NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विज्ञान
अंतरराष्ट्रीय
आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस के ज़रिये हुई बीमारी से जुड़े जीन की पहचान
''हमने पहली बार 'डीप लर्निंग' तकनीक का इस्तेमाल बीमारियों से संबंधित जीन की पहचान के लिए किया है। यह बड़ी मात्रा की जानकारी के विश्लेषण के लिए शानदार तरीक़ा है।"
संदीपन तालुकदार
27 Feb 2020
Artificial Intelligence Used to Find Disease-related Genes
Image Courtesy: entrepreneur.com

आर्टफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल अब बॉयोलॉजिकल रिसर्च में हो रहा है। रिसर्चर इसके ज़रिए बड़ी मात्रा के जीन डाटा (गुणसूत्र आकंड़ों) पैटर्न को दिखाने और कई प्रकार की बीमारियों से जुड़े जीन समूहों की खोज के लिए कर रहे हैं। नेचर में इससे संबंधित एक पेपर प्रकाशित हुआ है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमें साइट की तरफ़ से कुछ नए दोस्त बनाने के लिए नाम सुझाए जाते हैं। इन सुझावों (फ्रेंड्स सजेशन) का चुनाव संबंधित व्यक्ति से हमारे साझा दोस्तों की संख्या के हिसाब से होता है। इसी तरह वैज्ञानिकों ने बॉयोलॉजिकल नेटवर्क मैप बनाने की कोशिश की है। इसका आधार कई प्रकार के प्रोटीन और जीन्स का आपसी व्यवहार है। रिसर्चर ने इसके लिए ''आर्टिफ़िशियल न्यूरल नेटवर्क'' का इस्तेमाल किया। इन आर्टिफ़िशियल नेटवर्क की प्रायोगिक आंकड़ों के साथ प्रोग्रामिंग की गई।

मतलब, नेटवर्क में ऐसी प्रोग्रामिंग की गई, जिसके ज़रिये, ''प्रयोगों से हासिल होने वाले नतीजों'' की तरह के परिणाम पाए जा सकते हैं। जब इस तरह के नेटवर्क में डाटा डाला जाता है, तो यह उसे विश्लेषित कर बताता है कि डाटा से क्या समझा जा सकता है। जटिल आंकड़ों के विश्लेषण में आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क का शानदार काम रहा है। इसलिए इनका इस्तेमाल इमेज रिक्गनिशन (तस्वीर से पहचान) एप्लीकेशन में भी किया जाता है। लेकिन बॉयोलॉजिकल रिसर्च में फिलहाल इनका उपयोग सीमित है।

लिंकोपिंग यूनिवर्सिटी के फ़िज़िक्स, केमिस्ट्री एंड बॉयोलॉजी (IFM) में पोस्टडॉक्टोरल फैलो संजीव द्विवेदी कहते हैं, ''हमने पहली बार 'डीप लर्निंग' तकनीक का इस्तेमाल बीमारियों से संबंधित जीन की पहचान के लिए किया है। यह बड़ी मात्रा की जानकारी के विश्लेषण के लिए शानदार तरीक़ा है।'' संजीव इस पेपर के पहले लेखक भी हैं। 

लेकिन इससे जुड़ी एक बड़ी चुनौती भी है। पूरी प्रक्रिया में आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क कैसे किसी काम को पूरा करता है, इसे देख पाना मुमकिन नहीं है। यह एक ब्लैक बॉक्स की तरह है। संजीव ने आगे कहा, ''हम जानते हैं कि हमने कौन से आंकड़े डाले हैं और हमें नतीजे भी दिखते हैं। लेकिन इन नतीजों तक पहुंचने के लिए नेटवर्क ने कौन से क़दम उठाएँ, यह देख पाना हमारे लिए मुमकिन नहीं है। मौजूदा अध्ययन के रिसर्चर ने भी इस प्रक्रिया को समझने की कोशिश की है।''

IFM में सीनियर लेक्चरर और अध्ययन के करस्पोंडिंग लेखिका माइका गुस्ताफसन कहती हैं, ''जब हमने अपने न्यूरल नेटवर्क की जांच की, तो पाया कि पहली गुप्त परत में ज़्यादातर अलग-अलग प्रोटीन का आपसी व्यवहार संपन्न होता है। मॉडल की गहराई में तीसरे स्तर पर हमें अलग-अलग कोशिका समूह मिले। बॉयोलॉजिकल तौर पर अहम इस ग्रुपिंग का अपने-आप बनना बेहद दिलचस्प है। जबकि हमारे नेटवर्क में जीन से संबंधित जो आंकड़े डाले गए थे, वो अवर्गीकृत थे।''

इसके बाद रिसर्चर यह जानने का प्रयास किया कि जीन मॉडल, अलग-अलग जीन के बीमारियों से संबंध को ढूंढ पाने में कामयाब है या नहीं। उनका मॉडल सही साबित हुआ। मॉडल जरूरी पैटर्न को समझने में कामयाब रहा, जो बॉयोलॉजिकल सच्चाई से वास्ता रखते हैं।

माइक गुस्ताफसन आगे कहती हैं, ''हमें लगता है कि इस मामले में असली हासिल न्यूरल नेटवर्क को समझ पाना है। इससे हमें बॉयोलॉजिकल पृष्ठभूमियों के बारे में बहुत सारी नई बातें पता चल सकेंगी। हमें यह भी लगता है कि हमारी अपनाई प्रक्रियाओं से वह मॉडल बनता है जिसका आसानी से सामान्यीकरण हो सकता है और जिसे कई तरह की बॉयोलॉजिकल जानकारी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।''

रिसर्चर का विश्वास है कि जीन पैटर्न पहचानने में AI के सफल इस्तेमाल से भविष्य में ''प्रेसिज़न मेडिसिन (सूक्ष्म पहुंच वाली दवाईयां)'' के विकास में मदद मिलेगी।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Artificial Intelligence Used to Find Disease-related Genes

Artificial intelligence
Artificial Neural Network
Artificial Intelligence in Gene Expression

Related Stories

पृथ्वी दिवस: वैज्ञानिकों ने चिंता जताई

आर्टिफ़िशियल मेटल से बने 'नैनोवायर' में दिमाग़ की तरह गतिविधियां हो सकती हैं


बाकी खबरें

  • RRB NTPC
    एम.ओबैद
    बिहार आरआरबी-एनटीपीसी छात्र आंदोलनः महागठबंधन माले नेता ने कहा- ये सरकार लोकतंत्र विरोधी है
    28 Jan 2022
    "सरकार चाहती ही है कि देश में रोजगार समाप्त हो। पीएम मोदी और उनके मंत्री और पूर्ववर्ती रेल मंत्री पहले कहते रहे हैं कि देश में निजीकरण ज़रुरी है और रोज़गार तो पकौड़ा तलना है। बीजेपी की पकौड़ा तलने की…
  • bsp
    भाषा
    यूपी में सपा समर्थकों में लाल टोपी का चलन बढ़ा, बिक्री में भी इज़ाफ़ा
    28 Jan 2022
    लखनऊ में प्रचार सामग्री बेचने वाले बता रहे हैं कि रैलियों व जुलूस पर चुनाव आयोग की पाबंदी के कारण बैनर व पोस्टर उतने नहीं बिक रहे जितनी सपा की ‘लाल टोपी’। 
  • Google Airtel
    भाषा
    भारती एयटेल में एक अरब डॉलर का निवेश करेगी गूगल, 1.28 फीसदी हिस्सेदारी भी खरीदेगी
    28 Jan 2022
    इस करार में इक्विटी निवेश के साथ-साथ संभावित वाणिज्यिक समझौतों के लिए एक कोष भी शामिल है, जिसके तहत समझौतों को अगले पांच वर्षों के दौरान पारस्परिक रूप से सहमत शर्तों पर मंजूरी दी जाएगी। गूगल यह निवेश…
  • akhilesh
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिना कारण बताए मेरे हेलीकॉप्‍टर को रोका गया, यह भाजपा की साज़िश : अखिलेश यादव
    28 Jan 2022
    अखिलेश ने आज दोपहर पहले ट्वीट किया कि उनके हेलीकॉप्टर को दिल्ली में रोक कर रखा गया है, फिर करीब 40 मिनट बाद बताया कि वे उड़ान भरने जा रहे हैं। इसे उन्होंने कुछ इन शब्दों में कहा- "हम जीत की ऐतिहासिक…
  • Xiomara
    पीपल्स डिस्पैच
    होंडुरास: राजनीतिक उथल-पुथल के बीच ज़ियोमारा कास्त्रो बनेंगी राष्ट्रपति
    28 Jan 2022
    पारंपरिक रूढ़ीवादी वर्गों द्वारा कास्त्रो के होंडुरास में बदलावों वाले प्रस्तावों को रोकने के लिए कोशिशें की जा रही हैं। ऐसे में कास्त्रो के शपथ ग्रहण से पहले तनाव बढ़ रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License