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असम-मिज़ोरम सीमा विवाद: असम के पांच पुलिसकर्मियों की मौत, विपक्ष उठा रहा है गंभीर सवाल
असम पुलिस के कम से कम पांच जवानों की मौत हो गई और एक पुलिस अधीक्षक समेत 60 अन्य घायल हो गए। दोनों पक्षों ने हिंसा के लिए एक-दूसरे की पुलिस को जिम्मेदार ठहराया और केंद्र के हस्तक्षेप की मांग की। इन सबके बिच विपक्ष सरकार को घेर रहा है
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
27 Jul 2021
असम-मिजोरम सीमा विवाद
Image courtesy : HT Bangla

गुवाहाटी/आइजोल/नयी दिल्ली: असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद के अचानक खूनी संघर्ष में तब्दील हो जाने से राज्य की “संवैधानिक सीमा” की सुरक्षा कर रहे असम पुलिस के कम से कम पांच जवानों की मौत हो गई और एक पुलिस अधीक्षक समेत 60 अन्य घायल हो गए। दोनों पक्षों ने हिंसा के लिए एक-दूसरे की पुलिस को जिम्मेदार ठहराया और केंद्र के हस्तक्षेप की मांग की। इन सबके बीच विपक्ष सरकार को घेर रहा है क्योंकि दोनों राज्यों  बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की सरकार है।  ऐसे में इसी तरह की घटनाएं चिंताजनक तो हैं ही, इस पर सरकार को भी स्पष्ट जबाब देना चाहिए।

इससे पहले, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दावा किया था कि झड़प में छह पुलिसकर्मियों की मौत हुई। बाद में सोमवार देर रात असम सरकार ने एक बयान में मृतक संख्या में संशोधन किया और कहा कि पांच पुलिसकर्मियों की मौत हुई जबकि 50 से ज्यादा जवान घायल हुए हैं।

असम के कछार जिले के अधिकारियों ने कहा कि संघर्ष में 10 अन्य लोग भी जख्मी हुए हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने क्रमशः असम और मिजोरम के मुख्यमंत्रियों, हिमंत बिस्वा सरमा और जोरमथांगा से बात की और उनसे विवादित सीमा पर शांति सुनिश्चित करने और सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने का आग्रह किया।

अमित शाह ने पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत में सीमा विवादों को सुलझाने की आवश्यकता को रेखांकित किया था जिसके दो दिन बाद यह घटना सामने आई है।

असम के सिलचर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्रधानाचार्य बाबुल बेजबरुआ ने पीटीआई-भाषा को बताया कि कम से कम 50 घायल पुलिसकर्मियों को भर्ती कराया गया है जिन्हें गोली लगी है।

उन्होंने कहा कि अस्पताल में घायलों का आना जारी है और करीब 10 और घायलों को पास के ही धोलाई के अस्पताल में भर्ती किया गया है, जिनमें से अधिकतर पुलिसकर्मी हैं।

असम के बराक घाटी के जिले कछार, करीमगंज और हैलाकांडी मिजोरम के तीन जिलों आइजोल, कोलासिब और मामित के साथ 164 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं। एक क्षेत्रीय विवाद के बाद, इस साल अगस्त 2020 और फरवरी में अंतर-राज्यीय सीमा पर झड़पें हुईं।

पूर्व में असम के मुख्यमंत्री ने ट्विटर पर घोषणा की थी कि कछार जिले में अंतर-राज्यीय सीमा पर मिजोरम की ओर से 'उपद्रवियों' द्वारा की गई गोलीबारी में असम पुलिस के छह जवान मारे गए।

हालांकि, मिजोरम के गृह मंत्री लालचमलियाना ने एक बयान में कहा कि असम के 200 से अधिक पुलिसकर्मियों ने सीआरपीएफ की चौकी पार कर आगजनी, हमला और निहत्थे लोगों पर गोलीबारी की, जिसके बाद मिजोरम पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की।

असम पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सीमा पार से उपद्रवियों ने उस समय अचानक गोलीबारी शुरू कर दी, जब दोनों पक्षों के नागरिक अधिकारी मतभेदों को सुलझाने के लिए बातचीत कर रहे थे।

अधिकारी ने फोन पर कहा, 'मैं तत्काल यह नहीं बता सकता कि कितने लोग घायल हुए हैं, लेकिन मेरा अनुमान है कि कम से कम 50 कर्मी घायल हुए। गोलीबारी में हमारे एसपी भी घायल हो गए और एक गोली उनके पैर में लगी।'

आईपीएस अधिकारी जब 'पीटीआई-भाषा' से फोन पर बात कर रहे थे तब वह जंगल के अंदर छिपे हुए थे और पीछे से गोलीबारी की आवाज सुनाई दे रही थी।

शाम के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम और मिजोरम के मुख्यमंत्रियों से दोनों राज्यों के बीच चल रहे सीमा विवाद पर बात की और उनसे विवाद का शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करने को कहा। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

सूत्रों ने बताया कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा के साथ टेलीफोन पर अलग-अलग बातचीत के दौरान शाह ने उनसे अंतरराज्यीय सीमा पर शांति बनाए रखने को कहा। गृह मंत्री ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि सीमा विवाद को आपसी सहमति से हल करें।

दोनों मुख्यमंत्रियों ने गृह मंत्री को आश्वासन दिया है कि शांति सुनिश्चित करने और सीमा मुद्दे को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

इसके तुरंत बाद, मिजोरम के गृह मंत्री लालचमलियाना ने अपने बयान में कहा कि शाह के हस्तक्षेप के बाद, असम पुलिस उस जगह से हट गई है और ड्यूटी पोस्ट सीआरपीएफ कर्मियों को वापस सौंप दी गई है।

कांग्रेस ने असम-मिजोरम सीमा पर हिंसा को लेकर भाजपा पर निशाना साधा।

कांग्रेस ने एक बयान में कहा कि यह बहुत चिंता का विषय है कि एक ओर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री ट्विटर पर खुलेआम बहस कर रहे थे, दूसरी ओर तनाव बढ़ रहा था।

पार्टी ने पूछा, 'कल (रविवार को) गृह मंत्री ने अंतरराज्यीय सीमा विवाद के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की थी। उनके बीच क्या हुआ? सीमा विवादों को कम करने के लिए क्या नीतियां अपनाई गईं?'

इससे पहले, दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सोमवार को एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए और एक-दूसरे की पुलिस को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया। दोनों ने केंद्र से मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने ट्विटर पर कहा कि उन्होंने मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा से बात की है और उनकी पुलिस शांति बनाए रखेगी।

असम सरकार के बयान में कहा गया, “बेहद भारी मन से हम यह बता रहे हैं कि जिसे मिजोरम द्वारा असम की तरफ से घुसपैठ और आक्रमकता करार दिया जा रहा है उसमें असम पुलिस के पांच कर्मियों की मौत हो चुकी है (शुरुआती खबरों के मुताबिक छह जिसकी पुष्टि अभी की जा रही है)।”

जोरमथांगा ने असम पुलिस पर लाठीचार्ज करने और आंसू गैस के गोले छोड़ने के आरोप लगाए जबकि असम की पुलिस ने दावा किया कि मिजोरम से बड़ी संख्या में ‘‘उपद्रवियों’’ ने पथराव किया और असम सरकार के अधिकारियों पर हमला किया।

मिजोरम के पुलिस महानिरीक्षक (उत्तरी रेंज) लालबियाकथांगा खियांगते ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि विवादित क्षेत्र में ऐटलांग नदी के पास कम से कम आठ झोपड़ियों में रविवार की रात साढ़े 11 बजे आग लगा दी गई। उन्होंने बताया कि इन झोपड़ियों में कोई नहीं था। उन्होंने बताया कि ये झोपड़ी असम के नजदीकी सीमावर्ती गांव वायरेंगटे के किसानों की है।

असम के स्थानीय लोगों ने आरोप लगाए कि अपराधी लाठी, डंडे, लोहे की छड़ और राइफल लिए हुए थे और उन्होंने ललितपुर में असम पुलिस के कर्मियों पर हमला किया और कई वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिसमें उपायुक्त कार्यालय के वाहन भी शामिल थे।

जोरमथांगा ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें असम के पुलिसकर्मियों और डंडे लिए हुए युवकों के समूह के बीच संघर्ष हो रहा है।

उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्री के कार्यालय, सरमा और असम के कछार जिले के अधिकारियों को टैग करते हुए लिखा, ‘‘अमित शाह जी...कृपया मामले को देखें। इसे तुरंत रोकने की जरूरत है।’’

जोरमथांगा ने एक अन्य ट्वीट में कछार से मिजोरम लौट रहे एक ‘‘निर्दोष दंपति’’ पर कथित हमले की बात भी कही। उन्होंने पूछा, ‘‘इन हिंसक कृत्यों को आप कैसे उचित ठहरा सकते हैं?’’

असम पुलिस ने मिजोरम के मुख्यमंत्री के आरोपों का प्रतिवाद करते हुए कहा कि मिजोरम के लोगों ने इसके कर्मियों पर हमला किया और पथराव किया।

इसने ट्वीट किया, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मिजोरम से काफी संख्या में बदमाशों ने पथराव किया और असम सरकार के अधिकारियों पर हमले किए, जो ललितपुर में असम की जमीन को अतिक्रमण से बचाने के लिए ठहरे हुए हैं।’’

असम पुलिस ने भी कहा, ‘‘हम तोड़फोड़ की इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हैं और असम की सीमा की रक्षा करने के अपने संकल्प को दोहराते हैं।’’

असम के मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘माननीय मुख्यमंत्री जोरमथांगा जी कोलासिब (मिजोरम) के पुलिस अधीक्षक हमसे अपनी चौकियों से हट जाने के लिए कह रहे हैं, अन्यथा उनके नागरिक न तो सुनेंगे, न ही हिंसा रोकेंगे।’’

एक वीडियो ट्वीट करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह की परिस्थितियों में हम सरकार कैसे चलाएंगे? उम्मीद है अमित शाह, प्रधानमंत्री कार्यालय जल्द से जल्द हस्तक्षेप करेंगे।’’

सरमा ने कहा कि उन्होंने मिजोरम के मुख्यमंत्री से बात की है और कहा कि असम पुलिस सीमा पर यथास्थिति तथा शांति बनाए रखेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने तुरंत माननीय मुख्यमंत्री जोरमथांगा जी से बात की। मैंने कहा है कि असम सीमा पर यथास्थिति तथा शांति बनाए रखेगा। मैंने आइजोल का दौरा करने और जरूरत पड़ने पर इन मुद्दों पर चर्चा करने की इच्छा जताई है।’’

बहरहाल जोरमथांगा ने फिर ट्वीट किया, ‘‘प्रिय हिमंत जी, माननीय अमित शाह जी द्वारा मुख्यमंत्रियों के साथ सौहार्दपूर्ण बैठक के बाद आश्चर्यजनक रूप से असम पुलिस की दो कंपनियां नागरिकों के साथ पहुंचीं और मिजोरम के अंदर आज वेयरेंगटे ऑटो रिक्शा स्टैंड पर मौजूद नागरिकों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। उन्होंने सीआरपीएफ कर्मियों/मिजोरम पुलिस से भी संघर्ष किया।’’

मिजोरम के मुख्यमंत्री ने सरमा से अपील की कि असम पुलिस को निर्देश दें कि वह वायरेंगटे से हट जाए। असम में फिलहाल भाजपा की सरकार है जबकि मिजोरम में भाजपा नीत पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन (नेडा) में शामिल मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) की सरकार है।

तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद को लेकर हुए संघर्ष में कम से कम पांच पुलिसकर्मियों की मौत होने और 60 अन्य लोगों के घायल होने की घटना पर हैरानी जताते हुए मंगलवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की निगरानी में लगातार इस प्रकार की घटनाओं ने भारत में लोकतंत्र की मौत को आमंत्रित किया है।

तृणमूल के राष्ट्रीय सचिव ने ट्वीट किया, ‘‘मैं असम-मिजोरम सीमा पर हुई निर्मम हिंसा का समाचार सुनकर स्तब्ध हूं। मैं शोकसंतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। भाजपा की निगरानी में लगातार इस प्रकार की घटनाओं ने भारत में लोकतंत्र की मौत को आमंत्रित किया है।’’

अब यह खबर आ रही है कि असम के मुख्य शहर गुवाहाटी के खानापारा इलाके में राज्य की जमीन पर मेघालय द्वारा बिजली के खंभे लगाने के कथित प्रयास के कारण सोमवार को अंतरराज्यीय सीमा पर तनाव बढ़ गया। असम के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी।

इस बारे में सूचना मिलने पर असम पुलिस और नागरिक प्रशासन के अधिकारी अंतरराज्यीय सीमा के करीब खानापारा पहुंचे और मेघालय के अधिकारियों से चर्चा की। अधिकारी ने बताया कि पड़ोसी राज्य इसके बाद बिजली का खंभा नहीं लगाने पर सहमत हुआ।

अधिकारी ने बताया, ‘‘मामले को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाया गया और अब स्थिति नियंत्रण में है।’’ इलाके में असम सरकार पहले से ही बिजली की आपूर्ति कर रही है। इस संबंध में मेघालय सरकार का बयान उपलब्ध नहीं है।

असम और मेघालय के बीच सीमा विवाद वर्षों से चल रहा है। दो दिन पहले मेघालय की राजधानी शिलांग में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच हुई बैठक में भी यह मुद्दा उठा।

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