NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
सीएए विरोधी आंदोलन-अब राह दिखाएंगी महिलाएं
शाहीनबाग की ये महिलाएं न्यू ईयर पार्टी में सबको दावत दे रही हैं; कह रही हैं, आइये हम साथ मिलकर गीत गाएं, कविताएं और नज़्म पढ़ें, संविधान का पाठ करें और सीएए व एनआरसी के विरुद्ध प्रतिरोध करें।
कुमुदिनी पति
02 Jan 2020
shaheen bagh

दिल्ली के शाहीनबाग में महिलाएं इतिहास रच रही हैं। कोई नहीं समझ सकता कि ये औरतें, जो घरों में सुकून से जी रही थीं, हिजाब और बुर्के पहनकर बाहर जाती थीं, जिन्होंने केवल अपने घर के पुरुषों को राजनीतिक बात करते या राजनीति में हिस्सा लेते देखा था, 31 दिसम्बर को कड़ाके की ठंड में कैसे सड़क पर नए साल का जश्न मनाने जा रही हैं।

शाहीनबाग की ये महिलाएं न्यू ईयर पार्टी में सबको दावत दे रही हैं; कह रही हैं, आइये हम साथ मिलकर गीत गाएं, कविताएं और नज़्म पढ़ें, संविधान का पाठ करें और सीएए व एनआरसी के विरुद्ध प्रतिरोध करें। ये महिलाएं दिसम्बर की रिकॉर्ड ठंडक में काफी समय से सारी-सारी रात सड़क पर बैठकर विरोध दर्ज़ कर रही हैं।

वे अपने नन्हे बच्चों के साथ, अपनी बहनों और रिश्तेदारों के साथ दिन-रात बारी-बारी से धरने पर बैठ रही हैं और बीच में जाकर घर के काम भी निपटाकर आती हैं। कई तो 3 दिनों से एक ही कपड़ा पहनी हैं, क्योंकि घर नहीं जा सकीं।
1_11.JPG
सारी औरतें मुस्लिम नहीं है, पर अधिकतर मुस्लिम हैं। हिन्दू व सिख या अन्य धर्मिक समुदायों के लोग और छात्र-छात्राएं भी उनके संघर्ष में शामिल हो रहे हैं। वे इस ऐतिहासिक व शान्त प्रतिरोध से बेहद प्रभावित भी हैं।

ओरिजित सेन का एक पोस्टर बहुत कुछ कहता है-‘अ वुमन्स प्लेस इज़ इन द रेज़िस्टेन्स’ यानि ‘महिला की जगह प्रतिरोध में है’। यह नारा पितृसत्तात्मक समाज के चिर-परिचित नारे, ‘महिला की जगह रसोईघर में है’ को चुनौती दे रहा है। एक साथ सत्ता और पितृसत्ता को चुनौती दे रही महिलाएं नया इतिहास गढ़ रही हैं और मोदी ने तीन तलाक पर कानून बनाकर जो श्रेय बटोरना चाहा उसकी भी धज्जियां उड़ा रही हैं।

ये बहादुर औरतें हज़ारों की संख्या में डेरा डालकर कह रही हैं कि वे तबतक सड़क पर अपना सत्याग्रह जारी रखेंगी जबतक सीएए, एनआरसी और एनपीआर को सरकार वापस नहीं ले लेती। उनके अनुसार यहां मर जाना डिटेन्शन कैंप में जाने से बेहतर है। क्या भाजपा/आर एस एस इस कानून के पक्ष में जो सरकारी रैलियां आयोजित करने की योजना बना रहे हैं, इन महिलाओं के जज़्बे का मुकाबला कर सकेंगे?
4_4.JPG
इसी तरह 23 दिसंबर को पंजाब के मलेरकोटला में महिलाओं ने अपने बल पर विरोध प्रदर्शन किया था।  उन्होंने शपथ ली कि अगर सरकार इस जनविरोधी कानून को वापस नहीं लेती, वे आन्दोलन को तेज़ करेंगी। एक महिला ने ज़ोरदार आवाज़ में कहा, ‘केंद्र को कोई हक नहीं बनता कि वह धर्म के आधार पर तय करे कि कौन भारत का नागरिक रहेगा। सरकार ने दहशत का माहौल बना दिया है और सभी को असुरक्षाबोध हो रहा है।’ महिलाए तख़्तियां लेकर मार्च करते हुए सिरहंडी गेट से सट्टा चैक तक गईं, फिर उन्होंने एस डीएम को ज्ञापन दिया, जो राष्ट्रपति के नाम था।
 
कैसे बन गईं महिलाएं सीएए-एनआरसी विरोधी आन्दोलन का चेहरा?

जामिया मिल्लिया की लड़कियों ने पहले पुलिस को चुनौती दी और उनका बहादुरी से मुकाबला किया। ‘दिल्ली पुलिस गो बैक’ का नारा देती ये लड़कियां सीएए-विरोधी आन्दोलन की पोस्टर गर्ल बन गईं। आएशा रेन्ना इतिहास की छात्रा है, जो एक वाइरल वीडियो में दोनों हाथों से इशारा करते हुए पुलिस को पीछे धकेलती आगे बढ़ती जाती है।

उसकी मित्र लदीदा और दो और बहादुर छात्राएं अपने पुरुष मित्र शाहीन को पुलिस की लाठियों से बचाने के लिए उसे चारों ओर से घेरतीं दिखाई देती हैं। लदीदा बीए अरबी की छात्रा है और दमा की मरीज़ होते हुए भी पुलिस से भिड़ती बेहोश हो जाती है पर लड़ाई से पीछे नहीं हटती।
5_2.JPG
खून से लथपथ शाहीन को अस्पताल ले जाती हैं। एक और वीडियो में चंदा यादव और उसकी दो महिला साथी जामिया विश्वविद्यालय की दीवार पर चढ़कर नारे लगाती दिखाई दीं। चंदा उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले की छात्रा है, जो हिंदी में बीए आनर्स कर रही है। अनुज्ञा नाम की विधि की छात्रा एक वीडियो में रोते हुए आक्रोश व्यक्त करती दिखाई पड़ती है।

झारखण्ड की अनुज्ञा ने कहा कि वह हमेशा समझती थी कि जामिया विश्वविद्यालय छात्राओं के लिए सबसे सुरक्षित स्थान है। पर जिस दिन उसके काॅन्स्टिट्यूशन की परीक्षा थी उसी दिन बच्चों को लाइब्रेरी, बाथरूम और मस्जिद में बर्बर तरीके से पीटा गया, उनके हाथ-पैर तोड़ दिये गए, तो पढ़ाई में कैसे मन लगेगा? अनुज्ञा चिल्लाकर पूछती है, ‘हाॅस्टल में लड़किया रात भर रोती रहीं, उन्हें जाने को कहा गया है। अब हम कहां जाएं? हमें डर लगता है कि हमें कभी भी लिंच कर दिया जाएगा। और मैं तो मुस्लिम भी नहीं हूं!’

24-वर्षीय देबस्मिता चैधरी जादवपुर विश्वविद्यालय की गोल्ड मेडलिस्ट है। काॅन्वोकेशन में उसे जब डायस पर गोल्ड मेडल और सर्टिफिकेट लेने के लिए बुलाया गया, देबस्मिता पहले सीएए की प्रति निकालकर जनता की ओर मुखातिब होकर उसे फाड़ डालती है। वह नारा लगाती है, ‘हम कागज़ नहीं दिखाएंगे, इंक्लाब ज़िन्दाबाद।’ फिर वह पीछे हटती है और, जनता को झुककर सलाम करती है और तब अपना स्वर्ण पदक और प्रमाणपत्र लेकर जाती है।

विश्वविद्यालय के कुलपति उसके इस कृत्य पर कुछ नहीं कहते। अध्यापक भी देबस्मिता का साथ देते हैं। दूसरी ओर इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस का आयोजन केरल के कुन्नूर में होता है और भाजपा द्वारा मनोनीत राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के भाषण के बीच में ही दोलन सामंत नाम की छात्रा व आइसा कार्यकर्ता इर्फान हबीब के साथ अन्य छात्र-छात्राओं का नेतृत्व करते हुए सीएए के विरोध में नारे लगाती हैं और विरोध प्रदर्शन करती है। राज्यपाल का अभिभाषण बीच में बाधित हो जाता है।
8_1.JPG
बाद में बहुतों ने दोलन को उसकी बहादुरी के लिए साबाशी दी। दूसरी ओर जन्तर मंतर पर दिल्ली विश्वविद्यालय की एक हिंदू लड़की चिल्लाती हुई सरकार को ललकारती नज़र आती है। उसके तेवर देखने लायक हैं! वह पूछती है, ‘हमें हर जगह रोका जा रहा है, मेट्रो रेल बंद हैं, बसें नहीं चल रहीं, भय क्यों पैदा किया जा रहा है? मेरी मां ने कहा कि मैं अकेली क्या कर पाउंगी, पर यहां देखिये एक-एक करके कितने सारे नागरिक जमा हो गए। वो कौन होते हैं तय करने वाले कि भारत के नागरिक कौन होंगे और  कौन नहीं? वे संविधान को कैसे बदल सकते हैं, जिसे अंबेडकर ने बनाया? एक दिन जन्तर मंतर पर सारा भारत इकट्ठा हो जाएगा, तब वे क्या करेंगे?’
 
सोशल मीडिया ने इन बहादुर महिलाओं को महिमामंडित किया पर न्यूज़ चैनलों की ओर से इन मिसाल पेश करने वाली महिलाओं को तवज्जो नहीं दिया गया। कई ऐसी महिलाएं एनडीटीवी के दफ्तर में पहुंचकर रवीश कुमार से बात करती हैं। यहां आएशा, चंदा, सृजन, नयाला, ईमान के साथ और भी लड़कियां हैं जो जामिया और एएमयू में पढ़ती हैं। उनका कहना है कि यह हमला भीड़ को तितर-बितर करने के लिए नहीं, बल्कि एक खास समुदाय को टार्गेट करके मारने के लिये था।

फिर भी जामिया में 40 प्रतिशत बच्चे गैर-मुस्लिम हैं और वे कभी नहीं महसूस करते कि हम अलग हैं। वे बताती हैं कि मस्जिद के सुरक्षा गार्डों को तक को पुलिस ने मारा और लाइब्ररी में व कैंटीन में चुपचाप बैठे छात्र-छात्राओं को टीयर गैस शेल फेंककर, बत्तियां बंद करके और चारों ओर से घेरकर मारा गया।

एक छात्रा सृजन चावला ने तो कहा कि ‘हम हिन्दू हैं पर पुलिस आज इनको मार रही है तो कल हमारी भी बारी होगी, लड़कियों को भी पीटा जाएगा।’ उन्हें इस बात का दुख था कि मीडिया ने जनता को नहीं दिखाया कि किस बर्बर तरीके से छात्रों को घायल किया गया था कि वे चल नहीं पा रहे थे।
7.JPG
उन्हें रवीश के पास आना पड़ा, ताकि वे सारी बातों को दुनिया के सामने रख सकें। ईमान की तो कलाई टूट चुकी थी, और भी चोटें थीं, पर वह खड़ी होकर अपने दुख का बयान कर रही थी। यह पूछने पर कि क्या किसी को ‘मेंटल ट्रामा’ भी हुआ, एक ने कहा कि वह 33 घंटे से सोई नहीं और दूसरी ने बताया कि 48 घंटों में वह सिर्फ 2 घंटे सोई थी। उनके अस्तित्व पर सवालिया निशान लग गया था। उन्होंने कहा कि उन्हें  पुलिस द्वारा ‘जिन्नाह के पिल्ले’ कहा गया और पाकिस्तान जाने को कहा गया।

चेन्नई में महिलाएं सीएए और एनआरसी के खिलाफ कोलम बना रही थीं, बेंगलुरु में महिलाएं टाउन हाॅल, शिवमोगा और कलबुरजी में एकत्र होकर विरोध कीं, दिल्ली के ज़ाकिरनगर में महिलाएं सड़क पर एकत्र हुईं, लखनऊ में उ.प्र. भवन के सामने महिलाओं ने गिरफ्तारी दी, एक युवती ने जन्तर मंतर पर सीआरपीएफ जवान को गुलाब भेंट किया-यह भारत का ‘फलावर पावर’ था। आज महिलाओं के पावर को देखकर भारतीयों का मनोबल ऊंचा हुआ है, उनको आशा है कि महिलाएं ही राह दिखाएंगी।

Shaheen Bagh New Year
BJP
RSS
Shaheen Bagh
CAA
NRC
NPR
Women protest

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

शाहीन बाग से खरगोन : मुस्लिम महिलाओं का शांतिपूर्ण संघर्ष !

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?


बाकी खबरें

  • अभिलाषा, संघर्ष आप्टे
    महाराष्ट्र सरकार का एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम को लेकर नया प्रस्ताव : असमंजस में ज़मीनी कार्यकर्ता
    04 Apr 2022
    “हम इस बात की सराहना करते हैं कि सरकार जांच में देरी को लेकर चिंतित है, लेकिन केवल जांच के ढांचे में निचले रैंक के अधिकारियों को शामिल करने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता”।
  • रवि शंकर दुबे
    भगवा ओढ़ने को तैयार हैं शिवपाल यादव? मोदी, योगी को ट्विटर पर फॉलो करने के क्या हैं मायने?
    04 Apr 2022
    ऐसा मालूम होता है कि शिवपाल यादव को अपनी राजनीतिक विरासत ख़तरे में दिख रही है। यही कारण है कि वो धीरे-धीरे ही सही लेकिन भाजपा की ओर नरम पड़ते नज़र आ रहे हैं। आने वाले वक़्त में वो सत्ता खेमे में जाते…
  • विजय विनीत
    पेपर लीक प्रकरणः ख़बर लिखने पर जेल भेजे गए पत्रकारों की रिहाई के लिए बलिया में जुलूस-प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट का घेराव
    04 Apr 2022
    पत्रकारों की रिहाई के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए संयुक्त पत्रकार संघर्ष मोर्चा का गठन किया है। जुलूस-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में आंचलिक पत्रकार भी शामिल हुए। ख़ासतौर पर वे पत्रकार जिनसे अख़बार…
  • सोनिया यादव
    बीएचयू : सेंट्रल हिंदू स्कूल के दाख़िले में लॉटरी सिस्टम के ख़िलाफ़ छात्र, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी
    04 Apr 2022
    बीएचयू में प्रशासन और छात्र एक बार फिर आमने-सामने हैं। सीएचएस में प्रवेश परीक्षा के बजाए लॉटरी सिस्टम के विरोध में अभिभावकों के बाद अब छात्रों और छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है।
  • टिकेंदर सिंह पंवार
    बेहतर नगरीय प्रशासन के लिए नई स्थानीय निकाय सूची का बनना ज़रूरी
    04 Apr 2022
    74वां संविधान संशोधन पूरे भारत में स्थानीय नगरीय निकायों को मज़बूत करने में नाकाम रहा है। आज जब शहरों की प्रवृत्तियां बदल रही हैं, तब हमें इस संशोधन से परे देखने की ज़रूरत है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License