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भारत
राजनीति
विधानसभा चुनाव 2021: आज तमिलनाडु,केरल, पुदुचेरी में सभी सीटों और बंगाल,असम की कुछ सीटों पर चुनाव   
आज,मंगलवार को तीसरे चरण की ज़्यादतर सीटों पर बंगाल और असम को छोड़कर बाक़ी राज्यों में ग़ैर-भाजपा दलों के बीच मुक़ाबला है।
सुबोध वर्मा
06 Apr 2021
विधानसभा चुनाव 2021

इस साल के विधानसभा चुनाव में आज का दिन सुपर मंगलवार इसलिए है,क्योंकि आज यानी  6 अप्रैल को चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के कुल 824 सीटों में से 475 सीटों पर मतदान हो रहा है। सभी विधानसभा सीटों के लिए पूर्ण मतदान तमिलनाडु (234 सीटें),केरल (140 सीटें),और पुदुचेरी (304 सीटें) में हो रहा है।

पश्चिम बंगाल के पहले दो चरणों में 60 सीटों के लिए मतदान हो चुका है और आज अन्य 31 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। इसके बाद 203 सीटें और बच जायेंगी, जिन पर आज के बाद बाक़ी पांच चरणों में मतदान होंगे। असम में आज 40 सीटों पर मतदान हो रहा है,इसके साथ ही राज्य विधानसभा के लिए मतदान का काम पूरा हो जायेगा,इसके पहले दो चरणों में 86 सीटों के लिए मतदान का काम पूरा हो चुका है।

केरल,तमिलनाडु में बीजेपी की तरफ़ से सेंध लगने की संभावना नहीं

तमिलनाडु में मुख्य रूप से ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के नेतृत्व वाले दो मोर्चों के बीच मुक़ाबला है। इस समय एआईएडीएमके सत्तारूढ़ मोर्चा है और इस मोर्चे में  भारतीय जनता पार्टी छोटे सीझीदार के तौर पर शामिल है,यहां बीजेपी महज़ 25 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

डीएमके के नेतृत्व वाले विपक्षी मोर्चे में कांग्रेस और वामपंथी दल शामिल हैं। जाति / क्षेत्रीय आधारों का प्रतिनिधित्व करने वाले विभिन्न छोटे-छोटे क्षेत्रीय दल या तो दोनों ही मोर्चों के साथ गठबंधन कर रहे हैं, या फिर अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। 2016 में एआईएडीएमके के मोर्चे ने 136 सीटें जीती थीं,जबकि डीएमके-कांग्रेस के मोर्चे को 98 सीटें मिली थीं।

सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक के पांच साल के कार्यकाल के दौरान दिसंबर 2016 में पार्टी की नेता जे.जयललिता का निधन हो गया था,जो इस विशेष कार्यकाल में सिर्फ़ आठ महीने तक मुख्यमंत्री बनी रही थीं। पार्टी के संस्थापक एमजी रामचंद्रन के निधन के बाद जे.जयललिता ने एआईएडीएमके का कामयाबी के साथ नेतृत्व किया था। हालांकि,जयललिता के निधन के बाद पार्टी सत्ता संघर्ष का शिकार हो गयी,लेकिन पार्टी सत्ता पर काबिज होने और अपना कार्यकाल पूरा करने में सफल रही।

इन वर्षों में एआईएडीएमके की साख और लोकप्रियता,दोनों में लगातार गिरावट देखी गयी है,जिसका मुख्य कारण सुस्त शासन और ज़बरदस्त बेरोज़गारी, कृषि संकट, आर्थिक मंदी जैसे बुनियादी आर्थिक मुद्दे और कोविड महामारी के मोर्चे पर सरकार की ढीला ढाला रवैया और पूर्ण अक्षमता रही है। सरकार की यह स्थिति सत्तारूढ़ मोर्चे की इन चुनावों में हार और एक दशक के बाद डीएमके के नेतृत्व वाले मोर्चे की सत्ता में वापसी के रूप में भी सामने आ सकती है। डीएमके के नेता एम.करुणानिधि का भी 2018 में निधन हो गया था,लेकिन इसके बाद पार्टी की कमान उनके बेटे हाथ में आ गयी और ऐसा माना जा रहा है कि अगला मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ही हों।

केरल में सीधा-सीधा मुक़ाबला कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ़्रंट (UDF) और सीपीआई (M) के नेतृत्व वाले लेफ़्ट डेमोक्रेटिक फ़्रंट (LDF) के बीच है। 2016 में एलडीएफ़ ने 91 सीटें जीती थीं,जबकि यूडीएफ़ को 47 और बीजेपी को एक सीट मिली थी। सत्तारूढ़ एलडीएफ़ दो बड़े मोर्चों पर अपनी सरकार की कामयाबियों पर सवार होकर सत्ता में एक इतिहास बनाने वाली वापसी की ओर देख रहा है, इन दो कामयाबियों में एक वायरस के प्रकोप (निपा और कोविड) और दूसरी 2017 और 2018 में दो भीषण बाढ़ जैसी आपदाओं की एक श्रृंखला के दौरान व्यापक और बेहद सतर्कता से निपटने वाले राहत कार्य है।

स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास जैसी बुनियादी जरूरतों पर एलडीएफ सरकार का ध्यान और रोज़गार प्रदान करने और गंभीर वित्तीय सीमाओं के बावजूद बुनियादी ढांचे के निर्माण को लेकर इसके ज़बरदस्त प्रयासों की व्यापक रूप से सराहना होती रही है। हालांकि,केरल में इन दो मोर्चो के बीच बेहद बंटे हुए आपसी सम्बन्ध इन दो मोर्चों के बीच की लड़ाई को एक करीबी लड़ाई बना देती है। भाजपा इस चुनाव में एक छोटा खिलाड़ी है, लेकिन अपनी चुनावी संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए इसने सांप्रदायिक और जातिवादी भावनाओं को भड़काने की पूरी कोशिश की है। इस चुनाव में इसकी बढ़त की संभावना नहीं है।

असम और बंगाल में भाजपा की सत्ता की तलाश जारी

निचले असम की बाक़ी 40 सीटों के लिए मतदान हो रहा है,इसके साथ ही इस पूर्वोत्तर राज्य,असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान की प्रक्रिया पूरी हो जायेगी। बड़े पैमाने पर एक ऐसे एकजुट विपक्ष का सामना करते हुए भाजपा और उसके छोटे-छोटे क्षेत्रीय सहयोगी दल सत्ता को बनाये रखने के लिए लड़ रहे हैं,जिसके महागठबंधन में कांग्रेस,वामपंथी दल और वह ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ़्रंट (AIUDF) शामिल हैं,जिसका मुसलमानों के बीच एक मज़बूत आधार है। दो नवगठित क्षेत्रीय दलों का तीसरा मोर्चा भी मैदान में है।

 आज जिन क्षेत्रों में चुनाव हो रहे हैं,उनमें उस बोडोलैंड स्वायत्त क्षेत्र के कुछ हिस्से भी शामिल हैं,जहां भाजपा के उस सहयोगी दल का शासन रहा है,जो तब से विपक्षी गठबंधन के साथ है। यह क्षेत्र एक विभिन्न प्रजातियों से बना हुआ क्षेत्र है और बीजेपी ने विभिन्न समूहों को प्रलोभन दिये जाने के ज़रिये एक साथ लाने की कोशिश ज़रूर की है,लेकिन बदले हुए नागरिकता क़ानून से बड़े तबकों के बीच इसका समर्थन कम हो सकता है।

पश्चिम बंगाल के इस तीसरे चरण में 31 विधानसभा सीटों के लिए मतदान हो रहा है, जिनमें ज़्यादातर सीटें उन दक्षिण 24 परगना और हावड़ा ज़िलों में आती हैं, जो कोलकाता की सीमा के पास स्थित हैं और सही मायने में ये वृहत्तर कोलकाता महानगर के ही हिस्से हैं। ये ज़िले पिछले एक दशक से लगातार मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी की अगुवाई वाली सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के गढ़ रहे हैं। ये क्षेत्र वामपंथी संगठनों के ख़िलाफ़ मुख्य रूप से टीएमसी द्वारा नियोजित उग्र रणनीति के केन्द्र रहे हैं,जिसका मक़सद वामपंथी संगठनों के मज़बूत समर्थन को दोफाड़ करना था। हाल ही में वाम के अथक अभियान और संघर्ष ने इसके पहले के समर्थन में फिर से जान डाल दी है।

पाने के लिए ज़्यादा कुछ नहीं, मगर खोने के लिए बहुत कुछ

बीजेपी के पास बड़े पैमाने पर पैसे, और ज़मीन पर उसकी रणनीति को लागू करने करने वाले कार्यकर्ता,दोनों ही तरह के भरपूर संसाधन हैं,लेकिन आज हो रहे मतदान में बीजेपी के लिए बहुत खुश होने का कोई कारण नहीं है। बीजेपी को दोनों ही दक्षिणी राज्यों में ज़्यादा कुछ हासिल होने की संभावना नहीं है, और असम और पश्चिम बंगाल,इन दोनों ही राज्यों में वह एक हताशा भरी लड़ाई लड़ रही है। दूसरे शब्दों में बीजेपी इस समय भी उसी स्तर पर है,जिस स्तर पर 2016 में थी। इसके पीछे की मुख्य वजह नरेंद्र मोदी सरकार की वह विनाशकारी नीतियां हैं, जिनमें आर्थिक नीतियां तो हैं ही,साथ ही साथ चुनावी लाभ के लिए धार्मिक विभाजनों का इस्तेमला करने वाली इसकी ज़हरीली कोशिश भी शामिल है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Assembly Polls 2021: All Seats in TN, Kerala, Puducherry, and Some in Bengal, Assam Vote Today

Assembly elections
Assembly Phase 3
West Bengal
Kerala
UDF
LDF
TN Elections
DMK
AIADMK
BJP
left parties

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