसदी के भयावह स्तर पर स्थिर हो चुकी है। ऐसा अक्टूबर 2018 से जारी है (जैसा नीचे चार्ट में बताया भी गया है। चार्ट के लिए आंकड़े सीएमआई द्वारा किए गए सर्वे से लिए गए हैं.)

"वी" आकार में अर्थव्यवस्था के सुधार होने या इसके पटरी पर वापस आने की बात बेमानी हैं, क्योंकि लोगों के लिए पर्याप्त मात्रा में नौकरियां ही उपलब्ध नहीं हैं। इस बीच काम करने लायक आबादी का प्रतिशत तेजी से गिरा है। इस वर्ग में वह लोग शामिल हैं, जो या तो काम कर रहे हैं या काम तलाश रहे हैं। 2017 जनवरी में यह स्तर 45 फ़ीसदी पर था, जो मार्च 2022 में गिरकर 40 फ़ीसदी पर आ गया। (नीचे चार्ट देखें)

इसका मतलब क्या है? इसका मतलब है कि नौकरियों की कमी और बिना काम के बैठे रहने के चलते ज़्यादा से ज़्यादा लोग हतोत्साहित हो रहे हैं और वे नौकरी के "बाज़ार" को छोड़ रहे हैं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा युवा लोगों का है, जिन्होंने या तो कोई कोर्स करना शुरू कर दिया है या कोई दूसरा अध्ययन शुरू कर दिया है, ताकि भविष्य में बेहतर नौकरियों के लिए वे खुद को तैयार कर सकें।

इन पांच सालों में भारत में कुल रोज़गार प्राप्त लोगों की संख्या, जनवरी 2017 के 40.1 करोड़ के आंकड़े से कम होकर 39.6 करोड़ पर आ गई है। जबकि इस बीच में भारत की आबादी 130.5 करोड़ से बढ़कर 137.4 करोड़ पर पहुंच गई है। यह आंकड़े जनगणना कार्यालय के अनुमानों पर आधारित हैं।

आय और नौकरियां

सीएमआईई के आंकड़ों के हालिया विश्लेषण दो अहम आयामों पर प्रकाश पड़ता है: अलग-अलग वर्ग के लोगों की आय और रोज़गार पर असर।

सबसे गरीब़ वार्षिक आय वर्ग (जिन परिवारों की सालाना आय एक लाख रुपये कम है)- इस वर्ग में 2019-20 में 9.8 फ़ीसदी परिवार आते थे। यह महामारी के पहले की बात है। 2021-22 तक इनकी संख्या बढ़कर 16.6 फ़ीसदी पहुंच गई। इस वर्ग में बेरोज़गारी दर कम है। सितंबर-दिसंबर 2019-20 में यह 4.1 फ़ीसदी थी, जो 2021-22 में इन्हीं महीनों में बढ़कर 4.8 फ़ीसदी पहुंच गई। लेकिन इस वर्ग में कार्य भागादारी दर बेहद कम है। यह महामारी के पहले 38.1 फ़ीसदी थी, जो 2021-22 में घटकर 31.3 फ़ीसदी रह गई। इस वर्ग में एक परिवार की औसत आय सालाना 53,000 रुपये है। मतलब यह लोग बमुश्किल ही गुजारा कर पा रहे हैं। साफ़ है कि बेरोज़गादी दर ही अपने आप में अपर्याप्त है।

निम्न मध्यम वर्ग (जिन परिवारों की आय एक से दो लाख रुपये के भीतर है): यह कुल परिवारों का 45 फ़ीसदी हिस्सा है। यह वर्ग, कुल रोज़गार प्राप्त लोगों में एक तिहाई हिस्सेदारी रखता है। महामारी के दौरान इसमें थोड़ी बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन 2021 के अंत तक यह अपनी पिछली स्थिति में वापस आ गया। इसमें सबसे गरीब़ वर्ग की तुलना में श्रम भागीदारी दर थोड़ी बेहतर है, लेकिन अमीर वर्गों की तुलना में यह बदतर है।

मध्यम वर्ग (जिन परिवारों की वार्षिक आय 2 से 5 लाख रुपये के भीतर)- इन परिवारों की संख्या, कुल परिवारों की आधी है। वहीं आधे बेरोज़गार भी इसी वर्ग से हैं। यही वह वर्ग है, जो नौकरियां जाने से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। इसमें श्रम भागीदारी 43 फ़ीसदी, मतलब ऊंची है। लेकिन बेरोज़गारी दर भी यहां 9 फ़ीसदी है।

ज़्यादा अमीर वर्ग- उच्च मध्यम वर्ग (जिन परिवारों की आय 5 से 10 लाख रुपये है) और अमीर (जिनकी आय 10 लाख रुपये से ज्यादा है), उनकी श्रम भागीदारी दर ज़्यादा बेहतर है, यह 46 फ़ीसदी है, यहां बेरोज़गारी दर भी 5 फ़ीसदी ही है। महामारी के दौरान इनकी बेरोज़गारी दर बेहद तेजी से ऊपर गई थी। लेकिन अब यह लोग वापसी कर चुके हैं। यही वह वर्ग है जो अर्थव्यवस्था के कमजोर "V आकार" वाले सुधार का गवाह बना है।

स्थिति की गहराई की झलक

गलतियां भी शामिल हैं। अकादमिक जगत में फीसदी हिस्सेदारी के जरिए वर्गीकरण लिया जाता है, लेकिन इस सर्वे में एक परिवार की वार्षिक आय के आंकड़े लिए गए हैं। 

लेकिन इससे आय और नौकरियों के मामले में संघर्ष कर रहे भारत की बहुत कुछ स्थिति साफ हो जाती है।

सबसे हैरान करने वाली चीज कम आय का स्तर है। इस सर्वे के मुताबिक़, 57 फ़ीसदी परिवार सालाना 2 लाख रुपये कम कमाते हैं। मतलब महीने का 16,666 रुपये से भी कम। बिल्कुल, कई लोग तो इससे भी बहुत कम कमा पाते होंगे। 17 फ़ीसदी लोग महीने के 8,333 रुपये से कम कमाते हैं।

जैसा बताया गया है कि औसत वार्षिक आय एक लाख सत्तर हजार रुपये या चौदह हजार रुपये प्रति महीने है। सर्वे में यह पता नहीं चल पाया है कि इस आय को पाने के लिए कितने घंटे काम करना पड़ता है। लेकिन दूसरे सर्वे पर्याप्त सबूत देते हैं कि इसके लिए 8 घंटे से ज्यादा काम करना होता है।

इससे भी कथित "छुपी हुई बेरोज़गारी या प्रछन्न बेरोज़गारी" की स्थिति का पता चलता है। यह तब है जब लोगों को बहुत कम वेतन पर काम करने को मजबूर किया जा रहा है, क्योंकि उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। या तो वे भूखे रहें या फिर जो मिल रहा है, उसमें काम करें। यह अवधारणा सिर्फ़ गरीब़ वर्ग तक सीमित नहीं है। यहां तक कि तथाकथित मध्यम वर्ग, उच्च वर्ग भी बहुत कम वेतन के लिए काम कर रहे हैं और मोदी द्वारा प्रचारित अच्छे दिनों का इंतज़ार कर रहे हैं।

इस लेक को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Amrit Kaal: Crushed Under Joblessness and Low Wages

unemployment rate
CMIE
Joblessness
LOW WAGES
Hidden unemployment
Work Participation Rate
Amrit Kaal

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

किधर जाएगा भारत— फ़ासीवाद या लोकतंत्र : रोज़गार-संकट से जूझते युवाओं की भूमिका अहम

5 साल में रोज़गार दर 46 फ़ीसदी से घटकर हुई 40 फ़ीसदी

पिछले 5 साल में भारत में 2 करोड़ महिलाएं नौकरियों से हुईं अलग- रिपोर्ट

भाजपा की जीत के वे फैक्टर, जिसने भाजपा को बनाया अपराजेय, क्यों विपक्ष के लिए जीतना हुआ मुश्किल?

मध्य प्रदेश के जनजातीय प्रवासी मज़दूरों के शोषण और यौन उत्पीड़न की कहानी

यूपी: युवाओं को रोजगार मुहैय्या कराने के राज्य सरकार के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते हैं!

बिना रोज़गार और आमदनी के ज़िंदा रहने को मजबूर कई परिवार

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण तनाव और कोविड संकट में सरकार से छूटा मौका, कमज़ोर रही मनरेगा की प्रतिक्रिया

महामारी ने एक निस्वार्थ शिक्षक और उसके गाँव के सपनों को चूर-चूर कर दिया


बाकी खबरें

  • Modi
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, PM मोदी आज मुख्यमंत्रियों संग लेंगे बैठक
    27 Apr 2022
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,927 नए मामले सामने आए हैं। इसमें से क़रीब 60 फ़ीसदी मामले दिल्ली और हरियाणा से सामने आए है।
  • SATAN
    जॉन दयाल
    एनआईए स्टेन स्वामी की प्रतिष्ठा या लोगों के दिलों में उनकी जगह को धूमिल नहीं कर सकती
    27 Apr 2022
    स्टेन के काम की आधारशिला शांतिपूर्ण प्रतिरोध थी, और यही वजह थी कि सरकार उनकी भावना को तोड़ पाने में नाकाम रही।
  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    नागरिकों से बदले पर उतारू सरकार, बलिया-पत्रकार एकता दिखाती राह
    26 Apr 2022
    वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने बताया कि चाहे वह दलित विधायक जिग्नेश मेवानी की दोबारा गिरफ्तारी हो, या मध्यप्रदेश में कथित तौर पर हिंदू-मुस्लिम विवाह के बाद मुसलमान की दुकान और घर पर चला बुल्डोज़र, यह सब…
  • सत्यम् तिवारी
    रुड़की : डाडा जलालपुर गाँव में धर्म संसद से पहले महंत दिनेशानंद गिरफ़्तार, धारा 144 लागू
    26 Apr 2022
    27 अप्रैल को होने वाली 'धर्म संसद' का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी उत्तराखंड पुलिस को निर्देश दिये थे। 26 अप्रैल की शाम को पुलिस ने डाडा जलालपुर गाँव से महंत दिनेशानंद को गिरफ़्तार कर लिया।
  • अजय कुमार
    एमवे के कारोबार में  'काला'  क्या है?
    26 Apr 2022
    साल 2021 में इस सम्बन्ध में उपभोक्ता संरक्षण नियम बने। इसके तहत नियम बना कि कोई भी डायरेक्ट सेलिंग कंपनी यानी वैसी कम्पनी जो उपभोक्ताओं को सीधे अपना माल बेचती हैं, वह कमीशन देने की शर्त पर अपना माल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License