NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतिम एनआरसी से बाहर हुए हिंदू बंगालियों की संख्या सार्वजनिक करेगी असम सरकार: हिमंत
असम भाजपा के वरिष्ठ नेता और वित्तमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि राज्य सरकार ने एनआरसी की अंतिम सूची से बाहर हुए हिंदू बंगालियों का जिलेवार आंकड़ा वर्तमान विधानसभा सत्र में पेश करने का निर्णय किया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
29 Nov 2019
NRC
Image courtesy:DD News

पहले असम और फिर पूरे देश में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की वकालत कर रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ही चाहती है कि असम में लागू हुआ एनआरसी रद्द हो जाए और फिर से ये प्रक्रिया हो। जबकि करीब छह साल में यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पूरी हुई। इसके अलावा असम सरकार जल्द से जल्द नागरिकता संशोधन कानून भी चाहती है। दरअसल बीजेपी जिस मंशा से एनआरसी चाहती थी वो असम में पूरी नहीं हुई। और अब असम सरकार एनआरसी से बाहर हुए हिंदू बंगालियों की सूची जारी करने जा रही है। इसके पीछे की मंशा पर भी कई सवाल हैं।  

राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को इसके वर्तमान स्वरूप में खारिज करने का केंद्र से अनुरोध कर चुके असम भाजपा के वरिष्ठ नेता हिमंत बिस्व सरमा ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य सरकार ने राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की अंतिम सूची से बाहर हुए हिंदू बंगालियों का जिलेवार आंकड़ा वर्तमान विधानसभा सत्र में पेश करने का निर्णय किया है।

असम के वित्तमंत्री सरमा ने दावा किया कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने राज्य में तीन वर्ष पहले राष्ट्रीय नागरिक पंजी प्रक्रिया के अद्यतन की प्रक्रिया में ‘‘भारी अनियमितता’’ पायी है।

उन्होंने विधानसभा परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम उन हिंदू बंगाली व्यक्तियों के आंकड़े विधानसभा के वर्तमान सत्र के दौरान देंगे जो (एनआरसी से बाहर किये जाने के बाद फॉरनर्स ट्रिब्यूनल में) विभिन्न जिलों में आवेदन कर रहे हैं। हम पहले यह आंकड़ा नहीं दे सके क्योंकि एनआरसी तैयार नहीं हुआ था। अब हमारे पास जिलेवार आंकड़ा है।’’

राज्य विधानसभा का शीतकालीन सत्र बृहस्पतिवार को शुरू हुआ और यह छह दिसम्बर को समाप्त होगा।

विभिन्न वर्गों की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि 31 अगस्त को प्रकाशित अंतिम एनआरसी में बड़ी संख्या में हिंदुओं को बाहर कर दिया गया है और इसमें 19 लाख से अधिक आवेदनकर्ता छोड़ दिये गए हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 20 नवम्बर को राज्यसभा में घोषणा की थी कि असम में एनआरसी अद्यतन करने की प्रक्रिया भारत के बाकी हिस्से के साथ नये सिरे से चलायी जाएगी। उसी दिन सरमा ने कहा था कि राज्य सरकार ने शाह से एनआरसी को उसके वर्तमान स्वरूप में खारिज करने का अनुरोध किया है।

सरमा ने बृहस्पतिवार को कहा कि असम के लोगों ने नहीं बल्कि केवल एआईयूडीएफ और कांग्रेस विधायकों के एक वर्ग ने मांग की है कि एनआरसी को रद्द नहीं किया जाना चाहिए।

उच्चतम न्यायालय की निगरानी वाली एनआरसी अद्यतन प्रक्रिया का उद्देश्य अवैध प्रवासियों की पहचान करना था जिसमें अधिकतर पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से हैं। यह प्रक्रिया असम में संचालित की गई जहां पड़ोसी देश से 20वीं सदी की शुरूआत से ही लोगों का प्रवेश हो रहा है।

सरमा ने कहा कि देशव्यापी एनआरसी की एक साझी अनंतिम तिथि होनी चाहिए नहीं तो लोग एक राज्य में खारिज होने के बाद दूसरे राज्य से भारतीय नागरिकता प्राप्त करने का प्रयास करेंगे।

भाजपा नेता ने कहा, ‘‘नये एनआरसी में 1971 अनंतिम वर्ष हो सकता है या उसमें पूरी तरह से एक नयी अंतिम समयसीमा हो सकती है। लेकिन पूरे भारत के लिए जो भी समय की अंतिम समयसीमा हो वह असम पर भी लागू होनी चाहिए। हमें 1971 से पहले किसी भी वर्ष से कोई आपत्ति नहीं है।’’

शीतकालीन सत्र के पहले दिन कांग्रेस और एआईयूडीएफ के सदस्यों ने राज्य सरकार के एनआरसी खारिज करने के कदम और विवादास्पद नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन किया।

सरमा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री नागरिकता संशोधन विधेयक पर विभिन्न समूहों एवं कांग्रेस की प्रदेश इकाई सहित अन्य पार्टियों, पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ शुक्रवार और शनिवार को बैठकें करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं उम्मीद करता हूं कि नागरिकता संशोधन विधेयक संसद के वर्तमान संत्र के दौरान पारित हो जाएगा...मैं उम्मीद करता हूं कि नागरिकता संशोधन विधेयक आएगा। असम में हमें नागरिकता संशोधन विधेयक चाहिए...असम के लोगों के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक जरूरी है।’’

सरमा ने कहा कि कैग ने करीब तीन वर्ष पहले एनआरसी कार्यालय एवं उसकी गतिविधियों का निरीक्षण किया था और राज्य सरकार को ‘‘भारी अनियमितता और विसंगतियों’’ के बारे में सूचित किया था।

मंत्री ने कहा कि यद्यपि लोगों के बीच भ्रम से बचने के लिए मुख्यमंत्री और उन्होंने उस समय निर्णय किया था कि एनआरसी प्रक्रिया पूरी होने तक रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं करेंगे।

उन्होंने एनआरसी को अद्यतन करने की इस वृहद कवायद में कथित अनियमितता की राशि का खुलासा नहीं किया। अंतिम एनआरसी 31 अगस्त को प्रकाशित हुई थी। तब एनआरसी समन्वयक प्रतीक हजेला थे।

इस बीच एक एनजीओ ‘असम पब्लिक वर्क्स’ (एपीडब्ल्यू) ने हजेला के खिलाफ सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई में एक शिकायत दी है जिसमें दस्तावेज अद्यतन करने की प्रक्रिया में सरकारी धनराशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है।

असम समझौते को लेकर एक सवाल पर उन्होंने कहा कि जिन्होंने समझौता तैयार किया था वे इस पर बोलेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किये थे। और क्या आपने हस्ताक्षर किये थे? समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले किसी से भी मशविरा नहीं किया गया था। प्रफुल्ल महंत ने हस्ताक्षर किये थे इसलिए वह समझौते को लेकर प्रतिबद्ध हैं। हिमंत बिस्व सरमा ने उस पर हस्ताक्षर नहीं किये थे, इसलिए मैं उसे लेकर प्रतिबद्ध नहीं हूं। समझौते को स्वीकार करने का विधानसभा में कोई प्रस्ताव नहीं था।’’

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

NRC
NRC Assam
Assam Government
Himant Biswa Sarma
BJP
Bengali Hindus
Citizenship
Assam citizenship
Politics over citizenship

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • प्रियंका शंकर
    रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच, नॉर्वे में नाटो का सैन्य अभ्यास कितना महत्वपूर्ण?
    19 Mar 2022
    हालांकि यूक्रेन में युद्ध जारी है, और नाटो ने नॉर्वे में बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है, जो अभ्यास ठंडे इलाके में नाटो सैनिकों के युद्ध कौशल और नॉर्वे के सैन्य सुदृढीकरण के प्रबंधन की जांच करने के…
  • हर्षवर्धन
    क्रांतिदूत अज़ीमुल्ला जिन्होंने 'मादरे वतन भारत की जय' का नारा बुलंद किया था
    19 Mar 2022
    अज़ीमुल्ला ख़ान की 1857 के विद्रोह में भूमिका मात्र सैन्य और राजनीतिक मामलों तक ही सिमित नहीं थी, वो उस विद्रोह के एक महत्वपूर्ण विचारक भी थे।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: महंगाई-बेरोजगारी पर भारी पड़ी ‘नमक पॉलिटिक्स’
    19 Mar 2022
    तारा को महंगाई परेशान कर रही है तो बेरोजगारी का दर्द भी सता रहा है। वह कहती हैं, "सिर्फ मुफ्त में मिलने वाले सरकारी नमक का हक अदा करने के लिए हमने भाजपा को वोट दिया है। सरकार हमें मुफ्त में चावल-दाल…
  • इंदिरा जयसिंह
    नारीवादी वकालत: स्वतंत्रता आंदोलन का दूसरा पहलू
    19 Mar 2022
    हो सकता है कि भारत में वकालत का पेशा एक ऐसी पितृसत्तात्मक संस्कृति में डूबा हुआ हो, जिसमें महिलाओं को बाहर रखा जाता है, लेकिन संवैधानिक अदालतें एक ऐसी जगह होने की गुंज़ाइश बनाती हैं, जहां क़ानून को…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्यप्रदेश विधानसभा निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित, उठे सवाल!
    19 Mar 2022
    मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित कर दिया गया। माकपा ने इसके लिए शिवराज सरकार के साथ ही नेता प्रतिपक्ष को भी जिम्मेदार ठहराया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License