NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
मुसीबतों से कभी नहीं हारने वाली अपराजिता, 'अलबेली' बनकर हमेशा के लिए अमर हो गईं
अपने किरदारों के जरिए लोगों के दिल में जगह बनाने वाली अपराजिता, बिना किसी हो-हल्ला के प्रतिरोध की एक बुलंद आवाज़ बन गईं थीं। उनका व्यक्तित्व जितना चुलबुला था उनकी कलम उतनी ही गंभीर।
सोनिया यादव
17 Oct 2021
Aparajita Sharma

अपने मन की बात कला के माध्यम से देश-विदेश तक पहुंचाने वाली, इमोज़ी की तर्ज पर हिंदी में हिमोजी बनाने वाली, अपने किरदारों से महिलाओं के हक़ की आवाज़ बुलंद करने वाली 'अलबेली' अपराजिता शर्मा अब हमारे बीच नहीं रहीं। शुक्रवार, 15 अक्टूबर को हार्ट अटैक के कारण उनका निधन हो गया। वे दुनिया छोड़ गईं, लेकिन जाते-जाते हम सब को अपनी अभिव्यक्ति के सार्थक किरदार अलबेली और चित्रगीत दे गईं, जो उनकी जिवंतता का सालों-सालों आभास करवाते रहेंगे।

यूं तो अपराजिता शर्मा एक शिक्षिका के तौर पर खुद को किसी भी राजनीतिक विचारधारा से दूर रखती थीं लेकिन वो अपनी अभिव्यक्ति अपनी कलम के जरिए बखूबी उकेरना भी जानती थीं। उनकी रचनात्मक सक्रियता बेहद संजीदा और विविध थी, वो कभी प्रतिरोध की बहुत तीखी आवाज़ बनकर अपना विरोध दर्ज करवाती थीं, तो कभी फिल्मी गीतों की रोमानी याद के रूप में अपने शांत चित मन के निश्छल स्वभाव को चित्रों में ढालती थीं, कभी अपनी चंचल सखी-सहेलियों के साथ चुलबुली-अलबेली उमड़न-घुमड़न और बचपने को कलात्मक आवाजाही के तौर पर प्रदर्शित करती थीं। अपराजिता मानती थीं कि कैरेक्टर इलस्ट्रेशन कार्टून से इतर गहरे सवालों, अवसाद और सामाजिक निषेधों पर बात करता है, इसलिए ये काम जितना रोचक है उतना ही गंभीर भी।

हिमोजी के लिए देश-विदेश में मिली प्रशंसा

बता दें कि अपराजिता बिना किसी फॉर्मल ट्रेनिंग के कैरेक्टर इलस्ट्रेशन का चर्चित नाम थीं। उन्होंने 2016 में हिंदी में चैट स्टिकर बनाने शुरू किए थे, जिसे हिमोजी नाम दिया था। ये हिमोजी लोगों को इतने पसंद आए कि देश ही नहीं विदेश में भी ये खासा लोकप्रिय हुए। अपराजिता ने लगभग 270 से अधिक हिमोजी बनाए, जो उनकी राजनीतिक समझ, गुस्सा, नाराजगी, खुशी, गम, खीझ, ठहाके वाली हंसी, झुंझलाहट, उत्सव, प्यार, दोस्ती आदि पर आधारित हैं। इन चैट स्टिकर के सहारे आप हिंदी में धत्त तेरी की, कहब तो लग जाई धक्क से, हम हक से मांगें, धन्यवाद, हम्म, वाह-वाह... सब कुछ कह सकते हैं। यही नहीं, आप ‘अपना टाइम आएगा’ जैसे फिल्मी डायलॉग भी हिमोजी के जरिए अपने दोस्तों या परिजनों को भेज सकते हैं। ये इन स्टिकर्स की बढ़ती लोकप्रियता के चलते अब हिमोजी नाम का एक ऐप भी है। जिसे आप प्लेस्टोर से डाउनलोड करके रंगे-बिरंगे और मनमौजी हिमोजी शेयर कर सकते हैं।

कोरोना महामारी में जब लोग उम्मीद खो रहे थे तब अपराजिता ने एक और कैरेक्टर को गढ़ा, जिसे उन्होंने ‘चित्रगीत’ नाम दिया। लॉकडाउन में जब दुनिया घर के भीतर ही थम गई थी, तब संगीत की महत्ता को समझाता अपराजिता का चित्रगीत कैरेक्टर लोगों को उत्साहित करने का काम करता। ये एक ऐसी अभिव्यक्ति है जिसमें एक कैरेक्टर के पीछे मधुर संगीत बज रहा होता है। जो लोगों में फिर फिर से जीवन जीने की आस जगाता है। हालांकि अपराजिता मानती थीं कि उनकी सभी रचनाएं अलग हैं, हिमोजी अलबेली नहीं है, अलबेली चित्रगीत नहीं है, ये सब अलग हैं लेकिन ये सब मन की कहानियां दुनिया के सामने बखूबी रखते हैं।

हर लड़की अलबेली होती है, इसलिए महिलाओं से जुड़े मुद्दों को अलबेली ने खूब उठाया

अपराजिता अपने किरदारों के माध्यम से महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज़ बुलंद करने के लिए भी जानी जाती हैं। वो हर लड़की को अलबेली मानती थीं इसलिए उनके अलबेली नाम के किरदार को लोगों से खूब प्यार भी मिला। अलबेली के साथ ललमुनिया नाम की एक चिड़िया भी है। यह चिड़िया अलबेली का मन है। अपराजिता अपने मन की तमाम बातें इस किरदार के जरिए कहती थीं। फिर सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मामला हो या किसी जज या राजनेता का महिलाओं को लेकर उटपटांग बयान हो...सभी पर अलबेली अपनी प्रतिक्रिया देती है। इन प्रतिक्रियाओं में कभी अलबेली पीरियड्स को दिखाती है तो कभी राजनेताओं पर अपने गुस्से को। यही नहीं, होली, दिवाली, रक्षाबंधन, जन्मदिन सभी पर अलबेली भी उत्सव मनाती है। एक ओर अलबेली सजी-संवरी है, दूसरी ओर उसमें गंभीरता की अभिव्यक्ति भी है।

अपराजिता दिल्ली के मिरांडा कॉलेज में बतौर एसोसिएट प्रोफेसर हिंदी पढ़ाती थीं। समकालीन हिंदी साहित्य से उसका परिचय बहुत घनिष्ठ और विश्वसनीय था। उन्होंने नीलिमा चौहान की किताब ‘पतनशील पत्नियों के नोट्स' के लिए रेखांकन का काम भी किया था, जो किताब की टिप्पणियों के समानांतर अपना एक अलग प्रभाव पैदा करते हैं। हालांकि अपराजिता इस बात से अक्सर निराश भी होती थीं कि हमारे पठन-पाठन की संस्कृति में कला-धर्म की उपेक्षा हमारे अभ्यास का हिस्सा हो चुकी है। वो कला-संस्कृति को जीवने जीने के परिपेक्ष्य से जोड़कर देखती थीं।

रेखांकनों के ज़रिए प्रतिरोध

अपराजिता रेखांकनों को बस हाशिया या खाली जगह भरने का काम नहीं मानती थीं, वो अपने रेखांकनों के ज़रिए लगातार अपने हिस्से का प्रतिरोध जताती थीं। मौजूदा राजनीतिक रुझानों के विपरीत वो खुल कर अपनी राय रखती थीं। दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक आंदोलन का मामला हो या हमारे समकालीन समय की कोई भी त्रासदी- अपराजिता अचूक ढंग से सब पर टिप्पणियां करती रही और अपनी कला को लगभग पोस्टर की तरह इस्तेमाल करती नज़र आईं, सत्ता से सवाल करतीं नज़र आईं। और इस तरह बिना किसी हो-हल्ला के अपराजिता अपनी कला से एक सख्त प्रतिरोध की आवाज़ बन गईं।

बहरहाल, अपराजिता को अगर आप जानते हैं तो उनके उत्साहभरे व्यक्तित्व से भी जरूर रूबरू होंगे। वे कहती थीं, 'मैं कभी उदास नहीं रहूंगी' और वो अपने आखिरी समय तक इस वाक्य को सार्थक बनाए रखने की कोशिश भी करती रहीं। बीते साल उन्होंने अपने सबसे बड़े सपोर्ट अपने पिता को खो दिया, फिर कई बार अस्पताल में भी जूझती नज़र आईं लेकिन जिंदगी के जज़्बे को उन्होंने कभी नहीं छोड़ा। अपने आज़ाद, हंसमुख और चुलबुलेपन से वे सबके बीच हमेशा हंसती और हंसाती रहीं। अपराजिता अपने नाम की तरह ही अपने जिंदगी में दुखों और परेशानियों से कभी नहीं हारीं, सबको प्यार से विश्वास से जीतती रहीं।

Aparajita
Himoji
Albeli
Chitrageet
Aparajita Sharma

Related Stories

साल 2021 : खेत से लेकर सड़क और कोर्ट तक आवाज़ बुलंद करती महिलाएं


बाकी खबरें

  • ram_navmi
    अफ़ज़ल इमाम
    बढ़ती हिंसा व घृणा के ख़िलाफ़ क्यों गायब है विपक्ष की आवाज़?
    13 Apr 2022
    हिंसा की इन घटनाओं ने संविधान, लोकतंत्र और बहुलतावाद में विश्वास रखने वाले शांतिप्रिय भारतवासियों की चिंता बढ़ा दी है। लोग अपने जान-माल और बच्चों के भविष्य को लेकर सहम गए हैं।
  • varvara rao
    भाषा
    अदालत ने वरवर राव की स्थायी जमानत दिए जाने संबंधी याचिका ख़ारिज की
    13 Apr 2022
    बंबई उच्च न्यायालय ने एल्गार परिषद-माओवादी संपर्क मामले में कवि-कार्यकर्ता वरवर राव की वह याचिका बुधवार को खारिज कर दी जिसमें उन्होंने चिकित्सा आधार पर स्थायी जमानत दिए जाने का अनुरोध किया था।
  • CORONA
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1,088 नए मामले, 26 मरीज़ों की मौत
    13 Apr 2022
    देश में अब तक कोरोना से पीड़ित 5 लाख 21 हज़ार 736 लोग अपनी जान गँवा चुके है।
  • CITU
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन
    13 Apr 2022
    ये सभी पिछले माह 39 दिन लंबे चली हड़ताल के दौरान की गई कार्रवाई और बड़ी संख्या आंगनवाड़ी कर्मियों को बर्खास्त किए जाने से नाराज़ थे। इसी के खिलाफ WCD के हेडक्वार्टस आई.एस.बी.टी कश्मीरी गेट पर प्रदर्शन…
  • jallianwala bagh
    अनिल सिन्हा
    जलियांवाला बाग: क्यों बदली जा रही है ‘शहीद-स्थल’ की पहचान
    13 Apr 2022
    जलियांवाला बाग के नवीकरण के आलोचकों ने सबसे महत्वपूर्ण बात को नज़रअंदाज कर दिया है कि नरसंहार की कहानी को संघ परिवार ने किस सफाई से हिंदुत्व का जामा पहनाया है। साथ ही, उन्होंने संबंधित इतिहास को अपनी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License