NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जनप्रतिनिधियों को आईना दिखा रही सीमांचल की आत्मनिर्भर जनता
बांस की चचरी से अस्थायी पुल बनाकर जनता उद्घाटन के लिए उन सांसद और विधायक को आमंत्रित कर रही है जिनसे वे लंबे समय तक अनुरोध करते रहे कि वे उनका पुल बनवा दें, मगर उन्होंने उनकी एक नहीं सुनी। वे चाहते हैं कि वे इस चचरी पुल का उद्धाटन कैंची से न करके दबिया या कुल्हाड़ी से करें।
पुष्यमित्र
01 Jun 2020
आत्मनिर्भर जनता

बिहार के अररिया जिला मुख्यालय से महज नौ किमी दूर स्थित झमटा पंचायत में ग्रामीणों ने एक अनूठा पुल उद्घाटन कार्यक्रम रखा है। यह कोई कंकरीट से बना पुल नहीं, बांस की चचरी से बना अस्थायी और कमजोर पुल है, जिसे वहां के लोगों ने खुद अपनी मेहनत और संसाधनों से तैयार किया है। इस उद्घाटन समारोह में लोगों ने अपने उन सांसद और विधायक को खास तौर पर आमंत्रित किया है, जिनसे वे लंबे समय तक अनुरोध करते रहे कि वे उनका पुल बनवा दें, मगर उन्होंने उनकी एक नहीं सुनी। वे इस पुल के जरिये अपने जन प्रतिनिधियों को आईना दिखाना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि वे इस चचरी पुल का उद्धाटन कैंची से न करके कुल्हाड़ी से करें।

IMG-20200601-WA0004.jpg

इससे पहले बीते शुक्रवार 29 मई को पड़ोसी जिले किशनगंज के ठाकुरगंज में एक ऐसे ही चचरी पुल का उद्घाटन लोगों ने जदयू विधायक नौशाद आलम से करवाया। नूरी चौक और हाथीडूबा के बीच बने इस चचरी पुल के उद्घाटन के वक्त ग्रामीणों ने विधायक महोदय के हाथों में कैंची के बदले वह दाव या दबिया पकड़ा दिया, जिससे मजदूर बांस को छीलते और काटते हैं। इस रास्ते पर एक पुल था, जो दस साल पहले बाढ़ की वजह से क्षतिग्रस्त हो गया था। तब से लगातार ग्रामीण यहां पुल की मांग कर रहे थे, मगर प्रशासन और जन प्रतिनिधि बार-बार उन्हें आश्वासन देकर टाल रहे थे।

इस बार इस पुल को जाहिद आलम, इसराइल आलम, सफलू और काफिल आलम आदि ग्रामीणों ने मिलकर बनाया है। इस पुल को बनाने में 38 हजार रुपये की लागत आय़ी है। यह राशि आसपास के ग्रामीणों से मिले चंदे से जुटाई गयी है। अब इस पुल के सहारे वे ग्रामीण मुफ्त में नदी पार कर सकेंगे, जबकि बाहर के लोगों से कुछ सहयोग राशि ली जायेगी।

IMG-20200601-WA0005.jpg

वहां के स्थानीय सिटिजन जर्नलिस्ट प्रिंस खान सुरजापुरी ने इस पुल के उद्घाटन का एक वीडियो भी यूट्यूब पर पोस्ट किया है, जिसमें वे पुल के उद्घाटन के मौके पर विधायक महोदय से लगातार चुभने वाले सवाल पूछ रहे हैं। उनके इस सवाल पर कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि आपको चचरी पुल का उद्घाटन करना पड़ रहा है, विधायक नौशाद आलम कहते हैं कि हालांकि यह काम मुझे नहीं करना चाहिए। मगर पुल बन गया है तो इससे लोगों की मदद ही होगी तो मैं यहां उद्घाटन के लिए आ गया। इसके बाद वे बताने लगते हैं कि उन्होंने कई रास्तों और पुलों का निर्माण कराया है, इस पुल का नंबर भी आयेगा। पूरे सवाल जवाब के दौरान वे असहज नजर आते हैं।

आपको बताते हैं कि इस इलाके में चचरी पुल हमेशा से बनते रहे हैं, मगर इनके उद्घाटन की कोई पंरपरा नहीं रही। अगर कहीं कुछ ऐसा होता भी है तो गांव के किसी सम्मानित व्यक्ति को बुला लिया जाता है। इस बार लोगों ने सिर्फ अपना गुस्सा जताने के लिए विधायक महोदय को बुलाया और उनके हाथ में दबिया पकड़ा दिया। विधायक महोदय इस पुल के बारे में लंबे समये से झूठा आश्वासन देते रहे हैं। पिछले साल तो उन्होंने एक चार्ट भी दिखाया था कि देखिये इस पुल का नंबर आ गया है।

IMG-20200531-WA0003_0.jpg

इसी तरह अररिया के झमटा पंचायत में बने पुल के बारे में स्थानीय लोगों की मदद करने वाली संस्था पीपुल्स ऑफ होप के संचालक फैसल जावेद बताते हैं कि उद्घाटन का जो पोस्टर लोगों ने जारी किया है और कुल्हाड़ी से फीता काटने की बात कही है, वह भी लोगों की नाराजगी का ही नमूना है।

इस रूट पर पुल न होने के कारण अब तक कई लोगों की डूब कर मौत हो गयी है। हर साल यहां चचरी पुल बनता है, मगर वह पुल बहुत सुरक्षित नहीं होता। हर साल कोई न कोई उससे फिसल कर नदी में गिर जाता है। मगर सरकार या जन प्रतिनिधि लोगों की इन मुसीबतों को समझते नहीं।

IMG-20200601-WA0010.jpg

बिहार के पूर्वी सीमा पर स्थित ये दोनों जिले अररिया और किशनगंज में इस वक्त कम से कम चार से पांच दर्जन जगहों पर चचरी पुल हैं। यहां से बहने वाली नदी महानंदा, कनकई, बकरा, परमान आदि में कई जगहों पर लोगों को इसी तरह इन चचरी पुलों के सहारे नदी को पार करना पड़ता है। 

इस इलाके के पापुलर सोशल मीडिया ग्रुप खबर सीमांचल के मोडरेटर हसन जावेद इन चचरी पुलों के घाटों का नाम गिनाते हैं। ये हैं, पलसा घाट, मटियारी घाट,  होलिया घाट,  निशंद्रा घाट,  असुरा घाट,  हांडीभाषा घाट,  खरखरी घाट,  रतवा घाट,  मिरचान टोला घाट,  दल्ले गांव घाट,  लौचा घाट, कंचनबाड़ी घाट,  कुढ़ैली घाट,  गोरुमारा घाट और हारीभाषा घाट। वे कहते हैं, इनमें से लौचा घाट की तो खुशकिस्मती है कि यहां पुल बन चुका है। इन तमाम घाटों में से ज्यादातर ऐसे हैं, जिन पर पुल बनने की बात सोची भी नहीं गयी है। लिहाजा चचरी पुल ही इनका सहारा हैं।  

पीपुल्स ऑफ होप के फैसल कहते हैं, पहले के जमाने में जब लोग चचरी पुल बनाते थे और नदी को पार करने में इसका इस्तेमाल करते थे, तब इतना अखरता नहीं था। मगर अब जबकि दुनिया इतनी तरक्की कर चुकी है, फिर भी लोगों को नदी पार करने के लिए चचरी पुलों का सहारा लेना पड़े यह अच्छा नहीं लगता। खास तौर पर तब जब इसकी वजह से लगातार हादसे हो रहे हैं।

वे कहते हैं, झमटा घाट पर पुल नहीं बनने के कारण पिछले साल लोकसभा चुनाव के दौरान लोगों ने वोट बहिष्कार भी करने का फैसला किया था। मगर बाद में प्रशासन के अनुरोध पर लोग वोट डालने के लिए तैयार हो गये। उसके बाद महज एक साल में इस चचरी पुल से फिसल कर तीन बच्चों की नदी में डूबने से मौत हो गयी। ऐसे में लोगों का गुस्सा जायज लगता है।

इस पूरे प्रसंग पर टिप्पणी करते हुए खबर सीमांचल के मॉडरेट हसन जावेद कहते हैं, सीमांचल के इलाके का दुर्भाग्य ही यही है कि जहां सरकारी विकास खत्म हो जाते हैं, वहां चचरी पुल दिखने लगते हैं। पहले तो लोग पुल-पुलियों के लिए सरकार और प्रतिनिधियों से मांग किया करते थे, अब जबकि सरकार ने खुद ही लोगों को आत्मनिर्भर बनने कह दिया है, तो लोग खुद चचरी पुल बनाकर सत्ता को आईना दिखा रहे हैं।    

Atamnirbhar Bharat
Bihar
Seemanchal
Atamnirbhar People

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी


बाकी खबरें

  • Economic Survey
    वी श्रीधर
    आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22: क्या महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था के संकटों पर नज़र डालता है  
    01 Feb 2022
    हाल के वर्षों में यदि आर्थिक सर्वेक्षण की प्रवृत्ति को ध्यान में रखा जाए तो यह अर्थव्यवस्था की एक उज्ज्वल तस्वीर पेश करता है, जबकि उन अधिकांश भारतीयों की चिंता को दरकिनार कर देता है जो अभी भी महामारी…
  • muslim
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: मुसलमानों के नाम पर राजनीति फुल, टिकट और प्रतिनिधित्व- नाममात्र का
    01 Feb 2022
    देश की आज़ादी के लिए जितना योगदान हिंदुओं ने दिया उतना ही मुसलमानों ने भी, इसके बावजूद आज राजनीति में मुसलमान प्रतिनिधियों की संख्या न के बराबर है।
  • farmers
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    केंद्र सरकार को अपना वायदा याद दिलाने के लिए देशभर में सड़कों पर उतरे किसान
    31 Jan 2022
    एक साल से अधिक तक 3 विवादित कृषि कानूनों की वापसी के लिए आंदोलन करने के बाद, किसान एक बार फिर सड़को पर उतरे और 'विश्वासघात दिवस' मनाया। 
  • Qurban Ali
    भाषा सिंह
    प्रयागराज सम्मेलन: ये लोग देश के ख़िलाफ़ हैं और संविधान के ख़ात्मे के लिए काम कर रहे हैं
    31 Jan 2022
    जिस तरह से ये तमाम लोग खुलेआम देश के संविधान के खिलाफ जंग छेड़ रहे हैं और कहीं से भी कोई कार्ऱवाई इनके खिलाफ नहीं हो रही, उससे इस बात की आशंका बलवती होती है कि देश को मुसलमानों के कत्लेआम, गृह युद्ध…
  • Rakesh Tikait
    न्यूज़क्लिक टीम
    ख़ास इंटरव्यू : लोगों में बहुत गुस्सा है, नहीं फंसेंगे हिंदू-मुसलमान के नफ़रती एजेंडे में
    31 Jan 2022
    ख़ास इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने भाजपा के सांप्रदायिक एजेंडे को ज़मीनी चुनौती देने वाले बेबाक किसान नेता राकेश टिकैत से लंबी बातचीत की, जिसमें उन्होंने बताया कि इन चुनावों में किसान…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License