NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
आंध्र: अनंतपुर की इंडियन डिज़ाइन कंपनी के कपड़ा मज़दूर न्यूनतम मज़दूरी बढ़ाने के लिए कर रहे हैं विरोध प्रदर्शन
कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें शोषणकारी स्थितियों में काम करने पर मजबूर किया जा रहा है, यहां तक कि उन्हें 6000 की न्यूनतम मज़दूरी दी जाती है।
पृध्वीराज रूपावत
12 Nov 2020
आंध्र

हैदराबाद: आंध्रप्रदेश के अनंतपुर जिले में हिंदुपुर कस्बे के पास पारिगि मंडल में स्थित "इंडियन डिज़ाइन एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड" में 800 महिला कर्मचारियों ने काम रोक दिया है। और न्यूनतम मज़दूरी दर को बढ़ाने के लिए यह महिलाएं अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली गई हैं। इन महिलाओं को इस वक़्त 6000 रुपये तक की न्यूनतम मजदूरी दी जा रही है। कर्मचारियों ने शोषणकारी शर्तों पर काम करने के लिए मजबूर होने के साथ-साथ प्रबंधन पर उत्पीड़न का आरोप भी लगाया है।

कर्मचारियों को समर्थन देने वाले “सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (CITU)” के वेंकटेश के मुताबिक़, महिलाकर्मी न्यूनतम मज़दूरी भत्ता मिलने से नाराज हैं और अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रही हैं। वेंकटेश ने बताया कि पिछले सात सालों से महिलाओं की मज़दूरी में इज़ाफा नहीं किया गया है।

वह कहते हैं, "6000 रुपये के मासिक वेतन में सात सौ से हजार रुपये महिला कर्मियों को अपने गांवों से कंपनी तक आने में ट्रांसपोर्ट चार्ज के तौर पर देने होते हैं।"

उत्पादन ईकाई के जनरल मैनेजर को सौंपे गए दस्तावेज़ों के मुताबिक, महिला कर्मियों की मांग है कि उनके वेतन में 5000 रुपये का इज़ाफा किया जाए (मतलब उनका न्यूनतम वेतन 11,000 रुपये हो), उन्हें यातायात भत्ता दिया जाए, महिला कर्मियों का उत्पीड़न बंद किया जाए, मुफ़्त कैंटीन सुविधा मिले, वक़्त पर बोनस दिया जाए, काम का भार कम किया जाए और ESI भत्ते दिए जाएं।

नाम ना छापने की शर्त पर एक महिला कर्मचारी कहती हैं, "अगर कर्मचारी एक मिनट भी लेट हो जाते हैं या एक दिन की भी छुट्टी लेते हैं, तो प्रबंधन बोनस में से पैसे काटता है। कई महिलाएं अपने परिवारों को चलाने की मजबूरी में ही अपने आत्मसम्मान को ताक पर रखकर नौकरी कर रही हैं। उन्हें प्रबंधन बिना कारण ही लगातार प्रताड़ित करता है।"

इंडियन डिज़ाइन एक्सपोर्ट लिमिटेड (ID) कपड़ा बनाने वाली कंपनी है, जिसकी दक्षिण भारत और बांग्लादेश में 14 ईकाईयां मौजूद हैं। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक़, दुनिया भर की नामी गिरामी कंपनियों के लिए ID प्राथमिक वेंडर है।

कंपनी की प्रोफाइल के मुताबिक़, "2018-19 में कंपनी का टर्नओवर 140 मिलियन डॉलर रहा। अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर जोड़ने के बाद कंपनी का लक्ष्य 2021 तक टर्नओवर दोगुना करना है।"

CITU के राज्य सचिव एम ए गफूर कहते हैं कि पड़ोसी राज्य कर्नाटक की तुलना में कम वेतन-भत्ता मिलने से अनंतपुर के कपड़ा मज़दूरों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

वह कहते हैं, "यह बहुत शोषण की बात है कि निर्यात आधारित कपड़ा कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बड़ा मुनाफ़ा कमाती हैं, लेकिन वे अपने मज़दूरों को 6000 रुपये तक न्यूनतम मज़दूरी देती हैं।"

कंपनी के मुताबिक़, हिंदपुर यूनिट में 2,63,935 यूनिट कपड़ों का हर महीने उत्पादन होता है।

अक्टूबर में 400 कपड़ा कर्मचारियों ने अनतंपुर जिले के हिंदपुर की ठुमाकुंता स्थित टेक्सपोर्ट इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड में हफ़्ते भर का विरोध प्रदर्शन किया था। इस प्लांट की तीन यूनिट में काम करने वाले, विरोध कर रहे इन कर्मचारियों में 90 फ़ीसदी महिलाएं थीं।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

Andhra: Garment Workers in Anantapur’s Indian Designs Company Protest for Minimum Wages

Hindupur
Indian Designs
Protest
Apparel Industry
Textiles
Anantapur
Women Workers
minimum wages
Working conditions
Andhra pradesh
CITU
workers protest
Garment Workers Protest

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

न नकबा कभी ख़त्म हुआ, न फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान

दिल्लीः एलएचएमसी अस्पताल पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया का ‘कोविड योद्धाओं’ ने किया विरोध


बाकी खबरें

  • Hemant Soren
    अनिल अंशुमन
    झारखंड-बिहार: स्थानीय भाषा को लेकर विवाद कहीं महज़ कुर्सी की राजनीति तो नहीं?
    22 Sep 2021
    “किसी भी प्रदेश में वहां की स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता मिलना संविधान सम्मत है। लेकिन अब इस पर भी राजनीति होना संदेह पैदा करता है कि कहीं ये विवाद भी कोई सांप्रदायिक ध्रुविकरण करा कर बुनियादी सवालों…
  • Varanasi
    विजय विनीत
    बदहाली: रेशमी साड़ियां बुनने वाले हाथ कर रहे हैं ईंट-पत्थरों की ढुलाई, तल रहे हैं पकौड़े, बेच रहे हैं सब्ज़ी
    22 Sep 2021
    बनारस से ग्राउंड रिपोर्ट: विश्वविख्यात बनारस की रेशमी साड़ियों का ताना-बाना बिखर रहा है। इसी ताने-बाने में सिसक रही है बुनकरों की जिंदगी। जानने के लिए आपको लिए चलते हैं बनारस की संकरी गलियों में..
  • school
    सौम्या गुप्ता, सी. सरतचंद
    स्कूलों को वक़्त से पहले खोलने की अनुमति क्यों नहीं दी जानी चाहिए
    22 Sep 2021
    केवल स्कूलों को फिर से खोलने से असमान शिक्षा प्रणाली अधिक समान नहीं हो जाएगी जब तक कि सरकारें शिक्षा पर अपने ख़र्च को नहीं बढ़ाती हैं स्थिति में बदलाव लाना असंभव है। स्कूल खोलने से कोविड म्यूटेशन का…
  • SCO
    एम. के. भद्रकुमार
    ईरान की एससीओ सदस्यता एक बेहद बड़ी बात है
    22 Sep 2021
    तेहरान का एससीओ में ज़ोरदार स्वागत के साथ शामिल किया जाना और इस संगठन का जल्दबाज़ी के साथ विस्तार किया जाना दिखाता है कि बीजिंग और मॉस्को के बीच ज़बरदस्त तालमेल है।
  • यूपी: योगी सरकार का "विकासोत्सव" बर्बादी का जश्न है
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी: योगी सरकार का "विकासोत्सव" बर्बादी का जश्न है
    22 Sep 2021
    योगी जी का विकास का सारा जश्न दरअसल अर्थव्यवस्था के ध्वंस और कोविड से हलकान, हैरान-परेशान जनता को मुंह चिढ़ाने और उसके जले पर नमक छिड़कने जैसा है। कुछ विश्लेषकों ने ठीक नोट किया है कि "यूपी विकासोत्सव…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License