NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
पाकिस्तान
'औरत मार्च' पाकिस्तान के पितृसत्तात्मक सोच पर एक चोट है!
अक्सर महिलाओं के साथ हिंसा और दमन की बातें पितृसत्तात्मक सोच रखने वालों को परेशान कर जाती हैं। सदियों से पुरुष, महिलाओं पर अपना हक़ समझते आए हैं, ऐसे में खुलेआम महिलाओं का ये आंदोलन उनके लिए चिंता का सबब है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
07 Mar 2020
Aurat March

'मेरा जिस्म, मेरी मर्ज़ी' यानी महिला के शरीर पर सिर्फ़ उसका अधिकार है। ये नारा उस पितृसत्तात्मक सोच पर चोट है जिसके तहत औरत के शरीर पर पुरुष का हक़ माना जाता है। इन दिनों ये नारा पाकिस्तान में खासा चर्चा में है। वजह 8 मार्च, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर होने वाला 'औरत मार्च' है। इस मार्च को लेकर पाकिस्तानी कट्टरपंथी विरोध कर रहे हैं, कोर्ट के आदेश के बावजूद ताकत के ज़ोर पर मार्च को रोकने की धमकियां दे रहे हैं।

दुनिया भर में महिलाएं अत्याचार, बलात्कार, वैवाहिक ज़बरदस्ती, यौन हमले जैसे अनेकों ज़ुल्म का शिकार हैं। नारी शरीर पर केंद्रित हिंसा की समस्या का कोई ओर-छोर नहीं है। विश्व के बड़े देशों से लेकर छोटे मुल्कों तक हर जगह महिलाएं अपने अस्तित्व और सम्मान की लड़ाई लड़ रही हैं। 'औरत मार्च' के आयोजकों के मुताबिक भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में 93 प्रतिशत महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न होता है। इनमें से करीब 70 फीसदी यौन उत्‍पीड़न तो खुद उनके परिवार के सदस्य ही करते हैं। इस अत्याचार के ख‍िलाफ महिलाएं 8 मार्च को सड़क पर उतर कर मार्च कर रही हैं, जो फिलहाल इस पुरुषप्रधान देश में कुछ कट्टरपंथियों की परेशानी का सबब बना हुआ है।

महिलाओं के इस मार्च के खिलाफ सर्वाधिक मुखर दक्षिणपंथी और कट्टरपंथी संगठन हैं। जमीयत-ए-उलेमाए इस्लाम के नेता मौलाना फजलुर रहमान ने अपने समर्थकों का आह्वान किया है कि वे हर हाल में इस मार्च को होने से रोकें। हाल में एक रैली में मौलाना फजल ने ‘औरत मार्च’ का नाम लिए बिना कहा था, 'जब कभी भी आप इस तरह के लोगों को देखें, सुरक्षा कर्मियों को इनके बारे में अलर्ट करें। और अगर सुरक्षाकर्मी इन्हें ही सुरक्षा दे रहे हों तो ताकत के जोर पर इन्हें रोकने के लिए आपकी कुर्बानी की ज़रूरत पड़ेगी।'

auarat-march-696x392.jpg

इस साल 'औरत मार्च' पर रोक लगाने की मांग पाकिस्तान हाईकोर्ट में भी उठी। एक याचिकाकर्ता ने इसे ‘इस्लामी क़ायदों’ के खिलाफ बताते हुए कहा है कि इस मार्च का छुपा एजेंडा ‘अराजकता, अश्लीलता और नफ़रत फैलाना’ है। हांलाकि लाहौर हाईकोर्ट ने इसे नकार दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में देश के संविधान और कानून का हवाला देते हुए कहा कि इस मार्च को रोका नहीं जा सकता। अदालत ने नागरिक प्रशासन को आदेश दिया कि वह मार्च निकालने के लिए दी गई अर्जी पर जल्द से जल्द फैसला करे। अदालत ने मार्च निकालने पर रोक नहीं लगाने की बात कहते हुए यह भी कहा कि ‘मार्च में किसी तरह के घृणा भाषण या अनैतिक बातें’ नहीं होनी चाहिए। अदालत ने पुलिस से मार्च को पूरी सुरक्षा देने को भी कहा है।

वैसे, 'औरत मार्च' के पोस्टर-बैनर को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है। महिलाओं द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर अपना हक़ जताते हुए मार्च में प्रदर्शित कई तख्तियां अभी भी लोगों के जेहन में हैं, जिनमें सेनेटरी पैड को टैक्स फ्री करने, महिलाओं पर एसिड नहीं फेंकने, स्त्रियों की लॉलीपॉप, आईपैड या जूस बॉक्स से तुलना नहीं करने और बेटियों को विरासत का अधिकार देने की मांग उठाई गई थी। कई बार मार्च का विरोध कर रहे लोगों को महिला आंदोलन द्वारा उठाई गई इन मांगों से कोई लेना देना नहीं होता। उन्हें सिर्फ समाज की पहले से चली आ रही दकियानूसी बातों से मतलब होता है। ये तख्ती-पोस्टर उनके सम्मान में गुस्ताखी जैसे प्रतीत होते हैं।

दुनिया के सामने 'प्रगतिशील' होने के दावा करने वाली पाकिस्तान की इमरान सरकार फिलहाल इस मार्च को लेकर उलझन में नज़र आ रही है। अगर सरकार कट्टरपंथियों पर कार्रवाई करती है तो उस पर संकट आ सकता है। अगर कार्रवाई नहीं करती तो समाज के सभी वर्गों को समान हक देना के पाकिस्तान सरकार के वादे की पोल खुल जाएगी।

उधर, विपक्षी राजनैतिक दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने 'औरत मार्च' को अपना पूर्ण समर्थन देने का ऐलान करते हुए सरकार से इसे सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है। पाकिस्तान की मानवाधिकार मामलों की मंत्री शीरीन मजारी ने मार्च का खुलकर समर्थन किया है। मजारी ने उन नेताओं की निंदा की है, जो इस मार्च को ताकत के जोर पर रोकने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज के और तबकों की तरह महिलाओं को भी अपने हक़ में आवाज उठाने का अधिकार है।

गौरतलब है कि 8 मार्च का दिन पूरे विश्व में महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन कई देशों के कई शहरों में औरतें अपने अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद करती हैं। लेकिन अक्सर महिलाओं के साथ हिंसा और दमन की बातें पितृसत्ता की सोच रखने वालों को परेशान कर जाती हैं। सदियों से पुरुष महिलाओं पर अपना हक़ समझते आए हैं, ऐसे में खुलेआम महिलाओं का ये आंदोलन उनके लिए चिंता का सबब है।

Aurat March
Pakistan
patriarchal society
male dominant society
gender discrimination
Women protest
crimes against women
exploitation of women

Related Stories

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

पाकिस्तान में बलूच छात्रों पर बढ़ता उत्पीड़न, बार-बार जबरिया अपहरण के विरोध में हुआ प्रदर्शन

बीएचयू: लाइब्रेरी के लिए छात्राओं का संघर्ष तेज़, ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ हटाने की मांग

बीएचयू: 21 घंटे खुलेगी साइबर लाइब्रेरी, छात्र आंदोलन की बड़ी लेकिन अधूरी जीत

अर्बन कंपनी की महिला कर्मचारी नई कार्यप्रणाली के ख़िलाफ़ कर रहीं प्रदर्शन

दिल्ली: सिविल डिफेंस वालंटियर की निर्मम हत्या शासन-प्रशासन के दावों की पोल खोलती है!

छत्तीसगढ़: विधवा महिलाओं ने बघेल सरकार को अनुकंपा नियुक्ति पर घेरा, याद दिलाया चुनावी वादा!

किसान संसद: अब देश चलाना चाहती हैं महिला किसान

ऑस्ट्रेलिया में महिलाओं ने यौन हिंसा के ख़िलाफ़ रैली निकाली

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: क़ाफ़िला ये चल पड़ा है, अब न रुकने पाएगा...


बाकी खबरें

  • jammu and kashmir
    अजय सिंह
    मुद्दा: कश्मीर में लाशों की गिनती जारी है
    13 Jan 2022
    वर्ष 2020 और वर्ष 2021 में सेना ने, अन्य सुरक्षा बलों के साथ मिलकर 197 मुठभेड़ अभियानों को अंजाम दिया। इनमें 400 से ज्यादा कश्मीरी नौजवान मारे गये।
  • Tilka Majhi
    जीतेंद्र मीना
    आज़ादी का पहला नायक आदिविद्रोही– तिलका मांझी
    13 Jan 2022
    ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना के बाद प्रथम प्रतिरोध के रूप में पहाड़िया आदिवासियों का यह उलगुलान राजमहल की पहाड़ियों और संथाल परगना में 1771 से लेकर 1791 तक ब्रिटिश हुकूमत, महाजन, जमींदार, जोतदार और…
  • marital rape
    सोनिया यादव
    मैरिटल रेप को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, क्या अब ख़त्म होगा महिलाओं का संघर्ष?
    13 Jan 2022
    गैर-सरकारी संगठनों द्वारा दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि मैरिटल रेप के लिए भी सज़ा मिलनी चाहिए। विवाहिता हो या नहीं, हर महिला को असहमति से बनाए जाने वाले यौन संबंध को न कहने का हक़…
  • muslim women
    अनिल सिन्हा
    मुस्लिम महिलाओं की नीलामीः सिर्फ क़ानून से नहीं निकलेगा हल, बडे़ राजनीतिक संघर्ष की ज़रूरत हैं
    13 Jan 2022
    बुल्ली और सुल्ली डील का निशाना बनी औरतों की जितनी गहरी जानकारी इन अपराधियों के पास है, उससे यह साफ हो जाता है कि यह किसी अकेले व्यक्ति या छोटे समूह का काम नहीं है। कुछ लोगों को लगता है कि सख्त कानूनी…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनाव 2022: बीजेपी में भगदड़ ,3 दिन में हुए सात इस्तीफ़े
    13 Jan 2022
    सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने दावा किया है कि रोजाना राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार के एक-दो मंत्री इस्तीफा देंगे और 20 जनवरी तक यह…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License