NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
असम चुनावः भाजपा को हांफ़ना पड़ गया विपक्ष और मुद्दों के आगे
बात बोलेगी: ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर बसे शहर गुवाहाटी में चुनावी धार क्या वही है जो पूरे असम की है—शायद नहीं।
भाषा सिंह
06 Apr 2021

विस्तार है अपार, प्रजा दोनों पार... करे हाहाकार निःशब्द सदा... ओ गंगा तुम, ओ गंगा बहती हो क्यूं ?

...नैतिकता नष्ट हुई, मानवता भ्रष्ट हुई... निर्लज्ज भाव से बहती हो क्यूं ? ओ गंगा तुम, ओ गंगा बहती हो क्यूं ?

मतदान करते असम को देखते हुए आज ज़ेहन में असम के महान गायक, संस्कृतिकर्मी भूपेन हजारिका के प्रसिद्ध गीत—ओ गंगा तुम बहती हो क्यों...की ये पंक्तियां घूमती रहीं। ब्रह्मपुत्र नदी-- के तट पर बसे शहर गुवाहाटी में चुनावी धार क्या वही है जो पूरे असम की है—शायद नहीं। हालांकि असम में इस बार का चुनाव पूरी तरह से हिंदू-मुसलमान ध्रुवीकरण पर केंद्रित करने में भाजपा काफी हद तक सफल रही है। इसके साथ ही बाकी सारी मशीनरी के बेजा इस्तेमाल से लेकर सभी हथकंडे इस्तेमाल करने से भाजपा को कोई गुरेज़ नहीं दिखाई दिया। जिस तरह से भाजपा के नेताओं और उनके रिश्तेदारों के पास ईवीए मशीन मिल रही है, लोगों को धमकाया जा रहा है, पोलिंग स्टेशन में घुस कर भाजपा कार्यकर्ता हिंसा पर उतारू हो रहे हैं, उससे यह भी आभास होता है कि असम जीतने में भाजपा की सांस छूट गई यानी बहुत ही मुश्किल हो रहा है भाजपा के लिए।

इन विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सबसे अधिक विवादित बयानों के जरिए चर्चा में रहे हेमंत विस्वा सरना। उनकी ज़मीन बहुत पुख्ता है। उत्तर गुवाहाटी में उनका खासा दबदबा है, लोग उनके बयानों से ज्यादा उनके कामकाज की तारीफ करते हैं। सड़कों की बात करते हैं, स्वास्थ्य सेवाओं की बात करते हैं और फिर जब हम उनसे हिंदू-मुसलमान ध्रुवीकरण की बात पूछते हैं तो वे कहते हैं कि नफरत नहीं है, हम ये सब नहीं चाहते। गुवाहाटी शहर -उत्तर गुवाहाटी में भारतीय जनता पार्टी का खासा दबदबा दिखाई दिया, हालांकि असम के बाकी हिस्सों की तस्वीर इसके अलग नजर आई। गुवाहाटी में भी जो नौजवान तबका है, वह भीतर तक बेहद उद्वेलित है। वह नौकरी के वादे पर मोदी सरकार और असम की सोनेवाल की सरकार से जबाव की दरकार करता है। लेकिन यहीं पर हमें ऐसे नौजवान मिले जो भाजपा से बेहद नाराज हैं। उनका कहना है कि भाजपा हमें बेवकूफ बना रही है। सब कुछ बेच रही है। नौकरियां नहीं दे रही है। इस बारे में युवा सोनू ने बताया- हम इस बार भाजपा के खिलाफ हैं और रहेंगे, क्योंकि वह नौजवानों को पकौड़ा बेचने वाला नहीं तो दंगा करने वाला बनाना चाहती है।

मतदान की लाइन में लगी महिला सुष्मिता देव ने कहा, हम बड़ी संख्या में वोट देने के लिए इसलिए आये हैं क्योंकि हमें असम को बचाना है। हमारा कल्चर अलग है, खाना-पीना-पहनावा अलग। हम इसके पक्ष में है। हिंदू मुसलमान लड़ाई झगड़ा हमें पसंद नहीं। न ही हम नफरत के लिए घर से निकलते हैं।

ऐसा लगता है कि असम में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ जो संघर्ष चला था, उसकी आग ठंडी पड़ गई है। कम से कम ऐसा एहसास हुआ गुवाहाटी में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ चले प्रदर्शन में जान गंवाने वाले 17 साल के नौजवान सैम के घर जाकर। उनकी बहन मौसमी ने दुख के साथ बताया कि अब कोई इस मुद्दे को याद नहीं करना चाहता। कोई नहीं बात करता सैम की शहादत की। शायद असम के एक हिस्से में इसका असर मतदान में पड़ेगा, लेकिन पूरे राज्य में नहीं। वहीं, अखिल गोगोई अपने इलाके में खासा प्रभाव पैदा करने में कामयाब हो पाए हैं।

वाम दल और एआईयूडीएफ के साथ कांग्रेस जमीन पर कड़ी टक्कर भाजपा को दे रही है। चुनाव घोषणा होने तक भाजपा को लग रहा था कि मैदान उसके लिए खाली है, लेकिन जमीनी मुद्दों औऱ संगठित विपक्ष ने भाजपा को हांफने पर मजबूर कर दिया है। शायद यही कारण है कि इतने बड़े पैमाने पर ईवीएम धांधलियां सामने आईं। 

(भाषा सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

Assam
Assam Elections Update
BJP
Assam Issues
opposition parties
Religion Politics
Guwahati

Related Stories

ख़बरों के आगे-पीछे: केजरीवाल के ‘गुजरात प्लान’ से लेकर रिजर्व बैंक तक

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

इस आग को किसी भी तरह बुझाना ही होगा - क्योंकि, यह सब की बात है दो चार दस की बात नहीं

ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा में नंबर दो की लड़ाई से लेकर दिल्ली के सरकारी बंगलों की राजनीति

बहस: क्यों यादवों को मुसलमानों के पक्ष में डटा रहना चाहिए!

ख़बरों के आगे-पीछे: गुजरात में मोदी के चुनावी प्रचार से लेकर यूपी में मायावती-भाजपा की दोस्ती पर..

कश्मीर फाइल्स: आपके आंसू सेलेक्टिव हैं संघी महाराज, कभी बहते हैं, और अक्सर नहीं बहते

उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!

जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता

त्वरित टिप्पणी: जनता के मुद्दों पर राजनीति करना और जीतना होता जा रहा है मुश्किल


बाकी खबरें

  • modi
    अनिल जैन
    खरी-खरी: मोदी बोलते वक्त भूल जाते हैं कि वे प्रधानमंत्री भी हैं!
    22 Feb 2022
    दरअसल प्रधानमंत्री के ये निम्न स्तरीय बयान एक तरह से उनकी बौखलाहट की झलक दिखा रहे हैं। उन्हें एहसास हो गया है कि पांचों राज्यों में जनता उनकी पार्टी को बुरी तरह नकार रही है।
  • Rajasthan
    सोनिया यादव
    राजस्थान: अलग कृषि बजट किसानों के संघर्ष की जीत है या फिर चुनावी हथियार?
    22 Feb 2022
    किसानों पर कर्ज़ का बढ़ता बोझ और उसकी वसूली के लिए बैंकों का नोटिस, जमीनों की नीलामी इस वक्त राज्य में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में गहलोत सरकार 2023 केे विधानसभा चुनावों को देखते हुए कोई जोखिम…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव, चौथा चरण: केंद्रीय मंत्री समेत दांव पर कई नेताओं की प्रतिष्ठा
    22 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश चुनाव के चौथे चरण में 624 प्रत्याशियों का भाग्य तय होगा, साथ ही भारतीय जनता पार्टी समेत समाजवादी पार्टी की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। एक ओर जहां भाजपा अपना पुराना प्रदर्शन दोहराना चाहेगी,…
  • uttar pradesh
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव : योगी काल में नहीं थमा 'इलाज के अभाव में मौत' का सिलसिला
    22 Feb 2022
    पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि "वर्तमान में प्रदेश में चिकित्सा सुविधा बेहद नाज़ुक और कमज़ोर है। यह आम दिनों में भी जनता की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त…
  • covid
    टी ललिता
    महामारी के मद्देनजर कामगार वर्ग की ज़रूरतों के अनुरूप शहरों की योजना में बदलाव की आवश्यकता  
    22 Feb 2022
    दूसरे कोविड-19 लहर के दौरान सरकार के कुप्रबंधन ने शहरी नियोजन की खामियों को उजागर करके रख दिया है, जिसने हमेशा ही श्रमिकों की जरूरतों की अनदेखी की है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License