NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
विधानसभा चुनाव 2021: दूसरे चरण के चुनाव में अपनी बढ़त बचाने में लगी भाजपा
आज 1 अप्रैल को असम और पश्चिम बंगाल की 69 सीटों पर मतदान हो रहा है।
सुबोध वर्मा
01 Apr 2021
विधानसभा चुनाव 2021

राज्य में चल रहे विधानसभा चुनावों के लिए 1 अप्रैल को दूसरे चरण के मतदान में असम की 39 और पश्चिम बंगाल की 30 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। असम में तीन चरणों में होने वाले चुनावों के पहले चरण में 28 मार्च को 47 सीटों के लिए पहले ही मतदान हो चुका है। आज (1 अप्रैल) के बाद, शेष 40 सीटों के लिए तीसरे और अंतिम चरण का मतदान 6 अप्रैल को होगा। असम विधानसभा में 126 सदस्य हैं, जबकि पश्चिम बंगाल, जहां 292 सदस्यीय विधानसभा है, उसे ग़ैर-मुनासिब तौर पर आठ लम्बे चुनावी चरण से गुजरना पड़ रहा है। वहां पहले चरण में 30 सीटों पर मतदान हुआ था।

भाजपा असम में पारंपरिक रूप से कांग्रेस के गढ़ों में सेंध लगाकर पिछले चुनाव में मिली बढ़त को बरक़रार रखने के लिए लड़ रही है। बंगाल में इस दूसरे चरण में बीजेपी पिछली बार तृणमूल कांग्रेस (TMC) की जीती हुई सीटों पर जीत हासिल करने की कोशिश करेगी।

बंगाल: हाई प्रोफ़ाइल युद्धक्षेत्र

बंगाल में इस चरण में जिन 30 सीटों पर मतदान हो रहे हैं, वे विधानसभा क्षेत्र उस आदिवासी इलाक़े के तहत आते हैं, जिसे जंगल महल के नाम से जाना जाता है। पहले चरण में भी इसी क्षेत्र के 30 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ था।

इस चरण में बंगाल के उस नंदीग्राम (पूर्बो मेदिनीपुर ज़िला) सहित कुछ सबसे हाई प्रोफ़ाइल निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होगा, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनकी अपनी ही पार्टी के दलबदलू और उनके पूर्व विश्वासपात्र उस सुवेंदु अधिकारी का सामना करना पड़ रहा है, जो भाजपा में शामिल हो गये हैं और जिन्हें पार्टी संभावित मुख्यमंत्री के रूप में पेश कर रही है। इन दोनों को चुनौती पेश करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की नौजवान नेता, मीनाक्षी मुखर्जी खड़ी हैं, जो संयुक्त मोर्चा (लेफ़्ट, कांग्रेस और भारतीय धर्मनिरपेक्ष मोर्चा के संयुक्त मोर्चे) की उम्मीदवार हैं।

2016 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी ने इन 30 में से 21 सीटें जीती थीं, जबकि वाम दलों ने पांच, कांग्रेस ने तीन और भाजपा ने महज़ एक सीट पर जीत हासिल की थी। हालांकि, भाजपा को उस 2019 के लोकसभा चुनावों से भरोसा मिला था, जिसमें इसे सभी सीटों पर उम्मीदवारों को कामयाबी मिली थी और इस तरह इस क्षेत्र में उसे एक बड़ा जनादेश मिला था। जानकारों का मानना है कि इस लोकसभा चुनावों से जो वोटिंग पैटर्न सामने आया है, उसे विधानसभा चुनावों के वोटिंग पैटर्न के रूप में प्रोजेक्ट करना सही इसलिए नहीं है क्योंकि हाल के सालों में मतदाताओं ने सरकार के दोनों स्तरों के बीच काफ़ी अंतर रखा है।

बीजेपी इस चुनाव में अन्य पार्टियों (ख़ास तौर पर टीएमसी) के अनुमानित उन 158 दलबदलुओं पर भरोसा कर रही है, जिनमें सुवेंदु अधिकारी सबसे ख़ास हैं। क्या लोग ऐसे उम्मीदवारों पर भरोसा कर पायेंगे या नहीं, यह एक ऐसा सवाल है जो इन चुनावों के भाग्य का फ़ैसला करेगा।

नंदीग्राम में ममता बनर्जी और सुवेन्दु अधिकारी के बीच के मुक़ाबले में दोनों ने राजनीतिक "राज़" से पर्दे उठाते हुए एक दूसरे पर बेशुमार कीचड़ उछालना शुरू कर दिया है। सबसे सनसनीखेज ख़ुलासों में एक ख़ुलासा वह था जिसमें कि ममता बनर्जी ने अपने ही पूर्व सहयोगी रहे शुवेन्दु अधिकारी पर 2007 की कुख्यात नंदीग्राम गोलीबारी की घटना में कई लोगों की मौत के पीछे का मास्टरमाइंड होने का आरोप लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि यह महज़ पुलिस फ़ायरिंग नहीं थी जिसमें 14 लोगों की मौत हो गयी थी बल्कि उनमें से कुछ की हत्या अधिकारी के भाड़े के पुलिसवाले (बिना चप्पल पहने हुए) भी कर रहे थे।

नंदीग्राम वाम मोर्चा शासन के दौरान एक हिंसक आंदोलन का स्थल बन गया था और माना जाता है कि वहां घटी घटनाओं की वजह से ही ममता बनर्जी का तेज़ी से उदय हुआ था। 2011 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने वाम मोर्चा को हरा दिया था।

हालांकि,ज़मीनी रिपोर्टों से इस बात का भी संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र के लोग,ख़ास तौर पर अस्थिरता और हिंसा वाले नंदीग्राम में हिंसा के निरंतर चल रहे चक्र से थक चुके हैं और उन वास्तविक मुद्दों पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित करना पसंद करेंगे,जिनका इस समय वे सामना कर रहे हैं।

असम: बीजेपी की लड़ाई सीटों को क़ायम रखने की होगी

इस चरण में असम के मध्य और दक्षिणी भाग में मतदान होगे। यह शायद राज्य का सबसे विविधता वाला इलाक़ा है। इन इलाक़ों में अनुसूचित जाति के लिए पांच और अनुसूचित जनजाति के लिए छह सीटें आरक्षित हैं। अनुसूचित जनजाति वाली सीटों में दक्षिणी असम का कार्बी आंगलोंग इलाक़ा शामिल है जिसमें बोडोलैंड की कुछ सीटें भी शामिल हैं। ब्रह्मपुत्र के साथ-साथ इस क्षेत्र के कई निर्वाचन क्षेत्रों में मुसलमानों की आबादी अच्छी-ख़ासी है।

2016 में बीजेपी ने 39 सीटों में से 22 सीटें जीती थीं, कांग्रेस को छह, और उसके सहयोगी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ़्रंट (AIUDF) को पांच सीटें मिली थीं। भाजपा की सहयोगी असम गण परिषद (AGP) को दो सीटें मिलीं थीं, जबकि बोडोलैंड पीपुल्स फ़्रंट (BPF) ने चार सीटें जीती थीं। इस बार बीपीएफ़ ने बीजेपी का साथ छोड़ दिया है और कांग्रेस के नेतृत्व वाले मोर्चे में शामिल हो गयी है।

बीजेपी इस चुनाव में अपने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण अभियान पर भरोसा कर रही है। उसे अपनी ‘घुसपैठ’ वाली उन बयानबाज़ियों पर वोट पाने की उम्मीद है, जो लगातार बुनियादी तौर पर मुस्लिम विरोधी भावनाओं को तूल देती रही है। हालांकि, सर्बानंद सोनोवाल की अगुवाई वाली इस राज्य में भाजपा सरकार ने बदले हुए नागरिकता क़ानून से सम्बन्धित भाजपा के रुख़ के चलते सभी वर्गों के लोगों में काफ़ी असंतोष पैदा कर दिया है।

मतदान के इस दूसरे दौर के बाद आगामी तीसरे दौर में 6 अप्रैल को सभी चार राज्यों (असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल) और एकमात्र केन्द्र शासित प्रदेश पुडुचेरी को मिलाकर 475 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव होने वाले हैं।

टैग्स: विधानसभा चुनाव 2021, असम चुनाव, पश्चिम बंगाल चुनाव, दूसरा चरण विधानसभा चुनाव, जंगल महल, भाजपा, टीएमसी, ममता बनर्जी, सुवेन्दु अधिकारी, बोडोलैंड पीपुल्स फ़्रंट, असम गण परिषद, एआईयूडीएफ़, कांग्रेस, वाम मोर्चा बंगाल।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Assembly Polls 2021: In Phase 2, BJP Fights to Save Its Advantage

Assembly Elections 2021
Assam Elections
West Bengal Elections
Second Phase Assembly Elections
Jangal Mahal
BJP
TMC
mamata banerjee
Suvendu Adhikari
Bodoland People’s Front
Asom Gana Parishad
AIUDF
Congress
Left Front Bengal

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • अजय कुमार
    मोदी जी की नोटबंदी को ग़लत साबित करती है पीयूष जैन के घर से मिली बक्सा भर रक़म!
    29 Dec 2021
    मोदी जी ग़लत हैं। पीयूष जैन के घर से मिला बक्से भर पैसा समाजवादी पार्टी के भ्रष्टाचार का इत्र नहीं बल्कि नोटबंदी के फ़ैसले को ग़लत साबित करने वाला एक और उदाहरण है।
  • 2021ः कोरोना का तांडव, किसानों ने थमाई मशाल, नफ़रत ने किया लहूलुहान
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    2021ः कोरोना का तांडव, किसानों ने थमाई मशाल, नफ़रत ने किया लहूलुहान
    29 Dec 2021
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने साल 2021 के उन उजले-स्याह पलों का सफ़र तय किया, जिनसे बनती-खुलती है भारतीय लोकतंत्र के भविष्य की राह।
  • जानिए: अस्पताल छोड़कर सड़कों पर क्यों उतर आए भारतीय डॉक्टर्स?
    रवि शंकर दुबे
    जानिए: अस्पताल छोड़कर सड़कों पर क्यों उतर आए भारतीय डॉक्टर्स?
    29 Dec 2021
    यह हड़ताली रेजिडेंट डॉक्टर्स क्या चाहते हैं, क्यों चाहते हैं, अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरना इनके लिए क्यों ज़रूरी है। आइए, क्रमवार जानते हैं-
  • सोनिया यादव
    जेएनयू: ICC का नया फ़रमान पीड़ितों पर ही दोष मढ़ने जैसा क्यों लगता है?
    29 Dec 2021
    नए सर्कुलर में कहा गया कि यौन उत्पीड़न के मामले में महिलाओं को खुद ही अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। महिलाओं को यह पता होना चाहिए किए इस तरह के उत्पीड़न से बचने के लिए उन्हें अपने पुरुष दोस्तों के…
  • कश्मीरी अख़बारों के आर्काइव्ज को नष्ट करने वालों को पटखनी कैसे दें
    एजाज़ अशरफ़
    कश्मीरी अख़बारों के आर्काइव्ज को नष्ट करने वालों को पटखनी कैसे दें
    29 Dec 2021
    सेंसरशिप अतीत की हमारी स्मृतियों को नष्ट कर देता है और जिस भविष्य की हम कामना करते हैं उसके साथ समझौता करने के लिए विवश कर देता है। प्रलयकारी घटनाओं से घिरे हुए कश्मीर में, लुप्त होती जा रही खबरें…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License