NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
असम: आख़िर चुनाव आयोग की भूमिका सवालों के घेरे में क्यों है?
कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी ने अख़बारों में ‘समाचार की शक्ल’ में अपनी जीत का विज्ञापन देकर नियमों का उल्लंघन किया है। लेकिन चुनाव आयोग ने सिर्फ अख़बारों को नोटिस जारी कर बीजेपी पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
31 Mar 2021
Image Courtesy:  Social Media

राजनीति में राज करने के लिए साम, दाम, दंड और भेद की नीति बरसों पुरानी है। राजनीतिक पार्टियां चुनाव जीतने के लिए अक्सर थोड़ा कम या ज्यादा इस हथिहार का इस्तेमाल कर ही लेती हैं। लेकिन विडंबना ये है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में पहले ये सब पर्दे के पीछे रहकर होता था और अब अख़बारों में विज्ञापन के माध्यम से खुलेआम होता दिखाई दे रहा है। असम के ताज़ा मामले में एक ओर निर्वाचन आयोग की भूमिका पर फिर से सवाल उठ रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर आयोग पहले की तरह ही सत्तारूढ़ दल बीजेपी पर चुप्पी साधे हुए है।

क्या है पूरा मामला?

असम में 27 मार्च को 47 सीटों के लिए पहले चरण का मतदान हुआ था। ठीक इसके अगले ही दिन 28 मार्च को भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी की ओर से पहले चरण की सभी सीटों पर अपनी जीत का दावा करने वाला ‘समाचार की शक्ल में विज्ञापन’ अख़बारों में प्रकाशित करवाया गया।  

महज़ एक-दो अख़बारों में नहीं बल्कि असम के अंग्रेजी, असमी, हिंदी और बंगाली भाषा के सभी प्रमुख अखबारों में बीजेपी का यह विज्ञापन प्रकाशित हुआ था। इन अखबारों में असम ट्रिब्यून, असोमिया प्रतिदिन, आमार असोम, नियोमिया बार्ता, असोमिया खबोर, दैनिक असम, दैनिक जुगसंख और दैनिक पूर्वोदय शामिल हैं।

मुख्यमंत्री समेत आठ प्रमुख समाचार पत्रों के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज

कथित विज्ञापन के प्रकाशित होते ही कांग्रेस हरकत में आ गई और पार्टी ने कथित रूप से ‘खबर के रूप में विज्ञापन छपवाने’ के लिए असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास तथा आठ प्रमुख समाचार पत्रों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी।

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के विधि विभाग के अध्यक्ष निरन बोरा ने कहा कि आदर्श आचार संहिता, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126ए के प्रावधानों और 26 मार्च को जारी चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के कथित उल्लंघन के लिए रविवार की रात प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। शिकायत दिसपुर थाने में दर्ज कराई गई थी।

मतदाताओं के प्रभावित करने की पूर्व नियोजित साज़िश

बोरा ने कहा, ‘मुख्यमंत्री, भाजपा अध्यक्ष, प्रदेश इकाई के प्रमुख तथा पार्टी के अन्य सदस्यों ने दूसरे और तीसरे चरण में मतदाताओं के प्रभावित करने की पूर्व नियोजित साजिश के तहत जान-बूझकर विभिन्न समाचार पत्रों के पहले पन्नों पर समाचार के रूप में विज्ञापन दिया है, जिसमें दावा किया गया है कि बीजेपी ऊपरी असम की सभी सीटों पर जीत हासिल करेगी।’

निरन बोरा ने कहा कि बीजेपी के नेताओं को एहसास हो रहा है कि वे चुनाव हार रहे हैं, इसलिए वे मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए अवैध और असंवैधानिक तरीके अपना रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस ने विज्ञापन के प्रकाशन के खिलाफ रविवार, 28 मार्च को ही असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नितिन खाड़े के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए बीजेपी तथा समाचार पत्रों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई का अनुरोध किया था।

चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल

मामले में आयोग की कार्रवाई सामने आई तो आयोग पर ही सवाल उठने लगे। निर्वाचन आयोग ने कार्रवाई करते हुए आठों अखबारों को नोटिस जारी किया। जिस पर कांग्रेस ने सवाल उठाया की आखिर आयोग ने इस पूरे मामले में बीजेपी पर कोई कार्रवाई क्यों नही की। क्या आयोग बीजेपी के लिए नियम कानून भूल गया है।

कांग्रेस नेता और पार्टी के महासचीव रणदीप सुरजेवाला ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुनिल अरोड़ा पर तंज कसते हुए ट्वीट किया, “जवाब तलबी और कठोर कार्रवाई तो झूठे दावे छपवाने वाले विज्ञापनदाताओं यानी असम व भाजपा के शीर्ष नेताओं पर भी होनी चाहिए। सोचा याद दिला दूं! शायद सत्तारूढ़ दल के खिलाफ कार्रवाई वाली धाराओं को चुनाव आयोग ने भुला दिया है।”

आपको बता दें कि बीजेपी के इस कदम के बाद कांग्रेस भी इस ‘विज्ञापन वार’ में कूद पड़ी है। द न्यूज मिल वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी के इन विज्ञापनों के जवाब में कांग्रेस ने 30 मार्च को राज्य के अखबारों में विज्ञापन दिया है, जिसका शीर्षक ‘पांच गारंटी का चला जादू, पूरे असम में कांग्रेस की लहर’ है। ये विज्ञापन कम से कम 15 अखबारों में प्रकाशित किए गए हैं।

इस बार असम में किसकी सरकार!

गौरतलब है कि असम में सरकार बनाने के लिए कुल 126 सीटों की आधी से एक ज्यादा यानी 64 सीटों की जरूरत होगी। जिसके लिए तीन चरणों में चुनाव हो रहे हैं। दूसरे चरण में 39 सीटों पर एक अप्रैल को और तीसरे और अंतिम चरण के लिए छह अप्रैल को चुनाव होंगे। फिलहाल असम में बीजेपी की सरकार है, जिसकी सत्ता किसी भी कीमत पर बीजेपी खोना नहीं चाहती। वहीं दूसरी ओर लंबे समय तक असम की सत्ता पर काबिज़ रही कांग्रेस भी अपनी खोई कुर्सी दोबारा पाना चाहती है।

मालूम हो कि 2011 के विधानसभा चुनाव में महज़ पांच विधायकों वाली बीजेपी ने 2016 में 60 सीटें जीती थी। जिसकी मुख्य वजह कांग्रेस का हाथ छोड़ बीजेपी में शामिल हुए हिमंत विस्व सरमा हैं। हालांकि इस बार जानकार बीजेपी की जीत को इतना आसान नहीं देख रहे। इसका बड़ा कारण नागरिकता संशोधन कानून और दिहाड़ी मजदूरों का मुद्दा है जो कहीं न कहीं बीजेपी की गले की फांस बना हुआ है।

Assam
assam assembly elections 2021
BJP
Sunil Arora
Congress
code of conduct violation
Paid News

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • Ludhiana
    न्यूज़क्लिक टीम
    ग्राउंड रिपोर्ट; लुधियानाः क्या दलित कार्ड पार लगाएगा नैया या भारी दूसरे दांव
    18 Feb 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह पहुंची लुधियाना और भगत सिंह के भांजे प्रो. जगमोहन सिंह से लेकर सफाई कर्मचारी समाज, नौजवानों से मिलकर जाना चुनावी मौसम का हाल
  • Udupi Ground Report
    शिवम चतुर्वेदी
    उडुपी ग्राउंड रिपोर्ट : हिजाब के समर्थन में हैं कॉलेज की हिंदू लड़कियां, पर उन्हें मीडिया से बात करने की इजाज़त नहीं
    18 Feb 2022
    कुसुम ने कहा, "हिंदू लड़के कभी भी भगवा गमछा पहन कर पहले नहीं आया करते थे शायद वह किसी के उकसावे में आकर भगवा गमछा पहन कर आ रहे हैं।"
  • narendra modi
    पार्थ एस घोष
    क्या यह मोदी लहर के ख़ात्मे की शुरूआत है?
    18 Feb 2022
    अब राजनीतिक प्रतिद्वंदी बीजेपी से खौफ़ नहीं खाते हैं, ना ही वह धारणा रही है कि बीजेपी को हराया नहीं जा सकता। अब बीजेपी को समझ आ रहा है कि लोग अच्छे प्रशासन की अपेक्षा रखते हैं।
  • Modi channi kejriwal
    रवीश कुमार
    चन्नी का बयान ग़लत है लेकिन निंदा करने वाले उससे भी ज़्यादा ग़लत हैं
    18 Feb 2022
    प्रधानमंत्री मोदी बताएं कि तालाबंदी के समय यूपी और बिहार के मज़दूर जब दर-दर भटक रहे थे तब वे क्या कर रहे थे? पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह ने तो बयान दिया है लेकिन हरियाणा की खट्टर सरकार ने तो…
  • yogi
    भाषा
    सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध जारी 274 भरपाई नोटिस वापस लिए गए: उप्र सरकार
    18 Feb 2022
    न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकान्त की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार करोड़ों रुपये की पूरी राशि वापस करेगी जो 2019 शुरू की गई कार्रवाई के तहत कथित प्रदर्शनकारियों से वसूली गई थी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License