NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अयोध्या मामला: सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के कथित प्रस्ताव से अन्य मुस्लिम पक्षकार भी हैरान और असहमत 
‘‘हम यह बिल्कुल स्पष्ट करना चाहते हैं कि उच्चतम न्यायालय के समक्ष हम, अपीलकर्ता, प्रेस को लीक किए गए प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करते, हम न ही मध्यस्थता की प्रक्रिया को स्वीकार करते हैं और न ही दावे की वापसी को समझौता बनाने वाले तरीके को स्वीकार करते हैं।’’
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Oct 2019
ram mandir and babri masjid
Image courtesy:Urdu Tahzeeb

अयोध्या भूमि विवाद में मुस्लिम पक्षकारों ने बयान जारी कर सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड द्वारा मामला वापस लेने संबंधी खबरों पर शुक्रवार को हैरानी जताई।

अयोध्या भूमि विवाद में अहम मुस्लिम वादी एम सिद्दीक के वकील एजाज मकबूल ने कहा कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को छोड़कर सभी मुस्लिम पक्षों ने समझौते को ख़ारिज कर दिया है क्योंकि विवाद के मुख्य हिंदू पक्षकार मध्यस्थता प्रक्रिया और इसके तथाकथित समाधान का हिस्सा नहीं थे।

सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को छोड़कर मुस्लिम पक्षकारों ने स्पष्टीकरण बयान जारी कर कहा कि वे उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त मध्यस्थता समिति के राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद भूमि विवाद को सौहार्दपूर्वक सुलझाने के लिए तथाकथित समझौते के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेंगे।

बयान में कहा गया, ‘‘हम सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील शाहिद रिज़वी के हवाले से मीडिया में आ रही इन खबरों से हैरान हैं कि उत्तर प्रदेश सुन्नी केंद्रीय वक़्फ़ बोर्ड बाबरी मस्जिद स्थल पर अपना दावा वापस लेने का इच्छुक है।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘हम यह बिल्कुल स्पष्ट करना चाहते हैं कि उच्चतम न्यायालय के समक्ष हम, अपीलकर्ता, प्रेस को लीक किए गए प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करते, हम न ही मध्यस्थता की प्रक्रिया को स्वीकार करते हैं और न ही दावे की वापसी को समझौता बनाने वाले तरीके को स्वीकार करते हैं।’’

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुआई वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने इस मामले पर 40 दिन सुनवाई करने के बाद 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। ऐसा बताया जाता है कि इसी दिन मध्यस्थता समिति की रिपोर्ट भी न्यायालय को सौंपी गई थी।

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एफ एम आई कलीफुल्ला तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति की अध्यक्षता कर रहे थे। समिति के दो अन्य सदस्यों में आध्यात्मिक गुरू कहे जाने वाले श्री श्री रविशंकर और मध्यस्थ्ता विशेषज्ञ वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पांचू शामिल थे।

मध्यस्थता समिति से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई रिपोर्ट हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों के बीच ‘‘एक तरह का समझौता’’ है।

सूत्रों ने बताया कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड, निर्वाणी अखाड़ा, निर्मोही अखाड़ा, राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति और कुछ अन्य हिंदू पक्षकार भूमि विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने के पक्ष में हैं।

कथित रूप से ऐसा भी बताया जा रहा है कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड समझौते के फार्मूले के तहत मुकदमे को वापस लेने का इच्छुक है।

सूत्रों के अनुसार पक्षकारों ने धार्मिक स्थल कानून, 1991 के प्रावधानों के तहत ही समझौते का आग्रह किया था। इस कानून में प्रावधान है कि किसी अन्य मस्जिद या दूसरे धार्मिक स्थलों , जिनका निर्माण मंदिरों को गिराकर किया गया है और जो 1947 से अस्तित्व में है, को लेकर कोई विवाद अदालत में नहीं लाया जायेगा।

हालांकि, राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया था।

सूत्रों ने बताया कि मुस्लिम पक्षकारों ने सुझाव दिया कि विवाद का केन्द्र भूमि सरकार को अधिग्रहण में सौंप दी जायेगी और वक़्फ़ बोर्ड सरकार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन चुनिन्दा मस्जिदों की सूची पेश करेगा जिन्हें नमाज के लिये उपलब्ध कराया जा सकता है।

शीर्ष अदालत में इस प्रकरण में पेश होने वाले एक वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना था कि चूंकि अब सुनवाई पूरी हो गयी है, इसलिए मीडिया को लीक की गयी इस रिपोर्ट का कोई महत्व नहीं है।

आपको बता दें कि बुधवार, 16 अक्टूबर को सुनवाई के अंतिम दिन सुबह से तमाम न्यूज़ चैनलों में कथित समझौते को लेकर ख़बरें चलने लगीं थी और दिन भर इस पर बहस होती रही। हालांकि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की ओर से कुछ स्पष्ट नहीं किया गया।

हिन्दू और मुस्लिम पक्षकारों के कुछ वकीलों ने कहा कि मध्यस्थता समिति द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बारे शीर्ष अदालत ने उन्हें सूचित भी नहीं किया है।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

इसे भी पढ़ें : अयोध्या विवाद : सुनवाई के अंतिम चरण में मध्यस्थता या समझौते की बात के क्या मायने हैं?

Ayodhya Case
Babri Masjid-Ram Mandir
Sunni Waqf Board
Supreme Court
indian hindu-muslim

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • नदियों के संरक्षण के लिए ज़रूरी धन के प्रवाह में अब भी बड़ी बाधाएं
    भरत डोगरा
    नदियों के संरक्षण के लिए ज़रूरी धन के प्रवाह में अब भी बड़ी बाधाएं
    14 Sep 2021
    हर साल नदियों का प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। लेकिन नमामि गंगे जैसे बहुप्रचारित-प्रसारित परियोजनाओं के बावजूद, नदी संरक्षण के लिए आवंटन और ख़र्च में कमी बरक़रार है।
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव और योगी की सांप्रदायिकता, बंगाल के किसानों ने एमएसपी की मांग और अन्य ख़बरें
    13 Sep 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी यूपी चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ का सांप्रदायिक खेल, बंगाल के किसानों की एमएसपी की मांग और अन्य ख़बरों पर।
  • महिला आरक्षण बिल के 25 साल पर कोई नतीजा नहीं
    न्यूज़क्लिक टीम
    महिला आरक्षण बिल के 25 साल पर कोई नतीजा नहीं
    13 Sep 2021
    देश की अनेक महिला संगठन कई सालों से 33 % महिला आरक्षण की मांग कर रही हैं पर 25 साल से अनेक सरकारें आयी और गयी पर बिल पर कोई फैसला नहीं हुआ है।
  • पंजाब विधानसभा चुनाव: परंपरागत सियासत पर सवाल खड़े करती जनता 
    शिव इंदर सिंह
    पंजाब विधानसभा चुनाव: परंपरागत सियासत पर सवाल खड़े करती जनता 
    13 Sep 2021
    “किसान आंदोलन पंजाब के लोगों के लिए सिर्फ़ आंदोलन नहीं है, बल्कि एक विश्वविद्यालय है जिसमें उन्होंने बहुत कुछ सीखा भी है और सीखे हुए को वे व्यवहारिक रूप देने की कोशिश भी कर रहे हैं।”
  • मेरठ: मौसेरी बहनों को समलैंगिक बता टीचर ने की पिटाई, स्कूल में घुमाकर किया अपमानित!
    ज़ाकिर अली त्यागी
    मेरठ: मौसेरी बहनों को समलैंगिक बता टीचर ने की पिटाई, स्कूल में घुमाकर किया अपमानित!
    13 Sep 2021
    मेरठ के एक गर्ल्स इंटर कॉलेज में दो बहनें एक साथ लंच कर रही थीं, आरोप है कि उनकी टीचर ने दोनों पर समलैंगिक संबंध बनाने का आरोप लगाकर पिटाई कर दी और कॉलेज परिसर में घुमाकर अपमानित किया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License