NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
पर्यावरण
विज्ञान
अगले पांच वर्षों में पिघल सकती हैं अंटार्कटिक बर्फ की चट्टानें, समुद्री जल स्तर को गंभीर ख़तरा
वैज्ञानिकों का कहना है कि सबसे बुरी स्थिति आने पर थ्वाइट्स ग्लेशियर के एक हिस्से में तेजी आ सकती है जो अल्प अवधि में वैश्विक समुद्री स्तर के बढ़ने में लगभग पांच प्रतिशत का योगदान दे रहा है।
संदीपन तालुकदार
16 Dec 2021
Antarctic Ice
थ्वाइट्स ग्लेशियर  (फ़ोटो- फ्लिकर.कॉम)

अंटार्कटिक में थ्वाइट्स ग्लेशियर एक महत्वपूर्ण हिम भंडार है। इसके नष्ट होने से गंभीर खतरा पैदा हो सकता है जो पहले से ही समुद्री स्तर में वैश्विक वृद्धि के रूप में दिखने लगा है। थ्वाइट्स ग्लेशियर वैश्विक समुद्री स्तर में लगभग 4 प्रतिशत वृद्धि के लिए जिम्मेदार है। यह ग्लेशियर एक बर्फ का एक विशाल चट्टान है जो क्षेत्रफल के लिहाज से आंध्र प्रदेश के बराबर होगा। थ्वाइट्स हिम चट्टान 45 किलोमीटर की चौड़ाई के साथ बर्फ के एक बहते हुए लेज (किनारे) के रूप में फिसल कर महासागर में मिल जाता है।

लेकिन, खतरे की घंटी बज चुकी है क्योंकि वैज्ञानिकों ने पाया है कि हिम का यह विशाल चट्टान अगले पांच वर्षों के भीतर टूट कर अलग हो जाने वाला है। वैज्ञानिकों ने अमेरिकी भूभौतिकीय यूनियन की एक बैठक में थ्वाइट्स की सतह पर नई पाई गई दरारों की सूचना दी।

दरार का सबसे महत्वपूर्ण संकेत पूरे हिम चट्टान पर फैली तिरछी दरारों का एक समूह है। इस निष्कर्ष पर टिप्पणी करते हुए, ओरेगन स्टेट विश्वविद्यालय के एकग्लेशियोलॉजिस्ट तथा ग्लेशियरों पर अध्ययन के एक हिस्सा रहे एरिन पेटिट ने कहा ‘पिछले महीने उपग्रहों ने दरारों के साथ-साथ बर्फ की गति में तेजी का अवलोकन किया। यह शेल्फ धीरे धीरे खुल रही दरारों की एक श्रृंखला के साथ एक विंड शील्ड की तरह है। ‘धीरे धीरे, एक दिन एक बड़े धमाके के साथ वहां लाखों दरारें पैदा हो जाएंगी।‘

जब बर्फ की शेल्फ टूट जाएगी तो इसके द्वारा रोके गए ग्लेशियर के बड़े हिस्सों से इसके विघटन और पिघलने में काफी तेजी आ जाएगी। पेटिट के अनुसार, सबसे खराब परिदृश्य थ्वाइट्स के इस हिस्से के तेजी से बढ़ने का कारण बन सकता है जो कम समय में वैश्विक समुद्री स्तर की वृद्धि में लगभग 5 प्रतिशत का योगदान देता है। इसलिए, ऐसा लग रहा है कि कोई बड़ा खतरा हमारे करीब आ गया है।

इससे भी चिंताजनक बर्फ की चट्टान के नीचे पानी का गर्म होना है जिसका पता वैज्ञानिकों ने एक रोबोटिक सबमर्शिबल की सहायता से लगाया था। थ्वाइट्स का दिलचस्प हिस्सा यह है कि यह समुद्री तल से नीचे जमीन पर स्थित होता है जो तट से दूर होता हैं। गर्म होता समुद्र का पानी नीचे से ग्लेशियर को पिघलाने लगता है। कुछ वैज्ञानिकों का विश्वास है कि ग्लेशियर का पूरी नष्ट हो जाना भी संभव है और कुछ सौ वर्षों में ही ऐसा हो जाएगा जिससे समुद्र के स्तर में लगभग 65 सेंटीमीटर का इजाफा हो जाएगा।

इससे और अधिक विनाश पैदा होगा- थ्वाइट्स के खत्म होने से समीपवर्ती ग्लेशियरों का बहाव कम हो जाएगा और पूरे पश्चिमी अंटार्कटिक बर्फ की चादर को नुकसान हो सकता है। पश्चिमी अंटार्कटिक बर्फ की चादर में वैश्विक समुद्रीस्तर की वृद्धि का लगभग 3.3 मीटर शामिल है।

पेटिट सहित शोधकर्ताओं की टीम इंटरनेशनल थ्वाइट्स ग्लेशियर सहयोग(आईटीजीसी) का हिस्सा है जिसका लक्ष्य प्रमुख ग्लेशियर के भविष्य का पता लगाना है। आईटीजीसी अमेरिका तथा ब्रिटेन द्वारा समर्थित एक बहुस्तरीय कार्यक्रम है। थ्वाइट्स ग्लेशियर किसी अन्य अनुसंधान केंद्र से बहुत दूर है और वहां पहुंचना एक वास्तविक चुनौती है। 2019-20 की गर्मियों में आईटीजीसी के पहले अभियान को भारी तूफान की गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

थ्वाइट्स शोधकर्ताओं की टीम ने अपने निष्कर्षो को प्रदर्शित करने के लिए बर्फ की चट्टान के कंप्यूटर मॉडलों को प्रस्तुत किया। उन्होंने क्रायोस्फीयर जर्नल में थ्वाइट्स के बारे में अपने मॉडल का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। मॉडलों ने पूर्वानुमान लगाया कि पिछले पांच वर्षों में सतह पर बड़ी दरारें देखी गई हैं जो बर्फ के पिघलने से खुली हैं। कई दरारों को थ्वाइट्स ग्लेशियर के मध्य की ओर बढ़ते हुए पाया गया।

उदाहरण के लिए, एक दरार जिसे ‘ द डैगर‘ का नाम दिया गया है अब बर्फ की चट्टान के बीच तक विस्तारित हो रही है। पेटिट के अनुसार, जैसे ही यह बीच में पहुंचेगी, ये दरारें नीचे की घाटियों में कई आरंभिक दरारों को बढ़ा और पैदा कर सकती हैं जिससे चट्टान और अधिक कमजोर हो जाएगी।

टीम द्वारा देखी गई नवीनतम दरार तिरछे फ्रैक्चर के रूप में दिखाई पड़ रही है जो 40 किमी से अधिक दूरी तक फैली हुई है। पेटिट ने सावधान किया कि बर्फ की चट्टान के टूटने की इस खतरनाक गति के कारण कई संभावित खतरे पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘बर्फ की चट्टान का टूटना एक चेतावनी होगी कि थ्वाइट्स और शेष पश्चिमी अंटार्कटिक बर्फ की चादरें कुछ ही दशकों के भीतर बड़े नुकसान की शुरुआत कर सकती हैं, खासकर अगर कार्बन उत्सर्जन में कमी आना शुरु नहीं हुई तो। हो सकता है, मेरी मृत्यु से पहले मैं इनमें से कुछ को देखना शुरु भी कर दूं।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें। 

Antarctic Ice Shelf May Disintegrate in 5 Years, Posing Grave Threat to Sea-Level

Thwaites Glacier
Antarctic Ice Shelf
West Antarctic Ice Sheet
Erin Pettit
International Thwaites Glacier Collaboration
ITGC
Sea-Level Rise
global warming
Carbon Emission
climate change

Related Stories

गर्म लहर से भारत में जच्चा-बच्चा की सेहत पर खतरा

मज़दूर वर्ग को सनस्ट्रोक से बचाएं

लू का कहर: विशेषज्ञों ने कहा झुलसाती गर्मी से निबटने की योजनाओं पर अमल करे सरकार

जलवायु परिवर्तन : हम मुनाफ़े के लिए ज़िंदगी कुर्बान कर रहे हैं

लगातार गर्म होते ग्रह में, हथियारों पर पैसा ख़र्च किया जा रहा है: 18वाँ न्यूज़लेटर  (2022)

अंकुश के बावजूद ओजोन-नष्ट करने वाले हाइड्रो क्लोरोफ्लोरोकार्बन की वायुमंडल में वृद्धि

‘जलवायु परिवर्तन’ के चलते दुनियाभर में बढ़ रही प्रचंड गर्मी, भारत में भी बढ़ेगा तापमान

दुनिया भर की: गर्मी व सूखे से मचेगा हाहाकार

जलविद्युत बांध जलवायु संकट का हल नहीं होने के 10 कारण 

संयुक्त राष्ट्र के IPCC ने जलवायु परिवर्तन आपदा को टालने के लिए, अब तक के सबसे कड़े कदमों को उठाने का किया आह्वान 


बाकी खबरें

  • एम.ओबैद
    एमपी : ओबीसी चयनित शिक्षक कोटे के आधार पर नियुक्ति पत्र की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे
    26 Apr 2022
    चयनित शिक्षक पिछले एक महीने से नियुक्ति पत्र को लेकर प्रदेश भर में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन मांग पूरी न होने पर अंत में आमरण अनशन का रास्ता चयन किया।
  • अखिलेश अखिल
    यह लोकतांत्रिक संस्थाओं के पतन का अमृतकाल है
    26 Apr 2022
    इस पर आप इतराइये या फिर रुदाली कीजिए लेकिन सच यही है कि आज जब देश आज़ादी का अमृतकाल मना रहा है तो लोकतंत्र के चार प्रमुख स्तम्भों समेत तमाम तरह की संविधानिक और सरकारी संस्थाओं के लचर होने की गाथा भी…
  • विजय विनीत
    बलिया पेपर लीक मामला: ज़मानत पर रिहा पत्रकारों का जगह-जगह स्वागत, लेकिन लड़ाई अभी बाक़ी है
    26 Apr 2022
    "डबल इंजन की सरकार पत्रकारों को लाठी के जोर पर हांकने की हर कोशिश में जुटी हुई है। ताजा घटनाक्रम पर गौर किया जाए तो कानपुर में पुलिस द्वारा पत्रकारों को नंगाकर उनका वीडियो जारी करना यह बताता है कि…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जन आंदोलनों के आयोजन पर प्रतिबंध अलोकतांत्रिक, आदेश वापस लें सरकार : माकपा
    26 Apr 2022
    माकपा ने सवाल किया है कि अब जन आंदोलन क्या सरकार और प्रशासन की कृपा से चलेंगे?
  • ज़ाहिद खान
    आग़ा हश्र काश्मीरी: गंगा-ज़मुनी संस्कृति पर ऐतिहासिक नाटक लिखने वाला ‘हिंदोस्तानी शेक्सपियर’
    26 Apr 2022
    नाट्य लेखन पर शेक्सपियर के प्रभाव, भारतीय रंगमंच में महत्वपूर्ण योगदान और अवाम में उनकी मक़बूलियत ने आग़ा हश्र काश्मीरी को हिंदोस्तानी शेक्सपियर बना दिया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License